सोमवार, 15 नवंबर 2004

धन्य धान्य धर्माचार्य – भाग 2

चोला राम का दिल रावण रावण
यही है रवि हाहाकारी असलियत




भाग 1 में मैंने बोहरा समाज के धर्मगुरु का परिवार मुम्बई के कामा हाउस को 1 अरब से अधिक रुपयों में खरीदे जाने के बारे में लिखा था. वह तो भला हो कुछ समाचार पत्रों का जिसमें इस विवादास्पद सौदे का हल्ला मचा और वह रद्द हो गया. भाग 2 तो और भी कलंकित है. काँची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य को हत्या के अपराध में मुख्य अभियुक्त क्रमांक 1 के रूप में विगत दिनों गिरफ्तार किया गया. मामला पीठ के पाँच हजार करोड़ रूपयों से अधिक की सम्पत्ति का है, जिसके दुरुपयोग के बारे में मृतक बरसों से शंकराचार्य पर उंगली उठाते रहे थे.

मैं फिर से एक बार कहना चाहूँगा कि ये धार्मिक गुरु चाहे जिस पंथ, रीति और धर्म के हों, वे खतरनाक परजीवी हैं जो समग्र विश्व को चूसकर उसके विकास में बाधा डालते रहे हैं. उम्मीद करते हैं कि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ इनकी असलियत को पहचान लेंगीं.

ग़ज़ल
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खुद की नहीं पहचानी असलियत
तलाश में हैं औरों की असलियत

यहीं तो है उस लोक की हकीकत
जनता कब पहचानेगी असलियत

मत मारो उस दीवाने को पत्थर
पहले देख लो अपनी असलियत

ईश्वर तो मौज़ूद है तेरे कर्मों में
रे मूरख पहचान तेरी असलियत

चोला राम का दिल रावण रावण
यही है रवि हाहाकारी असलियत

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