टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

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आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि- आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (14-10-2016) के चर्चा मंच "रावण कभी नहीं मरता" {चर्चा अंक- 2495} पर भी होगी!
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

कुछ कच्चे होंगे कुछ पके , भूरा कद्दू अलग है जिसका पेठा बनता है ,स्वाद सबका एक सा ही होगा है तो कद्दू ही .

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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