आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 57

आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ

संकलन – सुनील हांडा

अनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी

347

प्रेम की भुलक्कड़ी

एक पति ने अपनी पत्नी से कहा - "तुम क्यों मेरी पुरानी गलतियों की याद दिलाती रहती हो। मुझे तो लगा था कि तुम सब कुछ भूल गई होगी और मुझे माफ कर दिया होगा।"

पत्नी ने उत्तर दिया - "मैंने जरूर तुम्हें माफ कर दिया है परंतु तुम यह कभी मत भूल जाना कि मैंने तुम्हें माफ किया है।"

348

कौआ और हंस

एक कौआ, हंस के सुंदर सफेद बालों से ईर्ष्या करता था। उसका मानना था कि हंस की सुंदरता उस पानी के कारण है जिसमें वह रहता है।

अतः उसने भी अपना घर त्याग कर तालाबों और झरनों की शरण ली। इसने बार-बार अपने पंखों को पानी में धोया परंतु सब व्यर्थ गया। उसके बाल पहले की ही तरह काले बने रहे और उसका भी जीना दूभर हो गया क्योंकि पानी में वह अपने लिए भोजन तलाश नहीं कर पाया।

जगह बदलने से किसी की प्रकृति नहीं बदलती।

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100

दो भगौड़ा कहानियाँ

वैवाहिक पंजीयक के कार्यालय में एक भारीभरकम स्त्री दनदनाते हुए दाखिल हुई और वहाँ अपना कार्य निपटा रहे पंजीयक से उतना ही भारी भरकम सवाल दागा “आपने हफ़्ते भर पहले हमारी शादी करवाई थी की नहीं?”

पंजीयक को याद आया कि उन्होंने कोई सप्ताह भर पहले इस महिला और इसके प्रेमी की शादी का पंजीयन करवाया था. पंजीयक ने उत्साह पूर्वक कहा – “हाँ, हाँ, याद आया. आप दोनों एक दूसरे के प्रेम में डूबे हुए थे और जल्द से जल्द शादी करना चाहते थे.”

“वो तो ठीक है,” उस महिला ने कहा – “लेकिन मेरा पति भाग गया है. आप इस सिलसिले में क्या करने वाले हैं?”

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एकलव्य स्कूल में एक छात्र गुमसुम सा, परेशान सा बैठा था. वह छात्र हमेशा खुशमिजाज रहता था. आज उसे गुमसुम उदास परेशान बैठे देख एक शिक्षक से रहा नहीं गया तो उससे जाकर पूछा – “बेटे तुम्हें क्या परेशानी है?”

“मेरे माता पिता” छात्र ने जवाब दिया – “मेरे पापा रात दिन काम करते हैं. ओवरटाइम करते हैं ताकि मुझे इस महंगे स्कूल में पढ़ाने के लिए भेज सकें. मेरी मां दिन भर घर में खटती रहती है ताकि दूसरे खर्चे बच सकें. वो काम वाली बाई भी नहीं रखती, और खुद ही काम करती है.”

“बेटे तो इसमें परेशान होने की क्या बात है?” शिक्षक ने सांत्वना देने की कोशिश की.

“यही तो परेशानी है” बच्चे ने आगे कहा – “मुझे भय है कि कहीं वो मुझे छोड़कर भाग न जाएँ.”

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इतिहास लिखें या बनाएँ

नेताजी सुभाष चंद्र बोस सच्चे कर्मवीर थे. आमतौर पर वे आम सैनिकों की भांति ही कार्यरत रहते थे. एक मर्तबा अनौपचारिक बातचीत में आजाद हिंद फौज के एक अफसर ने नेताजी को सुझाव दिया कि आजाद हिंद फौज का इतिहास लिख लेना चाहिए.

नेताजी ने तत्काल जवाब दिया – “पहले हम इतिहास तो बना लें. फिर कोई न कोई तो लिख ही देगा!”

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बिनाशर्त स्वीकारें

गौतम बुद्ध के पास उनका एक भक्त आया और उनसे अपनी समस्या बताई कि उनका वैवाहिक जीवन नर्क बन गया है. उनकी पत्नी अच्छी पत्नी नहीं है.

गौतम बुद्ध ने उसकी समस्या विस्तार से सुनी और कहा “तुम्हारी पत्नी अच्छी पत्नी बन सकती है, बस एक समस्या है. तुम्हें एक अच्छा पति बनना होगा.”

“मैं अच्छा पति कैसे बनूं – कृपा कर यह भी उपाय बता दें तो अच्छा होगा” उस व्यक्ति ने पूछा.

“अपनी पत्नी को अच्छी, बेहतर पत्नी बनाने का प्रयास करना छोड़ दो.”

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(सुनील हांडा की किताब स्टोरीज़ फ्रॉम हियर एंड देयर से साभार अनुवादित. कहानियाँ किसे पसंद नहीं हैं? कहानियाँ आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं. नित्य प्रकाशित इन कहानियों को लिंक व क्रेडिट समेत आप ई-मेल से भेज सकते हैं, समूहों, मित्रों, फ़ेसबुक इत्यादि पर पोस्ट-रीपोस्ट कर सकते हैं, या अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित कर सकते हैं.अगले अंकों में क्रमशः जारी...)

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