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प्रभासाक्षी ने कर दिखाया! दैनिक हिट 3 लाख के पार


बालेंदु व प्रभासाक्षी को बधाईयाँ!

हिंदी हिंदी के प्रमुख समाचार-विचार पोर्टल प्रभासाक्षी.कॉम पर होने वाले दैनिक हिट्स की संख्या तीन लाख से अधिक हो गई है। दो जनवरी को पोर्टल पर तीन लाख एक हजार हिट दर्ज किए गए। प्रभासाक्षी प्रबंधन ने सन 2006 के अंत तक पोर्टल के दैनिक हिट्स की संख्या तीन लाख से अधिक हो जाने की संभावना जताई थी जो सटीक सिद्ध हुई। इस तरह, इंटरनेट पर हिन्दी पाठकों की कुल संख्या के करीब पंद्रह फीसदी हिस्से पर काबिज इस पोर्टल के मासिक हिट्स भी बढ़कर 85 लाख से अधिक हो गए हैं. उम्मीद है कि अगले तीन महीनों में पोर्टल के मासिक हिट्स की संख्या एक करोड़ का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लेगी.

याद रहे, प्रभासाक्षी.कॉम के संपादक बालेन्दु दाधीच को तकनीकी क्षेत्र में उनके योगदान के लिए माइक्रोसॉफ्ट की तरफ से 'मोस्ट वेल्यूएबल प्रोफेशनल 2007' पुरस्कार प्रदान किया गया था। प्रभासाक्षी की लोकप्रियता निरंतर बढ़ रही है और पिछले एक साल में इस पर आने वाले इंटरनेट उपयोक्ताओं (सर्फरों) की संख्या लगभग तीन गुना हो गई है। हिंदी भाषी अप्रवासी भारतीयों और छोटे शहरों के हिंदी पाठकों के चहेते इस पोर्टल ने हिट्स के मामले में 26 अप्रैल 2006 को ढाई लाख का आंकड़ा पार किया था। प्रभासाक्षी ने प्रचार आदि पर भारी भरकम खर्च किए बिना अपनी संपादकीय और तकनीकी क्षमताओं के बल पर तीन लाख का आंकड़ा पार किया है। प्रभासाक्षी पर होने वाले हिट्स को लगातार वेबलॉगएक्सपर्ट और वेबट्रेंड्स सॉफ्टवेयरों की मदद से मॉनीटर किया जाता है।

निरंतर बढ़ती लोकप्रियता

प्रभासाक्षी.कॉम का संचालन द्वारिकेश संवाद लिमिटेड करता है जो श्री गौतम मोरारका के नेतृत्व वाले द्वारिकेश समूह का उपक्रम है। बालेन्दु दाधीच के संपादन में प्रकाशित किए जा रहे इस पोर्टल के हिट्स में लगातार वृध्दि का कारण उसकी स्वच्छ, सूचनापरक और विशद सामग्री, समाचार देने की गति, तकनीकी श्रेष्ठता व सरलता तथा प्रसिध्द व अनुभवी लेखकों का जुड़ाव माना जाता है। प्रभासाक्षी.कॉम का लक्ष्य भारत से संबंधित सूचनाओं का विश्वसनीय हिंदी स्रोत बनना है और वह सनसनीखेज या उत्तोजक सामग्री के प्रयोग से बचता है। समाचारों के मामले में भी यह पोर्टल पूरी तरह निष्पक्ष संपादकीय नीति पर चलता है और सभी पक्षों के विचारों को समान रूप से कवर करता है। प्रभासाक्षी में प्रयुक्त सामग्री परंपरा और नवीनता के प्रति संतुलन पर आधारित होती है। प्रगतिशील विचारों पर आधारित होने के बावजूद यह पोर्टल भारतीय संस्कृति के उज्ज्वल पक्षों के प्रति गहरा सम्मान और लगाव दिखाता है और साथ ही साथ दकियानूसी और कट्टरपंथी विचारों के विरोध में खड़ा रहता है।

पिछले एक साल में प्रभासाक्षी के पाठकों के अनुपात में भी बहुत दिलचस्प और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। साल भर पहले जहां इस पोर्टल के 65 फीसदी पाठक अनिवासी भारतीय तथा विदेशी थे वहीं अब उनकी संख्या घटकर लगभग पच्चीस फीसदी रह गई है और स्वदेशी पाठकों की संख्या बढ़कर 75 फीसदी तक जा पहुंची है। यह इस बात का परिचायक भी है कि भारत के छोटे शहरों और कस्बों में भी इंटरनेट का प्रचलन धीरे-धीरे बढ़ रहा है और हिंदी पाठकों में इंटरनेट के प्रयोग की अभिरुचि बढ़ रही है।

पिछले पांच साल की अवधि में प्रभासाक्षी भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में रहने वाले हिंदी पाठकों के बीच भी अपनी जगह बनाने में सफल रहा है। भारत से विदेश गए लोगों को उनकी भाषा, भूमि और संस्कृति से जोड़े रखना इसके उद्देश्यों में प्रमुख है। जिन देशों में प्रभासाक्षी सबसे अधिक देखा जाता है उनमें अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा प्रमुख हैं। प्रभासाक्षी के कुल सर्फरों के आधे से अधिक अमेरिका से आते हैं। इस पोर्टल पर पांच श्रेणियों में समाचार और 26 श्रेणियों में गैर-समाचार सामग्री दी जाती है। प्रसिध्द लेखक-पत्रकार खुशवंत सिंह, मशहूर संपादक व मानवाधिकारवादी कुलदीप नायर, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण नेहरू, पूर्व सांसद व संपादक दीनानाथ मिश्र आदि प्रभासाक्षी के लेखकों में शामिल हैं। विख्यात हिंदी कार्टूनिस्ट काक भी इससे जुड़े हुए हैं।

स्रोत: प्रभासाक्षी


(क्या यह बताना उचित रहेगा कि मेरे आलेख भी प्रभासाक्षी में आते रहे हैं? - रवि :) )

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टिप्पणियाँ

  1. मै प्रभासाक्षी के नियमित पाठको मे से हूं। नियमित पढने के पिछे एक ही कारण है, पढने लायक उच्च कोटी की सामग्री !

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  2. प्रभासाक्षी की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए बालेन्दु जी को हार्दिक बधाई। यह ऑनलाइन हिन्दी के तेजी से हो रहे प्रचार-प्रसार का द्योतक है। आशा है, धीरे-धीरे हिन्दी चिट्ठों की लोकप्रियता में भी वृद्धि होगी और व्यावसायिक सफलता का कुछ स्वाद चिट्ठाकारों को भी चखने को मिल सकेगा।

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  3. प्रभासाक्षी को बहुत बहुत बधाई तथा इस सफलता की सुचना हम तक पहूँचाने के लिए आपको साधूवाद.
    निःसंदेह इस सफलता से युनिकोडीत हिन्दी के प्रसार को गति मिलेगी.

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  4. बहुत खुशी हुई जानकार। प्रभासाक्षी निस्देंह बेहतरीन हिन्दी पोर्टल है... यह युँही प्रगति करे ऐसी कामना है।

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  5. बेनामी4:30 pm

    प्रभासाक्षी के सभी साथियों को बधाई॓। आगे भी सफ़लता के लिये मंगल कामनायें!

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  6. बेनामी5:01 pm

    इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए बालेन्दु जी को एवं प्रभासाक्षी के सभी साथियों हार्दिक बधाई।

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  7. हिंदी वालों के हिस्से पहिले ऐसी उपलब्धियां आती ही नहीं थी, अब छन-छ्न कर आने लगी है. मुझे पक्का यकीन है कि हिंदी की सफलता की ऐसी कहानियां अब जल्दी ही हमारी दिनचर्या का हिस्सा होगीं.
    बालेंदुजी और उनकी टीम को बधाई. रविभाई आपको भी बधाई (देख रहे हैं न... अब आपके सपनों को आकार मिल रहा है.)

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  8. बेनामी9:13 pm

    I could not see this paper in unicode. Am I doing something wrong?

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  9. Raag,

    प्रभासाक्षी यूनिकोड में नहीं है. अलबत्ता इसका यूनिकोड का ट्रायल संस्करण आप यहाँ से पढ़ सकते हैं:
    http://www.prabhasakshi.com/unicode.htm

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  10. वाह बहुत ही अच्छी खबर है ये तो अब तो हिन्दी बहना के दिन फिर ही गए। बस यूनिकोडित हो जाए 'प्रभासाक्षी' तो फिर क्या कहने।

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  11. यह समाचार पढ़कर बहुत खुशी हुई। और जिस प्रकार हिन्दी की हमारी चहेती पत्रिकायें 'अनुभूति' और 'अभिव्यक्ति' यूनिकोडित हो गयीं, हमारे प्रिय पत्र प्रभासाक्षी के भी शीघ्र यूनिकोडित होने की मंगलकामना करता हूं। और अन्तत: हिन्दी के अंतरजाल पर छा जाने की हमारी सदिक्षा फलवती होती दिखने लगी है।

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  12. प्रिय रवि भाई, आशीष, संजय, पंकज, शशि सिंह, श्रीश और अन्य सभी साथियो, आप सबके अपनत्व और प्रोत्साहन के लिए मैं दिल से आभारी हूं। यकीन मानिए, आप सबकी टिप्पणियां, सलाह, प्रशंसा, आलोचना और उलाहने सब मेरे लिए और प्रभासाक्षी के लिए अनमोल हैं। हमारे यूनिकोडीकरण का आपका आग्रह जायज है और हम इस दिशा में अवश्य काम करेंगे। पूरी प्रभासाक्षी टीम की ओर से आप सबको बहुत बहुत धन्यवाद।

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  13. अब क्या हाल है प्रभासाक्षी का?

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