गुरुवार, 20 जनवरी 2005

आओ आराम फरमाएँ...

अलालों के लिए अच्छी (?) ख़बर
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हमारे जैसे अलालों के लिए ये अच्छी (?) ख़बर है. हम अलाल दुनिया की छाती में मूंग दलने के लिए औरों की अपेक्षा जरा ज्यादा समय तक जीवित रहेंगे. पर इसके साथ खतरा यह भी है कि दुनिया की धूल-गर्द, हिंसा-आतंकवाद, ग़रीबी-भुखमरी, प्राकृतिक आपदा-महामारी को भी हम अलालों को ज्यादा समय तक झेलना होगा. अगर आपमें इनको झेलने का दम है, तो फिर, ईश्वर के पास जल्दी जाने के लिए काहे को ताबड़तोड़ काम किए जा रहे हैं? काम धाम छोड़कर आइए, आराम फ़रमाइए और हमारी अलाल मंडली में आप भी शामिल हो जाइए और दीर्घ जीवन पाइए....

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ग़ज़ल
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यूँ तो बड़ा अलाल तू
करे है खूब सवाल तू

जाति-धर्म के किसलिए
मचाए बहुत बवाल तू

बैठा आँखें मींचे फिर
करे है क्यूँ मलाल तू

किसी अंधेरी राह का
बन के देख मशाल तू

सफल क्यों न हो रवि
सत्ता का बड़ा दलाल तू

*-*-*

3 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. रवि जी,

    क्या ख़ूब ग़ज़ल लिखी है। दो-तीन और शे'र पेशे-ख़िदमत हैं -

    आराम क्यों हराम है?
    चल, मान इसे हलाल तू।

    जल्दी पड़ी क्यों काम की
    कर लेना अगले साल तू।

    सो ले तू लंबी तान के
    सारी बलाएँ टाल तू।

    - रमण

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  2. मेरे जैसे पुराने और मंजे हुए आलसियों के लिये ये काफ़ी अच्छी ख़बर है.. वैसे ये दोहा तो आपने सुन ही रखा होगा..

    आज करे सो काल करे , काल करे सो परसों
    जल्दी जल्दी क्यूं करत है , अभी पड़े हैं बरसों

    उत्तर देंहटाएं
  3. Alali shabd sun ke apne jabalpur ki yaad dila diye aap to. Jyada type nahi karenge bhai Alali jo kayam rakhni hai.

    उत्तर देंहटाएं

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