सोमवार, 9 जनवरी 2012

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 55

 

आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ

संकलन – सुनील हांडा

अनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी

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शरारती कुत्ता

एक कुत्ता बहुत शरारती और जंगली था। उसके मालिक ने तंग आकर उसके गले में घंटी लगा हुआ मोटा सा पट्टा बांध दिया ताकि वो किसी को चुपके से काट और डरा न पाए।

वह कुत्ता अपने पट्टे से बहुत इतना खुश हुआ कि पूरे बाजार में घंटी बजाते हुए घूमने लगा ताकि लोगों का ध्यान उसकी ओर आकृष्ट हो।

उसके एक पुराने और धूर्त मित्र ने उससे कहा - "तुम ज्यादा शोर न ही मचाओ तो अच्छा है। जिस पट्टे को लेकर तुम इतना इतरा रहे हो, वह अपमान का प्रतीक है न कि योग्यता का।"

बेवकूफ और मूर्ख लोग प्रायः अपने कुख्यात होने पर भी गर्व करते हैं।

344

शेर और उसके तीन सिपहसालार

जंगल के राजा शेर ने एक दिन भेड़ को बुलाकर पूछा कि क्या उसकी साँसों में से बदबू आती है?

भेड़ ने कहा - हां। यह सुनते ही शेर ने यह कहते हुए उसे काट लिया कि वह बेवकूफ है।

फिर शेर ने यही प्रश्न भेड़िया से पूछा। भेड़िए ने कहा- जी नहीं। शेर ने गुस्से में आकर यह कहते हुए उसे मौत के घाट उतार दिया कि वह चापलूस है।

फिर शेर ने यही प्रश्न लोमड़ी से पूछा। लोमड़ी ने कहा - माफ कीजिए महाराज, लगता है आपको जुकाम हो गया है जिससे आप ठीक से साँस नहीं ले पा रहे हैं।

समस्या में फंसने से बेहतर है विनम्रतापूर्वक बच निकलना।

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96

विश्वास और घड़ियाल

एक पहुँचे हुए स्वामी के आश्रम में एक आदमी पहुँचा और उन्हें अपना शिष्य बनाने की मिन्नत की.

गुरु ने उससे एक परीक्षा पास करने को कहा. गुरु ने कहा कि पास में एक नदी बहती है जिसमें ढेर सारे घड़ियाल हैं. यदि वह नदी सुरक्षित पार कर लेता है तो वह उसे अपना शिष्य बना लेगा.

वह व्यक्ति उस स्वामी के प्रति बेहद निष्ठा रखता था. उसने बिना आगा पीछा सोचे बगैर नदी की ओर दौड़ा और नदी में छलांग लगा दी. दैवयोग से उस वक्त घड़ियाल आस पास नहीं थे. शिष्य बनने की तमन्ना में उसने अपना सारा जोर जल्द से जल्द नदी पार करने में लगाई और शीघ्रता से नदी पार कर लिया.

जब वह नदी से सुरक्षित वापस आ गया तो स्वामी ने उससे पूछा कि उसे नदी पार करते समय भय नहीं लगा और क्या उसे घड़ियाल नहीं मिले?

उस व्यक्ति ने बताया कि वह तो सिर्फ गुरु का नाम जपता हुआ गया था, और उसे कुछ नहीं मालूम.

गुरु को लगा कि उसके नाम में इतना प्रताप है कि इस व्यक्ति के नदी पार करते समय घड़ियाल इसका बाल भी बांका नहीं कर पाए. ऐसा सोचकर वह स्वयं अपना नाम जपता हुआ नदी में गया. जानबूझ कर घड़ियालों से भरे क्षेत्र में गया और वहां से आराम से नदी पार करने लगा.

आराम कर रहे घड़ियालों के बीच गुरु के आने से विघ्न उत्पन्न हुआ और गुस्साए घड़ियालों ने गुरु को जल्द ही अपना ग्रास बना लिया.

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97

अकबर की 100 अशर्फियाँ

अकबर ने अपने दरबारियों से कहा “मैं आप में से किसी को 100 अशर्फियाँ खर्चने के लिए दूंगा. उसे आपको इस तरह से खर्चना होगा कि आपको मुझे 100 अशर्फियाँ पृथ्वी में, 100 अशर्फियाँ स्वर्ग में, 100 अशर्फियाँ न तो यहाँ न वहाँ और 100 अशर्फी जैसे का तैसा वापस करना होगा”

दरबारी एक दूसरे का मुँह देखने लगे. बीरबल के चेहरे पर मुस्कुराहट थी. बीरबल ने कहा – “जहाँपनाह, जैसा आप चाहते हैं, मैं वैसा ही खर्च करूंगा और वैसे ही वापस करूंगा. मुझे जल्द से जल्द अशर्फियाँ दिलवाई जाएँ.”

और बीरबल 100 अशर्फियाँ लेकर शहर के एक बहुत बड़े सेठ के पुत्र के विवाह समारोह में गया और वैवाहिक शुभकामना देते हुए शगुन स्वरूप अकबर के नाम से 100 अशर्फियाँ भेंट की. सेठ ने इसे अपना सम्मान समझा और रिटर्न गिफ्ट के रूप में बीरबल को 300 अशर्फियाँ पेश की. बीरबल ने उसमें से 100 अशर्फियों के कपड़े अकबर के नाम से गरीबों में बांट दिए. 100 अशर्फियों की पार्टी दे दी, और बाकी बचे 100 अशर्फियों को बादशाह के सामने पेश किया और सारा वाकया बताते हुये कहा – महाराज, मैंने आपके दिए 100 अशर्फियों को आपके कहे अनुसार ही खर्च किया है. 100 अशर्फियों को वैवाहिक-शगुन स्वरूप दिया जो पृथ्वी में आपको मिल गया. 100 अशर्फियों को गरीबों में बांटा जो आपको स्वर्ग में मिलेगा. 100 अशर्फियों की पार्टी दी जो यूँ ही खर्च हो गई, जो आपको न तो यहाँ मिलेगा न वहाँ. और 100 अशर्फी तो मैंने आपको जैसे का तैसा वापस कर ही दिया है.

(सुनील हांडा की किताब स्टोरीज़ फ्रॉम हियर एंड देयर से साभार अनुवादित. कहानियाँ किसे पसंद नहीं हैं? कहानियाँ आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं. नित्य प्रकाशित इन कहानियों को लिंक व क्रेडिट समेत आप ई-मेल से भेज सकते हैं, समूहों, मित्रों, फ़ेसबुक इत्यादि पर पोस्ट-रीपोस्ट कर सकते हैं, या अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित कर सकते हैं.अगले अंकों में क्रमशः जारी...)

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