बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

आधार से फ़ालतू में डरने वालों, जरा फ़ेसबुक से भी तो डरो!

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छद्मभयभीत!

और, भारतीयों के उनके कुल जनसंख्या का 200% !

... क्योंकि एक एक भारतीय के तीन तीन एफ़बी आई डी हैं, कुछ ब्लॉक, कुछ डीएक्टीवेट तो कुछ छद्म!

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

वाट्सएप्प के फ़ोटो वीडियो से फ़ोन की मेमोरी भर जाती है, फ़ोन स्लो हो जाता है, काम नहीं करता?

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तो, यह सुविधा आपके लिए है!

वाट्सएप्प के गुडमार्निंग संदेशों से आपके 128 जीबी मेमोरी वाले फ़ोन की मेमोरी तीन दिन में ही भर जाती है?

वाट्सएप्प के संदेशों / वीडियो फारवर्ड से आपके फ़ोन की मेमोरी इतनी भर जाती है कि आपका फ़ोन स्लो हो जाता है, रीएक्ट नहीं करता, खुलता नहीं?

और, आप इन्हें हटा हटा कर परेशान हो जाते हैं?

और, ये रोज की समस्या है?

वाट्सएप्प की सेटिंग में जाकर डिफ़ॉल्ट - स्वचालित डाउनलोड को डिसेबल करने से भी मामला सुलझता हुआ दीखता नहीं?


तो फिर वाट्सएप्प त्यागें और स्नैपचैट या टेलीग्राम अपनाएँ. प्ले स्टोर परस्नैपचैट या टेलीग्राम  सर्च करें व इंस्टाल करें.

इनमें चित्रों, वीडियो संदेश आदि के स्वचालित तरीके से स्वयंमेव मिटते रहने की सुविधा है. आपकी सेटिंग के अनुरूप, या डिफ़ॉल्ट रूप में जैसे ही आपके पास संदेश / चित्र / वीडियो आते हैं, और आप उन्हें देख लेते हैं तो यह निश्चित समय के पश्चात् (यदि आपने सहेजा नहीं है तो) स्वयं ही मिट जाते हैं, और आपके फ़ोन की मेमोरी बनी रहती है पूरी फुल.

मंगलवार, 6 फ़रवरी 2018

व्यंग्य जुगलबंदी : 72 - आपके व्यंग्य का बीमा

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बीमा आग्रह की विषयवस्तु है.

इधर, पकौड़े की आड़ में बेरोजगारी पर बहस फिर से जारी है. भले ही मैंने, एक दशक पहले, शासकीय सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली हो, मेरे पास फ़ेसबुकियाने, ब्लॉगिंग करने और ट्विटरियाने के अलावा और कोई काम नहीं है, यानी मैं भी खालिस बेरोजगार हूँ.

इस भूमिका का लब्बोलुआब यह है कि मुझे भी एक अदद रोजगार पाने का पूरा हक है. इधर, मैं अपनी बेरोजगारी से तंग आ चुका हूँ और इससे पहले कि मैं कोई और कदम उठा लूँ, और चूंकि सरकारी नौकरी छोड़ ही चुका हूँ, सोचता हूँ एक धंधा खोल लूँ. अब चूंकि पकौड़ों का धंधा हर गली चौराहे पर खुल रहा है या खुलने वाला है, इस धंधे में बड़ा रिस्क है. तो रिस्क कवर करने का धंधा क्यों न खोला जाए? बीमा का धंधा. पर, जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा, खेती-किसानी, पकड़ौं के ठेलों का बीमा नहीं – ये सब सरकारों के लिए रहने देना चाहिए, वरना, एक तो सरकारें क्या करेंगीं, और लोगों का सरकारों को गरियाने के टाइमपास का क्या होगा – इसलिए, रचनाकारों का, रचनाओं का बीमा.

रचनाकारों की रचनाओं का बीमा यूँ भी बढ़िया, जबरदस्त आइडिया है. शत-प्रतिशत सफलता की गुंजाइश. वेंचरफंड वाले तो इस आइडियो को सुनकर उछल पड़ेंगे. ढेर सारा कैपिटल यूँ ही हाथ में आ जाएगा. मार्केट में कोई कंपीटीशन ही नहीं है. सारा आकाश हमारा. शुरूआत, व्यंग्यकारों के व्यंग्यों के बीमे से किया जाएगा. इसके लिए एक बीमा कंपनी खोलने का प्लान है. इस कंपनी के लिए कोई सटीक, धाँसू ब्रांड नाम आप सुझा सकें तो आपके आभारी रहेंगे. नाम में, चूंकि मामला व्यंग्य का है तो पंच भी होना चाहिए, सरोकार भी, मार्मिकता भी, पठनीयता, गेयता आदि, आदि भी.

अब, चूंकि बीमा आग्रह की विषयवस्तु है, इसलिए आपसे आग्रह है कि आप अपने व्यंग्य का बीमा हमसे अवश्य लें. प्रीबुकिंग के प्रथम सौ व्यंग्य बीमा को विशेष छूट. आप अपने व्यंग्य का बीमा लेंगे तो इससे आपको बहुत से फायदे होंगे. व्यंग्य बीमा के कुछ नियमित और विशिष्ट फायदे ये डिजाइन किये गये हैं, और इनमें उत्तरोत्तर और भी फायदे नियमित अंतराल पर, बोनस स्वरूप जोड़े जाते रहेंगे –

· बीमे की पॉलिसी की रकम के अनुसार, सोशल मीडिया में आपके व्यंग्य के 20, 25, 50 हजार या और अधिक, लाइक, शेयर और कमेंट आदि की गारंटी.

. विभिन्न पॉलिसी की किस्म के अनुसार, आपके घोर अपठनीय, टाइप्ड किस्म के  व्यंग्य के भी हजार, दस हजार, लाख, करोड़ पाठक जुगाड़ने की गारंटी.

· बीमे की पॉलिसी की रकम के अनुसार वरिष्ठों, नवांकुरों, युवाओं, उभरतेहुओं, जलेसों-प्रलेसों आदि आदि से आपके व्यंग्य की 25, 50, 100 या अधिक समीक्षा की गारंटी.

. आपके व्यंग्य को न्यूनतम आधा दर्जन पुरस्कारों की गारंटी.

· आपके व्यंग्य में अधिकतम मात्रा में, बल्कि हर लाइन, वाक्य और शब्द में पंच, मार्मिकता, गहराई (वही, डार्क ह्यूमर,), सरोकार आदि आदि ढूंढ ढूंढ कर निकालने, पहचानने, छिद्रान्वेषण करने की गारंटी.

· आपके व्यंग्य को अधिकाधिक ई-पत्रिकाओं, प्रिंट पत्रिकाओं, ब्लॉगों, यूट्यूब-फ़ेसबुक-रेडिट-लिंक्डइन-इंस्टाग्राम आदि आदि सभी संभव-असंभव स्थलों में बारंबार प्रकाशित करने-करवाने की गारंटी. आप कहेंगे कि इंस्टाग्राम तो फ़ोटोग्राफ़ी कलाकारी का स्थल है, वहाँ व्यंग्य का क्या काम? तो भइए, आपके लिखे व्यंग्य की स्क्रीनशॉट बनाकर उसकी फ़ोटो टांगने में कोई हर्ज है क्या?

व्यंग्य आजकल खतरे में है. सरोकारी व्यंग्य विलुप्त होते जा रहा है. व्यंग्य में चुटकुलेबाजी घुस गई है. व्यंग्य में वनलाइनर घुस आया है. व्यंग्य में हास्य ने घर कर लिया है. व्यंग्य व्यंग्य न रहा है, कुछ और हो गया है. व्यंग्य जोशी-परसाईं से निकल कर जाने कहाँ चला जा रहा है जहाँ उसकी पहचान ही खत्म होने के कगार पर है. ऐसे में, व्यंग्य की रक्षा के लिए, सुधार के लिए, बचाने के लिए, सही समय पर व्यंग्य बीमा आया है. अन्य विधाओं यथा - कविता, कहानी, उपन्यास, लघुकथा, हाइकु आदि आदि  के लिए भी जल्द ही यह बीमा स्कीम लांच होगी. इसलिए, सभी व्यंग्यकारों को व्यंग्य बीमा अनिवार्य रूप से लेना चाहिए. बीमा आग्रह की विषयवस्तु है.