काम के बोझ का मारा

सुप्रीम कोर्ट बेचारा!
और क्यों न हो.  सरकार (माने सरकारी बाबू ) ही सबसे बड़ी मुकदमेबाज है.

एक उदाहरण है -  मप्र में उच्च शिक्षा विभाग में आपाती नियुक्त सहायक प्राध्यापकों के नियमितीकरण का, जो पिछले पंद्रह साल से ज्यादा से हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में अपील पर अपील में चल रही है. जबकि हर बार हर कोर्ट सरकार के विरुद्ध निर्णय देती रही  है. परंतु सरकार कोई न कोई बहाना बनाकर तारीख पर तारीख,  तारीख पर तारीख लगवाने में ही लगी हुई है. 

ऐसे सैकड़ों, हजारों उदाहरण हैं.

मुझे सुप्रीम कोर्ट से पूरी सहानुभूति है!

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