ज़ूटोपिया - फ़िल्म समीक्षा - मनोरंजक, शिक्षाप्रद - जरूर देखें, दिखाएँ

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शायद यह मेरी पहली फ़िल्म समीक्षा है.

आमतौर पर मैं फ़िल्में नहीं ही देखता. देखता हूँ तो थोड़ा छांट कर, थोड़ा खोजबीन कर, और वह भी आधी अधूरी - पूरे ढाई तीन घंटे फ़िल्म झेलने का सब्र मुझमें शायद नहीं है. जब फ़िल्म शोले लगी थी, कोई छः माह चली थी, और शहर के तमाम बंदों ने तब उस फ़िल्म को कोई दो-दो, तीन-तीन बार देखा था, तब भी मैंने शोले नहीं देखी थी.

यह भूमिका बतानी इसलिए भी जरूरी थी क्योंकि हाल ही में मैंने एक फ़िल्म देखी - ज़ूटोपिया.

डिज़्नी की एनीमेटेड फ़िल्म 3डी में है. एनीमेशन भले ही अवतार, फ़ाइंडिंग नेमो,  रियो या टिनटिन जैसा कमाल का न हो, परंतु फिर भी है बहुत धमाल. दृश्य खूबसूरत हैं, चरित्र-चित्रण बेहद लाजवाब और एक से बढ़कर एक मनोरंजक. जो कमाल की चीज है वो है स्टोरी लाइन और कसी हुई स्क्रिप्ट, साथ में हर दृश्य में हास्य-व्यंग्य का जोरदार तड़का. त्रिआयामी कल्पना और चित्रण भी यदि बहुत अच्छे (माने अवतार के स्तर के) नहीं हैं, तो, फिर भी अच्छे तो हैं ही.

कोई डेढ़ घंटे की यह फ़िल्म अपने पहले दृश्य से आपको बांध लेती है और फिर जब अंत में टाइटल के साथ फ़िल्म का क्लोजिंग गीत आता है तो पता चलता है कि अरे, फ़िल्म तो खत्म हो गई! फ़िल्म जूडी हॉप्स नामक खरगोश जो कि पुलिस ऑफ़ीसर हैं और निक वाइल्ड नामक लोमड़ी जो कि एक ठग है के इर्द-गिर्द घूमती है और ड्रामा, इमोशन और एक्शन के कई दौरों के बाद फ़िल्म सुखांत होती है.

 

फ़िल्म को यदि आईमैक्स 3डी में देखें तो आनंद और अधिक आएगा. यदि आप इसे सामान्य थियेटर या टीवी या सीडी में देखेंगे तो हो सकता है कि उतना मजा नहीं आए.

 

तो, इससे पहले कि यह थियेटर से उतरे, देख डालिए. बल्कि अपने परिवार के सभी सदस्यों को दिखाइए. क्या कहा? यह मूवी बच्चों की है? जी नहीं! यह पूरे परिवार के लिए है. शर्तिया पैसा वसूल. बच्चे तो मजे करेंगे ही, बड़ों को भी उतना ही आनंद आएगा. भई, मुझे तो बहुत मजा आया. बहुत दिनों बाद ऐसी फ़िल्म देखी.

टिप्पणियाँ

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (07-03-2016) को "शिव का ध्यान लगाओ" (चर्चा अंक-2274) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं

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