बुधवार, 25 अप्रैल 2018

सुरेन्द्र मोहन पाठक का लेखन अच्छा कि वेद प्रकाश काम्बोज का?

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टंटा ही खत्म. मार्केट में नया लेखक आया है. एआई. उसके सामने डान ब्राउन भी फेल. जेके रॉलिंग को भी कोई नहीं पूछेगा. शर्तिया.

जिंदगानी बस है यही, फ़ारवर्ड किए जा...

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स्मार्टफ़ोन माने वाट्सएप्प, और, बहुत हुआ तो फ़ेसबुक.

मैं तो तेरी रग रग से वाकिफ़ हूँ प्यारे!

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तकनीकी उन्नतता का एक और धमाल. अब तो, सचमुच, जबान संभाल के!

बुधवार, 28 मार्च 2018

किंडल ईबुक संबंधी आम प्रश्नों के उत्तर kindle FAQ Hindi

( किंडल ईबुक - पेपर व्हाइट एडीशन)


किंडल क्या है?

किंडल, बड़े स्क्रीन वाला, स्मार्टफ़ोन जैसा दिखने वाला एक हार्डवेयर है, जिसे केवल किताब जैसे पढ़ने के उत्तम अनुभव के लिए डिजाइन किया गया है. वर्तमान में तीन किस्म के किंडल मिलते हैं, जिनकी कीमत छः हजार से दस हजार रुपए के बीच है. एक किंडल में सैकड़ों किंडल ईबुक डाउनलोड कर रख सकते हैं. एक तरह से यह आपकी चलती फिरती लाइब्रेरी होती है. इसी किस्म के कुछ और हार्डवेयर हैं कोबो, नोबल आदि, परंतु ये उतने प्रचलित नहीं हैं.

किंडल ईबुक क्या है?

किंडल ईबुक खासतौर पर किंडल उपकरणों पर पढ़ने की सुविधा हेतु प्रकाशित किए जाते हैं. यह सॉफ़्ट-कॉपी होती है, कुछ कुछ पीडीएफ फ़ाइल की तरह परंतु इसमें उन्नत सुविधा होती है – टैक्स्ट आकार को छोटा बड़ा करने, नोट लेने, नोट लिखने, शब्दार्थ समझने की अंतर्निर्मित सुविधा आदि (हिंदी भाषा में कुछ सुविधाएँ अभी अनुपलब्ध हैं). किंडल ईबुक डीआरएम सक्षम होती हैं, यानी इन्हें बिना शुल्क चुकाए आसानी से वितरण / साझा इत्यादि नहीं किया जा सकता. आमतौर पर सभी किंडल ईबुक बेहद सस्ते होते हैं (प्रिंट व वितरण इत्यादि का खर्च नहीं लगता इसलिए) और किंडल अनलिमिटेड सदस्यता में हजारों किंडल ईबुक निःशुल्क पढ़े जा सकते हैं.

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स्मार्टफ़ोन के किंडल ऐप्प पर डाउनलोड किए गए कुछ किंडल ईबुक.


किंडल ईबुक को किंडल के अलावा कैसे पढ़ा जा सकता है?

किंडल ईबुक को पढ़ने के लिए आपको खर्चीला किंडल उपकरण खरीदने की कतई जरूरत नहीं है. अपने कंप्यूटर उपकरणों अथवा स्मार्टफ़ोनों में आप निःशुल्क किंडल ऐप्प इंस्टाल कर किंडल ईबुक पढ़ सकते हैं. हालाकि अनुभव उतना अच्छा नहीं होगा, क्योंकि किंडल उपकरण के ई-इंक तकनीक से किताब पढ़ने जैसा अनुभव होता है, और स्मार्टफ़ोन की चमकीली स्क्रीन से देर तक पढ़ने से आँखों में तनाव का अनुभव हो सकता है. किंडल ऐप्प इंस्टाल करने के लिए प्लेस्टोर पर किंडल ऐप्प Kindle app सर्च करें और आधिकारिक अमेजन किंडल ऐप्प ही इंस्टाल करें. किंडल ईबुक खरीद कर डाउनलोड कर पढ़ने से पहले आप इनके सेंपल को निःशुल्ड डाउनलोड कर पढ़ कर कंटेंट का अंदाजा भी लगा सकते हैं. इससे आपको खरीदी करने के निर्णय लेने में आसानी होती है – किताब काम का है, रूचि का है भी या नहीं.

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अमेजन किंडल ऐप्प जिससे आप अपने स्मार्टफ़ोन पर किंडल ईबुक पढ़ सकते हैं.


अपना पसंदीदा किंडल ईबुक मैं कैसे खोज सकता हूँ

किंडल पर सर्च की उत्तम सुविधा है. किंडल ऐप्प पर भी आप उत्तम सर्च सुविधा का लाभ ले सकते हैं. अपने किंडल पर अथवा अपने स्मार्टफ़ोन के किंडल ऐप्प (पहली बार उपयोग करते समय आपको एक खाता बनाना जरूरी होगा) में कीवर्ड से सर्च करें – जैसे कि ‘कुबेर’ . आपके सामने किंडल पर कुबेर के व्यंग्य नामक ईबुक, (यदि किंडल में कभी भी प्रकाशित हुई हो तो) आ जाएगी, अथवा मिलती जुलती किताबें दिखाई देंगी.

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किंडल पर कीवर्ड "कुबेर" से  सर्च


क्या किंडल ईबुक प्रिंट रूप में भी मिलती हैं?

अंग्रेज़ी की किताबें अधिकांशतः प्रिंट ऑन डिमांड के तहत अमेजन से प्रिंट में भी खरीदा जा सकता है. हिंदी की कुछ किंडल किताबें प्रिंट में मिलती हैं, परंतु कुछ नहीं. रचनाकार के तहत प्रकाशित किताबें अभी प्रिंट में उपलब्ध नहीं हैं. शायद निकट भविष्य में अमेजन यह सुविधा प्रारंभ कर दे.

अब आप पढ़ते रहिए किंडल पर किंडल ईबुक.

और हाँ, रचनाकार के जरिए किंडल ईबुक प्रकाशित करने की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध है. अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएँ.

रविवार, 25 मार्च 2018

बेहतर लिखना तो ठीक है साहब, बेहतर पढ़ने वालों में असली बुद्धिमत्ता कहाँ से लाएँगे?

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... पत्थर का एक टुकड़ा भी!


कृत्रिम बुद्धिमत्ता से अब उच्चकोटि का साहित्य लिखा जाएगा. कविताई-शविताई, ग़ज़ल-शज़ल, व्यंग्य-श्यंग्य  सब. एक बात तो इससे बढ़िया हो जाएगी. एक कवि दूसरे से नहीं जलेगा. एक व्यंग्यकार दूसरे व्यंग्यकार के व्यंग्य में सरोकार या मार्मिकता या पंचादि ढूंढने की कोशिश नहीं करेगा, बल्कि एआई ऐप्प को थ्रीस्टार, फाइवस्टार रेटिंग देगा - ये वाला ऐप्प बढ़िया व्यंग्य लिखता है. इस ऐप्प ने तो इस बार व्यंग्य में व्यंग्य नहीं, फूहड़ हास्य भर दिया. इसलिए, जीरो रेटिंग.

पर एक यक्ष प्रश्न उठेगा. कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बढ़िया साहित्य रच लिया जाएगा. पढ़ेगा कौन? उच्च कोटि के साहित्य को पढ़ने व समझने के लिए असली बुद्धिमत्ता भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता से गढ़नी होगी. और आदमी अपने बुद्धूपन की ओर एक कदम और बढ़ा लेगा Smile

जै हो तकनीक की!

शुक्रवार, 23 मार्च 2018

आर यू स्टिल ऑन फ़ेसबुक?

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क्या आप अभी भी फ़ेसबुक पर हैं?

पांच-छः साल पहले लोग गर्व से कहते थे – आ’यम ऑन फ़ेसबुक. आर यू ऑन फ़ेसबुक?

और यदि कोई नहीं होता था फ़ेसबुक में तो, वो अपने आप को तकनीकी रूप से बेहद पिछड़ा, अति पिछड़ा, अति अति पिछड़ा आदि आदि न जाने क्या क्या समझने लगता था.

और, अब मुंह छुपाने का समय आ गया है.


लोग कह रहे हैं – आर यू स्टिल ऑन फ़ेसबुक?


फ़ेसबुक का मेरा परीक्षण (हाँ, यह एक तरह से अभी भी परीक्षण खाता ही है, क्योंकि मैं इसमें सक्रिय कभी भी नहीं रहा) खाता स्व. ओरकुट (RIP) के जमाने से है. और इसकी पॉलिसी मुझे कभी भी रास नहीं आई. पहले पहल तो यह कि कहीँ भी, किसी भी उपकरण में फ़ेसबुक के सार्वजनिक पृष्ठों को भी पढ़ने देखने के लिए आपको एक अदद खाता बनाना पड़ेगा और लॉगिन करना होगा.

फ़ेसबुक पर जो सामग्री लिखी जाती है उसका सर्च इत्यादि से ढूंढ पाना मुश्किल होता है. फ़ेसबुक ने बेहद शातिराना तरीके से सर्च इंजन बनाया है जो कि अपने उपयोगकर्ताओं से पैसे ऐंठ कर अथवा विज्ञापनदाताओं से पैसे वसूल कर उनके मनमाफ़िक सामग्री को सदैव आगे प्रदर्शित करता रहता है. और यही बात अप उसके गले की हड्डी बनती जा रही है.

शायद इसी तरह की घटिया, मगर शातिराना पॉलिसी के कारण, और संभवतः बेहद सरल इंटरफ़ेस और मजमा जमाने (लड़ी दार टिप्पणी करने की बेहतरीन सुविधा) की सुविधा के कारण फ़ेसबुक उत्तरोत्तर लोगों में फैलता भी गया. परंतु घड़ियाल के मुंह में खून लग गया था. उसने अपने उपयोगकर्ताओं के डेटा उचित अनुचित तरीके से उपयोग में लेने भी प्रारंभ कर दिए. नतीजा सामने है.

आर यू स्टिल ऑन फ़ेसबुक?

इफ़ यस, दैन गो बैक टू ब्लॉग, यू फ़ूल! Smile

बुधवार, 21 मार्च 2018

आइए, आज होशियारी भरा एक काम करें,

अपना फ़ेसबुक का खाता सदा के लिए मिटा दें...

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फ़ेसबुक से बाहर निकालने वालों के अपने अपने फंडे हैं. इन महाशय ने एक नया, वाट्सएप्प प्रतिद्वंद्वी किस्म का ऐप्प लांच किया है. शायद उस ओर मक्खियों को आकर्षित करने की कोई योजना हो... Smile

गुरुवार, 15 मार्च 2018

हुर्रे! आ गया!! आ गया !! गूगल असिस्टेंट हिंदी में आ गया

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यूँ तो गूगल असिस्टेंट हिंदी में पिछले कुछ समय से सीमित उपयोग में काम कर रहा था, परंतु अब गूगल ने इसे आधिकारिक तौर पर हिंदी में पूरी सुविधाओं से लैस जारी कर दिया है.

अब आप हर किस्म के कमांड हिंदी में बोलकर दे सकेंगे जिसे यह पूरी दक्षता के साथ पूरा करने की कोशिश करेगा, और यही नहीं, यह नित्य सीखता भी रहेगा.

मैंने गूगल असिस्टेंट को हिंदी में बोलकर कुछ कमांड दिए – मसलन पूछा – पास में ATM कहाँ है. तो इसने नक्शा पेश कर दिया, दिशानिर्देश के विकल्प सहित. मुलाहिजा फरमाएँ -

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फिर मैंने इसे कॉल करने को कहा, तो यह मेरे फ़ोनबुक में हिंदी में सहेजे गए नाम में से सही सही चुनकर (फ़ोनेटिक रोमन में से भी काम करता है) फोन  लगा दिया!

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यह आपकी गतिविधि लॉग को सुरक्षित रखता है. और भी ढेरों काम कर सकता है. जैसे कि कैलेंडर सेट कर अगले महीने आने वाले किसी जन्मदिवस पर बिना भूले अपने मित्र को बधाई व शुभकामना संदेश देना.


जीवन बहुत आसान हो रहा है. सचमुच बहुत आसान.

बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

आधार से फ़ालतू में डरने वालों, जरा फ़ेसबुक से भी तो डरो!

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छद्मभयभीत!

और, भारतीयों के उनके कुल जनसंख्या का 200% !

... क्योंकि एक एक भारतीय के तीन तीन एफ़बी आई डी हैं, कुछ ब्लॉक, कुछ डीएक्टीवेट तो कुछ छद्म!

गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

वाट्सएप्प के फ़ोटो वीडियो से फ़ोन की मेमोरी भर जाती है, फ़ोन स्लो हो जाता है, काम नहीं करता?

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तो, यह सुविधा आपके लिए है!

वाट्सएप्प के गुडमार्निंग संदेशों से आपके 128 जीबी मेमोरी वाले फ़ोन की मेमोरी तीन दिन में ही भर जाती है?

वाट्सएप्प के संदेशों / वीडियो फारवर्ड से आपके फ़ोन की मेमोरी इतनी भर जाती है कि आपका फ़ोन स्लो हो जाता है, रीएक्ट नहीं करता, खुलता नहीं?

और, आप इन्हें हटा हटा कर परेशान हो जाते हैं?

और, ये रोज की समस्या है?

वाट्सएप्प की सेटिंग में जाकर डिफ़ॉल्ट - स्वचालित डाउनलोड को डिसेबल करने से भी मामला सुलझता हुआ दीखता नहीं?


तो फिर वाट्सएप्प त्यागें और स्नैपचैट या टेलीग्राम अपनाएँ. प्ले स्टोर परस्नैपचैट या टेलीग्राम  सर्च करें व इंस्टाल करें.

इनमें चित्रों, वीडियो संदेश आदि के स्वचालित तरीके से स्वयंमेव मिटते रहने की सुविधा है. आपकी सेटिंग के अनुरूप, या डिफ़ॉल्ट रूप में जैसे ही आपके पास संदेश / चित्र / वीडियो आते हैं, और आप उन्हें देख लेते हैं तो यह निश्चित समय के पश्चात् (यदि आपने सहेजा नहीं है तो) स्वयं ही मिट जाते हैं, और आपके फ़ोन की मेमोरी बनी रहती है पूरी फुल.

मंगलवार, 6 फ़रवरी 2018

व्यंग्य जुगलबंदी : 72 - आपके व्यंग्य का बीमा

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बीमा आग्रह की विषयवस्तु है.

इधर, पकौड़े की आड़ में बेरोजगारी पर बहस फिर से जारी है. भले ही मैंने, एक दशक पहले, शासकीय सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली हो, मेरे पास फ़ेसबुकियाने, ब्लॉगिंग करने और ट्विटरियाने के अलावा और कोई काम नहीं है, यानी मैं भी खालिस बेरोजगार हूँ.

इस भूमिका का लब्बोलुआब यह है कि मुझे भी एक अदद रोजगार पाने का पूरा हक है. इधर, मैं अपनी बेरोजगारी से तंग आ चुका हूँ और इससे पहले कि मैं कोई और कदम उठा लूँ, और चूंकि सरकारी नौकरी छोड़ ही चुका हूँ, सोचता हूँ एक धंधा खोल लूँ. अब चूंकि पकौड़ों का धंधा हर गली चौराहे पर खुल रहा है या खुलने वाला है, इस धंधे में बड़ा रिस्क है. तो रिस्क कवर करने का धंधा क्यों न खोला जाए? बीमा का धंधा. पर, जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा, खेती-किसानी, पकड़ौं के ठेलों का बीमा नहीं – ये सब सरकारों के लिए रहने देना चाहिए, वरना, एक तो सरकारें क्या करेंगीं, और लोगों का सरकारों को गरियाने के टाइमपास का क्या होगा – इसलिए, रचनाकारों का, रचनाओं का बीमा.

रचनाकारों की रचनाओं का बीमा यूँ भी बढ़िया, जबरदस्त आइडिया है. शत-प्रतिशत सफलता की गुंजाइश. वेंचरफंड वाले तो इस आइडियो को सुनकर उछल पड़ेंगे. ढेर सारा कैपिटल यूँ ही हाथ में आ जाएगा. मार्केट में कोई कंपीटीशन ही नहीं है. सारा आकाश हमारा. शुरूआत, व्यंग्यकारों के व्यंग्यों के बीमे से किया जाएगा. इसके लिए एक बीमा कंपनी खोलने का प्लान है. इस कंपनी के लिए कोई सटीक, धाँसू ब्रांड नाम आप सुझा सकें तो आपके आभारी रहेंगे. नाम में, चूंकि मामला व्यंग्य का है तो पंच भी होना चाहिए, सरोकार भी, मार्मिकता भी, पठनीयता, गेयता आदि, आदि भी.

अब, चूंकि बीमा आग्रह की विषयवस्तु है, इसलिए आपसे आग्रह है कि आप अपने व्यंग्य का बीमा हमसे अवश्य लें. प्रीबुकिंग के प्रथम सौ व्यंग्य बीमा को विशेष छूट. आप अपने व्यंग्य का बीमा लेंगे तो इससे आपको बहुत से फायदे होंगे. व्यंग्य बीमा के कुछ नियमित और विशिष्ट फायदे ये डिजाइन किये गये हैं, और इनमें उत्तरोत्तर और भी फायदे नियमित अंतराल पर, बोनस स्वरूप जोड़े जाते रहेंगे –

· बीमे की पॉलिसी की रकम के अनुसार, सोशल मीडिया में आपके व्यंग्य के 20, 25, 50 हजार या और अधिक, लाइक, शेयर और कमेंट आदि की गारंटी.

. विभिन्न पॉलिसी की किस्म के अनुसार, आपके घोर अपठनीय, टाइप्ड किस्म के  व्यंग्य के भी हजार, दस हजार, लाख, करोड़ पाठक जुगाड़ने की गारंटी.

· बीमे की पॉलिसी की रकम के अनुसार वरिष्ठों, नवांकुरों, युवाओं, उभरतेहुओं, जलेसों-प्रलेसों आदि आदि से आपके व्यंग्य की 25, 50, 100 या अधिक समीक्षा की गारंटी.

. आपके व्यंग्य को न्यूनतम आधा दर्जन पुरस्कारों की गारंटी.

· आपके व्यंग्य में अधिकतम मात्रा में, बल्कि हर लाइन, वाक्य और शब्द में पंच, मार्मिकता, गहराई (वही, डार्क ह्यूमर,), सरोकार आदि आदि ढूंढ ढूंढ कर निकालने, पहचानने, छिद्रान्वेषण करने की गारंटी.

· आपके व्यंग्य को अधिकाधिक ई-पत्रिकाओं, प्रिंट पत्रिकाओं, ब्लॉगों, यूट्यूब-फ़ेसबुक-रेडिट-लिंक्डइन-इंस्टाग्राम आदि आदि सभी संभव-असंभव स्थलों में बारंबार प्रकाशित करने-करवाने की गारंटी. आप कहेंगे कि इंस्टाग्राम तो फ़ोटोग्राफ़ी कलाकारी का स्थल है, वहाँ व्यंग्य का क्या काम? तो भइए, आपके लिखे व्यंग्य की स्क्रीनशॉट बनाकर उसकी फ़ोटो टांगने में कोई हर्ज है क्या?

व्यंग्य आजकल खतरे में है. सरोकारी व्यंग्य विलुप्त होते जा रहा है. व्यंग्य में चुटकुलेबाजी घुस गई है. व्यंग्य में वनलाइनर घुस आया है. व्यंग्य में हास्य ने घर कर लिया है. व्यंग्य व्यंग्य न रहा है, कुछ और हो गया है. व्यंग्य जोशी-परसाईं से निकल कर जाने कहाँ चला जा रहा है जहाँ उसकी पहचान ही खत्म होने के कगार पर है. ऐसे में, व्यंग्य की रक्षा के लिए, सुधार के लिए, बचाने के लिए, सही समय पर व्यंग्य बीमा आया है. अन्य विधाओं यथा - कविता, कहानी, उपन्यास, लघुकथा, हाइकु आदि आदि  के लिए भी जल्द ही यह बीमा स्कीम लांच होगी. इसलिए, सभी व्यंग्यकारों को व्यंग्य बीमा अनिवार्य रूप से लेना चाहिए. बीमा आग्रह की विषयवस्तु है.

बुधवार, 31 जनवरी 2018

व्यंग्य जुगलबंदी - बजट

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व्यंज़ल

बजट

गड़बड़ाया मानवीयता का बजट

सर पे चढ़ा राष्ट्रीयता का बजट


चलो चलें किसी और दर, यहाँ

हो गया कम जीवटता का बजट


जहाँ चर्चे थे प्रेम और सौहार्द्र के

बढ़ गया उधर है कटुता का बजट


आज कुछ और होता, यदि होता

उनके कहने में स्पष्टता का बजट


फिक्र की बात नहीं रवि के देश में

बहुत है वहाँ अशिष्टता का बजट

***

यूनिकोड हिंदी में कॉपी-पेस्ट किए जाने योग्य व संपादित किए जाने योग्य पीडीएफ़ फ़ाइल कैसे बनाएँ?

अपडेट - यह आलेख - श्रीदेवी कुमार जी के विकिहाऊ पर प्रकाशित मूल आलेख का हिंदी अनुवाद है. उन्हें धन्यवाद.

यह सामुदायिक मुक्त स्रोत की महिमा है, कि अब यह संभव है. एम एस वर्ड या एडोबी या किसी अन्य प्रोप्राइटरी प्रोग्राम से जब आप अपने यूनिकोड हिंदी फ़ाइल की पीडीएफ बनाते हैं तो बाद में उसमें की सामग्री को निकालना या संपादन आदि संभव नहीं हो पाता है.  

XeTeX नामक टूल से आप यूनिकोड टैक्स्ट वाली फ़ाइलों की पीडीएफ़ बना सकते हैं जिसे बाद में संपादित किया जा सकता है, उसका टैक्स्ट ऐक्सट्रैक्ट किया जा सकता है, कॉपी-पेस्ट आदि किया जा सकता है. यह टूल कमांड लाइन आधारित है, तो इसके लिए एक जीयूआई इंटरफ़ेस बनाया गया है जिसका नाम है Lyx जिससे काम करना आसान हो जाता है. साथ ही Miktex नाम का टूल हिंदी वर्तनी जाँच आदि की सुविधा भी प्रदान करता है. इन सभी को संयुक्त रूप से उपयोग कर आप हिंदी के शानदार, त्रुटि रहित दस्तावेज़ तैयार कर सकते हैं.

आपकी सुविधा के लिए निम्न चरण-दर-चरण ट्यूटोरियल प्रस्तुत है -

भाग 1 - सेटअप (केवल एक बार, प्रारंभ में करना होगा)

1 – इस कड़ी - http://www.lyx.org/ से LyX+Miktex का बंडल डाउनलोड कर इंस्टाल करें. डाउनलोड के लिए वैकल्पिक मिरर साइटों पर भी जा सकते हैं जिसकी लिंक वहाँ उपलब्ध है.

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2 - विंडोज़ इंस्टालर में हिंदी स्पेल चेक इंस्टाल करने के लिए हिंदी कंपोनेंट तथा हिंदी स्पेलचेकर पर सही का निशान अवश्य लगाएँ

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3 – इंस्टालेशन के दौरान Miktex अपडेट पर हाँ करें –

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4 – यहाँ - http://salrc.uchicago.edu/resources/fonts/available/sanskrit/sanskrit2003.shtml से Sanskrit 2003  या और भी अन्य  दूसरे फ़ॉन्ट डाउनलोड कर इंस्टाल करें.


5 - Lyx को चलाएँ, और फ़ाइल मेनू से अथवा  Ctrl+N दबाकर नया दस्तावेज़ बनाएँ –

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6 - शीर्ष मेनू में Document > Settings में जाएँ.

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7 - वहां पर जैसा कि ऊपर के स्क्रीशॉट में दिया है, "Document Class" चुनें फिर "Koma-Script Article" चुनें.

8 - वहीं पर, "Language" चुनें और फिर "Hindi" चुनें -

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9 - फिर, सेटिंग में ही, "Fonts" चुनें. फिर अपने पसंदानुसार ड्रापडाउन मेनू से उपलब्ध विकल्पों में से Roman (Serif), Sans-Serif, या Typewriter (Mono) फ़ॉन्ट चुनें.


10 - फिर,   LaTeX Preamble चुनें. वहाँ देखें कि "\XeTeXgenerateactualtext=1" प्रविष्टि दर्ज है या नहीं. नहीं हो तो यह जोड़ें. इस से बनाई जाने वाली PDF फ़ाइलों में  यूनिकोड देवनागरी फ़ॉन्ट के पूरे ग्लिफ़ कॉपी हो जाते हैं जिससे बाद में टैक्स्ट कॉपी-पेस्ट बिना किसी त्रुटि के किया जा सकता है.

वैकल्पिक रूप से   निम्न प्रविष्टियाँ भी जोड़ें –

· \XeTeXgenerateactualtext=1

· \setmainfont[Script=Devanagari]{Sanskrit2003}

· \setsansfont[Script=Devanagari]{Aparajita}

· \setmonofont[Script=Devanagari]{Mangal}

· \font\dev="Mangal:script=deva" at 12pt\dev

चित्र देखें –

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11 - सेटिंग विंडो में "Numbering & TOC" चुनें. नंबरिंग के स्लाइडर को चित्रानुसार, बाईं ओर खिसकाकर सेट करें.

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इन सेटिंग को डाक्यूमेंट डिफ़ॉल्ट के रूप में सहेजें  (Save as Document Defaults पर क्लिक करें) ताकि हर बार यह सेटिंग न करना पड़े. लागू करें और सेटिंग विंडो बंद करें.


भाग 2 दस्तावेज़ तैयार करना (हर बार, नया दस्तावेज़ बनाते समय करना होगा)


1 -  अब Lyx के मुख्य टैक्स्ट इनपुट विंडो में यूनिकोड देवनागरी सामग्री टाइप करें अथवा किसी अन्य दस्तावेज़ से कॉपी पेस्ट करें और दस्तावेज़ सहेजें. निम्न स्क्रीनशॉट में  इनपुट किया यूनिकोड देवनागरी सामग्री की झलक दिख रही है -

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2 - शीर्षक सेट करने के लिए  टैक्स्ट चुनें और फिर बाएँ ऊपर दिए गए ड्रापडाउन मेनू से टाइटल चुनें

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3 - इसी तरह,  सामग्री के अन्य खंडों को सेट कर सकते हैं. जैसे कि उपशीर्षक -

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4 - लेखक का नाम सेट कर सकते हैं -

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5 - खंड का शीर्षक सेट कर सकते हैं -

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6 - इसी तरह और भी खंडों के शीर्षक सेट करें. अलग अलग सेट किए गए खंड कुछ ऐसे दिखेंगे -

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7 - वैकल्पिक - यदि आप दस्तावेज़ में टेबल शामिल करना चाहें तो इसके लिए  जहाँ आपका कर्सर मौजूद है वहाँ टेबल इंसर्ट करने के लिए मेनू में Insert > Table चुनें और नए चाइल्ड विंडो से आड़ी खड़ी पंक्तियों की संख्या सेट करें.

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8 - वैकल्पिक - यदि आप दस्तावेज़ में कोई चित्र शामिल करना चाहते हैं तो जहाँ आपका कर्सर मौजूद है वहाँ कोई ग्राफ़िक इंसर्ट करने के लिए मेनू में Insert > Graphics चुनें, और फ़ाइल नाम चुनें व आकार के लिए वांछित % आकार चुनें.


9 - जहाँ आपको विषय सूची (Table of Contents) चाहिए वहाँ कर्सर को रखें और Insert > List > TOC > Table of Contents चुनें.

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10 - अब आपका दस्तावेज़ साझा करने के लिए तैयार है. यह PDF के रूप में कैसे दिखेगा इसकी झलक देखने के लिए Ctrl+R  दबाएँ.

11 - आपके पीडीएफ़ फ़ाइल बनाने की प्रगति देखने के लिए या कोई त्रुटि संदेश देखने के लिए View > Messages Pane पर जाएँ.


12 – फ़ाइल > एक्सपोर्ट मेनू से PDF (XeTeX) चुनें, और पीडीएफ फ़ाइल सहेजें.

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हिंदी यूनिकोड सामग्री युक्त, संपादित किए जाने योग्य आपकी पीडीएफ़ फ़ाइल तैयार है. बधाई!

(स्क्रीनशॉट तथा अन्य सामग्री विकिहाऊ - https://www.wikihow.com/index.php?title=Create-a-Searchable-Hindi-PDF-Using-Lyx-with-Xetex से साभार)

मंगलवार, 30 जनवरी 2018

तू डाल डाल तो मैं पात पात...


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क्रिप्टोकरेंसी. आप नहीं भी चाहेंगे तो भी जाने अनजाने यह आपके कंप्यूटर पर, आपके मोबाइल पर, और आपके पास के यथा-संभव समस्त कंप्यूटिंग उपकरणों पर मौजूद रह सकता है. मगर, आपको लखपति, करोड़पति बनाने नहीं, बल्कि आपके कंप्यूटिंग उपकरण के पॉवर की चोरी कर, हैकरों के लिए क्रिप्टोकरेंसी छापने के लिए.

अब, ऐसी चोरी को आप कैसे पकड़ पाएंगे भला!

बुधवार, 17 जनवरी 2018

लीजिए, पेश है - स्मार्ट चड्ढी

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और यह कोई केवल बच्चों या बूढ़ों के लिए नहीं है, जिसमें एब्जार्वेंट पैड लगा हो ताकि अप्रिय स्थिति का सामना न करना पड़े.

अब चूंकि शुरुआत हो ही चुकी है, मैं चाहूँगा कि मेरी एक अदद स्मार्ट चड्ढी में न्यूनतम, निम्न  लिखित सुविधाएँ तो हों, नहीं तो वो काहे की स्मार्ट!

  • चड्ढी आपको पहले से यह बता सकने में सक्षम हो कि आप अगले दस मिनट में पादने वाले हैं, पादने के आवाज का डेसीबल 45 रहेगा, और  यह कि तब तक आप कोई सुरक्षित स्थान तलाश लें ताकि किसी घोर अप्रिय स्थिति का सामना न करना पड़े.
  • अगले दस मिनट में पादने वाले हैं का प्रेडिक्शन शत प्रतिशत सही होना चाहिए, फ़ेल सेफ़ की कोई गुंजाइशन नहीं होना चाहिए.
  • केवल प्रेडिक्शन से काम नहीं बनेगा, स्मार्ट चड्ढी यह भी बता पाने में उतना ही स्मार्ट होना चाहिए कि एक से लेकर 10 के स्केल में आपकी पादी गई गैस का बदबू का स्तर क्या कैसा होगा. बेहतर होगा कि स्मार्ट चड्ढी में अंतर्निर्मित फ़िल्टर व कैमिकल लगे हों  और नॉइस कैंसलिंग सिस्टम लगे हों जिससे कि बदबू खत्म कर उसमें खुशबू डाली जा सके और पाद के आवाज का लेवल न्यूनतम किया जा सके. बेहतर यह होगा कि पाद की आवाज के साथ शहनाई या बांसुरी की आवाज को मिलाकर कोई फ़्यूज़न संगीत की रचना कर सकने में सक्षम हो तो सारा अनुभव खुशबूदार, खुशनुमा, संगीतमय भी हो सकता है.
  • आपकी स्मार्ट चड्ढी यह भी बता सकने में सक्षम होनी चाहिए कि जब आप लांग ड्राइव पर जा रहे हों तो यह आपको पहले से आगाह कर दे कि भइए, आने वाले 50 मील दूर दूर तक कोई ढंग का टायलेट नहीं है, अभी से अपना ब्लैडर खाली कर ले, या ज्यादा बीयर और थम्प्सअप के कैन खाली नहीं कर, नहीं तो किसी रोड साइड स्थल पर फारिग होने की कोशिश करनी होगी जिसे पूरी तरह से  असफल करने के प्रयास ओडीएफ़ वाले कार्यकर्ता और सीटी बजाने वाले गुरुजी लोग (भारतीय संदर्भ में पढ़ें) कर सकते हैं.
  • इस स्मार्ट चड्ढी की सबसे बड़ी स्मार्ट खासियत यह होनी चाहिए कि इसे धोने की जरूरत न हो. सेल्फ क्लीनिंग हो. इतिहास गवाह है, और इस बात पर बहुत बवाल मच सकता है, मगर यह सही है कि बहुत से कुंवारे मर्दों ने, केवल चड्ढी धोने के लिए ही शादियाँ कीं. मर्दों को चड्ढी न पहनना पसंद है, मगर चड्ढी धोना नहीं.
  • स्त्रियों के लिए, बकौल ट्विंकल खन्ना - इसमें स्मार्ट सेंसर लगे हों जो पहले से यह बताने में सक्षम हों कि सेनिटरी पैड ओवरफ्लो होने जा रहा है या नहीं. मगर बात इससे भी आगे हो तो बेहतर. पेडलैस फुल्ली ड्राई सिस्टम हो जो एनवायरनमेंटल फ्रेंडली भी हो - यानी महीनों के उन दिनों की कोई चिंता फिकर न हो - कब आया कब गया पता ही न चले - खासकर पुरातन पंथी सासु माताओं की सोच स्मार्ट बनाने में बेहद उपयोगी.

बुधवार, 3 जनवरी 2018

पुरुषों (और, पुरुष मानसिकता वालों ) के लिए एक अल्टीमेट गॅजेट

बस, इसी की तो जरूरत थी!

भारतीय बाजारों में यह किसी भी अन्य सर्वाधिक विक्रय/पसंदीदा उपकरणों से अधिक बिकेगा. शर्तिया.

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टेबल टॉप, पर्सनल व्हिस्की, रम, ब्रांडी, बीयर बनाने की मशीन. तीन घंटे में पसंदीदा टेस्ट का लिकर तैयार.

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चलें, खरीदने?

ल्यौ इब 8के टीभी!


लगता है कि भविष्य मेंं, उच्च तकनीकी की टीवी देखने के लिए हमें अपनी आंखों को कम्पेटिबल बनाने के लिए उसमें एक अदद चिप लगानी होगी! 🤔