मैं तो होशियार पैदा हुआ था, फ़ेसबुक ने मेरा सत्यानाश कर दिया!

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आई वॉज़ बॉर्न इंटेलिजेंट, फ़ेसबुक रूईन्ड मी!

एंड दैट इज व्हाय आई एम हियर...?

(पचमढ़ी के एक चाय की गुमटी का चित्र )

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हा हा सही

मेरे पास बरसों पहले ऐसा ही एक टी-शर्ट था। उसमें "फेसबुक" की जगह "एज्यूकेशन" लिखा था।

काश!कोई अब भी समझ जाये .....
आभार!

चचा गालिब के दौर मे फेसबूक न था ... नहीं तो वो भी यही कहते ... " फेसबूक ने गालिब निकम्मा कर दिया ... वरना हम भी आदमी थे काम के " ...

इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - यह अंदर की बात है ... ब्लॉग बुलेटिन

मार्क द्वारा इसे रिवार्ड मिलना चाहिए ...

यह केवल एक युवक की नहीं, पूरी पीढी की दशा का बखान है।

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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