‘मैं चिट्ठाकार हूँ... कुछ भी लिख सकता हूँ.’

t i d p ahirwar shame on you

पिछले दिनों इंदौर के एक पुलिस थाने में एक व्यक्ति को झाड़ पर बाँध कर इतना पीटा गया कि उसकी मृत्यु हो गई.

इस तरह के अबू-गरीब किस्म के अत्याचार भारत के थानों में आम हैं. भारतीय पुलिस वसूली, भ्रष्टाचार और अत्याचार के लिए ज्यादा जानी जाती है बनिस्वत जनता की सेवा और उसकी रक्षा के.

मेरे एक जहीन मित्र का सहपाठी पुलिस में टीआई है. एक दिन वो उससे मिलने उसके घर गया तो उस पुलिसिये ने मित्र की ओर इशारा करते हुए अपने बेटे से कहा – बेटा थोड़ा पढ़ लिख लेना ठीक ठाक नहीं तो बाद में मेरी तरह हर तरफ से गाली खाएगा. देखो ये मेरा दोस्त पढ़ लिख कर अफसर बन गया है. मैंने पढ़ने में कोताही की थी तो देखो कहाँ फंसा हूँ.

मित्र ने मजाक में प्रतिवाद किया कि भइए, तुम भी तो थाने में टीआई हो, अच्छे अच्छों की हवा निकालते हो. इस पर उस पुलिसिए ने कहा – यार मैं सीरियस हूँ. लोग सामने तो भले ही सलाम ठोंकते हैं, परंतु पुलिस को पीठ पीछे गाली देते हैं. पुलिस (यहाँ ‘भारतीय’ समझा जावे) और अपराधी की जन्म कुंडली एक ही होती है. वो एक जैसे ही कर्म करते हैं. बस, पुलिस के पास ऐसा करने का लाइसेंस स्वरूप उसकी पदवी और वर्दी होती है.

उस निलंबित टीआई – डी पी अहिरवार, जिसके थाने में पुलिसियों की पिटाई से युवक की मौत हुई थी ने इंदौर के समाचार पत्र की संवाददाता मनीषा दुबे से कहा – मैं टीआई हूँ... कुछ भी कर सकता हूँ.

माफ़ कीजिएगा टीआई – डी पी अहिरवार साहब! मैं चिट्ठाकार हूँ. मैं कुछ भी लिख सकता हूँ... शेम ऑन यू! शेम ऑन मी (एक जागरूक नागरिक के रूप में मैं ज्यादा कुछ नहीं कर पा रहा)! शेम ऑन इंडिया जिसके पास ऐसा घटिया पुराना, सड़ा गला पुलिस तंत्र है जिसमें निरीह लोगों को मरते तक पीटा जाता है, प्रमोशन पाने के लिए खुले आम एनकाउंटर किया जाता है... इत्यादि!

टिप्पणियाँ

  1. मन सिहर उठता है यह सब पढ़कर ...!

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  2. इसीलिए अंग्रेजों के बनाए 1861 के इंडियन पुलिस एक्ट को फौरन बदल देने की ज़रूरत है।

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  3. सच कहा आपने इस पूरे सड़े गले पुलिस तंत्र को बदलने की जरुरत है॥बहुत ही शर्म्नाक घटना है और बदकिस्मती से अपवाद नही

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  4. To WOh janta hai kuchh bhi kar sakti hai...... aur usne kiya bhi.....
    agle din us TI sahab ke thane ki halat dekhne layak thi. bhid ne thane ko puri tarah tahas-nahas kar diya aur Thane se police walon ko jaan bacha kar bhagna pada.

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  5. पुलिस वालों को कितना भी गरिया लिया जाए
    कुत्‍ते की पूंछ की तरह सीधे नहीं हो सकते, गलती से एक आध शरीफ इस लाइन में आ जाता है तो उसे जनता और ये तंत्र बिगाड देता है।

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