व्यंग्यविविध | तकनीकीहिन्दीछींटें और बौछारें

***************************************************************

Google
 

Friday, April 06, 2007

आपका मोबाइल और आपका व्यक्तित्व



शास्त्रों में लिखा है कि व्यक्ति का व्यक्तित्व उसके भोजन पर निर्भर करता है - याने कि यदि व्यक्ति तामसी भोजन करता है तो वह तामसी विचारों का होगा, और यदि वह सादा भोजन करता है तो उसका जीवन भी सादा, स्वच्छ होगा. अब ये अलग बात है कि सादा-भोजन-उच्च-विचार में सादे और तामसी भोजन में किस हिसाब से कैसी भिन्नता मानें - अगर मेनका गांधी की मानें तो दुनिया में दूध से बड़ा मांसाहारी भोजन और कोई है ही नहीं!

मोबाइल फ़ोनों के बारे में आपके क्या विचार हैं? आप पूछेंगे कि मोबाइल फ़ोन और व्यक्ति के व्यक्तित्व में क्या समानता है? भई, समानता भले ही न हो, कुछ अध्ययनों से यह निष्कर्ष निकाला गया है कि आपके मोबाइल फ़ोन से आपके व्यक्तित्व का पता लगाया जा सकता है.

गणित साफ है. यदि आपका मोबाइल तामसी गुणों वाला होगा तो आपकी भी प्रवृत्ति तामसी होगी. आपका मोबाइल यदि राक्षसी गुणों युक्त होगा तो आपके भीतर भी राक्षसी गुण होंगे ही.

अब आप पूछेंगे कि ये तामसी और राक्षसी गुण मोबाइल फ़ोनों में कहाँ से आ गए. रुकिए. मामला अभी साफ किए देते हैं. परंतु पहले एक छोटी सी सच्ची कहानी -

कल ही की तो बात है. मैं चौराहे के फुटपाथिया बाजार पर कुछ खरीद रहा था. पास में ठेले में तमाम तरह की हरी-नीली-पीली सीडी और डीवीडी पर बेचने वाला नित्य की तरह खड़ा था. यदा कदा मैं भी पाइरेसी की बहती गंगा में हाथ धोता था चूंकि असली माल तो कहीं मिलता ही नहीं था. और कभी असली माल के बारे में दरियाफ़्त भी करता था तो लोग बाग़ कुछ यूं देखते थे जैसे हम किसी दूसरे ग्रह से आए हुए प्राणी हों. वह सीडी वाला निराश परेशान हलाकान लग रहा था. आमतौर पर वह चहकता हुआ मिलता था और हर बार नई आई हुई सीडी के बारे में शौक से बताता था.

मैंने यूं ही उससे उसकी उदासी का कारण पूछा. वह उबल पडा. उसने बताया कि उसके सीडी के धंधे को निगोड़े मोबाइल फ़ोनों ने तबाह करके रख दिया है. मुझे उत्सुकता हुई - मैंने उससे पूछा भइए, सीडी के धंधे का मोबाइल फ़ोनों से क्या संबंध? वह बोला - अरे साहब आप बड़े भोले हो. आपको पता नहीं है. हमारा धंधा जो हरी-नीली सीडी से चकाचक चलता था अब वह मल्टीमीडिया युक्त मोबाइल फ़ोनों के कारण मंदा हो गया है. लोग अब सीडी नहीं खरीदते, बल्कि मोबाइल की दुकानों में जाकर सीधे ही ये फ़िल्में डाउनलोड करवा लेते हैं और उसमें ही ये फ़िल्में देखते हैं. पहले लोग गेम की सीडी ले जाते थे वो अब मोबाइलों में गेम खेलने में व्यस्त रहते हैं. उसके मुंह से निकलते बोलों की कड़वाहट मुझ तक पहुँच रही थी. मुझे लगा कि यदि उसका बस चलता तो वह संपूर्ण संसार के मोबाइल फ़ोनों पर प्रतिबंध लगा देता.

मैंने उसे सांत्वना दी और कहा कि भई, ठीक है, चारों ओर प्रगति हो रही है. तुम भी तकनॉलाज़ी के साथ चलते क्यों नहीं? अचानक वह प्रसन्न हो गया. उसने बताया कि उसने भी एक दुकान देख लिया है और आवश्यक सामानों का आर्डर दे दिया है - उसकी भी मोबाइल डाउनलोड शॉप अगले हफ़्ते खुलने ही वाली है. फिर उसने मुझसे उसी प्रसन्नता से कहा - साब, अपनी दुकान पर आते रहना. आपको बढ़िया मोबाइल दिलवाएंगे और शुरू में महीने भर का अनलिमिटेड डाउनलोड बिलकुल मुफ़्त!

बाजार से घर वापस आते समय एक पुराने मित्र मिल गए. उनसे पुराने दिनों की बातें होने लगी. एक और पुराने मित्र की बात होने लगी. इस पर वे बिफर गए. बोले - तुम साले उसकी बात करते हो. बहुत गंदा आदमी है वह. उसने अपने मोबाइल में तमाम गंदे एसएमएस भर रखे हैं. अब उन मित्र ने यह नहीं बताया कि ये बात उन्हें कैसे पता चली.

तो, अब वापस आते हैं - आपके मोबाइल फ़ोनों पर - जो आपका व्यक्तित्व दर्शाते हैं. यदि आपके पास कोई स्मार्ट फ़ोन है तो भले ही आपको उसका पूरा फ़ंक्शन पता न हो, आप उन फ़ंक्शनों का उपयोग न कर पाएँ या आपके लिए वे अनावश्यक हों, आप उस स्मार्ट फ़ोन को हाथ में लेकर अपने आप को अच्छा खासा स्मार्ट महसूस करेंगे. और यदि यह काला बुख़ारा मोती जैसा कुछ हो तो क्या कहने! ये तो सौतनों का काम भी बख़ूबी करने लग गई हैं! यदि आपके पास O2 आइस जैसा मोबाइल फ़ोन हाथ में नहीं है तो आपको सबके सामने अपने मोबाइल को अपनी जेब या पर्स से बाहर निकाल कर बात करने में भी शर्म आती है. मोबाइलों को भी अब ड्रेस सेंस और फ़ैशन स्टेटमेंट में शामिल मान लिया गया है.

जब सारी दुनिया मोबाइल इस्तेमाल कर रही है और ऐसे में यदि आप मोबाइल फ़ोन ही इस्तेमाल नहीं करते हैं तब? तब तो आप रिचर्ड स्टालमैन हैं!


चित्र - साभार - देसी टून्ज़

Tag ,,,

7 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

जगदीश भाटिया said...

सात्विक और तामसिक फोन :)
इसी तरह कम्प्यूटर भी होते होंगे :)

अतुल शर्मा said...

मैं भी अब तक रिचर्ड स्टालमैन हूँ।

अरुण said...

ध्न्यवाद रवि भाइ आपने बताया हमे तो इससे बात करने के अलावा कुछ आता नही उपर से ये चिट्ठे पढ्ने की बिमारी लग गई है हा वो 02 कि फ़ोटो देख ली दिखाने के लिये धन्यवाद (कुछ तो हमारा स्टैन्डर्ड बढा) वो कान पे लगाने का हमारे पास है ही
अब ये भैया इक दिन फ़ुर्सत से लिस्ट बना दो कोन सा माडल तामसिक है कोन सा सात्विक

Piyush said...

बहुत खूब...
लेकिन इस शोध को शायद और आगे बढ़ाया जा सकता है।
-पीयूष

संजय बेंगाणी said...

मैं भी बिना मोबाइल के घूम रहा हूँ. :(

Anonymous said...

नमस्कार भाईयो,

रवि भाई आपकी ब्लोग पढी, बहुत बढीया है, मे ईन्टरनेट पर टेक्स्ट टु स्पीच पर सर्च कर रहा था, आपकी ब्लोग पढ कर खुशी हुई, मे भी एक शोपिंग कार्ट का हिन्दी वर्जंन लिख रहा हु, २-४ दिन मे वो पुरा हो जायेगा.

यह मोबाईले वाला आर्टीकल भी अच्छा है,

तब तक के लिये,

आपका अपना
सन्तोष

Shrish said...

मैं भी रिचर्ड स्टॉलमैन हूँ शाब! :)