शनिवार, 14 अक्तूबर 2017

आ गया !! किंडल व किंडल ऐप्प में हिंदी ईबुक का आनंद सुनकर लें.

किताबें पढ़ने का आनंद अब आप अपनी आँखों से नहीं, कानों से लें. आँखों को जरा आराम दें.

सभी किताबें तो नहीं, मगर किंडल पर उपलब्ध अधिकांश हिंदी किताबों का आनंद अब आप सुनकर ले सकते हैं.

किंडल स्टोर में जब आप जाते हैं तो कौन सी किताब का आनंद सुनकर लिया जा सकता है यह वहाँ एबाउट किंडल एडीशन में दिया रहता है – स्क्रीन रीडर सपोर्टेड.

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यदि किताब यूनिकोड वर्ड फ़ाइल में प्रकाशित हुई होती है (पीडीएफ संस्करण नहीं) तो हमें यह सुविधा मिलती है.

किंडल के कुछ खास उपकरणों में यह सुविधा आपको अंतर्निर्मित मिलती है. एंड्रायड और एप्पल उपकरणों पर किंडल ऐप्प के जरिए किताब का आनंद सुनकर लेने के लिए कुछ जुगाड़ लगाने होंगे.

किंडल ऐप्प में (एंड्रायड में) हिंदी किताबों का आनंद सुनकर लेने के लिए निम्न चरण आजमाएँ.

ध्यान दें -1 – आपके उपकरण में स्थापित एंड्रायड संस्करण अथवा मैन्यूफैक्चरर के यूआई के अनुसार ये भिन्न हो सकते हैं, मगर आमतौर पर लगभग समान होते हैं, थोड़ा बहुत मामूली परिवर्तन हो सकता है.

2 – एंड्रायड में किंडल बुक सुनने के लिए टाक बैक को चालू करना होता है. टाक बैक एक बार चालू होने के बाद इसे बंद करना थोड़ा सा जटिल होता है, क्योंकि इसे दृष्टिबाधित लोगों के उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है. अतः कृपया धैर्य रखें और, टाक बैक चालू करते समय जैसा विवरण में बताया जाता है कि इसे कैसे बंद करना है, वह चरण पहले ध्यान से पढ़ लें और कहीं नोट कर के रख लें. किसी किसी उपकरण में इसे चालू या बंद करने के लिए मोबाइल उपकरण का पासवर्ड/सीक्यूरिटी चेक पिन/पैटर्न आदि फिर से मांगा जाता है अतः वह भी याद रखें.

पहला चरण – यदि आपने अपने मोबाइल की भाषा हिंदी कर रखी है तो इस चरण को आप छोड़ सकते हैं.

सबसे पहले सेटिंग में जाएं और लैंगवेज और इनपुट में जाएँ

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फिर स्पीच के अंतर्गत टैक्स्ट टू स्पीच ऑप्शन्स में टैप करें -

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फिर गूगल टैक्स्ट टू स्पीच को चुनें और उसके सामने गीयर बटन पर टैप करें –

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अब लैंगुएज में हिंदी चुनें और इंस्टाल वाइस डाटा में टैप कर हिंदी डेटा चुनें

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इंस्टाल वाइस डेटा 19 मेबा की फाइल होगी जो आफलाइन स्पीच के लिए उपयोगी है

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अब आपके मोबाइल उपकरण पर आवश्यक हिंदी फाइलें स्थापित हो चुकी हैं जिससे कि हिंदी किताबों का आनंद हिंदी में सुनकर लिया जा सकता है.

दूसरा चरण – टाकबैक सुविधा द्वारा किंडल ऐप्प पर हिंदी किताबें सुनना

सेटिंग में जाकर एक्सेसिबिलिटी पर जाएँ (नए संस्करणों में उपलब्ध). पुराने संस्करणों में कुछ और अतिरिक्त चरण हो सकते हैं (जैसे कि सेमसुंग नोट 4 में - सेटिंग्स > पर्सनलाइजेशन > एक्सेसिबिलिटी > विजन > टाकबैक)

वहाँ टाकबैक को चालू करें.

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ऊपर - सेमसुंग एज 7 पर टाकबैक सेवा एंड्रायड 7


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ऊपर - मोटो एम पर टाकबैक सेवा एंड्रायड 7

ध्यान दें – टाकबैक चालू हो जाने के बाद स्क्रॉल आदि करने के लिए दो उंगली का उपयोग करें. एक उंगली से स्क्रॉल नहीं होगा. यह सुविधा दृष्टिबाधितों के आसान उपयोग हेतु विशेष तौर पर की गई है. अतः ध्यान रखें, और टाकबैक चालू करने से पहले उसे बंद करने की विधि उसी समय बताई जाती है (जैसे कि मोटो एम में होम बटन पर तीन बार टैप करना) उसे भी याद रखें या नोट कर रखें. वैसे सामान्य तरीके से जिस तरह से टाकबैक को चालू किया गया है उसी तरह से सेटिंग में जाकर ऐक्सेसिबिलिटी में जाकर टाकबैक को बंद किया जा सकता है. परंतु नेविगेशन चूंकि दृष्टिबाधितों के अनुरूप चालू हो गया रहता है अतः इसमें समस्या आती है.

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हो गया. बधाईयाँ. अब आप अपना किंडल ऐप्प चालू करें, किताब खोलें और किताब का आनंद सुनकर लें.

सोशल मीडिया की दीवाली - हैप्पी या शुभ?

हैप्पी दीपावली

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बनाम

शुभ दीपावली -

अब, जब आदमी का खाना-पीना-सोना यानी लगभग सबकुछ सोशल मीडिया के इर्दगिर्द हो रहा है तो फिर उसकी ईद-क्रिसमस-होली-दीवाली भी तो सोशल मीडिया पर ही होगी. ज्यादा पुरानी बात नहीं है, जब सोशल मीडिया नामक दानव ने व्यक्ति के जीवन में प्रवेश नहीं किया था, तब त्यौहार सचमुच त्यौहार होते थे और दीवाली सचमुच की दीवाली. न पर्यावरण व त्यौहारी ढकोसलों की चिंता परवाह और न किसी किस्म की गिल्ट फ़ीलिंग. दीवाली पर हैसियत अनुसार जी भर के पटाखे फ़ोड़ते थे और रौशनी करते थे. होली पर जी भर के बाल्टी भर भर के रंग उंडेलते थे और टंकियों भर रंग खेलते थे. और बकरीद पर... खैर, छोड़िए. अभी तो आप दीवाली पर चार पटाखे ज्यादा क्या फोड़ लेंगे, यदि रात दस बजे के बाद पटाखे फोड़ने का कुत्सित किस्म का प्रयास कर लेंगे और रौशनी की चार लड़ी अधिक लगा लेंगे, वह भी चीनी, तो पड़ोसी आपको यूं देखेंगे जैसे कि आप निरे जाहिल गंवार हैं और आपको ध्वनि प्रदूषण और धरती के पर्यावरण की, और राष्ट्रवाद की कोई चिंता ही नहीं है. आप उसकी नजर में मानवता के घोर दुश्मन नजर आएंगे जो प्रकृति को नष्ट करने के प्रयास में लगा है, और समय मिलते ही पहला काम वो यह करेगा - अपने इस अनुभव को फ़ोटोग्राफ और सेल्फ़ी के सुबूतों के साथ सोशल मीडिया में पोस्ट करेगा, आपको लानतें भेजेगा और सोशल मीडिया में इस तरह बदनाम करेगा. इसी वजह से अब दीवाली में अच्छी खासी संख्या में रस्सी बम बिना फूटे रह जाते हैं और ढेरों चीनी लड़ियाँ बिना लटकी रह जाती हैं अपने भाग्य को कोसते. क्योंकि होता यह है कि आप त्यौहारी उत्साह से या बच्चे की जिद से इन्हें खरीद कर ले तो आते हैं, मगर लोग क्या कहेंगे, कहीं सोशल मीडिया में टंग तो नहीं जाएंगे, यह सोचकर उपयोग नहीं कर पाते हैं. ऊपर से, कोढ़ में खाज की तरह न्यायालय भी अपने सिर पर आ बैठा है - वो हरित हो या सर्वोच्च - कहता है, बेटा, वैसे बहुत दीवाली मना लिया, अब ऐसे मना!

दीवाली ही क्या, दिया गया कोई भी त्यौहार ले लीजिये, उस दौरान यदि आप सोशल मीडिया में थोड़ी देर घूम फिर आएं, मन में अवसाद लेकर चले आएंगे और, अपने आपको और अपने पुरखों को कोसने लगेंगे कि पर्यावरण की चिंता, धरती की चिंता किए बगैर, मानवता की चिंता किए बगैर ऐसे-ऐसे वाहियात त्यौहार मनाने की परंपरा क्यों और कैसे चली आ रही है और इनमें नित नई फूहड़ताएँ क्यों घुसी चली आ रही हैं. होली में पानी बचाओ लकड़ी बचाओ कैंपेन चलेगा तो बकरीद पर बकरी बचाओ. गणपति-दुर्गापूजा पर ध्वनि प्रदूषण और पर्यावरण-मित्र मूर्तियों की बातें चलेंगी तो दीवाली पर पटाखे नहीं फोड़ने और चीनी झालरों के बहिष्कार के कैंपेन चलेंगे. अब जरा बताइए, बिना पटाखों के कोई दीवाली, दीवाली हो सकती है भला? और, यदि 50 रुपए में घर में बढ़िया रौशनी हो रही हो तो आदमी 500 रुपए क्यों खर्च करे? झालर चीनी हो तो हुआ करे, बच तो अपना धन रहा है – फ़िजूल खर्ची कर धन की देवी लक्ष्मी का अपमान वह भी दीवाली में, लक्ष्मीपूजन के समय! क्या यह चलेगा? बिलकुल नहीं!


सोशल मीडिया और त्यौहार

एक सरसरी निगाह से देखें तो सोशल मीडिया का स्वरूप त्यौहार विरोधी दिखाई देता है. किसी त्यौहार के पक्ष में चार लोग कुछ कहते हैं तो विपक्ष में चालीस लोग अपने तर्क-कुतर्क समेत चले आते हैं. त्यौहारों पर धीर-गंभीर और शोधात्मक शास्त्रोक्त बातें करने वाले चार होते हैं तो हवाई खिल्ली उड़ाने वाले चालीस.

मगर, वास्तविकता तो यह है कि सोशल मीडिया जैसा त्यौहार-बाज प्लेटफ़ॉर्म और कोई नहीं है. याद कीजिए अपने पिछले जन्मदिन को. फ़ेसबुक पर, व्हाट्सएप्प पर, लाइन और टेलीग्राम पर आपको कितने सैकड़ा-हजार बधाईयां मिलीं? बधाइयों का यह सिलसिला बाकायदा हफ़्ते भर पहले से जो चालू होता है तो वो दो हफ़्ते तक बिलेटेड चलता रहता है. इसके उलट, कोई दशक भर पहले के अपने जन्मदिन की याद कर लें. आंकड़ा दर्जन भर में ही सिमट गया होगा, और बहुत संभव है, दूसरों की तो दूर, आप स्वयं वो दिन भूल गए होंगे. होली दीवाली पर भी यही हाल होता है. दीवाली की इतनी बधाईयाँ, हर संभव ऐप्प के जरिए आप तक पहुँचती हैं कि यदि आप वाकई इन बधाइयों में लिखी इबारतों को पढ़ने बैठ जाएँ, मल्टीमीडिया संदेशों को देखने सुनने बैठ जाएं, तो अगली दीवाली तक ये किसी सूरत खत्म न हों!

फिर, सोशल मीडिया में तो हर रोज दीवाली मनती है. देश दुनिया में चलता हुआ कोई भी एक नामालूम सा विषय उठा लिया जाता है और फिर दो-तरफ़ा पटाखे फ़ोड़ने का दौर चल निकलता है. कोई समर्थन के रस्सी बम दागता है तो कोई विरोधों की अंतहीन फुलझड़ियाँ छेड़ता है. कोई तटस्थता के अनार चलाता है तो कोई तीसरा ही चौथे की इस तटस्थता को संज्ञेय अपराध घोषित करता हुआ रॉकेट चलाता है कि भाई, ऐसे नहीं चलेगा. गोया आपको कोई न कोई किनारा पकड़ना ही होगा. त्यौहार तो मनाना ही होगा. यदि आप सोशल मीडिया में हैं, तो फुलझड़ी हरी जलाओ या गेरुआ, जलानी तो पड़ेगी!

सोशल मीडिया की त्यौहारी तैयारियाँ

दीपावली का त्यौहार हर्षोल्लास से मनाने के लिए लोग बहुत पहले से तैयारी करते हैं. दीपावली में नए कपड़े, नए जूते पहनने का चलन है. सोशल मीडिया ने आदमी को चहुँओर से अपग्रेड कर दिया है. अब दीवाली पर नई डीपी, नया स्टेटस अपडेट और नया बैकग्राउंड फ़ोटो लगाने का प्रचलन है. नए कपड़ों व जूतों से ज्यादा जरूरी ये हो गए हैं. माल भले ही कॉपी-पेस्ट हो, मगर दिखना विशिष्ट, अलग चाहिए. इसीलिए वे पहले से ही ऐसी चीजों को ढूंढना व कॉपी कर सहेजना प्रारंभ कर देते हैं. पहले लोग दीवाली में अपने घरों की साफ सफाई किया करते थे. घर में पड़े कूड़ा कबाड़ा हटाते थे, जाले साफ करते थे और घरों की दीवारों, दरवाजे खिड़कियों में रंग रोगन करते थे. आजकल लोग दीवाली में अपने फ्रेंड लिस्ट धोते चमकाते हैं. मित्र, प्रशंसक, फ़ॉलोअर और अनुसरणकर्ताओं को ब्लॉक-अनब्लॉक करते हैं. ग्रुप की सदस्यता की साफ सफाई करते हैं, अपने सोशल प्लेटफ़ॉर्म के वाल सजाते संवारते हैं. उनकी थीमें बदलते हैं. दीपावली के वार्षिक घरेलू साफ-सफाई की अपेक्षा सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की साफ सफाई कहीं ज्यादा श्रमसाध्य और तकलीफ़देह है. ऊपर से, कोई एक प्लेटफ़ॉर्म होता तो भी कोई बात थी. यहाँ तो फ़ेसबुक भी है तो व्हाट्सएप्प भी, लिंक्डइन भी है तो इंस्टाग्राम भी. और अब तो टिंडर भी आ गया है!

जिस तरह पटाखों की दुकानें सजती हैं, कुछ अरसा पहले तक, दीपावली पर ग्रीटिंग कार्डों की दुकानें सजा करती थीं. आर्चीज़ और वकील जैसे नामी ब्रांडों से लेकर स्थानीय प्रिंटर में प्रिंट किए या प्रीमियम हैंड-मेड आदि किस्म किस्म के दीपावली के बधाई कार्ड मिलते थे. चिप व बैटरी लगे हुए म्यूजिकल बधाई कार्ड भी अवतरित हो चुके थे. हर रेंज के, हर जेब के मुताबिक - व्यक्तिगत के लिए खुदरे में विविध पसंदानुसार और व्यावसायिक उपयोग के लिए थोक में एक जैसे छपे हुए मिलते थे. हर आम व खास अपने हर आम व खास को दीपावली के ग्रीटिंग कार्ड भेजता था. सोशल मीडिया ने छपे ग्रीटिंग कार्डों का धंधा बल्कि उसका कंसेप्ट ही चौपट कर दिया – जैसे वाट्सएप्प ने पारंपरिक एसएमएस का किया है. स्वभाव से आरामतलब और कृपण आदमी ने भौतिक ग्रीटिंग कार्डों का शानदार विकल्प सोशल मीडिया में ई-कार्डों के रूप में देख लिया. हींग लगे न फिटकरी के तर्ज पर पिक्चर-पोस्टकार्ड, एनीमेटेड जिफ और ऑडियो-वीडियो युक्त मीडिया के जरिए जब मुफ़्त में सोशल मीडिया में बधाईयों का आदान प्रदान शानदार तरीके से हो तो आदमी धन क्यों खर्च करे? वह भी ऐसे बधाई कार्डों पर जिसे एक बार देख लेने के बाद आमतौर पर कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है. यूँ, हजार बार फारवर्ड मारे गए, सुंदर सुंदर मीडिया फोटो-वीडियो फ़ाइलें जिन्हें ई-कार्ड या इलैक्ट्रॉनिक ग्रीटिंग कार्ड कह लें, जो हम-आप एक दूसरे को भेजते हैं वो भी एक तरह से ई-कचरा ही हैं.

जो भी हो, सोशल मीडिया ने व्यक्ति की उत्सवधर्मिता में नए आयाम तो जोड़े ही हैं, और इनमें से बहुत से मानवता के लिए शुभकारक भी हैं. तो आइए, इस दफ़ा केवल सोशल मीडिया में ही दीपावली मनाएँ. वर्चुअल दीपावली. ई-ग्रीटिंग करें, मल्टीमीडिया फ्लैश की फुलझड़ियाँ जलाएँ और ईपटाखे फ़ोड़ें और बिजली बचाने के लिए अपने घरों की दीवालों पर चीनी हो या देसी किसी भी किस्म की लड़ियाँ लगाने के बजाए अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर जगमग करती फ्लैश एनीमेशन की वर्चुअल लड़ियाँ लगाएँ. आपको दीपावली की ढेरों सोशल मीडिया कामनाएँ!

(कादंबिनी अक्तूबर 2017 दीपावली विशेषांक में पूर्व-प्रकाशित)

गुरुवार, 12 अक्तूबर 2017

तकनीकी विकास तो, सचमुच पगला गया है!

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राजनीतिक विकास का पागलपन देखना या दिखाई देना सापेक्षिक है. राजनीतिक विकास अर्धपागलों को पागल लग सकता है, पागलों को सामान्य और सामान्य को अर्धपागल या ठीक इनके उलट! मगर यकीनी तौर पर एक बात तो कही ही जा सकती है - वह यह है कि तकनीकी विकास तो, सचमुच पागल हो गया है. सभी के लिए. पागलों के लिए भी, अर्धपागलों के लिए भी और सामान्य के लिए भी.

हमारे जैसे रचनाकारों को ही ले लीजिए. अच्छा भला हम लोग फ़ाउंटेन पेन से, डायरी नुमा कॉपियों में पांडुलिपि में लिखते थे, और जैसे तैसे जुगाड़ आदि भिड़ा कर और यदि जेंडर-न्यूट्रल की बात न करें तो अपनी रचना को संवारने के बजाए स्वयं को संवारकर, लीप-पोतकर, देख दिखा कर, मठाधीशों की लल्लो-चप्पो कर कहीं छप-छपा जाते थे और मर-खप जाते थे. मगर भला हो इस तकनीकी विकास का. फ़ाउंटेन पेन और डायरी का तो खैर, इन्तकाल होना ही था, किंडलादि के इस जमाने में, छपने-छपाने की प्रिंट की पत्रिकाओं और किताबों के दिन भी कब्र में लटके हुए हैं – और इधर सारा माल इंटरनेट पर जम कर इन्स्टैंट लिखा जा रहा है, जम कर पढ़ा जा रहा है और जम कर साझा किया जा रहा है और वायरल हो रहा है. हर आदमी लिख रहा है और हर आदमी पढ़ रहा है. रचनाकार-पाठक की महीन रेखा इस तकनीकी विकास के पागलपन ने खत्म सी कर दी है. हिंदी-तकनीक की दुनिया में इस बीच तकनीकी विकास ने इतनी पागल-पन भरी दौड़ मचाई कि लोग शुषा-कृतिदेव फ़ॉन्ट अपनाते, इससे पहले यूनिकोड कूद पड़ा और लेखक- ब्लॉग-फ़ेसबुक के पागलपन में उलझ कर रह गया.

तकनीकी विकास का पागलपन आदमी को कहीं का नहीं रख छोड़ेगा – मानव को पूरी तरह समाप्त भले न कर पाए, मगर पागल बना कर ही छोड़ेगा. और मैं ये बात, कंप्यूटरों-मोबाइलों में आ रही नई कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बारे में नहीं कह रहा. मैं तो अपने घर में लगे, नए, स्मार्ट-बल्ब को जान समझ कर, अपना कर और अंततः फेंक कर यह बात कर रहा हूँ. पिछली ऑनलाइन खरीदी ऑफर में, जाने किस पागलपन में मैंने एक अदद स्मार्ट-बल्ब खरीद लिया और उसे अपने शयनकक्ष में लगा लिया. यूँ, किसी भी किस्म की छूट और खरीदी ऑफर, आदमी को पागल बनाने के लिए ही होते हैं. तो, बात शयनकक्ष में स्मार्टबल्ब के इंप्लांट होने की थी.  शयनकक्ष में जहाँ दो दशक पहले तक मिट्टी तेल की डिबरी बमुश्किल जला करती थी, वहाँ तकनीकी विकास के पागलपन की वजह से मामला टंगस्टन फ़िलामेंट लैंप से चलकर ट्यूबलाइट और सीएफएल से होता हुआ, अब, स्मार्टबल्ब तक आ गया है.

मेरे शयनकक्ष का यह स्मार्टबल्ब 1 करोड़ 60 लाख रंगों में रौशनी फेंक सकता है – जिनको पहचानने की कोशिश में आप खुद पागल हो सकते हैं. भले ही मुझे गिनती सौ तक नहीं आती हो, मेरा मैथ्स कमजोर रहा हो, मैं आर्ट का ग्रेस-मार्क्स वाला स्टूडेंट रहा हूँ, और बड़ी बात यह हो कि औसत (आम नहीं लिखा है, कृपया ध्यान दें,) आदमी की आंखें सैकड़ा-हजार रंग को ही विभाजित रूप में पहचान पाने की क्षमता रखती हों, पर उससे क्या? न केवल यह स्मार्टबल्ब करोड़ों रंगों की रौशनी फेंक सकता है जो केवल स्मार्ट लैंसों व उपकरणों को ही समझ आ सकता है, बल्कि यह मौसम, समय और आपके मूड के मुताबिक भी रौशनी फेंक सकता है. जैसे कि रात को 11 बजे आपके सोते समय यह ऐसी रौशनी फेंकता है जिससे आपको और अधिक गहरी , रीलैक्सिंग नींद आती है और फलस्वरूप जब आप सुबह उठते हैं तो अपेक्षाकृत अधिक तरोताज़ा, सुखद और प्रसन्न महसूस करते हैं. इसी के लालच में मैंने यह बल्ब खरीदकर अपने शयनकक्ष में लगाया था.

इस स्मार्टबल्ब की सहायता से मैं कोई सप्ताह भर की भली नींद ले भी नहीं पाया था, कि एक अच्छी भली रूमानी रात को दो बजे मेरी नींद खुल गई. मेरे स्मार्टबल्ब में से विचित्र तरीके के, अजीबोगरीब रंगों की रौशनी निकल रही थी, जिसने मेरी शांति भरी नींद में खलल डाल दिया था, और मैं जाग गया था. पसीने से तरबतर. जैसे कि कोई बुरा ख्वाब देख लिया हो. मगर बात कुछ दूसरी थी. स्मार्टबल्ब से निकल रही अजीबोग़रीब रौशनी मुझे पागल बनाए दे रही थी. मैंने तत्काल उसे बंद करने के लिए अपने मोबाइल में स्थापित ऐप्प को खोलना चाहा, तो देखा कि उसमें तो पहले ही नोटिफ़िकेशन आ रहा था. नोटिफ़िकेशन में किसी हैकर का संदेश बोल्ड अक्षरों में आ रहा था – आपका स्मार्टबल्ब हैक कर लिया गया है. अब इस स्मार्टबल्ब में निकलने वाली रौशनी आपको पंद्रह मिनट के भीतर पागल बना देगी, अतः जल्द से जल्द इससे छुटकारा पाने के लिए तुरंत ही इस खाता- #$@%%^& नंबर पर $ #@$$% बिटक्वाइन जमा करें. अब आप बिटक्वाइन क्या है यह मत पूछिए. तकनीकी विकास के पागलपन की पराकाष्ठा है यह. न रूपया न पैसा न सिक्का न नोट और है यह बड़ी रकम. बस गिनते रहिए. और दूसरी मुद्राओं के उलट यह गिरता नहीं, बस उठता जाता है उठता जाता है – शायद किसी दिन फटने के लिए!

तो, तकनीकी विकास के पागलपन ने मुझे ही एक अच्छी भली अर्धरात्रि को पागल बना दिया था. मैंने अपने इस पागलपन और जुनून में शयनकक्ष के कोने में रखा डंडा उठाया जो पत्नीजी छिपकलियों और कॉकरोचों को भगाने के लिए रखा करती हैं. पता नहीं, तकनीकी विकास छिपकलियों और कॉकरोचों को भगाने के मामलों में पीछे क्यों और कहाँ रह गया जो अभी भी डंडों का सहारा लेना होता है – शायद पुरुषवादी अनुसंधानकर्ताओं की साजिशें हों -स्त्रियों को अभी भी वश में रखने हेतु, बहरहाल अभी तो यह मेरे लिए फायदेमंद ही रही. मैंने उस डंडे से अपने स्मार्टबल्ब को दे मारा. मगर ये क्या? वो एंटी शैटर, एंटी डिस्ट्रक्टिव मटीरियल का बना था, शैटरप्रूफ़ था, डस्ट और वाटरप्रूफ़ था, लाइफ़टाइम गारंटी वाला था. उसे न टूटना था, न टूटा और वह मुझे नीम पागल बनाने वाली रौशनी फेंके जा रहा था, जिसकी फ्रीक्वेंसी और बढ़ती जा रही थी.

आप कहेंगे कि मैं उस स्मार्टबल्ब का स्विच क्यों ऑफ नहीं कर रहा था? तो, बता दूं कि अभी मैं पूरा पागल नहीं हुआ था, और मुझे पता था कि यह स्मार्टबल्ब 72 घंटे का पॉवरकट तो झेल ही सकता था, यह सेल्फ़पावर्ड भी था – दिन में वातावरण से प्राप्त रौशनी से सेल्फ चार्ज भी हो जाता था. तो इससे पहले कि मुझ पर पूरी तरह से पागलपन सवार होता, मैंने उस स्मार्टबल्ब को कंबल में लपेटा, सॉकेट से बाहर निकाला और कूड़ेदान में डालकर ढक्कन बंद कर दिया.

प्लास्टिक के अल्प-पारदर्शी कूड़ेदान के भीतर से उस स्मार्टबल्ब की पगलाई रौशनी धीमी-धीमी बाहर आ रही थी और अब वो बड़ी भली और अच्छी लग रही थी – सम्मोहक, मेस्मेराइजिंग, हिप्नोटिक टाइप. मैंने जल्द ही अपनी नजरें फेर लीं, कूड़ेदान को घर से बाहर रखा, और वापस शयनकक्ष में आकर सोने की असफल कोशिश करने लगा. तकनीकी विकास के पागलपन की तो #@$%&*%#@$!

तकनीकी विकास, आपके मुताबिक, कितना पागल है पार्टनर?

बुधवार, 11 अक्तूबर 2017

अमेजन किंडल पर अब किंडल-ईबुक के रूप में प्रकाशित करें अपनी हिंदी किताबें

नीचे का स्क्रीनशॉट देखें -

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किंडल डायरेक्ट पब्लिशिंग सुविधा के तहत, किंडल पर अब आप हिंदी किताबें किंडल ईबुक फ़ॉर्मेट में प्रकाशित कर सकते हैं.

किंडल ईबुक फ़ॉर्मेट में किताब प्रकाशित करने पर एक अतिरिक्त सुविधा यह मिलती है कि किंडल उपकरणों पर किताब जैसे पढ़ सकते हैं तथा लाखों मोबाइल उपकरणों पर किंडल ईबुक ऐप्प के जरिए भी किताब रूप में पढ़ सकते हैं, हालांकि किंडल उपकरणों जैसा किताबी आनंद थोड़ा कम मिलता है.

सारी प्रक्रिया बेहद आसान है.

निम्न चरण हैं -

1 - अमेजन किंडल डायरेक्ट पब्लिशिंग में खाता खोलें - वैसे अमेजन का कोई भी खाता काम करेगा. और, आज कौन होगा, जिसके पास अमेजन का खाता नहीं होगा?

2 - अपनी किताब को यूनिकोड हिंदी में एमएस वर्ड डाक्यूमेंट फ़ॉर्मेट में तैयार कर लें.

3 - चाहें तो किताब का कवर तैयार कर लें. और न्यूनतम 1000 पिक्सेल लंबाई का चित्र जेपीईजी फ़ॉर्मेट में सहेज लें.

4 - अब किंडल डायरेक्ट पब्लिशिंग में जाएं और अपनी किताब व कवर वहाँ चढ़ा दें. सब कुछ ऑन-स्क्रीन होता है, चरण - दर - चरण. अपनी किताब की कीमत आदि तय कर दें, और हो गया.

5 - एकाध दिन में आपकी किताब रीव्यू होकर ऑनलाइन हो जाएगी.

बधाईयाँ.


जब तक आपकी स्वयं की किताब किंडल पर आए, तब तक मेरी निम्न 3 (और भी जल्द आएंगी) किताबों को किंडल / किंडल ऐप्प पर पढ़ें . यदि आपके पास किंडल अनलिमिटेड एकांउट है तो बिलकुल मुफ़्त. किताबों की लिंक है -

व्यंग्य जुगलबंदी - कीमत 65 रुपए केवल
https://www.amazon.in/dp/B0769DT47M
प्रेरक कहानियाँ  - कीमत 65 रुपए केवल
https://www.amazon.in/dp/B076B38RQM

लिनक्स गाइड - कीमत 135 रुपए केवल

https://www.amazon.in/dp/B0765SJPL7

सोमवार, 9 अक्तूबर 2017

अपने कंप्यूटिंग उपकरणों में देवनागरी में विविध प्रकार से, धड़ल्ले से कैसे लिखें?

आप चाहे हिंदी के - खांटी, उत्साही, युवा, बुजुर्ग, वरिष्ठ, पुरस्कृत (भले ही लौटा दिया हो), चर्चित इत्यादि-इत्यादि जिस भी किस्म के भी पाठक-लेखक हों, एक बात मैं दावे के साथ कह सकता हूँ. आपमें से अधिकांश के पास मौजूद आपके कंप्यूटिंग उपकरणों – यथा स्मार्टफ़ोन अथवा टैबलेट-लैपटॉप-डेस्कटॉप का इंटरफ़ेस हिंदी में तो शर्तिया नहीं होगा. अंग्रेज़ी चमचमाती हुई चहकती हुई दिखती होगी. जबकि हिंदी वहीं, पृष्ठभूमि में दबी कुचली पड़ी होगी, जिसे सेटिंग में जाकर केवल एक टैप या क्लिक के बल पर सक्षम कर ससम्मान, सगर्व सामने लाया जा सकता है. पर, नहीं, इतना कष्ट कौन करे, किसके लिए करे! जब डिफ़ॉल्ट अंग्रेज़ी इंटरफ़ेस पर बढ़िया काम हो रहा है तो हिंदी इंटरफ़ेस कौन सामने लाए, और हिंदी के बहुत से नव-युवा पाठकों-लेखकों को तो, हो सकता है हिंदी का इंटरफ़ेस ही समझ न आए! कोढ़ में खाज ये कि हममें से बहुतों के कंप्यूटिंग उपकरणों में तो हिंदी टाइप करने की सुविधा भी स्थापित या सक्षम नहीं होती है, और हम रोमन-हिंदी में टाइप कर सोशल मीडिया पर अति सक्रिय होकर हिंदी की अति-सेवा कर रहे होते हैं. बहुत हुआ तो, रो-धो कर फ़ोनेटिक हिंदी कुंजीपट का उपयोग करते हैं जिसमें राम जैसे आसान शब्द को टाइप करने के लिए भी अंग्रेज़ी के आर ए ए एम ए जैसे जटिल और अपेक्षाकृत बहुत अधिक कुंजियों को टाइप करना होता है, और यदि मामला क्वचिदन्यतोपि जैसे जटिल शब्दों को लिखने का हो तो कितना भी ट्रायल-एरर मैथड अपना लें, टाइप ही नहीं होगा, नतीजतन सरल वैकल्पिक/शब्दार्थ से काम चलाते हैं और, बहुत से भले लोग पूर्ण विराम के लिए, हिंदी की खड़ी पाई के बजाए रोमन खड़ी लाइन का उपयोग करते पाए जाते हैं, क्योंकि उन्हें रोमन पूर्णविराम चिह्न के उपयोग से गुरेज होता है.

चूंकि हिंदी एक बहुत ही बड़े और विशाल-संभावनाशील बाजार की भाषा है, इसलिए हिंदी में अब हर कंप्यूटिंग प्लेटफ़ॉर्म – चाहे वो क्लासिक विंडोज़ हो, एप्पल आईओएस हो, लिनक्स हो या नवीनतम एंड्रायड – हिंदी भाषा अब हर किस्म की सुविधाओं के साथ मौजूद है, और इनमें नित नए आयाम जुड़ते ही जा रहे हैं. अस्सी के शुरूआती दशक में जब पर्सनल कंप्यूटरों का आगमन हुआ तो शब्द-संसाधक जैसे प्रोग्रामों ने आम जन में इनकी लोकप्रियता व स्वीकार्यता में नए आयाम जोड़े. जमाना डास आधारित प्रोग्रामों का होता था जिसमें श्वेत-श्याम स्क्रीन पर की-बोर्ड कमांड के जरिए काम करना होता था. उस वक्त हिंदी के पहले पहल बनाए गए शब्द-संसाधक प्रोग्राम अक्षर और शब्द-रत्न अच्छे खासे लोकप्रिय थे.

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(डॉस DOS आधारित हिंदी शब्द संसाधक प्रोग्राम ‘अक्षर’ – सीआरटी श्वेत-श्याम कंप्यूटर मॉनीटर पर चलता हुआ. )

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(डॉस DOS आधारित हिंदी शब्द संसाधक प्रोग्राम ‘शब्दरत्न’ – इनके कीबोर्ड रेमिंगटन हिंदी लेआउट में सेट थे.)

तब से लेकर अब तक हिंदी कंप्यूटिंग की दुनिया में अरबों अक्षरों के कोड लिखे जा चुके हैं और अब तो कंप्यूटरों पर उपलब्ध कृत्रिम बुद्धि आपकी हिंदी भाषा में बोले गए वाक्यों और आदेशों को भी समझने में सक्षम हो चुकी है.

अब सवाल ये है कि आखिर देवनागरी में लिखें तो कैसे, और किस टूल से? यदि आप पहले से ही देवनागरी में लिख रहे हैं तो अपनी उत्पादकता बढ़ाने – माने और अधिक तेज़ी से, और अधिक शुद्धता से, और बेहतर तरीके से देवनागरी में कैसे लिखें? आइए, आज पड़ताल करते हैं - आपके लिए उपलब्ध कुछ शानदार हिंदी टाइपिंग टूल के बारे में – कौन सा टूल किस प्लेटफ़ॉर्म के लिए बेहतर होगा?

मैं कोई पिछले पच्चीस वर्षों से प्रायः सभी किस्म के कंप्यूटरों और कंप्यूटिंग उपकरणों पर हिंदी टाइपिंग का उपयोग धड़ल्ले से करता आ रहा हूँ, और मैंने आमतौर पर, बेहतर की तलाश में सभी प्रमुख टाइपिंग टूल को एकाध बार तो आजमाया ही है. इन्हीं में से चुनकर, आपके लिए कुछ टाइपिंग टूल की जानकारी प्रस्तुत करूंगा जिसे प्रयोग कर आप सोशल मीडिया में अपनी गतिविधि में चार चाँद लगा सकते हैं.

स्मार्टफ़ोन की अंग्रेज़ी की करें हिंदी

आइए, सबसे पहले हम अपने हाथों में मौजूद स्मार्टफ़ोन/टैबलेट के अंग्रेज़ी इंटरफ़ेस को हटाकर हिंदी में बदलते हैं. हममें से अधिकांश के पास एंड्रायड उपकरण होता है. अधिकांश में हिंदी का इंटरफ़ेस पहले से ही स्थापित होता है. बस, केवल एक टैप से इसे सक्षम करना होता है. इसके लिए, सेटिंग्स आइकन (गियर आइकन होता है) पर टैप करें, जनरल मैनेजमेंट (सेमसुंग उपकरणों) अथवा लैंग्वेजेस एंड इनपुट (स्टॉक एंड्रायड) में जाएं और वहाँ लैंग्वेज > लैग्वेज प्रेफ़रेंस > में जाकर एड ए लैंग्वेज के धन चिह्न में टैप करें. वहाँ उपलब्ध भाषाओं में से हिंदी चुनें, और उसे खिसका कर अंग्रेजी के ऊपर कर दें. बस. आप देखेंगे कि आपके फ़ोन की भाषा तुरंत ही, अंग्रेज़ी से बदल कर हिंदी हो गई है. है न एकदम आसान! (ये चरण स्टॉक एंड्रायड के नवीनतम वर्जन 7.0 के लिए है, अन्य संस्करणों में चरणों में मामूली फेरबदल हो सकता है, परंतु अधिकांशतः कुछ इसी तरह के आसान से चरण होते हैं). न केवल हिंदी, बल्कि तमाम प्रमुख भारतीय भाषाएँ भी आपको वहाँ दिखेंगी. और, यदि आपके पास माइक्रोमैक्स जैसी भारतीय कंपनी के स्मार्टफ़ोन/टैबलेट हैं तो आपको 22 भारतीय भाषाएँ मिलती हैं.

अपने विंडोज़ डेस्कटॉप/लैपटॉप को बनाएँ हिंदीमय

अपने विंडोज़ डेस्कटॉप/लैपटॉप के इंटरफ़ेस को अंग्रेज़ी से बदलकर हिंदी में करना चाहेंगे? यह भी बेहद आसान है, और आप पाएंगे कि आपका हिंदी-मय कंप्यूटर दिखने में सुघड़-सुंदर भी होगा. तो इसके लिए (ये चरण विंडोज़ के नवीनतम संस्करण 10 के लिए हैं, अन्य संस्करणों में मामूली सा फेरबदल हो सकता है) विंडो स्टार्टबटन को क्लिक करें और सेटिंग में जाने के लिए गियर आइकन को क्लिक करें. विंडोज़ सेटिंग्स विंडो खुलेगा जिसमें टाइम एंड लैंगुएज आइकन पर क्लिक करें. रीजन एंड लैंगुएज पर क्लिक करें. प्लस बटन के बाजू में दिए गए एड ए लैंगुएज पर क्लिक करें. नीचे स्क्रॉल करें और हिंदी चुनें. आप देखेंगे कि अन्य प्रमुख भारतीय भाषाएँ भी यहाँ मौजूद हैं. हिंदी भाषा पैक डाउनलोड करने के लिए आपके कंप्यूटर को इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता हो सकती है. अब हिंदी के ऊपर दायां क्लिक करें और सेट एज़ डिफ़ाल्ट चुनें. अगले साइन इन के बाद आपका कंप्यूटर हिंदी में दिखने लगेगा. चाहें तो ऑप्शन बटन पर क्लिक कर उपलब्ध स्पीच व लैंग्वेज पैक भी डाउनलोड कर सकते हैं, जिससे आपको भाषाई हिंदी कंप्यूटिंग की अतिरिक्त सुविधा मिल सकती है.

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(विंडोज़ 10 में हिंदी इंटरफ़ेस आसान चरणों से स्थापित किया जा सकता है)

चलिए अब देखते हैं कि हम अपने स्मार्टफ़ोनों में हिंदी में कैसे बेहतर तरीके से टाइप कर सकते हैं, क्योंकि सोशल मीडिया पर अधिकांश सामग्री स्मार्टफ़ोनों के जरिए ही आ रही है, और, अच्छी, सारगर्भित सामग्री भी आ रही है. आप आश्चर्य करेंगे यह जानकर कि बहुत संभव है कि आपके हाथों में उपलब्ध नए-नवेले स्मार्टफ़ोन में आपके पुराने हो चुके डेस्कटॉप कंप्यूटर से भी ज्यादा कंप्यूटिंग ताकत है. यदि थोड़ा भी उन्नत किस्म का हुआ तो हो सकता है कि आपके स्मार्टफ़ोन में एक नहीं, दो नहीं, बल्कि आठ-आठ प्रोसेसर (कंप्यूटर के सिंगल सीपीयू मदर बोर्ड जैसा आठ) लगे हों. चार प्रोसेसर तो आम बात हैं, जो बेहद किफ़ायती दामों वाले फ़ोनों में भी होते हैं. और, आपके ये स्मार्टफ़ोन आपके लिए हिंदी टाइप करने में हर तरह के उन्नत कार्य कर सकने में सक्षम होते हैं.

स्मार्टफ़ोनों में उपलब्ध हिंदी टाइपिंग की सुविधाएँ –

स्मार्टफ़ोनों में उपलब्ध हिंदी टाइपिंग का रोमन ट्रांसलिट्रेश औजार स्मार्टफ़ोनों में बहुत पहले से उपलब्ध है, और आमतौर पर हिंदी में सक्रियता से काम करने वालों के लिए बेकार है. क्योंकि चार हिंदी अक्षर वाले शब्द को टाइप करने के लिए छः से आठ कुंजियां दबानी पड़ती हैं और ट्रायल व एरर अपनाना पड़ता है. तो सवाल ये है कि सर्वश्रेष्ठ टूल कौन सा है? सर्वश्रेष्ठ टूल हर उपयोगकर्ता के लिए भिन्न हो सकता है, और यदि आप अपनी हिंदी टाइपिंग में पहले से ही किसी टूल में मास्टर हैं, तो आपको अपना हिंदी टाइपिंग टूल बदलने की जरूरत नहीं है. फिर भी, यदि आप अपने स्मार्टफ़ोन के लिए किसी सर्वश्रेष्ठ हिंदी टाइपिंग टूल की तलाश में हैं तो प्ले स्टोर से स्विफ़्टकी (swiftkey) इंस्टाल करें, और इंस्टाल करने के बाद उसमें हिंदी कीबोर्ड एनेबल करें. यह टूल निःशुल्क है, और यह एंड्रायड और आईओएस दोनों प्लेटफ़ॉर्म में उपलब्ध है.

स्मार्टफ़ोनों में हिंदी टाइपिंग के लिए बढ़िया औजार - स्विफ़्टकी

हिंदी टाइपिंग के लिए, स्विफ़्टकी क्यों सर्वश्रेष्ठ है? – माइक्रोसॉफ़्ट समर्थित स्विफ़्टकी, विश्व की सभी प्रमुख भाषाओं में टाइपिंग टूल उपलब्ध करवाता है और इसकी टीम केवल टाइपिंग टूल में बेहतर गुणवत्ता प्रदान करने के लिए ही काम करती है. हिंदी में स्मार्टफ़ोनों में टचस्क्रीन सुविधा के कारण आपको कीबोर्ड रटने की वैसे भी कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सब सामने रहता है, फिर भी यह आसानी से याद हो जाने वाले हिंदी वर्णमाला तथा बारह-खड़ी वाला कुंजीपट लेआउट का प्रयोग करता है. साथ ही इसमें कई तरह की उन्नत सुविधाएं हैं. जैसे कि पूर्व में चर्चा की जा चुकी है, यदि आपको रोमन ट्रांसलिट्रेशन टूल से ‘क्वचिदन्यतोऽपि’ जैसे कुछ हिंदी-संस्कृत का जटिल शब्द लिखने को कहा जाए तो बड़ी कठिनाई होती है, और कई बार असंभव हो जाता है. परंतु इस टूल में ऐसे जटिल शब्दों को टाइप करने के लिए त्रि-स्तरीय कुंजीपट उपलब्ध हैं और वे आपके द्वारा टाइप किए जा रहे शब्दों-अक्षरों का पूर्वानुमान लगा कर आपके लिए शानदार विकल्प भी पेश करते हैं. आइए, इसे जरा चित्रों से समझें –

जैसे ही आप क टाइप करते हैं, आपके सामने प्रेडिक्टिव टैक्स्ट के विकल्प आते हैं जो आपके पूर्व के कार्य पर निर्भर होते हैं. यदि आपको इनमें से कुछ नहीं चुनना है तो नीचे बारह खड़ी में से चुन सकते हैं, वह भी नहीं चाहिए, तो क्षत्रज्ञ लिखे बटन को टच करें.

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क्षत्रज्ञ बटन को टच करने पर कुंजी पट का एक नया लेवल खुलता है जिसमें आपको और विकल्प मिलते हैं – आप देखेंगे कि न सिर्फ ‘क’ के विभिन्न संयुक्ताक्षर वाले रूप बल्कि अन्य पौराणिक चिह्न आदि भी मिलते हैं.

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जैसे ही आप कोई शब्द टाइप कर लेते हैं, यह प्रेडिक्टिव टैक्स्ट इनपुट से आपके पुराने उपयोग पैटर्न के हिसाब से एक नहीं बल्कि दो-दो शब्दों का भी एक साथ टाइप करने का सुझाव देता है. इससे आप महज कुछ ही कुंजी दबा कर पूरा वाक्य टाइप कर सकते हैं.

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इसमें केवल यही सुविधा नहीं है बल्कि फ्लो टाइपिंग की सुविधा भी है. आप अपनी उँगली उठाए बिना ही शब्दों में निहित अक्षरों को छूकर बेहतर और तेजी से टाइप कर सकते हैं. उदाहरण के लिए कहानी टाइप करने के लिए आपको सीक्वेंस में क ह न को छूना भर है, और कहानी टाइप हो जाएगा. थोड़े से प्रैक्टिस से आप इसमें महारत हासिल कर सकते हैं और यह विधि बेहद सुविधाजनक तो है ही, आपकी उंगलियों को राहत भी देता है.

अपने स्मार्टफ़ोन में बोलकर हिंदी में टाइप करें –

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(एंड्रायड में गूगल डॉक्स में एक फ़ाइल में बोलकर लिखा जा रहा है. आप देखेंगे कि एंड्रायड गूगल डॉक्स में भी हिंदी वर्तनी जांच की बढ़िया सुविधा उपलब्ध है)

प्रसिद्ध कथाकार सूरज प्रकाश सोशल मीडिया में अति सक्रिय हैं. वे फ़ेसबुक, ट्विटर और ब्लॉग पर शुद्ध देवनागरी हिंदी में लिखते हैं. परंतु एक बात विचित्र है. वे बोल कर लिखते हैं. क्या आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे ये कैसे करते हैं? वे कोई पिछले सालेक भर से अपने स्मार्टफ़ोन में बोल कर ही टाइप करते हैं!

जी हाँ, गूगल वाइस लेखन नामक निःशुल्क उपलब्ध टूल के जरिए वे यह कार्य बखूबी कर रहे हैं. ऊपर से, अब आपको वाइस टाइपिंग के लिए ऑनलाइन रहने की भी जरूरत नहीं. हिंदी के लिए ऑफ़लाइन डेटा डाउनलोड हो जाता है जिससे आप कहीं भी कभी भी बोलकर हिंदी देवनागरी में लिख सकते हैं. इसके लिए गूगल इनपुट तथा गूगल वाइस इनपुट टूल इंस्टाल कर हिंदी लैंग्वेज पैक प्ले स्टोर से इंस्टाल करें. यदि आपका स्मार्टफ़ोन अपेक्षाकृत नया है तो उसमें जीबोर्ड नामक कुंजीपट स्वचालित इंस्टाल किया हुआ मिलेगा. इसमें गूगल वाइस इनपुट टूल अंतर्निर्मित रहता है. यकीन मानिए, इसका उपयोग बेहद आसान है और आश्चर्यकारी शुद्धता युक्त है. इतना ही नहीं, आप हिंदी में बोलकर कमांड भी दे सकते हैं. गूगल वाइस इनपुट को सक्षम करने की सेटिंग एंड्रायड 7.0 के लिए कुछ इस तरह होगी –

सेटिंग्स > जनरल मैनेजमेंट अथवा लैंग्वेजेस एंड इनपुट > कीबोर्ड एंड इनपुट मैथड के नीचे दिए गए वर्चुअल कीबोर्ड पर टैप करें. आपको गूगल वाइस टाइपिंग का आइकन दिखेगा. उस पर टैप करें. लैंग्वेजेस में टैप करें और केवल हिंदी चुनें. ध्यान रखें कि यहाँ केवल हिंदी चुनें, अन्यथा एक से अधिक भाषा चुनने पर यह कभी कभी दूसरी चुनी गई भाषा में इनपुट लेने लगेगा. ध्यान दें कि पहले से चुनी गई भाषाएँ मसलन अंग्रेज़ी का चयन हटाना है. अब सेटिंग सहेज लें. सहेजने के बाद आपको वहीं पर ऑफलाइन स्पीच रिकग्नीशन – मैनेज डाउनलोडेड लैंगुएजेस का एक विकल्प दिखेगा. उस पर टैप करें. आल टैब पर टैप करें. नीचे स्क्रॉल कर हिंदी चुनें. डाउनलोड के लिए सहमति दें. थोड़ी ही देर में (आपके इंटरनेट कनेक्शन की गति पर निर्भर) आपके स्मार्टफ़ोन में ऑफलाइन मोड में हिंदी बोली पहचान का मसाला डाउनलोड हो जाएगा, और आप धड़ल्ले से बोल कर हिंदी लिख सकेंगे. और, यकीन मानिए, यदि आपकी बोली रेडियो के उद्घोषकों की तरह स्पष्ट और तेज है तो शत प्रतिशत शुद्धता से टाइप कर सकेंगे और उत्पादकता होगी 200 शब्द प्रतिमिनट से भी अधिक!

जब भी आपको बोल कर लिखना हो, चुने गए कीबोर्ड (स्विफ़्टकी में स्पेस बार के बाई ओर या जीबोर्ड में कीबोर्ड के ऊपर दायीं ओर) उपलब्ध माइक्रोफ़ोन बटन को दबाएँ (विविध उपकरणों पर यह सेटिंग भिन्न हो सकती है – जैसे कि यह विकल्प पाने के लिए ग्लोब आइकन को दबाकर रखें या स्पेस बार को दबाकर रखें या कीबोर्ड आइकन को दबाकर गूगल वाइस टाइपिंग चुनें,) और बस बोलते चले जाएँ. रुकने के लिए माइक्रोफ़ोन आइकन को फिर से दबाएं जो टॉगल बटन जैसा काम करता है.

अपने कंप्यूटर पर हिंदी में बोलकर टाइप करें

आप अपने एंड्रायड स्मार्टफ़ोन को आप डिक्टाफ़ोन की तरह उपयोग कर उसमें बोल कर अपने पीसी या लैपटॉप में सीधे लिख सकते हैं. इसके लिए एक छोटा सा जुगाड़ करना होगा. अपने एंड्रायड फ़ोन में गूगल डॉक्स इंस्टाल करें (प्ले स्टोर में जाकर Google docs सर्च करें). अपने कंप्यूटर या लैपटॉप पर गूगल डॉक्स या गूगल ड्राइव (हिंदी में गूगल डिस्क) में जाएं और वहाँ एक नया फ़ाइल बनाएं या किसी पुरानी फ़ाइल को संपादन के लिए खोलें. उदाहरण के लिए, इस नए फ़ाइल का नाम देते हैं – ‘हिंदी बोलकर टाइप करना’.

अब अपने एंड्रायड मोबाइल में गूगल डॉक्स ऐप्प जो आपने इंस्टाल किया है उसे खोलें. फिर उस फ़ाइल को खोलें जिसे आपने अपने कंप्यूटर या लैपटॉप पर खोला हुआ है (उदाहरण – ‘हिंदी बोलकर टाइप करना’ नामक फ़ाइल, थोड़ा नेविगेशन करें तो यह फ़ाइल दिख जाएगा). अब आप अपने मोबाइल पर बोलकर इस फ़ाइल में लिखना चालू करें. जैसे जैसे आप बोलकर लिखते जाएंगे, आप देखेंगे कि आपके कंप्यूटर या लैपटॉप के गूगल डॉक्स के स्क्रीन पर भी रीयल टाइम में यह टाइप होता जा रहा है, जिसे आप आसानी से अपने की-बोर्ड की सहायता से संपादित कर सकेंगे.

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(कंप्यूटर पर गूगल डॉक्स की उसी फ़ाइल को खोला गया है जिसमें हम मोबाइल में बोलकर लिख रहे हैं, और जो रीयल टाइम में अपडेट हो रहा है – यानी हम अपने स्मार्टफ़ोन में बोलकर लिख रहे हैं और यहाँ कंप्यूटर पर खुले दस्तावेज़ में यह अपने आप टाइप हो रहा है. वस्तुतः यह दस्तावेज़ मोबाइल में ही टाइप हो रहा है, परंतु प्रतीत हो रहा है कि वह यहाँ टाइप हो रहा है. कंप्यूटर पर आप इस दस्तावेज़ को बाद में आसानी से संपादित कर सकते हैं.)

ध्यान दें कि अच्छे परिणामों के लिए निम्न आवश्यकताएं परिपूर्ण करना आवश्यक है -

1 – आपका स्मार्टफ़ोन थोड़ा उन्नत किस्म का हो – यानी ड्यूअल कोर हो और एंड्रायड संस्करण 4.1 से आगे का हो

2 – आपके नेट कनेक्शन की गति पर्याप्त तेज हो – यानी ब्रॉडबैण्ड या 3 जी हो और अबाधित हो – क्योंकि यह जुगाड़ और वर्तमान में गूगल द्वारा बोलकर हिंदी टाइपिंग ऑनलाइन ही संभव है.

3 – स्पष्ट और थोड़े तेज आवाज में बोलने का थोड़ा सा अभ्यास आवश्यक है ताकि आपकी आवाज को मशीन पहचान सके. ध्यान रखें कि सभी आवाज को मशीन पहचान नहीं सकता – ‘मुलायमी’ आवाज को तो यह शायद ही पहचाने, अलबत्ता ‘लालुई’ आवाज को यह जरूर अच्छे से पहचान लेगा clip_image015

क्रोम ब्राउज़र पर हिंदी में बोलकर लिखें

बोलकर हिंदी टाइप करने का एक वेब इंटरफ़ेस भी उपलब्ध है.

इसे आप क्रोम ब्राउज़र से चला कर देख सकते हैं.

लिंक यह है -

http://www.hindidictation.com/Index1.html

यहाँ कुछ बोलकर लिखने की कोशिश की गई तो परिणाम यह रहा -

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परिणाम जाहिर है, ठीक ठाक है. अपने आम बोलचाल की अंग्रेज़ी भाषा जैसे कि टाइप, एक्यूरेसी आदि को भी यह ठीक पहचान लेता है, परंतु धन्यवाद को धंयवाद तथा है को हे टाइप करता है.

लगता है कि अब पेन-पेंसिल के दिन खत्म होने ही वाले हैं. जब सारा कुछ बोल-सुनकर और जेस्चर (हाव-भाव से नियंत्रण) कंट्रोल से होने लगेगा तो फिर पेन-पेंसिलों को कौन पूछेगा भला?

अपने स्मार्टफ़ोन में लिखकर टाइप करें –

जी हाँ, आपने सही पढ़ा.

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आपका देवनागरी हिंदी में लिखा हस्तलेख अब आपका स्मार्टफ़ोन समझ जाता है और उसे डिजिटली कन्वर्ट कर सकता है जिसका उपयोग आप सोशल मीडिया में सक्रिय बने रहने के लिए कर सकते हैं. यदि आपको कुंजियों को टच कर लिखने में सहज नहीं हैं, और अपने प्रिय पेन-पेंसिल कागज जैसी फ़ीलिंग छोड़ना नहीं चाहते तो कोई सौ रुपल्ली (वैसे आप अपनी उँगली का बढ़िया उपयोग कर सकते हैं) में डिजिटल पेंसिल खरीद लाएँ और गूगल हस्तलेखन इनपुट हिंदी इंस्टाल/सक्षम कर इसके जरिए अपना काम करें. गूगल हस्तलेखन इनपुट जीबोर्ड तथा गूगल इंडिक कीबोर्ड में यह अंतर्निर्मित आता है, अथवा आप गूगल प्ले स्टोर से गूगल हैंडराइटिंग इनपुट नामक ऐप्प इंस्टाल कर सकते हैं.

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हस्तलेखन इनपुट चालू करने के लिए, कीबोर्ड सेटिंग से – या तो हिंदी जीबोर्ड चुनें या गूगल इंडिक कीबोर्ड चुनें. अब किसी भी इनपुट विंडो में एकदम दाएं कोने में दिए गए कीबोर्ड आइकन को टैप करें और वहाँ पर ऊपर की पट्टी में “अ” अक्षर के ऊपर टैप करें और सबसे नीचे का, तीसरे नंबर का विकल्प चुनें. आप देखेंगे कि सामान्य कीबोर्ड हट गया है और कीबोर्ड की जगह खाली स्थान आ गया है. वहाँ पर आप जिस तरह कागज-पेंसिल पर लिखते हैं, वैसे ही अपनी उंगली से या डिजिटल पेंसिल से हिंदी में लिख सकते हैं. एक बार में केवल एक शब्द लिख सकते हैं, परंतु जल्द ही महारत हासिल हो सकती है और आपको एक-एक अक्षर को टाइप करने से मुक्ति मिल सकती है. सामान्य टाइपिंग में वापस जाने के लिए “अ” अक्षर के बाजू में abc को टैप करें. याद रखें, हस्तलेखन इनपुट पहले से चुनी गई भाषा पर काम करता है – यदि आपने हिंदी चुना है तो हिंदी लिखेगा, अंग्रेज़ी चुना है तो अंग्रेज़ी लिखेगा.

आपके विंडोज पीसी के लिए हिंदी टाइपिंग का सबसे बढ़िया औजार –

डेस्कटॉप और लैपटॉप कंप्यूटरों पर हिंदी में काम करने के लिए अब तो तमाम तरह के जुगाड़ हैं, परंतु जनता बहुधा ट्रांसलिट्रेशन का ही उपयोग करती है. फिर भी, यदि आपको अपनी उत्पादकता बढ़ानी है, सक्रियता और शुद्धता बनाए रखनी है, टाइपिंग में गुम हो जाने (राम का रामा टाइप हो जाने या न होने) के फ्रस्ट्रेशन से बचे रहना चाहते हैं तो इनस्क्रिप्ट कुंजीपट अपनाएँ. यह सभी आधुनिक पीसी, विंडोज, मैक, लिनक्स आदि में डिफ़ॉल्ट रूप में मौजूद होता है, बस इनेबल करना होता है और आमतौर पर हर एप्लिकेशन, हर प्रोग्राम में चलता है. इसे सीखना बेहद आसान है. यह हिंदी वर्णमाला के अनुक्रम के आधार पर बना है और टचटाइपिंग – यानी बिनदेखे शीघ्रता से टाइप करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसके कई टाइपिंग ट्यूटर भी हैं जिन्हें डाउनलोड कर आप आसानी से इसे सीख सकते हैं. जब यूनिकोड नहीं था, इनस्क्रिप्ट कुंजीपट नहीं था, तो हिंदी इंटरनेट व हिंदी कंप्यूटिंग के शुरुआती दिनों में मैंने शुषा, रेमिंगटन, कृतिदेव, चाणक्य, रोमन, ट्रांसलिट्रेशन, फ़ोनेटिक आदि न जाने कितने कुंजी पट उपयोग किए और फेंक दिए. सभी में समस्याएँ होती थीं. जब से मैंने इनस्क्रिप्ट अपनाया, मेरी हिंदी टाइपिंग का लाइफ़ हो गया झिंगालाला. इस आलेख को भी मैंने इनस्क्रिप्ट से टाइप किया है, और कुंजीपट को बगैर देखे – 40 शब्द प्रतिमिनट की रफ़्तार से भी अधिक. मैं अपनी देवनागरी हिंदी टाइपिंग में पास तो हो गया ना?

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(डेस्कटॉप पर हस्तलेखन (डिजिटल पेन/माउस/टचस्क्रीन से) से हिंदी में टाइप करने की सुविधा – क्रोम एक्सटेंशन – गूगल इनपुट टूल के माध्यम से)

यदि आप डेस्कटॉप / लैपटॉप पर क्रोम ब्राउज़र का प्रयोग करते हैं तो एंड्रायड पर उपलब्ध हिंदी टाइपिंग की कुछ उन्नत सुविधाएँ जैसे कि हस्तलेखन / वाणी से हिंदी टाइपिंग की सुविधा आपको अपने डेस्कटॉप पर हासिल हो सकती हैं. इसके लिए आपको क्रोम में गूगल इनपुट टूल्स नामक एक प्लगइन/एक्सटेंशन इंस्टाल करना होगा. इसके लिए क्रोम वेबस्टोर - https://chrome.google.com/webstore/category/extensions में जाएँ, और google input tools सर्च करें और यह एक्सटेंशन इंस्टाल करें.

और, क्या यह भी बताना समीचीन नहीं होगा कि अब इन तमाम प्लेटफ़ॉर्म के प्रमुख प्रोग्रामों – एमएस वर्ड, नोटपैड++, क्रोम-ओपेरा ब्राउज़र, गूगल डॉक्स, जीमेल, थंडरबर्ड ईमेल क्लाएंट आदि-आदि में हिंदी वर्तनी जांच की अंतर्निर्मित सुविधा भी हासिल है, जिसके जरिए आप अपनी हिंदी में अच्छी खासी शुद्धता भी ला सकते हैं?

हिंदी कंप्यूटिंग संबंधी और भी तमाम किस्म की तकनीकी व काम की जानकारियाँ व समस्याओं के हल आप मेरी निम्न साइट में जाकर सर्च कर प्राप्त कर सकते हैं -

http://raviratlami.blogspot.com/

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रविवार, 8 अक्तूबर 2017

मैटर की फ़ॉर्मेटिंग बनाए रखते हुए फ़ॉन्ट कन्वर्ट कैसे करें

अभी भी लोग एक अच्छे फ़ॉन्ट कन्वर्टर की तलाश में हैं. दरअसल लोगों के पास अपने कंप्यूटरों के हार्ड डिस्क में पुराने फ़ॉन्टों में इफरात माल पड़ा हुआ है और अब उनका उपयोग यूनिकोड में कन्वर्ट किए बगैर होना नामुमकिन सा है.  एक अच्छे फ़ॉन्ट कन्वर्टर में दो चीजें आवश्यक हैं - शुद्धता तथा फ़ॉन्ट फ़ॉर्मेटिंग बनाए रखने की क्षमता. इस समूह के एचटीएमएल कन्वर्टर बहुत ही बेहतरीन परिणाम देते हैं, परंतु एक बड़ी समस्या यह है कि फ़ॉन्ट फ़ॉर्मेटिंग नहीं बचती (कन्वर्शन में केवल टैक्स्ट मिलता है) तथा द्विभाषी टैक्स्ट को कन्वर्ट करना लगभग असंभव है.

शुक्र है कि अब हमारे पास एक निःशुल्क, मुफ़्त का टूल उपयोग हेतु उपलब्ध है. बस थोड़ा जुगाड़ लगाना होगा.

वह है -

सिल कन्वर्टर तथा तकनीकी हिंदी समूह के कन्वर्टरों की सहायता से वर्ड फ़ाइल के मैटर को फ़ार्मेटिंग बनाए रखते हुए (फ़ॉन्ट आकार प्रकार रूप रंग, टेबल तथा अंग्रेज़ी हिंदी फ़ॉन्ट आदि को बनाए रखते हुए) फ़ॉन्ट कन्वर्ट करना.

कृपया ध्यान दें – यह एक जुगाड़ है, जिसमें धैर्य पूर्वक सेटअप व सेटिंग की आवश्यकता है. अवांछित परिणाम भी मिल सकते हैं. हालांकि इन चरणों को नवीनतम विंडोज़ 10 संस्करण व वर्ड 2016 संस्करण में भली भांति जांचा परखा जा चुका है. व बिना किसी त्रुटि या अवांछित परिणाम के, नियमित उपयोग में लिया जा रहा है.

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आपका कंप्यूटर विंडोज 7 या नवीनतम हो, और एमएस वर्ड 2007 या नवीनतम इंस्टाल हो.

सबसे पहले सिल कन्वर्टर का नया संस्करण 4 यहाँ से डाउनलोड कर इंस्टाल (पुराना संस्करण यदि इंस्टाल हो तो उसे पहले अनइंस्टाल कर लें) करें -

http://scripts.sil.org/cms/scripts/page.php?site_id=nrsi&id=enccnvtrs#c20c35ef

ध्यान दें - वहां पर आपको कई संस्करणों के सिल कन्वर्टर डाउनलोड हेतु मिलेंगे. आपको केवल ऑफ़लाइन इंस्टाल वाला परिपूर्ण संस्करण डाउनलोड करना है जिसकी फ़ाइल साइज 73 मेबा है.

वहाँ कुछ ऐसा लिखा मिलेगा जिसे डाउनलोड कर इंस्टाल करना है –

SIL Converters 4.0

Offline Standalone installer

SIL Converters 4.0 Standalone installer (includes addons like .NET) for offline installation (EXE file)

Size: 73 MB

इंस्टाल करते समय इंडिक कन्वर्टर इंस्टाल करना अवश्य चुनें. यह डिफ़ॉल्ट में चुना गया नहीं होता है.

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सेटअप के दौरान यह कन्वर्टर आपसे किन किन फ़ॉन्ट में से कन्वर्टर को स्थापित करना है यह पूछेगा. आप हिंदी देवनागरी से संबंधित कृतिदेव 010, 011, 290, शुषा आदि का चुनाव कर सकते हैं जो इसके साथ अंतर्निर्मित आता है. ये कन्वर्टर कुछ मायनों में 90-95 प्रतिशत शुद्धता के साथ फ़ॉन्ट फ़ॉर्मेटिंग बनाए रखते हुए कन्वर्ट करने में सक्षम हैं.

अब आप यथा संभव सिल कन्वर्टर की हेल्प फ़ाइलों को पढ़ लें कि प्रोग्राम किस तरह कार्य करता है. हेल्प फ़ाइलें सिल कन्वर्टर के प्रोग्राम मेन्यू में उपलब्ध हैं . वहाँ हेल्प फ़ॉर टेक्निकल हिंदी कन्वर्टर भी उपलब्ध है.

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अब अगले चरण में हम इस समूह के दर्जनों एचटीएमएल फ़ॉन्ट कन्वर्टरों को इस सिल कन्वर्टर में शामिल करेंगे जिससे कि हमें त्रुटि रहित व फ़ॉन्ट फ़ॉर्मेटिंग बनाए रखते हुए कन्वर्शन मिल सके.

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वैज्ञानिक एवं तकनीकी हिंदी समूह के जिस फ़ॉन्ट कन्वर्टर का उपयोग (इस कड़ी से डाउनलोड करें - https://goo.gl/3FpBQq ) आप करना चाहते हैं उसकी एचटीएमएल फ़ाइल को आप अपने कंप्यूटर पर सहेज लें.

अब प्रोग्राम मेन्यू अथवा सर्च बक्से के जरिए बल्क वर्ड डाक्यूमेंट कन्वर्टर (bulk word document converter) प्रोग्राम खोलें (सिल कन्वर्टर वर्ड प्रोग्राम में कन्वर्टर मैक्रो भी जोड़ता है, परंतु यह मैक्रो मैटर की फार्मेटिंग को हटा देता है, अतः हम यहाँ केवल बल्क वर्ड डाक्यूमेंट कन्वर्टर प्रोग्राम का ही प्रयोग करेंगे).

बल्क वर्ड डाक्यूमेंट कन्वर्टर के फ़ाइल ओपन डायलाग से उस फ़ॉन्ट में लिखी गई किसी फ़ाइल को खोलें. यह कुछ इस तरह दिखेगा –

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अब आप सलेक्ट ए कन्वर्टर बटन को क्लिक करें. फिर एड न्यू बटन को क्लिक करें. फिर चूज ए ट्रांसडक्शन विंडो खुलेगा वहाँ टेक्निकल हिंदी (गूगल ग्रुप) एचटीएमएल कन्वर्टर चुनें. और एड बटन पर क्लिक करें.

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एक नया विंडो खुलेगा जिसमें सेटअप टैब पर क्लिक करें.

कन्वर्टर पेज के सामने दिए गए तीन बिंदु (...) वाले चयन बटन पर क्लिक करें और इस समूह की वह कन्वर्टर फ़ाइल चुनें जिसे आपने पहले से डाउनलोड कर सहेजा है. यदि दोतरफ़ा कन्वर्टर है तो बाईडायरेक्शनल को अवश्य चुनें. फिर नीचे इनपुट आईडी, आउटपुट आईडी कन्वर्टर फंक्शन फारवर्ड और कन्वर्टर फंक्शन रिवर्स में चित्र में दिखाए अनुसार चुनें. सेव इन रीपोसिटरी में क्लिक करें, वांछित नाम से सहेजें, फिर उसके बाद ओके बटन को क्लिक करें.

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आपकी सेटिंग पूरी हो गई है, अब आप वर्ड डाक्यूमेंट कन्वर्ट करने के लिए तैयार हैं.

ध्यान दें कि एप्लाई फ़ॉन्ट में मंगल फ़ॉन्ट को अवश्य चुनें. अगली बार जब भी आप बल्क वर्ड कन्वर्टर प्रोग्राम चलाएंगे तो कन्वर्टर चयन बॉक्स में आपका यह नया इंस्टाल कन्वर्टर मौजूद रहेगा जिसे चुन कर आप अपनी फ़ाइलें कन्वर्ट कर सकते हैं.

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ऊपर दिए गए चित्र में कन्वर्टर प्रोग्राम में शुषा के मैटर वाली फ़ाइल खोली गई है. कन्वर्टर में इस समूह का शुषा से यूनिकोड से शुषा कन्वर्टर का नवीनतम 11वां संस्करण जोड़ा गया है, और एप्लाई फ़ॉन्ट में मंगल फ़ॉन्ट (आवश्यक – यह चरण जरूर ध्यान में रखें, अन्यथा आपकी कन्वर्टेड फ़ाइल में डब्बे नजर आ सकते हैं) चुना गया है. अब आप नीले कन्वर्ट बटन को क्लिक कर फ़ाइल कन्वर्ट करें. नया कन्वर्टेड फ़ाइल नाम पूछा जाएगा, चाहें तो डिफ़ॉर्ट कन्वर्टेड नाम चुनें या नए नाम से सहेजें.

यदि, यूनिकोड से शुषा में कन्वर्ट करना है तो विकल्प में रीवर्स डायरेक्शन अवश्य चुनें जैसा कि नीचे चित्र में दिखाया गया है -

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आपका फ़ाइल कन्वर्ट हो चुका है. बधाईयाँ!

कन्वर्टेड फ़ाइल कुछ इस तरह दिखता है – लगभग 100 प्रतिशत शुद्ध परिणाम. बिना फ़ॉर्मेटिंग खोए.  फ़ॉन्ट फ़ॉर्मेटिंग व द्विभाषी फ़ॉन्ट पर विशेष ध्यान दें –

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जुगाड़ का बोनस अंक - कार्य निष्पादन में यह कन्वर्टर डांगी सॉफ़्ट प्रखर कन्वर्टर से ज्यादा तेज है – लगभग इंस्टैंट, और आप इसमें अपनी आवश्यकतानुसार वांछित फेरबदल कर सकते हैं जिससे त्रुटियाँ न्यूनतम हों.

कोई समस्या हो तो टिप्पणी में बताएँ.

गुरुवार, 5 अक्तूबर 2017

व्यंग्य जुगलबंदी - बापू की लखटकिया लंगोटी

व्यंग्य

15 लाख रुपए की बापू की लँगोटी

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(चित्र - 2009 में मो ब्लॉ नामक कंपनी ने गांधी कलम बाजार में उतारा था जिसकी कीमत 14 लाख रुपए थी उस समाचार की कतरन)

हमारी नामी कंपनी 'सो फ्लां' ने एक लिमिटेड एडीशन बापू लँगोटी बाजार में पेश किया है. लिमिटेड एडीशन की सिर्फ 3000 लँगोटियाँ तैयार की गई हैं. इन लँगोटियों की ढेरों ख़ासियतें हैं जो इन्हें व इनके खरीदारों और प्रयोगकर्ताओं को विशिष्ट बनाती हैं. पहली खासियत तो ये है कि इन्हें अति विशिष्ट किस्म के खद्दर से बनाया गया है. वही खद्दर, जो देश के नेताओं को आजादी के पहले और आजादी के बाद बहुत ही मुफीद बैठता आ रहा है अब तक. खद्दर के लिए कच्चा माल खासतौर पर ऑस्ट्रेलिया के वर्जिन जंगलों से आयातित किया गया है. इसकी रुई प्राकृतिक रूप से उगे पौधों से तैयार की गई है और पूर्णतः जैविक पैदावार है, न कि रासायनिक और कृत्रिम रूप से उगी. इसे खास तौर पर डिजाइन किए गए हीरा मोती माणिक्य मढ़े करघे की सहायता से हाथ से बुना गया है. लँगोटी का डिजाइन प्रसिद्ध फ्रेंच फ़ैशन डिजाइनर 'विव सेंट फोरें' द्वारा रीडिजाइन कर बनाया गया है.
इसके बॉर्डर में विशेष किस्म के प्लेटिनम अलॉय का प्रयोग किया गया है जिससे लँगोटी सुन्दर, आकर्षक तो दिखती ही है, इस्तेमाल में नर्म और मुलायम भी होती है. इसकी ड्यूरेबिलिटी के लिए विशेष ट्रीटमेंट दिया गया है जिससे कि इसका प्रयोग एक बार में लगातार पाँच साल तक एक ही कुर्सी पर बैठकर किया जा सकता है.


बापू लँगोटी की एक और महत्वपूर्ण खासियत ये है कि आप नेता हों या अफसर, बापू लँगोटी डालकर बेशक भ्रष्टाचार के नए-नए, विशाल कारनामे कर सकते हैं. आपके ऊपर कोई आँच नहीं आएगी. आपने जो बापू लँगोटी का कैमोफ्लॉज पहना हुआ होगा. बापू लँगोटी आपको हर किस्म के चुनाव में (पूरे भारत में इसकी गारंटी है) जितवाने में सहायक होगा. आप लँगोटी की आड़ में आप चाहे कितने मतदाता खुले आम खरीद सकते हैं – कोई चुनाव आयोग आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा – क्योंकि उसे तो आपकी बापू लँगोटी ही दिखाई देगी. बापू लँगोटी की ये भी खासियत है कि ये अपने मालिक के लिए अच्छे और मलाईदार पद वाली कुर्सियों की व्यवस्था खुद करेगा.
चूंकि बापू लँगोटी को लिमिटेड एडीशन के रूप में सीमित संख्या में जारी किया गया है, अतः इसके मालिक और प्रयोगकर्ता समाज में विशेष इज्जत और मान सम्मान के हकदार होंगे. वे समाज के एलीट क्लास और श्रेष्ठी वर्ग के लोग होंगे जो बापू लँगोटी को अफोर्ड कर सकेंगे. जाहिरा तौर पर ऐसे में चंद बड़े नेताओं, उद्योगपतियों और बड़े अफसरों के हाथ में ही बापू लँगोटी पहुँच पाएगी. और ऐसे में बापू लँगोटी धारकों को हर कहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में माना जाएगा और उनका स्वागत सत्कार किया जाता रहेगा.


इन लँगोटियों की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इन्हें सर्वसिद्धि यंत्र के रूप में प्रयोग में लिया जा सकता है. आपका काम कहीं रुक रहा हो, अड़ रहा हो, कहीं फंस रहा हो, बस एक अदद बापू लँगोटी की दरकार है आपको. एक अदद बापू लँगोटी सामने वाले अफसर/नेता/मंत्री को गिफ़्ट कर दें. बापू लँगोटी का असर चौबीस घंटे के भीतर होगा और आपका रुका हुआ काम बन जाएगा. वैसे भी बापू लँगोटी को खास इन्हीं कामों को ध्यान में रख कर डिजाइन किया गया है.


इन लँगोटियों की वैसे तो और भी ढेरों खासियतें हैं जिन्हें गिनाया नहीं जा सकता और इन्हीं खासियतों के चलते लिमिटेड एडीशन बापू लँगोटी बाजार में जारी होते ही सोल्ड आउट हो गई और सुना है कि अब उसकी ब्लैक मार्केटिंग हो रही है. एक शीर्ष के वित्तीय सलाहकार के मुताबिक इन्वेस्टमेंट के लिहाज से भी बापू लँगोटी पर निवेश करना एक समझदारी भरा निर्णय होगा. इसीलिए बापू लँगोटी चाहे जितनी खरीद सकें खरीद लें.
बापू लँगोटी के बाजार से उत्साहित हमारी कंपनी जल्द ही बापू लाठी, बापू घड़ी, बापू खड़ाऊँ, बापू धोती के लिमिटेड एडीशन जारी करने जा रही है. इनमें भी एक से बढ़कर एक खासियतें होंगी. अग्रिम बुकिंग चालू है. इससे पहले कि आप पीछे रह जाएँ, बापू को लपक लें. बापू की लँगोटी ही सही!


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व्यंज़ल

यहाँ कहीं दिखती नहीं लँगोटियाँ
क्या हमने पहनी भी हैं लँगोटियाँ


यथा राजा तथा प्रजा के तर्ज पर
लोगों ने कब से तज दी लँगोटियाँ


मेरे शहर की सूरत यूँ बदल गई
यहाँ सरे आम धुलती है लँगोटियाँ


वक्त ने सब उलट कर रख दिया
पैंट के ऊपर पहनते हैं लँगोटियाँ


अपने को छुपाने में लगा है रवि
पहन कर लँगोटियों पे लँगोटियाँ

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