सोमवार, 21 मार्च 2005

प्रकृति की रंगीन बहार..

प्रकृति की होली
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फ़ाल्गुन के महीने में प्रकृति भी अपनी रंग-बिरंगी छटाएँ बिखेरती है. जहाँ देखें वहीं फूलों की बहार. टेसू तो हर ओर ऐसे दीखते हैं, जैसे जंगल में अग्निदेवता साक्षात् उतर आए हों. प्रकृति आपके तन-मन में रंगीनियाँ भरने को आतुर प्रतीत होती है.

पुष्पों के नियमित-अनियमित-सिमिट्रिकल रूप और रंग विन्यास दर्शकों के तन-मन को झंकृत-चमत्कृत तो करते ही हैं, अपनी भीनी-भीनी खुशबुओं की छटा से वे हमें मदमस्त भी करते हैं.

इस पुष्प को देखिए और मदमस्त होइए:



यह चित्र अपने पूरे आकार में यहाँ मौज़ूद है जिसे डाउनलोड कर आप अपना डेस्कटॉप वालपेपर बना सकते हैं.

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