व्यंग्यविविध | तकनीकीहिन्दीछींटें और बौछारें

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Sunday, March 18, 2007

अथ श्री उत्तम चिट्ठा आचार संहिता

पिछले दिनों चिट्ठों के आचार संहिता बनने बनाने व उन्हें अपनाने पर खूब बहसें हुईं. इसी बीच चिट्ठाकारों के अनाम -बेनाम-कुनाम मुखौटों पर भी खूब जमकर चिट्ठाबाजी हुई.

इसी बात को मद्देनजर रखते हुए इस ‘अथ श्री उत्तम चिट्ठा आचार संहिता' की रचना की गई है. सभी हिन्दी चिट्ठाकारों को इन्हें मानना व पालन करना घोर अनिवार्य है. अन्यथा उन्हें चिट्ठाकार बिरादरी से निकाल बाहर कर दिया जाएगा और उनका सार्वजनिक ‘चिट्ठा' बहिष्कार किया जाएगा.

  • चिट्ठे विवादास्पद मुद्दों पर ही लिखे जाएँ. मसलन धर्म, जाति, आरक्षण, दंगा-फ़साद इत्यादि. इससे हिन्दी चिट्ठों का ज्यादा प्रसार-प्रचार होगा. सीधे सादे सरल विषयों पर लिखे चिट्ठों को कोई पढ़ता भी है? अतः ऐसे सीधे-सरल विषयों पर लिख कर अपना व पाठकों का वक्त व नारद-ब्लॉगर-वर्डप्रेस का रिसोर्स फ़ालतू जाया न करें. इस तरह के सादे चिट्ठों की रपट ब्लॉगर और वर्ड प्रेस को एब्यूज के अंतर्गत कर दी जाएगी और उस पर बंदिश लगाने की सिफ़ॉरिश कर दी जाएगी.
  • अखबारी-साहित्यिक-संपादित तरह की तथाकथित ‘पवित्र' भाषा यहाँ प्रतिबंधित रहेगी. हर तरह का भाषा प्रयोग यहाँ न सिर्फ स्वीकृत बल्कि अनिवार्य होगा. फ़ूहड़, गाली-ग़लौज से भरे भाषाओं को चिट्ठा-चर्चा में विशेष तवज्जो दी जाएगी. अब ये अलग बात है कि चिट्ठा-चर्चा क्यों और किसलिए है ये कुछ चिट्ठाकारों को जल्दी से समझ नहीं आए. और ऐसे नासमझ चिट्ठाकारों को समझ आते तक दिन में दो बार चिट्ठा-चर्चा पढ़ना अनिवार्य होगा, और उन्हें अपने चिट्ठों पर ‘चिट्ठा-चर्चाओं' की नियमित ‘चर्चा' करना घोर अनिवार्य होगा.
  • चिट्ठों का स्वरूप है - अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता. चिट्ठाकार एक-दूसरे पर कीचड़-नुमा चिट्ठे उछालने को न सिर्फ स्वतंत्र हैं, बल्कि साल में ऐसे तीन चिट्ठापोस्ट करना अनिवार्य है जिसमें वे साथी चिट्ठाकारों की जमकर व्यक्तिगत भद पीटें. अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता को बनाए रखना हर चिट्ठाकार का न सिर्फ अधिकार है, बल्कि उसका कर्तव्य भी है.
  • अनाम-बेनाम-कुनाम चिट्ठाकारी प्रतिबंधित रहेगी. हर चिट्ठाकार को नाम रखना होगा - जे. एल. सोनारे - 001, जे. एल. सोनारे - 002 इत्यादि, इत्यादि. जिन चिट्ठाकारों ने प्रसिद्धि की चाह में अपने वास्तविक नाम रख छोड़े हैं उन्हें अपना वास्तविक नाम छः माह के भीतर हटाना होगा और नया नाम रखना होगा.
  • चिट्ठाकारों को पहचान हेतु फ़ोटो चिट्ठों के बाजू में प्रोफ़ाइल में लगाना अनिवार्य होगा. चिट्ठाकारों के खुद के फ़ोटो जरूरी नहीं हैं, बल्कि उन्हें अत्यंत अनावश्यक माना जाएगा. जिन चिट्ठों में चिट्ठाकारों के स्वयं के फ़ोटो लगे हैं उन्हें विज्ञापन माना जाएगा और उन्हें हटाने के लिए छः माह का समय दिया जाएगा. ऐसा न करने पर उन्हें दंडित किया जाएगा. पहचान हेतु कुछ इस तरह के या कुछ उस तरह के चित्रों की अनुशंसा की जाती है. वैसे, जगदीश भाटिया का चित्र भी लगाया जा सकता है (नंबर 001, 002 इत्यादि लगाकर), चूंकि हिन्दी चिट्ठा जगत् में एक अकेले वे ऐसे महापुरुष हैं जिनका चिट्ठा तो क्या, उनका फ़ोटो ही चोरी चला गया था , ऊपर से चोर कोई देसी नहीं, विदेसी बंधु था!
  • जिन चिट्ठाकारों ने अपने चिट्ठों में विज्ञापन भर रखे हैं उन्हें अपने चिट्ठे विज्ञापनों से खाली करने होंगे. ऐसे समस्त विज्ञापन उन चिट्ठों में रखना अनिवार्य होगा जिनके चिट्ठाकार विज्ञापनों से चिढ़ते हैं, खौफ़ खाते हैं. इंटरनेट इज ग्रेट लेवलर. इस तरह से, हिन्दी चिट्ठों का हिसाब बराबर किया जाएगा.
  • कुछ समय पहले चिट्ठा-चोर आया चिट्ठा-चोर आया का बड़ा हल्ला मचा था. इस तरह की समस्याओं का परमानेंट समाधान करने के लिए समस्त हिन्दी चिट्ठों पर मौलिक लेखन की तत्काल पाबंदी लगाई जाती है. अब चिट्ठों में जो भी लिखा जाएगा, वह चोरी की, कटपेस्ट और कॉपी पेस्ट सामग्री होगी. चोरी कर लिखी सामग्री की चोरी की फिर कोई चिंता नहीं होगी. जो चिट्ठाकार मौलिक सामग्री का प्रयोग करता पाया जाएगा, उस पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाएगा.
  • सौम्य भाषाओं में लिखी टिप्पणियाँ मॉडरेट कर दी जाएंगीं व उन्हें तत्काल कूड़ेदान में डाल दिया जाएगा. तल्ख़, उत्तेजक, गाली-गलौज से भरपूर टिप्पणियाँ लिखें, व्यक्तिगत छींटाकसी करती हुई टिप्पणियाँ लिखें. ऐसी टिप्पणी लिखें कि सामने वाले का ख़ून खौल उठे और वह भी उतनी ही उत्तेजक प्रति टिप्पणी लिखे और अन्य चिट्ठा लेखक-पाठक भी प्रति टिप्पणी या प्रति-चिट्ठापोस्ट लिखने को प्रेरित हों. पोस्ट को पढ़े बिना ही उसके असली पाठ के मतलब को समझे बिना ही टिप्पणी करने से भाषा में और तल्ख़ी आती है यह ध्यान रखें.

'अथ श्री उत्तम चिट्ठा आचार संहिता' की रचना लगातार जारी है. समयानुसार नियम बनते बिगड़ते रहेंगे. अपने उत्तम विचारों से अवश्य अवगत करावें ताकि इसे पूर्णता प्रदान की जा सके.

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13 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

अनूप शुक्ला said...

सही है। लेकिन सबसे पहले आपका चिट्ठा बाहर किया जा सकता है क्योंकि यह बिना गाली-गलौज वाली भाषा का है। वो तो कहिये विवादास्पद विषय पर होने के कारण बच गया।

Pratik said...

बहुत खूब, ऐसी आचार-संहिता की बहुत दिनों से ज़रूरत महसूस हो रही थी। आपने यह कमी पूरी कर एक महान काम किया है। :-)

Sanjeet Tripathi said...

बढ़िया, लेकिन इस रचना में कुछ कमी सी खल रही है। अरे हां गालियां लिखना भूल गये लगता है, खैर आदत पड़ते टाईम लगेगा ना।
बढ़िया रचना

Sagar Chand Nahar said...

आचार संहिता तो वाकई बड़ी अच्छी है पर जो चिट्ठाकार अनाड़ी है (गाली गलौज आदि मामलों में ) उन्हें क्या जरूरी मार्गदर्शन मुहैया कराया जायेगा?

या फिर ईपण्डित की तरह इस आचार संहिता को सिखाने के लिये कक्षायें चालू कराई जायेगी?

तल्ख़, उत्तेजक, गाली-गलौज से भरपूर टिप्पणियाँ लिखें, व्यक्तिगत छींटाकसी करती हुई टिप्पणी नहीं लिख पाया इसके लिये कृपया इसे मेरी पहली गलती मानकर इस टिप्पणी को मिटायें नहीं मैं जल्दी ही सब कुछ सीख जाऊंगा। :) :)

Shrish said...

वाह वाह रविजी, आपकी सेन्स ऑफ ह्यूमर तो कमाल की है, हंस हंस कर पेट दोहरा हो गया।

यह आचार संहिता जल्द ही बहुत काम आने वाली है, बल्कि मुझे तो लगता है कि ऐसे ही चलता रहा तो कुछ समय बाद ही इसका अगला वर्जन भी निकालना पड़ेगा जो कि फीचर्स के मामले में इससे भी एडवांस्ड और अपडेटेड होगा। :)

@सागर चन्द नाहर,
भाईसा इस मामले में तो पंडित जी खुद अनाड़ी हैं, किसी और विशेषज्ञ बंधु से क्लास लगवानी चाहिए।

Jagdish Bhatia said...

वाह जी वाह ! मजा आया इसे पढ़ कर ।
शायद आप जिन्हें आईना दिखा रहे हैं उन्हें कुछ समझ आ जाये :(

Udan Tashtari said...

वाह!! कहाँ थे अब तक? बिल्कुल अक्षरशः पालन किया जायेगा. :)

Tarun said...

बहुत सही यानि कि चिट्ठाकारों की संख्या एक बार फिर से ४-५ पर लाने की पूरी तैयारी

Ankur Gupta said...

Kya Baat Kahi Hai Aaapne. Wah!!!
Wah! Kya Sense of Humour hai!

Raag said...

रवि आपका दिमाग बिलकुल खराब हो गया है, क्या घटिया और अनाप शनाप लिखते रहते हैं। ये सब आपके दिमाग की गंदी सोच है।
ये सब टिप्पणी करने वाले खुद साले सब बदमाश हैं और सबको नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं। खुद पार्शिएलिटी करते हैं, अंधों की तरह अपने अपने को रेवड़ी बाँटते हैं, चर्चा करते हैं, फोटू लगाते हैं,और आप भी यही सब करते हैं।

मैं आप सबको आगाह करता हूँ कि अब साले को मेरा चिट्ठा नारद पर सबसे ऊपर नज़र आए हमेशा और सबसे पहले इसकी ही चर्चा हो। वर्ना चिट्ठों की दुनिया में आग लगा दूँगा।

अब हम आचार संहिता पालन करने में फर्स्ट हूँ।

Udan Tashtari said...

यार, हम भी टिपियाये थे, वो काहे गुम हो गई....देखो भईया और कारण बताओ..वरना हम न टिपियाया करेंगे..इत्ती मेहनत भी करो और दर्शनो नही..ई तो हद्दे कहलाई!!! :)

Udan Tashtari said...

लो अब धमकाये तो पुरानी भी दिखने लगी...वही तो है कि जब तक धमकाओ मत.............कोई सुनिबे नहीं करत,,,

अतुल शर्मा said...

बहुत ही मूर्खतापूर्ण पोस्ट है। पता नहीं क्या क्या लिख देते हैं? वाहियात!
रवि भैया, मैंने भी आचार संहिता पालन करने की कोशिश की है।