चलती रेलगाड़ी से विश्व का पहला हिन्दी चिट्ठा पोस्ट




पिछले दिनों हिन्दी चिट्ठाजगत् में एक अनावश्यक सा विवाद हो गया था कि विश्व का हिन्दी का पहला ब्लॉ ब्लॉ ब्लॉ कौन.

चलिए, एक और विवाद को मैं आगे बढ़ाता हूं.

मेरी यह पोस्ट चलती रेलगाड़ी से की गई विश्व का पहला हिन्दी चिट्ठा पोस्ट है.

मुझे लगता है कि रेल के उच्च अधिकारी ज्ञानेंद्र जी, जिन्हें विशिष्ट सेलून की सुविधा उपलब्ध है, उन्होंने भी अब तक चलती गाड़ी से कोई पोस्ट नहीं किया होगा. और अगर किया हो तो निःसंकोच आगे आएं और बताएं.

उड़ते वायुयान से तो हमारे कई हिन्दी चिट्ठाकार बंधुओं ने कमाल दिखाए हैं – परंतु उनमें भी विवाद है. हमें अब तक ये ही नहीं पता कि उनमें से पहला कौन है! किसी ने क्लेम ही नहीं किया है!

तो, इससे पहले कि कोई और क्लेम करे, मैंने यह क्लेम कर दिया. विश्व का पहला हिन्दी चिट्ठा जो तेज रफ़्तार से चलती रेलगाड़ी में लिखा गया और धीमी चलती रेलगाड़ी से पोस्ट किया गया (इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए आसपास स्टेशन/शहर होना जरूरी है).

वैसे यह कोई तीर मारने वाली बात नहीं है – किसी भी लॅपटॉप में आरकनेक्ट की सुविधा मोबाइल या डाटाकार्ड के जरिये (अब टाटा इंडिकॉम में भी तथा अन्य जीपीआरएस युक्त मोबाइल सेवाओं में भी यह उपलब्ध है) हो तो यह आसान है. मगर, फिर, है तो यह पहला तीर ही!

अब आप मुझसे सबूत मांगेंगे. तो सबूत के तौर पर ट्रेन में विविध वस्तुओं को बेचते हुए विक्रेता की तस्वीर देख सकते हैं. इस फेरीवाले से मैंने फोटो के लिए पूछा तो वह खुशी खुशी राजी तो हो गया, परंतु थोड़ा सा घबरा भी रहा था. आप यहाँ यह कह सकते हैं कि फोटू तो कभी भी लेकर लगाया जा सकता है तो भई, पुख्ता सबूत के लिए ट्रेन का टिकट, की गई यात्रा का विवरण, और उसका समय (कंट्रोलर से ज्ञान जी पक्का कर देंगे) तथा ब्लॉगर का टाइम स्टैम्प सबकुछ हाजिर किया जा सकता है.

तो अब तो आप मानेंगे न इसे – चलती ट्रेन से हिन्दी का पहला चिट्ठा पोस्ट!

अद्यतन - चित्र अंधकारमय हो गया था. उसे समझने लायक थोड़ी रौशनी बढ़ाई है.

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विषय:

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इसे रामगंज मंडी के आसपास 6.59 बजे पोस्ट किया गया

चलती गाड़ी के पहले चिट्ठाकार होने की ख़ूब सारी बधाई।

अरे ये कोई अदालत थोड़े ही है की सबूत मांगे जाएँ।

बहुत बधाई इस विवादित प्रथम स्थान की प्राप्ती के लिये.
(अभी ज्ञान जी स्पष्टीकरण नहीं आया है, इसलिये इसे विवादित मान रहा हूँ)

-गैर विवादित सूचना

विश्व का पहला हवाई जहाज से पोस्ट लिखने वाला हिन्दी ब्लॉगर देवनागरी में इस समय आपकी इस पोस्ट पर टिपिया रहा है. यह आपके लिये सम्मान का विषय है.. पहली हवाई पोस्ट का लिंक

http://udantashtari.blogspot.com/2006/05/blog-post_29.html

कदम निशां: हवाई जहाज से
click
here


किसी को विवाद हो तो प्रूफ में पासपोर्ट की एंट्री दिखाई- जायेगी. उनके द्वारा विपरीत में साक्ष्य प्रस्तुत करने पर. :)

बेनामी

Badhai. Aur yeh rahi kisi hindi blog par mobile se ki gayi tippanni. Aur ek baat, aapka blog bhi mere mobile par devnagri main dikhta hai. :) Jagdish Bhatia

मैंने कभी चिट्ठी तो नहीं पोस्ट की पर जब से चिट्ठा लिखना शुरू किया तब से ट्रेन पर आरकनेक्ट के द्वारा चिट्ठा जरूर पढ़ता हूं।

रतलामीजी चलती रेलगाडी से चिठ्ठा पोस्ट कर प्रथम आने की हृदय से बधाई। अब इस बात से कहीं नई प्रतियोगिता न छिड जाये जैसे कोई रात को 2 बजे चिठ्ठा पोस्ट कर कहेगा कि ये लो रात को 2 बजे पोस्ट किया गया कोई कहेगा ये लो सुबह को 4 बजे पोस्ट किया गया। खैर ये तो मजाक है! बधाई हो आपको

इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है. -

चिट्ठों की पटरी पर सरपट दौड़ता रहे आपका क़लम.

वैसे आप पहले तो नहीं ही हैं जी लेकिन चुंकि आपने पहले क्लेम कर दिया तो आप को यह अवार्ड दिया जाता है जी. वैसे मैने अपनी एक पोस्ट देहरादून एक्सप्रेस में रात 2 बजे लिखी थी...जब नींद नहीं आ रही थी..और उसे सुबह पोस्ट किया था.. कोटा (राजस्थान) के आसपास.. सबूत के तौर पर टिकट वाले लिफाफे पर लिखी हुई कविता है जो उस पोस्ट के लिये लिखी थी...पर आपसे पंगा नहीं लेना है जी इसलिये आप ही हुए पहले ब्लॉ ब्लॉ... :-)

लो भई मिल गई चुनौती. काकेश ने प्रतिदावा कर दिया है. अब हो जाए सीबीआई इन्क्वायरी.

बढ़िया है। बधाई एक और पहला होने के लिये।

ओफ्फ...अब मुझे पहला पहला कुछ करने के लिये कुछ और तिकड़म करनी होगी...पहला अंडरवॉटर ब्लॉगर पर मुझे तैरना ही नहीं आता...और तरीके बतायें :)

यह बर्र के छत्ते को छेड़ने जैसा है. अब क्लेम आयेंगे - कमोड से लिखी पहली पोस्ट; मरघट से लिखी पहली पोस्ट; पुनर्जीवन होने पर पहली पोस्ट! :) इण्टरनेट कहां नहीं पँहुचा है!

बधाई पहला रेलब्लॉगर बनने पर, हम भी स‌ोचने लगे हैं, क्या पहला करें?

वैसे रात बिरात लिखने की बात करें तो 24 घंटों में कोई ऎसा स‌मय नहीं जब हम लिख न चुके हों।

आपको हार्दिक बधाई। वैसे कई मामलों मे आकेले और प्रथम है :)

आपने झंडा गाड दिया है. उडती पताका को देखकर मन प्रफुल्लित हो रहा है. आपके इस कारनामे में रिलायन्स के योगदान को भी याद रखा जाए. धीरूभाई की आत्मा आज खुशी से झूम उठी होगी.

अब मैं सोच रहा हुँ कि मै कौन सा तीर मारुँ. क्या बाथरूम मे नहाते समय कोई पोस्ट लिख डालुँ.. या... ना ना... इतना ज्यादा ना सोचें.

:) << ये देखिए स्माइली भी है, तो ... हाँ आप समझ गए.

बधाई स्वीकारें.

मुझे शक था की ऐसे ब्लॉगर समीरलालजी हो सकते है, उन्हे रोज रेल यात्रा करनी होती है और इस दौरान वे बहुत बार हमसें बतियाते भी है. तो पोस्ट भी लिखी होगी, मगर उन्होने दावा नहीं रखा है :) इसलिए आप निर्विवाद पहले रेल ब्लॉगर है. पुनः बधाई.

चल गाड़ी मे पहले चिट्ठाकार को बहुत-बहुत बधाई।

ममता जी, जगदीश जी, उन्मुक्त जी, संजीत जी, संजय पटेल जी, संजय तिवारी जी, अनूप जी, महाशक्ति -प्रमेन्द्र जी, परमजीत जी,

यूं तो यह पोस्ट पूरे मौज मजे के लिए थी, परंतु फिर भी आपकी बधाईयां सिर आंखों पर. बधाई किसे अच्छी नहीं लगती?

समीर जी,

मुझे आपकी उस हवाई पोस्ट के बारे में मालूम था और उसे पढ़ा भी था. परंतु आपने उसमें इतिहास की बात की थी, हिन्दी के पहले हवाई पोस्ट का क्लेम नहीं किया था :) अब यहाँ कर दिया है तो माने लेते हैं :)

उन्मुक्त जी, तब तो आप रेल में हिन्दी चिट्ठा पढ़ने वाले पहले चिट्ठाकार हुए :) तत्काल क्लेम करिये! नहीं तो रह जाएंगे.

जी हाँ, विनोद जी, बजा फरमाया - आप भी कोई धांसू पोस्ट रात 2 बजकर एक मिनट पर, वह भी घर के छत पर से कर वह पहला गौरव प्राप्त कर सकते हैं.


काकेश जी, अब ये आपकी ग़लती कि आपने पहले क्लेम नहीं किया. नहीं तो मैं रेलगाड़ी के बाथरूम में जाकर पोस्ट करता और वो क्लेम करता :) और, धन्यवाद आपका कि आपने पंगा नहीं लिया. :)

देबाशीश जी - ज्ञानदत्त जी ने इशारा कर ही दिया है. अभी आप यूएसए में हैं - स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी से पहला हिन्दी पोस्ट का आइडिया कैसा है?

पंकज जी, आपका नहाते समय का आइडिया बिलकुल ठीक है. और स्व. धीरूभाई की प्रशंसा तो करनी ही होगी. अभी इनका फ़ाइबर ऑप्टिक्स का जाल इतना है कि आमतौर पर, भले ही यह थोड़ा मंहगा है, पर लॅपटॉप पर मोबाइल इंटरनेट के लिए यही एक मात्र और अत्यंत विश्वसनीय सेवा है- हर कहीं पहुँच युक्त.

संजय बेंगाणी जी, आपका कहना सही है - जिसका दावा उसका मावा :)

Ravi jee bohot dinose tippanee denaa chah rahee thee,lekin Devnaagreeme koshish kartee rahee. Shayad jaankaaree kam rakhtee hun isliye saphal nahee huee!Kshamaa karen!
Aapne mere blog pe ek kavita ke liye tippani chhodee thee.Bohot,bohot dhanyawaad!(Wo ghar bulaata Hai).
Ek kahaanee likhee hai"Neele,Peele Phool".Prarthnaa hai,awashya padhiyegaa!!

vahji apne to laalu ki rail me chaar chaand laga deyeapko uer us rail ke dibbe ko bahut bahut badhai

english men ham aksar train se kiya karte the waise hindi men mail ke jariye kai baar post mara hai
usually mobile se
waise ye comment bhi train se hi hai

बधाई हो.
इसे भी देखें..
http://poetry.jagranjunction.com/2013/05/10/indian-poets-%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7-%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF-%E0%A4%B9%E0%A4%BF/

बधाई हो! हमारे ब्लॉगिंग के इस प्रयास पर कृपाया प्रतिक्रिया दें:
http://poetry.jagranjunction.com/2013/05/10/indian-poets-%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7-%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF-%E0%A4%B9%E0%A4%BF/

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