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संतोषी प्रकृति के हैं आई आई एम के छात्र- केवल पैसे और प्लेसमेंट से संतुष्ट हो जाते हैं। :)

कुछ और महत्वपूर्ण दिखे तो सूचित किया जाये।

कौन सा ला(law) कहता है कि पैसे के लिये नहीं पढ़ना चाहिये? :)

चाहते तो हम भी ऐसा ही हैं किन्‍तु मौका नहीं मिल रहा इसलिए आदर्श बधार रहे हैं - छि:, पढाई का यह मकसद! घोर पतन! हम तो ऐसा कभी नहीं करें।

padhne aur placement hone mein kaafi antar hai...
abhi mujhe DRDO k purv director se charcha karne ka mauka mila tha,
unka yehi kehna tha ki yadi desh ka bhala karna hai to engineering chatron ko placement ki jagah research mein interest lena chahie...
unhone kahan ki har college mein 20-30% chatr, IT ya software companies mein chale jaaten hai, kyonki wo companies paisa zyaada deti hai...
Core Engineering mein lig jaana pasand nahi karte, par desh ko core engineering mein Expert logon ki zarurat hai...
unke shabdon mein, "IT sector has brought economic well being to india, but has shattered the research backbone, if this goes on for another 10 years, india will stand nowhere in scientific research community..."

हाँ अक्षत, डायरेक्टर साहब का ठीक ही कहना है. परंतु ये भी सच है कि भारत में रीसर्च क्षेत्र के लिए आवश्यक संरचना की भी बेहद कमी है. जो थोड़ा मोड़ा बचा खुचा या जुटाया गया था उसमें भी अच्छे ब्रेन की कमी होगी तो समस्या तो होगी ही

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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