टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

नया रुपया पुराना रुपया



इधर मैंने वह खबर टीवी पर देखी,  उधर मेरे दिमाग का हाजमा खराब हुआ था. मुझे रात में हजारों सूरज दिखाई देने लगे थे. सुबह ही मैंने एटीएम से पूरे पाँच हजार रुपए निकलवाए थे – पाँच पाँच सौ के पूरे दस नोट. वे अब मुझे चिढ़ाते से प्रतीत हो रहे थे. रात बारह बजे के बाद से वो महज कागज के टुकड़े भर रह जाने वाले थे.

रॉबर्ट के हाथ में भी टीवी का रिमोट था. उसके टीवी में भी, तमाम चैनलों में वही सुर्खियाँ थीं. वह भी वही खबर देख सुन रहा था. खबर सुन कर उसकी भी आंखें फटी रह गई थी. वह भी घबरा गया था. अलबत्ता उसके घबराने की वजह मुझसे जुदा थी. वह भागा. भागकर अपने बॉस लॉयन के पास पहुँचा था. पसीने से सराबोर, हाँफते हुए उसने लॉयन से फरियाद की थी – “बॉस अब अपना क्या होगा? सरकार ने देश में पुराने नोट बंद कर दिए हैं और बदले में नए नोट चलाने का फैसला कर लिया है. इस तरह तो हमारा धंधा चौपट हो जाएगा. मार्केट में हमारे फ्रेश नक़ली नोट जो असली कटे-फटे, सड़े-गले वोटों की तुलना में ज्यादा आथेंटिक दिखते हैं उसका तो डिब्बा ही गोल हो जाएगा. ऊपर से बहुत सारा माल मार्केट में आने को तैयार है उस स्टाक का क्या होगा? हम तो कहीं के न रहेंगे”

लॉयन हँसा था. वह भी टीवी के सामने जमा हुआ था. वह भी वही समाचार देख रहा था. परंतु  उसके चेहरे पर हमेशा मौजूद रहने वाली कुटिलता और बढ़ गई थी. वह बोला था – “बेवकूफ़ ! सरकार ने बहुत दिनों बाद यह एक अच्छा काम किया है. दरअसल बिजनेस का चार्म इधर खत्म होता जा रहा था. लाइफ़ में कोई चैलेंज साला बचा ही नहीं था. अब आएगा मजा. असली चैलेंज का असली मजा. जल्द से जल्द इन नए नोटों के असली से भी असल लगने वाले नकली नोटों को छापना और चलाना. अभी तक तो हर ऐरा-गैरा, पाकी-ए-टू-जैड गैंग इन पुराने नोटों का नकल छाप लेता था और मार्केट में चला डालता था. नए नोट चैलेंजिंग है, सुना है कि इसमें चिप लगा है, ट्रैकिंग डिवाइस है, कैमरा है, न जाने क्या क्या है. अब कोई बनाए इनकी नकल! हमारे सिवा किसी के पास इस तरह की तकनीक मिलना मुश्किल है. मोना डार्लिंग वाह ! मजा आ गया. लॉयन के बिजनेस एम्पायर के लिए एक और स्कोप मिल गया है. अब तो हम इसकी तकनीक आउटसोर्स कर और ज्यादा बिजनेस करेंगे”

इस तरह लॉयन ने रॉबर्ट का कन्फ्यूजन दूर कर दिया था. इधर नए रुपए के संबंध में मेरा भी सारा कन्फ्यूजन दूसरे दिन ही दूर हो गया था. पुराने नोटों के चलन से बाहर होने के कारण बाजार में नए नोटों की भारी डिमांड हो गई. लिहाजा उसकी भारी कालाबाजारी शुरू हो गई. नए नोटों के बंडल ऑन में बिकने लगे. किसी जमाने में सिनेमा टिकटों की कालाबाजारी जैसी होती थी वैसी इन रुपयों की काला बाजारी होने लगी. भ्रष्टाचार और कालाधन मिटाने के चक्कर में सरकार ने देश की मासूम जनता के हाथ में भ्रष्टाचार करने का एक और सरल किस्म का, आसान सा औजार थमा दिया था. जिधर, जिस बैंक में निगाह डालो, उधर लोग लाइन में लगे थे और कमीशन लेकर एक दूसरे के नोट अदला-बदली कर रहे थे और अपने सुप्त-गुप्त खातों को किराए पर प्रस्तुत कर रहे थे. तीस प्रतिशत में तो आप चाहे जितना पुराना रुपया नए रुपए से बदल सकते थे. टार्गेट पूरा करने के चक्कर में बेचारे जिन बैंकरों ने अपनी जेब से दस रुपल्ली खर्च कर, ऐसे लोगों को पकड़-पकड़ कर, जिनके पास शाम की दारू के पैसे के लाले हमेशा बने रहते थे, जन-धन खाते खुलवाए थे उनमें अचानक, नामालूम कहाँ से पैसों की बरसात होने लगी थी. बैंकों में पिछले दरवाजे का उपयोग बढ़ गया था, और विशिष्ट कस्टमर सेवा का प्रचलन बढ़ गया था. जिन लोगों ने पूरी जिंदगी अरूणाचल प्रदेश, सिक्किम और नागालैंड का नाम तक नहीं सुना था, वहां के लिए चार्टर्ड प्लेन बुक कर फेरियां लगाने लगे थे.

अचानक बहुतों का जमीर भी जाग गया था. बड़े अकड़ वाले अफसर और नेता अचानक रिश्तेदारी निभाने लग गए थे. चार्टर्ड अकाउंटैंट और बैंकर्स को जिन्हें लोग साल में एकाध बार भी दुआ-सलाम नहीं करते थे. अचानक सबके दुलारे बन बैठे. हर कोई उनसे रिश्तेदारी निभाने, निकालने और जमाने में लग गया था.

इधर हफ़्ते भर की मशक्कत के बाद, एटीएम से निकाले अपने इकलौते दोहजारी नए नोट के साथ सब्जी खरीदने गया तो ठेले वाले ने मुझ पर हिकारत भरी नजर डाली और कहा – या तो खुल्ले लाओ या फिर फैटीएम से पेमेंट करो. संदेश साफ था – या तो जुगाड़ कर चिल्लर ले आओ या फिर अपग्रेड हो जाओ.

लगता है नए रूपए ने भारत को सचमुच बदल दिया है. एक नए भारत का निर्माण हो रहा है. नई इकॉनामी, नए प्रयोग, नए-नए रास्ते और नई-नई रिश्तेदारियाँ.

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