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Tuesday, February 19, 2008

फ़िफ़्टीन सेकण्ड्स ऑफ़ फ़ेम रिटर्न्स…

रायपुर, छत्तीसगढ़ में पं. राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल की 78 वीं जयंती पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय लघुकथा सम्मेलन तथा सृजन सम्मान 2008 समारोह 16-17 फरवरी 2008 में शिरकत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. वहाँ चराग़े दिल की देवी नागरानी, अभिव्यक्ति हिन्दी की पूर्णिमा वर्मन, आवारा बंजारा के संजीत त्रिपाठी, आरंभ के संजीव तिवारी, संवेदनाओं के पंख के डॉ. महेश परिमल, युग मानस के डॉ. जय शंकर बाबु, लघुकथा.कॉम के रामेश्वर काम्बोज हिमांशु व सुकेश साहनी, हिन्दी साहित्य सरिता के कुमुद अधिकारी, भारत दर्शन के रोहित कुमार हैप्पी समेत सैकड़ों अन्य साहित्यकारों से प्रत्यक्ष मिलना हुआ जिनमें छत्तीसगढ़ी के लोक-रचनाकार लक्ष्मण मस्तूरिहा का विशेष सान्निध्य भी प्राप्त हुआ जिनके गीतों का प्रशंसक मैं अपनी किशोरावस्था से ही रहा हूँ, और जिनसे मिलकर लगा कि रायपुर प्रवास सफल हो गया. उनकी एक बेहद लोकप्रिय रचना – मोर संग चलव रे (मेरे संग चलो जी...) वीडियो पर रेकॉर्ड किया है जिसका आनंद आप शीघ्र ही रचनाकार पर उठाएंगे. सम्मेलन का कुछ विवरण आवारा बंजारा में यहाँ पर दर्ज है. सम्मेलन में मेरी एक प्रस्तुति थी – जिसका विषय था - अपनी रचनाओं को पाठकों तक सदैव, सदा सर्वदा, सर्वत्र उपलब्ध करने हेतु आइए इंटरनेट पर रचनाएँ प्रकाशित करें.

चोंच में आकाश की चिट्ठाकार पूर्णिमा वर्मन को अभिव्यक्ति-अनुभूति हिन्दी.ऑर्ग के लिए हिंदी गौरव सम्मान हिन्दी वेबसाइट के लिए दिया गया तथा मुझे कंप्यूटर अनुप्रयोगों के स्थानीयकरण (हिन्दी व छत्तीसगढ़ी) हेतु सम्मान प्रदान किया गया.

सम्मेलन के कुछ जीवंत चित्र प्रस्तुत हैं –


(दाएँ से - पूर्णिमा वर्मन, देवी नागरानी, कुमुद अधिकारी)



(दाएँ से - संजीव तिवारी, संजीत त्रिपाठी)


(दाएँ से - संजीत त्रिपाठी, महेश राजा, महेश परिमल, मैं, जयशंकर बाबु)

(छत्तीसगढ़ी लोक-रचनाकार-गायक लक्ष्मण मस्तूरिहा)

(पूर्णिमा वर्मन को सम्मानित करते छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री रमन सिंह)

और, ये मैं.

संबंधित प्रविष्टि – फ़िफ्टीन सेकण्ड्स ऑफ़ फ़ेम रीवाइन्डेड...

7 टिप्पणियाँ.:

anitakumar said...

बड़िया तस्वीरें आप को बधाई

Gyandutt Pandey said...

अच्छे लगे चित्र।

Sanjeet Tripathi said...

वाकई अच्छी आई हैं तस्वीरे, ठीक ठाक जो लग रहा हूं ;)

फिर से एक बार आपको बधाई!!
अच्छा लगा आपसे मिलना!!
संभव हो तो ओरिजिनल तस्वीरें मुझे ई मेल करेंगे?

Sanjeet Tripathi said...

मेरा मतलब है वह तस्वीरें जिनमे मै हूं।

मीनाक्षी said...

साहित्य महोत्सव की रिपोर्ट पढकर और चित्र देखकर बहुत अच्छा लगा. आप सबको बधाई.

अनूप शुक्ल said...

बधाई होअ आपको सम्मानित होने की। पन्द्रह सेकेंन्ड्स के किस्से तो लिखे जायें। दो दिन के बयान भी होने चाहियें।

पंकज अवधिया Pankaj Oudhia said...

कुमुद अधिकारी के बाजू वाले व्यक्ति राजेन्द्र सोनी है। सम्भवत: वे आयोजक मंडल के सदस्य रहे होंगे।