टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

अब मेरा क्या होगा कालिया?

251 रुपल्ली के फोन की बुकिंग तो बंद हो गई। अब हमारा क्या होगा।

हम भी एक अदद खरीदने वाले थे। काम करता तो ठीक नहीं तो गले में टांगने के काम तो आता ही आता। सदी का सबसे बड़ा चुटकुला समझ लोग देखते ही बेतहाशा हंसते तो। खै़र।
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दो सौ इक्यावन लगे, फोन बुकिंग आरम्भ।
दिखा करोड़ों का यहाँ, बेमतलब का दम्भ।
बेमतलब का दम्भ, दर्जनों बुक करवाये।
नोचे बिल्ली खम्भ, फोन आये ना आये।
मुफ्तखोर उस्ताद, दूर रहता है कोसों।
कौड़ी करे न खर्च, कहाँ इक्यावन दो सौ।।

दो सौ इक्यावन लगे, फोन बुकिंग आरम्भ।
दिखा करोड़ों का यहाँ, बेमतलब का दम्भ।
बेमतलब का दम्भ, दर्जनों बुक करवाये।
नोचे बिल्ली खम्भ, फोन आये ना आये।
मुफ्तखोर उस्ताद, दूर रहता है कोसों।
कौड़ी करे न खर्च, कहाँ इक्यावन दो सौ।।

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