मरने के लिए देश में सबसे शानदार जगह कौन सी है?

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कल अखबार था रवि,

आज हो गया है रद्दी।

सर्टिफ़िकेट जारी हो गया है कि पैदा होने के लिए अपना एमपी पूरे देश में सबसे खराब, सबसे रद्दी जगह है. अब एमपी में पैदा तो हो लिए, जिस पर अपना कोई दखल नहीं था. सोचते हैं कि मामले को कम्पनसेट करने के लिहाज से अब कम से कम मरने के लिए तो सबसे शानदार जगह का जुगाड़ पहले से क्यों न कर लें!

जैसे 'नेता' शब्द एक गाली के रूप में प्रचलित हो गया है, उसी तरह से एमपी वाला के भी बदलने के खतरे हैं. किसी को बताओ कि भोपाल, एमपी से हूँ, तो वो दन्न से पूछेगा - क्या पैदा भी वहीं हुए थे? या नहीं भी पूछेगा तो मन में कहेगा ही - साला यहीं, इस सबसे खराब जगह में पैदा भी हुआ होगा!

इस खतरे से बचने के लिए संभावित माता-पिताओं को डिलीवरी के समय एमपी से अन्यत्र कहीं ले जाना चाहिए. भले ही एमपी का बार्डर शामगढ़ क्यों न हो. रद्दी जगह में पैदा होने के ताउम्र मलाल या लांछन से तो बच सकेंगे. माता पिताओं को यह संतुष्टि रहेगी कि उन्होंने अपने बच्चे के लिए इतना कुछ किया और बच्चे भी अपने माता-पिता का अहसान मानेंगे कि उन्होंने रद्दी जगह पैदा होने से बचाया.

पर, जो आलरेडी रद्दी एमपी में पैदा हो गए हैं, उन्हें अपना आखिरी सांस लेने के शानदार स्थान का जुगाड़ कर लेना चाहिए. नहीं तो लोग बोलेंगे - साला पैदा भी रद्दी जगह हुआ और मरा भी रद्दी जगह. कम से कम किसी शानदार जगह तो जाकर मरता!

एक बार एक शादीशुदा रचनाकार ने शाइरी ठोंकी - मेरी तो ख्वाहिश है कि मेरी आखिरी सांसें उनके आगोश में निकले. तो दन्न से किसी ने पूछा ये 'उनके' कौन हैं? किसी ने उनकी यह शाइरी उनकी पत्नी तक पहुँचा दी. नतीजतन उन रचनाकार महोदय को अपनी वर्तमान सांसें लेना भी भारी पड़ गईं.

इस खबर के मुताबिक अगर आप भारत में गोआ और मणिपुर के अलावा कहीं भी अन्यत्र पैदा हुए हैं, तो आप भी मेरी तरह ही रद्दी जगह में ही पैदा हुए हैं. रद्दी का मामला थोड़ा ऊपर नीचे है, उन्नीसा-बीसा है तो क्या हुआ, है तो रद्दी जगह ही. तो आप भी मेरी तरह मामले को कम्पनसेट करने के लिहाज से मरने के लिए शानदार जगह का जुगाड़ पहले से क्यों नहीं कर के रख लेते?

पैदा होने और मरने के शानदार और सबसे रद्दी जगहों की चर्चा तो हो गई. मगर ये मौजूं सवाल तो हाल फिलहाल जीने के लिए है बंधु. आप क्या समझते हैं, आप जहाँ, जिस शहर में अभी जैसे तैसे रह रहे हैं, ले दे के जी रहे हैं,  क्या वो वाकई शानदार है या है एकदम रद्दी?

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व्यंज़ल

आऊँ कैसे तुझसे मिलने

तेरा शहर बड़ा है रद्दी

 

शहरों में नई होड़ है

कि कौन ज्यादा है रद्दी

 

देखो साठ साल में तो

संसद भी हो गया है रद्दी

 

जीना आसाँ होगा भी

ये सवाल ही है रद्दी

 

कल अखबार था रवि

आज हो गया है रद्दी

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एक टिप्पणी भेजें

हम तो हर बार गुजरते हैं...हमें तो हर बार ही अच्छा लगा।

ये नये-नये सर्वे तो जान हीं ले लेंगे

भिया ... अपन तो छाती ठोक के बोलते है की अपन MP में पैदा हुए हैं ...

देखो साठ साल में तो

संसद भी हो गया है रद्दी,bahut sundr

किसी विद्वान ने कहा था .आप अपनी रह खुद बनायें मंजिल चली आएगी . धरती स्वर्ग है नहीं हमारी सोच और काम उसे स्वर्ग से भी बेहतर बना देते हैं .

हा हा हा

कलकत्ता की दुर्गा पूजा - ब्लॉग बुलेटिन पूरी ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सब को दुर्गा पूजा की हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें ! आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

रवि महोदय इस लेख से तो हम कम से कम फायदे में है क्युकी हम अविभाजित एमपी में पैदा हुए थे जो अब छत्तीसगढ़ का रायपुर सहर है ,हम तो बच ही जायेंगे कसम से .
इतनी सुन्दर रचना के जरिये प्रेरित करने के लिए धन्यवाद्.
एमपी अजब है एमपी गज़ब है .
khotej.blogspot.in

pl check my first blog
www.hinditime.blogspot.com

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