रविवार, 13 मार्च 2016

भद्र स्त्रियों के लिए अति-आवश्यक 10 गॅजेट

image

श्रीमती फ़नीबोन्स (ट्विंकल खन्ना)

(संडे टाइम्स में छपा ट्विंकल खन्ना का यह व्यंग्य बेहद मजेदार है. हमारे जैसे गॅजेट प्रेमियों के लिए खासतौर पर. इसका भावानुवाद साभार -  संडे टाइम्स व ट्विंकल खन्ना - पेश है)

दैव की तरह इस साल भी महिला दिवस आया और अपनी चाल चलकर चला गया. इस बीच महिलाओं से लेकर पुरुषों और दुनिया के दीगर तमाम चिंतकों ने स्त्रियों की दशा दिशा पर हर तरह के चिंतन किए, चहुँ ओर प्रकाश डाले, और, स्त्रियों के समान-अधिकार जैसे मसलों-मामलों को अगले साल के चिंतन के लिए फिर से, जहाँ का तहाँ छोड़ दिया. अब चूंकि चहुँ ओर तमाम मुद्दों पर विचार-विमर्श का दौर समारोह पूर्वक सम्पन्न हो गया है, मैं कुछ छुद्र चीजों की चाहत तो कर ही सकती हूँ. नीचे मेरी इच्छा-सूची है, जिसमें दुनिया के तमाम एलन मस्क को चुनौतियाँ है कि भाई, तुमने अपने आमोद-प्रमोद से लेकर उपयोग-दुरूपयोग के तमाम गॅजेट तो बना लिए, और रोज नई चीजें बनाए जा रहे हो, जरा हम औरतों की जरूरतों का भी तो खयाल रखो, और कुछ ये गॅजेट हमारे लिए भी तो बनाओ -

1 अंतर्निर्मित लेज़र युक्त आतशी शीशा – यह गॅजेट स्त्रियों के लिए, सदियों से, सदा सर्वदा जरूरी रहा है, परंतु खेद है कि अब तक इसका आविष्कार नहीं किया गया है. पुतिन के अत्याधुनिक एस-400 मिसाइल टेक्नोलॉज़ी का प्रयोग भले ही करना पड़े, यह गॅजेट कुछ ऐसा बने कि देखते ही देखते आपके चेहरे या ऊपरी होठों में एक रात में उग आए बाल के एक महीन अंकुरण को भी पल भर में सदा सर्वदा के लिए मिटा डालने में सक्षम हो. वो भी दर्द और किसी परेशानी के बिना. शीशा हाथ में लिया, चेहरे को, बाहों को या सिर, भौंह और पलकों को छोड़कर जहाँ कहीं भी शरीर में बाल होने की संभावना हो, स्कैन किया और काम खतम. फिर रेजर क्या, और थ्रेडिंग क्या!

2 सेनिटरी नैपकिनों में वाइब्रेटिंग अलार्म – ठीक है, ठीक है, वाइब्रेटिंग भले ही न हो जो कि हमें किसी और दुनिया में ले जाने वाली चाल मान लिया जाए, परंतु एक ऐसा अलार्म तो हो जो आपके स्मार्टफ़ोन या स्मार्टवाच से सिंक हो जाए और ये चेतावनी संदेश नोटिफ़िकेशन में बताए कि मोहतरमा, आपका सेनिटरी नैपकिन आने वाले दस मिनट के भीतर ओवरफ्लो होने वाला है, इसलिए होशियार! इससे हमें उन खास दिनों में, ‘सब ठीक-ठाक तो है कि नहीं’ यह जाँचने के लिए, हर घंटे आधे घंटे बाथरूम की ओर दौड़ लगाने से मुक्ति तो मिलेगी.

3 इम्प्लान्ट होने वाला विचार-शून्यक माइक्रोचिप – जब, जहाँ जरूरत हो, यह आपके मस्तिष्क को विचार-शून्य बना दे, जिससे यह हम एक्स-वाई क्रोमोज़ोम युक्त विशिष्ट हस्तियों को अति विशिष्ट बना दे जिसमें हमें देख-भाल कर भी कुछ भी न सोचने देने की सुविधा मिल जाए. इससे स्त्री जगत की बहुत सी समस्याओं का समाधान चुटकी में मिल जाएगा. उदाहरण के लिए पार्टी में लाल ठीक रहेगा कि पीला कि नीला कि नीरा के गिफ़्ट किए ड्रेस के साथ सैंडल की हरी जोड़ी ठीक रहेगी कि चप्पल, और ये जमा तो बैग या क्लच कौन सा ठीक रहेगा? फिर, भोजन में आईसक्रीम खाएँ न खाएँ कि रबड़ी मलाई में कितनी कैलोरी होगी... उफ्फ! इतनी समस्याएँ? यदि ऐसे समय हम विचार शून्य हो जाएं तो जो सामने आ जाए वही पहन लें, जो सामने आए वही खा पी लें तो न केवल सबके लिए नया फैशन स्टेटमेंट होगा, बल्कि फैशन भी हर दूसरे तीसरे दिन बदलने लगेगा. चेंज का चेंज और सुविधा की सुविधा.

4 टॉगल बटन युक्त हाई हील – ताकि जब जी चाहे, फ्लैट चप्पल-सैंडल बन जाए, और जब जरूरत हो, हाई हील बन जाए. भई, जब खूब सारी सीढ़ियाँ चढ़नी हो, आस-पास इंप्रेशन मारने को कोई मौजूद न हो, जरा दूर पैदल चलना हो तो अपनी एड़ी सुजाने और पिंडलियों में दर्द पैदा करने की क्या तुक? ऐसे में एक बटन दबाओ, अपने सैंडल को फ्लैट, सपाट बना लो. और जब पार्टी हाल में पहुँच जाओ तो हाल में घुसने से पहले बटन दबा लो और अपनी ऊँचाई में पाँच इंच की बढ़ोत्तरी कर लो ताकि पुरुषों से कंधे से कंधा मिला सको. हे! भगवान, अब तक किसी आविष्कारक ने ये सोचा क्यों नहीं?

5 झूठ बोलने वाली वज़न मशीन – यह तो आसान होगा? फिर अब तक मार्केट में आया क्यों नहीं? वैसे भी कोई बड़ा झूठ बोलने की जरूरत नहीं है, नहीं तो मामला गड़बड़ा सकता है कि क्या चाँद पर पहुंच गए हैं जो कि उसकी ग्रेविटी के हिसाब से वज़न बता रहा है. बस, गाहे बगाहे किलो दो किलो कम बता दे तो हम स्त्रियों का काम हो जाए, और अपना दिन बन जाए, और शायद चार दहीभल्ले अतिरिक्त खाने की इच्छा-पूर्ति शांति और आनंद के साथ कर लें!

6 सासु माँ की जासूसी करने वाला ड्रोन – कुछ लोगों के लिए यह थोड़ा अतिरेकी आविष्कार हो सकता है, परंतु जब आपको यह वाक्यांश “हाँ, आप सही कह रही हैं मम्मी जी” बारंबार, दिनभर, अंतहीन बोलना पड़े तो इससे मुक्ति पाने के लिए आप दुनिया जहान का कोई भी काम करने को न तैयार हो जाएँ? ऊपर से आपको ये भी डर लगा रहता है कि आपके किस अगले कदम पर अगला क्या नुक्स निकालने वाला है. ऐसे में यह मशीन आपको आगाह कर सकता है कि सावधान! आपकी सासू माँ आ रही हैं, उनके आने से पहले कोई काम निकाल कर सीन से फटाफट निकल्लो!

7 दो साईबॉर्ग – रोबॉटिक - हाथ – दुनिया की हर स्त्री के लिए बेहद जरूरी. खासतौर पर शाम के उन तीन घंटों के लिए जब आपके बच्चे स्कूल से घर आते हैं तो उन्हें नाश्ता कराना होता है, उनके होमवर्क चेक करने होते हैं, साथ ही शाम को पतिदेव के आने पर नाश्ता देना होता है, ऐसी चाय बनकर देना होता है जो कभी भी उनके स्वयं के कोई एक दशक पूर्व अपने स्वयं के हाथों बनी चाय जितनी सुस्वादु कभी नहीं होती, और रात्रि के लिए खाना बनाना होता है. ऊपर से अपने चेहरे पर मुलतानी मिट्टी में मिलाया हुआ विशेष हर्बल फेस पैक भी 10 मिनट के लिए लगाना होता है ताकि उम्र की पड़ रही लकीरें जरा 10 वर्ष की कम दिखें. ये सब पढ़कर आपको भी हैरत हुई होगी न कि हम स्त्रियाँ इतना सारा काम हाड़-मांस के केवल दो हाथों से अब तक कैसे कर लेती रही हैं?

8 अपनी आँखों की रेटिना में अंतर्निर्मित प्रोजेक्टर युक्त डिजिटल वीडियो रेकॉर्डर – पुरुषों को उनकी औकात दिखाने, उनकी इच्छित तौर पर भूली हुई याददाश्त वापस लाने के लिए यह बेहद जरूरी गॅजेट है. जब वो ये कहें कि आप कबकी, किस दिन की, कैसी बात कर रही हैं, मुझे तो बिल्कुल याद नहीं तो उसके चेहरे पर अपनी रेटिना के प्रोजैक्टर से उस समय के वीडियो रीप्ले फेंक मारें. और बताएँ कि उस फलां दिन आपने मुझे वेजिना मोनोलॉगस दिखाने के लिए थियेटर ले जाने का वादा किया था, कुत्ते को डॉक्टर के पास टीका लगवाने ले जाने का कहा था, सप्ताहांत चाचू के घर जाने का प्लान बनाया था, आदि आदि और इनमें से एक भी नहीं किया और कहते हो कि ये कब कहा था, कब प्रॉमिस किया था. देखो – देखो – ये कब कब कहा था, कब प्रॉमिस किया था!

9 अंतर्निर्मित सुई युक्त पेन – सदा साथ रखने योग्य इस पेन की खासियत यह होगी कि जब कोई पुरुष आपके सम्मान को चोट पहुँचाने की कोशिश करे, आपकी बात नहीं सुने, अपनी कहे, और अपनी वाली पे उतर आए, तो इस पेन से उस पुरुष पर निशाना लगाएं, और बटन दबाएँ. ट्रंक्विलाइज़र से डूबी एक सुई उसके गले में चुभेगी और तुरंत ही दवा के रिएक्शन से उसे खुजली मचेगी और फिर आप विजयी मुस्कान फेंक कर कह सकेंगी – देखो, तुम्हारे अपने सड़ियल विचार से तुम्हें खुद खुजली होने लगी!

10 दिमाग को ठंडी करने वाली गोली – अब जबकि यह लेख लिखा जा रहा था तो मन सदैव की तरह अपराध-बोध से ग्रस्त था. दिमाग में तमाम तरह के दीगर विचार दौड़ रहे थे – यह समय तो मेरे पढ़ने का था, मुझे बच्चे को कहानी पढ़कर सुनानी थी, बेटे को होमवर्क करवाना था, रात्रि भोजन के लिए तैयारी करनी थी, और ये सब पहले करने के बाद, सब लोगों के सो जाने के बाद मुझे यह काम करना था!

तो, ऊपर दिए गए तमाम आविष्कार और गॅजेट यदि बन भी जाएँ, और हमारा जीवन आसान हो जाए, तब भी इस अपराध-बोध के कारण चैन हासिल नहीं होगा. तो, सबसे पहले हमें अपने अपराध-बोध से बाहर निकलना होगा. उस अपराध-बोध से जिससे हर स्त्री ग्रस्त होती है – जन्म लेते ही. इसी अपराध-बोध के चलते हम स्त्रियाँ मां होती हैं, बहन होती हैं, पत्नी होती हैं, बेटियाँ होती हैं, मगर हम ‘हम’ कभी नहीं हो पाती.

इसलिए, मेरे विचार में हमें खुद अपने दिमाग में एक ऐसी गोली बनानी चाहिए जो हमारे उस अपराध-बोध को खत्म कर सके, मार सके और हम पुरुष प्रधान समाज में सदियों से की जा रही स्त्रियों की कंडीशनिंग से बाहर निकल सकें. हम स्त्रियों में दैवीय क्षमता है नजरों को पहचानने की, मगर शायद अब समय यह है कि हम अपने अपराध-बोध को पहचानें और उससे बाहर आएँ.

2 blogger-facebook:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (14-03-2016) को "एक और ईनाम की बलि" (चर्चा अंक-2281) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  2. आखिरकार ट्विंकल जी ने हँसा कर ही दम लिया | Beauty with brain व्यंग्य लेखन में सहजता और प्रवाह सराहनीय है | रविजी इसे अपने ब्लॉग पर शेयर करने के लिए धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
कृपया ध्यान दें - स्पैम (वायरस, ट्रोजन व रद्दी साइटों इत्यादि की कड़ियों युक्त)टिप्पणियों की समस्या के कारण टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहां पर प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

---------------------------------------------------------

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------