सोमवार, 20 अक्तूबर 2014

लीजिए, पेश है– दर्जन भर गूगल यूनिकोड हिंदी (देवनागरी) फ़ॉन्ट

दर्जन भर से अधिक, ओपन-सोर्स, यूनिकोड हिंदी देवनागरी वेब फ़ॉन्ट गूगल ने जारी किए हैं. इन्हें आप अपनी वेबसाइटों में आसानी से लगा सकते हैं.

ब्लॉगर जैसी सेवा में इसे अंतर्निर्मित आने में थोड़ा समय लग सकता है, परंतु आप ब्लॉग टैम्प्लेट सेटिंग में फ़ॉन्ट शैली या सीएसएस में मामूली परिवर्तन कर इसका उपयोग धड़ल्ले से कर सकते हैं.

 

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अधिक जानकारी के लिेए यहाँ http://www.google.com/fonts#ChoosePlace:select/Script:devanagari  देखें.

सोमवार, 13 अक्तूबर 2014

मेरा रंग दे हेल्मेट हरा, नीला, पीला, लाल गुलाबी…

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न्यायालयों (आजकल कुछ अति सक्रिय)  और सरकारों (यदि कहीं कोई है,) ने दुपहिया सवार महिलाओं के लिए हेल्मेट को अनिवार्य कर दिया है. अब तक महिलाएं सड़कों पर मरें, गिरें, चोट खाएं, अपना हाथ-पैर तुड़वाएं, इससे सरकार को कोई सरोकार नहीं था, परंतु अचानक महिलाओं की सुरक्षा के प्रति सरकार का सरकारी प्रेम जागृत हो गया है. समाज में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं, यह दीगर बात है, मगर उन्हें सड़क पर, दुपहिया वाहन में बैठते वक्त सुरक्षित तो होना ही चाहिए. और, हेल्मेट उन्हें किस तरह सुरक्षित रखेगा, जैसा कि इससे पहले वाली लाइन में कहा गया है, भले ही यह दीगर बात हो, परंतु इस अनिवार्यता का दूरगामी प्रभाव हर घर, प्रांत और देश की इकॉनामी में होगा. पॉजीटिव होगा या निगेटिव, इसका ऑकलन तो भविष्य करेगा परंतु आज देश, प्रांत, समाज और व्यक्ति को इससे जूझना होगा.

आइए, देखें कि होगा क्या?

अचानक ही बाजारों में, मॉल में, और आपके मोहल्ले के नुक्कड़ में किराना की दुकानों में हर जगह हेल्मेट ही हेल्मेट नजर आने लगेंगे. वो भी बोरिंग काले और धूसर रंग के नहीं, बल्कि रंग बिरंगी, हजारों लाखों डिजाइनों में. इतने कि दुकानों में जगह नहीं होगी, मॉल हेल्मेटों से अटे पड़े रहेंगे. अभी तक होता यह था आप जहाँ भी जाते थे, पाते थे कि बाजारों में हर तरफ महिलाओं के परिधानों की दुकानें ही ज्यादा नजर आती थीं, अब हेल्मेट की दुकानें भी नजर आने लगेंगी. होगा यह कि नुक्कड़ का किरानी भी दाल-चावल के साथ चार दर्जन हेल्मेट भी बेचने के लिए रखेगा. परंतु – सभी लेडीज़ टाइप.

 

आपको अपने घर में एक अदद आलमारी अलग से रखनी होगी. जिसमें हर साड़ी और हर सलवार सूट के रंग से मैच करता हेल्मेट भरा होगा. हर महीने दो जोड़ी हेल्मेट खरीदना अनिवार्य होगा. या तो कोई छः माह पहले खरीदा गया हरे रंग का हेल्मेट आउट ऑफ फैशन हो गया होगा तो उसका रिप्लेसमेंट, नया फ़ैशनेबुल हेल्मेट लेना होगा या फिर बाजार में उस रंग का नए फ़ैशन का हेल्मेट आया होगा जिसे लेना आवश्यक होगा.

हेल्मेट का राज्य और देश की इकॉनामी में अच्छा खासा योगदान होगा. कई बड़े उद्योग खुलेंगे, तो कुटीर उद्योगों की चांदी हो जाएगी. स्थानीय डिजाइनरों से लेकर पेरिस के डिजाइनरों की हेल्मेट श्रृंखलाएं सुपर मॉल्स में मिलेंगीं. लक्मे फ़ैशन वीक में हेल्मेट एक अदद जरूरी आइटम होगा और रोहित बल जैसे फ़ैशन डिजाइनर के डिजाइन किए गए हेल्मेट प्रीमियम दामों में मिलेंगे, और उन्हें बाई इन्विटेशन ही खऱीदा जा सकेगा. ऐसे कस्टमाइज़्ड हेल्मेटों को पहन कर सड़क पर निकलने का अपना अलग ही मजा होगा. कहना नहीं होगा कि हेल्मेट के रूप-रंग-कीमत-डिजाइन-डिजाइनरों आदि पर स्त्री समूहों से लेकर मीडिया में बातचीत, बहस आदि की धुंआधार शुरूआत तो होगी ही, कुछ डेडिकेटेड चैनल्स भी आएंगीं और प्रकाशन संस्थाएं भी हेल्मेट टुडे जैसी सफल पत्रिकाएं प्रकाशित करने लगेंगी.

 

मामला स्त्रियों के हेल्मेटों के अनगिनत रूप-रंग की तरह अनगिनत खिंच सकता है. पर, आपने कभी गौर किया है कि पुरुषों के लिए हेल्मेट कैसे होने चाहिएं?

यदि पुरुषों के हेल्मेट में इलेक्ट्रॉनिक गजेट्स एम्बेड कर दिए जाएं तो यह भी सफल हो सकता है और बिना किसी प्रयास और कोर्ट ऑर्डर के हर पुरुष हेल्मेट लगा सकता है. यही नहीं, वो दो-दो हेल्मेट लेकर घूम सकता है. पुरुषों के हेल्मेटों में जीपीएस सिस्टम, एमपी3 प्लेयर, ऑडियो वीडियो रेकॉर्मडिंग और वॉट्सएप्प तथा फ़ेसबुक चलाने की सुविधा डाल कर देखें तो जरा!

मंगलवार, 7 अक्तूबर 2014

यह है मेरा जेबी कंप्यूटर...

इस पोस्ट के समेत, रचनाकार.ऑर्ग पर पिछले चार दिनों में प्रकाशित की गई पोस्टें इस जेबी कंप्यूटर के जरिये की जा रही हैं. फॉन्ट परिवर्तन में थोड़ी सी समस्या आ रही है और मोबाइल ब्लॉग क्लाएंट की सीमित सुविधाओं के कारण आ रही समस्याओं तथा छोटे कीबोर्ड के कारण होने वाली असुविधाओं के अलावा और कोई तकनीकी समस्या नहीं है.

इस छोटे कीबोर्ड में छोटा टचपैड भी है जो पेज नेविगेशन को आसान बनाता है.

अतः आपके पास होता है स्मार्टफोन नहीं, बल्कि फोन करने की अतिरिक्त सुविधा सहित एक परिपूर्ण जेबी कंप्यूटर!

टेक्नोलॉजी की जय हो!

शनिवार, 4 अक्तूबर 2014

धन्यवाद, और अलविदा लोटस १२३

यह मेरा पहला कंप्यूटर प्रोग्राम था जिसे मैंने सीखा था. इसे सिखाने वाला बंदा दूसरे शहर से आता था, और तब, फ्लाइंग अवर की तरह उस शिक्षक के पास १०० से अधिक घंटे का कंप्यूटिंग अनुभव था.

एक बात और, इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पहले साल इसके लिए १० लाख डॉलर विक्रय का लक्ष्य था, परंतु हासिल हुए थे ५४० लाख!

धन्यवाद और अलविदा लोटस १२३. मेरा पहला कंप्यूटर प्रोग्राम.