गरमी की छुट्टियाँ हो गई हैं और सभी कहीं न कहीं सैर का प्रोग्राम बना रहे हैं. घर में भी इस दफ़ा बाल-बच्चों ने उत्पात मचाया कि चलो कहीं सैर...
गरमी की छुट्टियाँ हो गई हैं और सभी कहीं न कहीं सैर का प्रोग्राम बना रहे हैं. घर में भी इस दफ़ा बाल-बच्चों ने उत्पात मचाया कि चलो कहीं सैर को चलें.
अब समस्या ये आई कि कहाँ चलें? किसी ने सुझाया कोवलम् के बैकवाटर पर चलें तो किसी ने टेहरी की पहाड़ियों की बात की. किसी ने मलेशिया-सिंगापुर या फिर दुबई का सुझाव दिया तो किसी ने मॉट्रियल का.
हर सुझाव पर कुछ न कुछ समस्या आती रही और मामला खारिज होता रहा. अचानक दिमाग की बत्ती जली. एक सुझाव मैंने फेंका - सुनकर किसी को मजा नहीं आया. मगर, फिर कोई दूसरा विकल्प भी नहीं था किसी के पास. जाहिर है, सब सफर की तैयारी में जुट गए.
जब हम मंजिल पर पहुँचे तो दोपहर के दो बज रहे थे. धूप तेज थी और हवा कहीं ठहर-सी गई थी. हर तरफ़ कांटे ही कांटे नज़र आ रहे थे. मगर यह क्या? कांटों के बीच कहीं-कहीं संसार की तमाम ख़ूबसूरती सिमट कर झलकने की, फ़ूट पड़ने की कोशिश-सी कर रही थी.
हम सैलाना के कैक्टस गार्डन में थे. कोई बीसेक साल पहले धर्मयुग के किसी अंक में इस पर एक विस्तृत फ़ोटो-फ़ीचर भी छपा था. यहां के भूतपूर्व महाराजा ने अपने महल के बाग़ीचे में सिर्फ कैक्टस के ही पौधे रोप रखे थे. कैक्टस के सैकड़ों क़िस्म. हर पौधा अपने आप में दर्शनीय और नायाब. कैक्टस भी इतने ख़ूबसूरत हो सकते हैं यह किसी को भी गुमान नहीं हो सकेगा जब तक कि वह इन पौधों को निकट से देख न ले.
हालांकि आज की तारीख में इस बग़ीचे का रखरखाव ठीक नहीं है और कैक्टस की बहुत सी क़िस्में अब वहां नहीं हैं, मगर फिर भी है यह अत्यंत दर्शनीय.
मई का महीना कैक्टस के लिए खास होता है. इस महीने कैक्टस में फूल आते हैं. और कहा जाता है कि संसार के कुछ सबसे ख़ूबसूरत फूल कैक्टस के ही होते हैं. इसीलिए किसी भी कैक्टस के बाग़ीचे में सैर करने जाना हो तो मई के अंतिम सप्ताह में जाना चाहिए. सैलाना कैक्टस गार्डन में भी फूलों की बहार आई हुई थी. हर कैक्टस पल्लवित हो रहा था. अलग-अलग क़िस्म के कैक्टस में अलग-अलग क़िस्म के लुभावने फूल. कंटीले कैक्टस में रेशम से कोमल फूल. धूसर कैक्टस में रंगों की छटा बिखेरते फूल.
मेरे यात्रा प्रोग्राम को सुनकर बाल-बच्चों के जिनके मुँह उतर गए थे, उन्होंने भी माना कि वाकई बहुत शानदार, मजेदार, ज्ञानवर्धक यात्रा रही. कैक्टस गार्डन के माली से यह जानकारी भी मिली की कोई दसेक दिन बाद यानी मई के आखिरी दिनों में कैक्टस पर फूलों की बहार अपने उच्चतम ऊँचाई पर रहेगी. उस दौरान एक बार फिर वहां तक दौड़ लगाने की योजना तो बन ही गई.
कैक्टस का फूल तो वाकई बहुत सुंदर है. मगर यह मांट्रियल तक की बात करके बस सैलाना...आ भी जाओ, भाई. मजा आ जायेगा. आशीष की यात्रा के दौरान ही बना लो प्रोग्राम. :)
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छी जानकारी दी है आपने रविशंकर जी, मैं भी मध्यप्रदेश में डेड़ दशक बिता चुका हूं पर कभी भी इसके बारे में नहीं सुना
जवाब देंहटाएंHi Friend.....
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रवि भाई,
जवाब देंहटाएंजब मै भारत यात्रा पर होऊंगा, देबू उस समय हिन्दी सम्मेलन मे भाग लेने अमरीका मे बैठा होगा।
भोपाल तो मै आऊंगा ही, आप रतलाम मे एक मीट करो, भोपाल और आस पास के ब्लॉगर्स की, मै जरुर शरीक होऊंगा।
सुन्दर चित्र हैं।
जवाब देंहटाएं"...भोपाल तो मै आऊंगा ही, आप रतलाम मे एक मीट करो, भोपाल और आस पास के ब्लॉगर्स की, मै जरुर शरीक होऊंगा।..."
जवाब देंहटाएंये हुई न बात. सभी चिट्ठाकार बंधुओं से आग्रह है कि जून अंतिम सप्ताह - जुलाई के प्रारंभिक सप्ताह में अपनी डेट खाली रखें. सभी को रतलाम ब्लॉगर मीट के लिए सादर निमंत्रण है.
नागफनी और सुन्दर फूल! आज जाना.
जवाब देंहटाएंसुन्दर.
वाह! सुंदर!
जवाब देंहटाएंदो साल पहले उज्जैन में हफ़्ते भर के लिए रहना हुआ था, तब सैलाना के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी नही तो जरुर पहुंचना होता यहां।
धन्यवाद
कैक्टस इतने खूबसूरत होते है ये पता नही था। फोटो तो बहुत ही अच्छी है। जानकारी के लिए शुक्रिया।
जवाब देंहटाएंकेकट्स के फ़ूल सच में बहुत सुन्दर है, और केक्ट्स बगीचा छुट्टियां बिताने के लिए, अनोखा आइडिया है
जवाब देंहटाएंकेकट्स के फ़ूल सच में बहुत सुन्दर है, और केक्ट्स बगीचा छुट्टियां बिताने के लिए, अनोखा आइडिया है
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर एलबम ..जितने सुन्दर कैक्टस है उतने स्वादिष्ट इनके फल होते हैं. सोच रही हूँ कि कैसे विडियो लगाई जाए जिसमे कैक्टस के फल खाने का तरीका बताया गया है.
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