August 2017

व्यंग्य जुगलबंदी 49 - बाबागिरी के मरफ़ी के नियम

(चित्र - साभार - काजल कुमार ) मरफ़ी का नियम हर जगह लागू होता है. बाबागिरी में भी. कुछ नियम ये हैं – · दुनिया में कुछ नहीं बदलता. बाबागिरी भ...

व्यंग्य जुगलबंदी - 48 : तकनीक और हवापानी

प्राचीन काल में आदमी स्वास्थ्य लाभ करने के नाम पर हवापानी बदलता था. तपेदिक जैसी बीमारियाँ हवापानी बदलने से खुद-ब-खुद ठीक हो जाती थीं. आजकल, ...

खबर एक, नज़र अनेक

जाकी रही भावना जैसी....

व्यंग्य जुगलबंदी 47 : साराह से छेड़छाड़

साराह से प्राप्त संदेशों को दुनिया सगर्व अपने फ़ेसबुक, वाट्सएप्प, ब्लॉग आदि आदि पर डाल रही है. प्रकटतः बड़ी ईमानदारी से. परंतु हमारे पास एआई...

साराह किया क्या?

आइए, साराह (या, सारा या सराहा?) करें यह तो स्वयंसिद्ध है कि दुनिया बड़ी पॉलिश्ड है. मुंह में राम बगल में छुरी टाइप. नहीं? अभी की ही बात ले ल...

आर्काइव.ऑर्ग पर हालिया प्रतिबंध और स्ट्रीसेंड प्रभाव

चहुँओर हल्ला मचने के बाद, जैसी कि संभावना थी, ताज़ा खबर ये है कि  आर्काइव.ऑर्ग पर से प्रतिबंध हटा लिया गया है. इस घटना से एक बात तो स्पष्ट ह...

आर्काइव.ऑर्ग पर सरकारी प्रतिबंध - शुतुरमुर्गी मूर्खता बंद करो! बंद करो!! How to visit blocked site through vpn

भारतीय सरकारी बाबुओं ने एकबार फिर से अपनी शुतुरमुर्गी जड़ता और मूर्खता को सार्वजनिक प्रतिपादित किया है. आर्काइव.ऑर्ग जैसी एक शानदार वेबसाइट ...

व्यंग्य जुगलबंदी : असली अफ़वाह

इधर उसने चोटीकटवा की खबर पढ़ी, और उधर उसकी बांछें, शरीर में जहाँ कहीं भी हों, खिल गईं. उसके दिमाग में बत्ती जो जल गई थी. आदमी को कुछ चीजें, ...

व्यंग्य जुगलबंदी 44+45 = डबल जुगलबंदी = जुगलबंदी की जुगलबंदी = जुगलबंदी^2 = गठबंधन की बाढ़

पवित्र भारत भूमि में, जुलाई के महीने में सदियों से बाढ़ आती रही है और आगे अनंत-काल तक आती रहेगी. तमाम सरकारें आईं और गईं, तमाम साम्राज्य आए ...