टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

August 2011

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आह! अब तो उल्टी गंगा बहानी होगी. उदास रहने के बहाने ढूंढने होंगे, जुगाड़ लगाने होंगे.

 

अब तक तो हम खुश रहने के हजार बहाने ढूंढते रहे थे. जिधर देखो उधर आदमी खुश दिखाई देता है. भीतर से दुःखी भी हो तो ऊपरी तौर पर खुश नजर आने की कोशिश में लगा रहता है. और नहीं तो खुशी पाने की जुगाड़ में लगा दीखता है. अगर आप अपने आसपास नजर दौड़ाएँ तो पाएंगे कि हर आदमी खुश रहने के जुगाड़ में जी जान से लगा हुआ है. सामने कोई प्रेमी अपने नए, हाई टैक, डबल प्रोसेसर युक्त और कैपेसिटिव टच स्क्रीन युक्त लेटेस्ट एंड्राइड फ़ोन को प्रेम से निहारता हुआ, 3 जी वीडियो कॉलिंग के जरिए अपनी प्रेमिका से लाइव चैट में मस्त है, खुश है. उधर सड़क पर कोई बंदा अभी ही सर्र से अपने नए हीरो करिज़्मा को फुल थ्रॉटल से टेस्ट करता निकला है. वैसे वो जाना पहचाना सा बंदा है जो अकसर इधर से गुजरता है और भीड़ हो या खाली सड़क हर कहीं अपनी बाइक को फुल थ्रॉटल पर रखता है. उसे इसी में खुशी मिलती है. इधर अपने क्यूबिकल में आपका कुलीग अपने कम्प्यूटर स्क्रीन पर ऐंवें.कॉम में क्षणिक खुशी की तलाश कर रहा है.

 

मगर बंधु, रुकिए. ठहरिए. खुशी के पीछे पागल मत बनिए. खुशी पाने के लिए दिन-रात एक मत करिए. खुशी से आपको कई तरह से हानि पहुँच सकती है. सबसे पहले तो ये कि खुशी यूँ ही हासिल नहीं होती. खुशी पाने के लिए आपको मेहनत करनी पड़ती है, नावां कमाना होता है, बीवी-बच्चे-प्रेमिका को खुश करना होता है. हीरो करिज्मा को फुल थ्रॉटल में दौड़ाने के लिए पेट्रोल की जरूरत होती है. और, इन सब में तन मन धन की जरूरत होती है. और, सबसे बड़ा नुकसान ये कि खुशी से आपकी याददाश्त कमजोर होती है. जी हाँ, आपकी याददाश्त कमजोर होती है. कहीं ऐसा न हो कि खुशी की तलाश में आप खुद को भूल जाएँ.

 

नए शोधों से पता चला है कि उदास रहने वालों की याददाश्त तेज होती है. इसका सीधा सटीक अर्थ ये कि खुश रहने से आपकी याददाश्त कमजोर होती है. अब आप या तो खुश रह लें या फिर अपनी याददाश्त तेज कर लें. दूसरे शब्दों में, आपकी भुलक्कड़ी का सीधा संबंध आपकी खुशी से है. अभी तक आप अपनी बीवी या गर्लफ्रेंड के (बहन जी इसके उलट समझ लें,) बर्थडे भूलते रहे हैं तो इसका दोष आप अपनी खुशी को दें. अब आप जैसे भुलक्कड़ों को अपनी दशा सुधारने के लिए उदास रहना होगा और उदास बने रहने के बहाने ढूंढने होंगे.

वैसे, उदास रहने के लिए बहाने ढूंढने की जरूरत नहीं है. आप अपने आसपास की दशा-दिशा को एक बार निहार लें बस. उदास होने और सदा सर्वदा के लिए उदास बने रहने के लिए इतना ही काफ़ी है. उदास रहने के लिए तन मन धन से मेहनत करने की भी जरूरत नहीं होती.

 

यकीन नहीं होता? एक काम करिए, चलिए, पॉलिटिकल सिस्टम को ले लेते हैं. कितना गंदा, कितना खराब हो गया है ये. इस बात पर आप उदास नहीं होगें तो क्या खुश होंगे? सड़कों की हालत ले लीजिए. गड्ढे और ट्रैफ़िक जाम से तो चलते फिरते ही उदास हुआ जा सकता है. वैसे एक वजह पर्यावरण-प्रदूषण भी है खास पढ़े लिखे लोगों को सदैव, सदा सर्वदा उदास बनाए रखने के लिए. नित्यप्रति बढ़ती कीमतें तो ख़ैर, वॉरेन बफ़ेट जैसे लोगों को भी उदास बना सकती हैं तो आपकी तो औकात ही क्या!

 

जो भी हो, इस शोध से एक विकल्प तो मिला है हमें. आपका तो पता नहीं, मगर मैं अपनी बता सकता हूं. मैं खुश रहना चाहूँगा. भले ही भुलक्कड़ हो जाऊँ. और फिर, बीवी की बर्थडे भूल जाने पर बढ़िया सा बहाना भी तो रहेगा – जॉनी, गम न करो, मैं खुश रहता हूं, तुम्हें भी खुश रखता हूँ इसीलिए भूल जाता हूं. तुम भी मेरी छोटी-मोटी भूलने की गलतियों को भूल जाया करो और खुश रहा करो!

छींटे और बौछारें 

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चलिए, प्रस्ताव पास हो गया, आश्वासन मिल गया. लोकपाल की वास्तविकता अब महज चंद दिनों दूर की बात है. दिल्ली बेहद करीब है. समझिए कि हम सीमा में दाखिल हो ही चुके हैं.

 

लोकपाल बन रहा है. मगर सवाल ये है कि लोकपाल कैसा हो? बहुत ही सीधा-सा, सरल-सा उत्तर है – बिलकुल मेरे जैसा हो.

कांग्रेसी बंधु चाहेंगे कि वो पूरा, पक्का कांग्रेसी हो. भाजपाई-संघी चाहेंगे कि वो पूरा पक्का संघी हो. लेफ़्टिस्ट चाहेंगे कि वो पक्का माओवादी हो. बाम्हन चाहेगा कि वो पिछले सात पुश्त से कान्यकुब्ज हो. कायस्थ चाहेगा कि वो असल ‘लाला’ हो, और राजपूत चाहेगा कि उसके ख़ून में शुद्ध क्षत्रिय खून बहता हो. माइनरिटी चाहेंगे कि लोकपाल माइनरिटी में से ही होना चाहिए. पिछड़ों को बहुजन लोकपाल चाहिए होगा. .....

अफ़सरों का लोकपाल खांटी अफ़सर नुमा होगा. नेताओं का पुख्ता नेता टाइप. व्यापारी और उद्योग घराने तो चाहेंगे ही कि लोकपाल कोई पार्टटाइम उद्योग-पति हो. इक्वेलिटी वाले चाहेंगे कि दसों के दसों लोकपाल कम्पटीशन से आएँ. अब, कम्प्टीशन के लिए कितना जुगाड़ चलेगा ये दीगर बात है. इधर कोटा सिस्टम वाले पचास प्रतिशत से कम में नहीं मानेंगे. स्त्रीवादी चाहेंगे कि हर कैटेगरी में हर लेवल पर वर्टिकली फ़िफ़्टी परसेंट महिला लोकपाल होनी चाहिए, तभी न्याय मिलेगा. .....

 

तो, पार्टनर, आप किस कैटेगरी में हैं – मेरा मतलब आपके हिसाब से लोकपाल कैसा होना चाहिए? जरा बताएंगे? कुछ खुलासा करेंगे?

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हाजिर है आपके हिंदी ब्लॉग के लिए मुफ़्त प्रोफ़ेशनल ग्राफ़िक डिजाइनिंग सेवा. कुछ दिन पहले श्री भरत चौधरी का ईमेल प्राप्त हुआ जिसमें उन्होंने लिखा -

हिंदी ब्लॉगिंग के बढते विस्तार को देख दिल प्रसन्नता से भर जाता है। इसी प्रसन्नता से प्रेरित हो मैने निर्णय लिया है कि मै हिंदी के उत्कृष्ट ब्लॉगर्स को मुफ्त ग्राफिक डिजाइनिंग सेवा प्रदान करूंगा।
             इस हेतु आपके अनुरोध विशेष आमंत्रित है। आपके ब्लॉग की गुणवत्ता देखकर मै आपको अपनी सेवा प्रदान करूंगा।

बस, क्या था. मैंने अपना अनुरोध भेज दिया.

रचनाकार (http://rachanakar.org)  पर अभी जो हेडर है (यहाँ ऊपर दिए गए चित्र में) वो भरत जी द्वारा ही मूलतः बनाया गया है जिसमें मामूली फेरबदल कर प्रयोग में लिया गया है.

भरत जी को उनके हिंदी प्रेम व रचनाकार व छींटे और बौछारें के  हेडर तैयार करने हेतु धन्यवाद.

कृपया बताएँ कि नया डिजाइन पुराने की अपेक्षा कैसा है.

आप भी अपने हिंदी ब्लॉगों के मुफ़्त ग्राफ़िक डिज़ाइनिंग के लिए भरत जी की सेवा ले सकते हैं.

श्री भरत चौधरी से संपर्क का पता है - i.designing.u@gmail.com

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ये आभासी योजना तो, लगता है जैसे हम ग़रीबों के लिए ही बनाई गई है.

बीस हजार स्क्वेयर फ़ीट जमीन पर लैंडस्केपिंग गार्डन के साथ स्वयं के स्वीमिंग पूल युक्त पैंटहाउस का सपना मेरा सदा से रहा है. पर इतना पैसा मेरे पास कभी भी नहीं हो सकता और मेरा ये ख्वाब कभी पूरा नहीं हो सकता ये भी मुझे अच्छी तरह मालूम है.

मगर वास्तविक दुनिया में न सही, इंटरनेटी-आभासी दुनिया में, इस तरह के भव्य आभासी जमीन और बंगले का मालिक तो अब मैं बन ही सकता हूँ. वो भी कौड़ियों के मोल.

आप भी शानदार बंगले, महल, रैंच, पैंटहाउस और न जाने क्या क्या कौड़ियों के मोल खरीद सकते हैं इस इंटरनेटी आभासी दुनिया में. यहाँ तक कि पूरा का पूरा आईलैंड भी आप खरीद सकते हैं. हाँ, आभासी दुनिया में आभासी बंगले और ज़मीन खरीदने के लिए आपको रोकड़ा असली, और नक़दी लगेगा. अलबत्ता आप आभासी पैसे लिंडेन डॉलर (सेकंड लाइफ़) अथवा बिटक्वाइन का प्रयोग जरूर कर सकते हैं.

उदाहरण के लिए, नीचे दिया गया खूबसूरत आइलैंड आप मात्र 80 डॉलर में खरीद सकते हैं -

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इन आभासी प्रॉपर्टी को बेच बेच कर एंशे चुंग विश्व की पहली आभासी करोड़पति बन चुकी हैं.

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आप भी सस्ते में प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं? अजूरआईलैण्ड में (वस्तुतः सेकण्ड-लाइफ़ - आभासी गेमिंग दुनिया के अंदर) आपका स्वागत है. और ये रही ताज़ा क़ीमतें -

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है न एकदम सस्ता? तो इससे पहले कि महंगाई रानी के पैर यहाँ भी पड़ें, अपनी प्रॉपर्टी खरीद लेते हैं. और, कौन जाने, आने वाले दिनों में ये हमें भी प्रॉफ़िट दे जाए!

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देश का अन्नाकरण हो रहा है और इधर आम-आदमी का हृदय धड़क रहा है. यदि भारत में सचमुच लोकपाल आ गया, यदि सचमुच भ्रष्टाचार मिट गया तो हमारे जैसे आम-आदमी का क्या होगा? वैसे तो आम-नेता लोग पानी पी-पीकर, आँखें तरेर कर यह बताने और भरोसा दिलाने में नहीं चूक रहे हैं कि लोकपाल आ भी गया तो क्या खाक होगा. नेताओं की बातों से आम-आदमी भी थोड़ा मोड़ा ही सही आश्वस्त तो हो ले रहा है कि भारत में लोकपाल-फोकपाल जैसे कितने आ जाएँ, मगर होगा जाएगा कुछ नहीं. फिर भी, भीतर से सभी डरे हुए हैं. आम-आदमी की तरह आम-नेता भी डरे हुए हैं.

कल्पना करें कि लोकपाल आ गया. शक्तिशाली. बल्कि महाशक्तिशाली. भ्रष्टाचार जड़-मूल से समाप्त हो गया. अब आपको अचानक कहीं जाना है. ट्रेन का टिकट बाबू लोकपाल का भय दिखाकर हाथ खड़े कर देगा. ट्रेवल एजेंट लोकपाल के भय के कारण अपना धंधा बदल चुका होगा. टीटीई का सबसे बड़ा दुश्मन तो लोकपाल ही है. वो मजबूरी का नाम लोकपाल बन चुका है. उसके पास पच्चीस बर्थ खाली होंगे चार्ट में, मगर वो किसी को भी नहीं देगा. एक तो खुन्नस कि सालों (देहली बेली ने गालियों को सांभ्रांत करार दे दिया है ये ध्यान रहे,) मुझे सुविधा शुल्क के नाम पर कुछ नहीं मिलेगा तो तुम्हें बर्थ की सुविधा क्यों दूं? और, ऊपर से लोकपाल का भयंकर भय कि यदि किसी को बर्थ अलाट कर दिया और कहीं दूसरे ने कंप्लेन कर दी तो?

अन्नाफ़ैक्टर के कारण हो गया ना आपके सडन ट्रैवल प्लान का गुड़-गोबर? इसीलिए, अन्ना! वापस जाओ!!

एक और उदाहरण लेते हैं. कल्पना करें कि लोकपाल आ गया. वही, महाशक्तिशाली. अब आपको कोई प्रमाण-पत्र बनवाना है. भारत में बगैर प्रमाणपत्र तो जीना मुहाल है. हर किसी को कोई न कोई प्रमाणपत्र तो चाहिए ही होता है. स्कूल में आप पढ़ने जाते हैं तो उसे छोड़ते समय आपको ‘चरित्र-प्रमाण पत्र’ दिया जाता है. क्या कोई बता सकता है कि कोई विद्यार्थी कितना ही फेलुअर रहा हो, नशा-पत्ती करता रहा हो, सहपाठियों को मारता-छेड़ता रहा हो या सहपाठियों के बस्तों से चोरी-चकारी करता रहा हो, किसी स्कूल ने यह ‘चरित्र प्रमाण पत्र’ नहीं दिया हो? लोकपाल के आने से शायद ये भी संभव हो. मगर यहाँ हम बात दूसरी करेंगे.

तो, आपको कोई प्रमाणपत्र बनवाना है- जाति, आय, जन्म, विवाह या ऐसा ही कुछ अन्य जैसे कि ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट. अभी तो आप संबंधित विभाग में आवेदन देने की जहमत भी नहीं उठाते. एजेंटों का पता करते हैं, उनसे उनकी सेवा-शुल्क पूछते हैं, और घर बैठे आपका काम हो जाता है. थोड़े से मितव्ययी किस्म के लोग सीधे कार्यालय पहुँच कर बाबुओं से रेट हासिल कर कम में काम करवा लेते हैं. लोकपाल आएगा, तो उसका इफ़ेक्ट ये होगा कि एजेंट भूमिगत हो जाएंगे. भूमिगतों का रेट दो-गुना-चौगुना हो जाएगा. बाबुओं से सीधी बात संभव नहीं होगी. खोज-खाजकर चैनल निकालने होंगे. इसका अर्थ होगा कि आपको कार्यालयों के चक्कर पे चक्कर काटने होंगे. काम होगा, जरूर होगा, बगैर रिश्वत दिए, बगैर भ्रष्टाचार के भी होगा, मगर एक काम को होने में चार से छः महीने लगेंगे. आपके आवेदनों में कोई न कोई ऑब्जैक्शन लगा कर लौटाया जाता रहेगा और आप उसकी पूर्ति करने में लगे रहेंगे. इसका प्रतिफल होगा कि जहाँ अभी ये काम 500 रुपल्ली में सटाक से हफ़्ता भर में हो जाता है, वहीं आपको सब खर्चे मिलाकर कुल छः महीने और 2000 रुपए का फटका पड़ेगा. इसीलिए, अन्ना वापस जाओ. आम-आदमी का नुकसान नहीं करवाओ.

और, जैसा कि तमाम नेता लोग बता रहे हैं, आँखें तरेर रहे हैं कि लोकपाल आने से क्या भ्रष्टाचार मिट जाएगा? वो तो बंधु, सही है - भारत में लोकपाल क्या साक्षात् परब्रह्म परमेश्वर के आने से भी नहीं मिटेगा. बल्कि जब लोकपाल आएगा, तब भ्रष्टाचार का लेवल कई गुना ऊपर पहुँच जाएगा. अभी तो भ्रष्टाचार कर बच निकलने के कई आसान रस्ते हैं इसलिए लोग आसानी से भ्रष्टाचार कर लेते हैं. लोकपाल के कारण ठोंक-बजा-कर भ्रष्टाचार किया जाएगा, और उसके रेट आज के रेट से कई गुना ज्यादा रहेंगे क्योंकि पकड़े जाने पर बच निकलने के रास्तों को मैनेज करना ज्यादा कठिन और ज्यादा खर्चीला रहेगा. देश पर इसका भार भी ज्यादा पड़ेगा. उदाहरण के लिए, जैसे अभी तो निर्माण या जलसंसाधन जैसे विभागों में ठेके का चालीस प्रतिशत हिस्सा स्तर-दर-स्तर बंटने के लिए फ़िक्स रहता है तो लोकपाल के आने से इस सीढ़ी में एक और दावेदार की हिस्सेदारी जुड़ेगी – पाँच से दस प्रतिशत – तो अब पचास प्रतिशत हिस्सा बंटा करेगा. इसीलिए हे! अन्ना वापस जाओ!!

ये महज चंद उदाहरण हैं. आप कल्पना कर सकते हैं कि हम आप जैसे आम-आदमी को लोकपाल से कितनी समस्या होगी. कितनी नई समस्याओं से जूझना होगा. जीवन मुहाल हो जाएगा. आप जल्दबाजी में रेडलाइट जम्प मारेंगे तो ट्रैफ़िक इंस्पेक्टर 200 रुपल्ली लेकर आपको नहीं छोड़ेगा. या तो वो सीधे चालान बनाएगा जिसकी वजह से आपको कोर्ट की हाजिरी बजा बजा कर हलाकान होना होगा या फिर वो अब नए रेट 2000 पर काम करेगा. इसीलिए, हे! अन्ना वापस जाओ!!!  आप कोई भी हों - सरकारी नौकर, डॉक्टर, वकील-जज, अध्यापक, व्यापारी, ठेकेदार, पुजारी, भक्त, समाजसेवक - सब के जीवन में भूचाल आ जाएगा - इसीलिए, हे अन्ना वापस जाओ.

अपने पिछले प्रवास में खींची गई कुछ तस्वीरें. बहुत कुछ बोलती तो बहुत कुछ सोचती सी...

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ड्रीमहाउस

 

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माँ

 

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चूड़ियाँ -1

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चूड़ियाँ 2

 

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दो-स्त्रियाँ

 

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बस स्टैण्ड

 

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चूड़ियाँ 3

 

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चूड़ियाँ 4

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घर-आंगन

 

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हीरो नं 1

 

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शीर्षक-हीन

 

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धूल का फूल

 

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बस स्टैण्ड 2

 

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गुड़िया

 

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फ्रूट-बाजार

 

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हुम्म्...

 

और, अंत में ...

 

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101 ई-शिष्टाचार

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एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.

ई-शिष्टाचार – 91-100

91.    अपने संबंधों में रोबॉटिक डिजिटल प्रभाव न लाएँ. सहिष्णु, सहनीय व उदार बनें.


92.    अपने व्यक्तिगत अथवा व्यवसायिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने हेतु अपने मोबाइल के साथ-2 लैंडलाइन नंबर (यदि कोई हो) भी उन्हें दें.

93.    अपने बच्चों के इंटरनेट सर्फिंग को चुपके से मॉनीटर करने के बजाए नेट सर्फिंग  उनके साथ बैठकर करें.

94.    जिस चैनल के जरिए आपको कोई दुःखद समाचार मिलता है तो उसी चैनल का प्रयोग संवेदना संदेश भेजने के लिए भी करें.

95.    आपके कंप्यूटर अथवा लैपटॉप का स्क्रीन आपके लिए हर हमेशा निजी नहीं होता. न्यूडिटी, हॉरर अथवा हिंसा के दृश्यों की झलक आपके सहकर्मी अथवा आस-पड़ोस के यात्रियों की भावनाओं को आहत कर सकते हैं.

96.    हेडसेट लगाकर यत्र-तत्र-सर्वत्र घूमना पिछली सदी में ही आउट ऑफ़ फ़ैशन हो चुका है.

97.    यदि आपके फ़ोन, कंप्यूटर या प्रिंटर चलते चलते बंद हो जाएँ तो परेशान होकर उन्हें झटकें-पटकें नहीं. यदि वे काम नहीं कर रहे हैं तो इसका अर्थ है कि उनमें कुछ खराबी है, जिसे दूर करना आवश्यक है.

98.    डिजिटल मीडिया डाइट (कंप्यूटर-इंटरनेट) से कभी दूरी बनाएँ और यदा कदा उपवास भी रखें.

99.    अपने मोबाइल फ़ोनों को दाह-संस्कार, कक्षाओं, लाइब्रेरी, मीटिंग अथवा अन्य जहाँ कहीं भी ये दूसरों के लिए समस्या पैदा कर सकते हैं, वहाँ बन्द रखें.


100.    विभिन्न देशों में डिजिटल शिष्टाचार और डिजिटल आचार-व्यवहार-विचार भिन्न-2 होते हैं. विदेश प्रवास से पहले वहाँ के ई-एटीकेट जान समझ लें.

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101 ई-शिष्टाचार

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एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.

ई-शिष्टाचार – 81-90

81.    वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अलविदा कहते समय मुस्कुराएँ. हाथ हिलाकर टाटा-बाय-बाय भी कर सकते हैं.


82.    इंस्टैंट मैसेंजिंग के लिए अपनी सीमाएँ तय कर लें. कोई भी बीच में व्यवधान पसंद नहीं करता.



83.    अपने ऑनलाइन प्रोफ़ाइल के चित्र को आपने कब से अपडेट नहीं किया है? अपनी ताज़ा फ़ोटो वहाँ लगाएँ तथा अपने परिवार, अपने कुत्ते या अपने बद्रीनाथ धाम की यात्रा के चित्र अपने टेबल की दराज या कंप्यूटर हार्डडिस्क में ही रखें.

84.    ध्यान रखें, किसी कॉफ़ी शॉप के फ्री वाई-फ़ाई की कीमत उसके कप्पचिनो या एस्प्रेसो कॉफी में जुड़ी होती है.

85.    वाई-फ़ाई कॉफ़ी शॉप को अपने ऑफ़िस की तरह समझें और वहाँ अपने मोबाइल या लैपटॉप के साथ थोड़ा संयम बरतें. दूसरों के आराम व मनोरंजन के समय का खयाल रखें.
86.    बिना अनुमति के दूसरों के फोन या पोर्टेबल म्यूजिक प्लेयर को ब्राउज़ न करें.

87.    किसी के सोशल नेटवर्क वाल में जरूरत से ज्यादा निजता प्रदर्शित न करें. ऐसे संदेशों के लिए ईमेल का प्रयोग करें.

88.    आपके ऑनलाइन चरित्र के बारे में गूगल को सबकुछ पता होता है, और वो आपके नए जॉब के साक्षात्कार कर्ताओं को चुपके से सबकुछ बता भी देता है. इसलिए इंटरनेट पर अपना व्यवहार यथासंभव संयमित रखें.

89.    अपने नए मित्र के बारे में गूगल सर्च मारने में जल्दी न करें. पहले उसे स्वयं जान लें.


90.    कहीं घूमने, डिनर या पार्टी में गए हों तो अपने मोबाइल फ़ोन को उस खास मोड में स्विच कर लें : उसे बंद कर लें.

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101 ई-शिष्टाचार

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एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.

ई-शिष्टाचार – 71-80

71.    लेडीज़ एंड जेंट्स फर्स्ट : लोगों को अपने गीकी गॅजेट और टिमटिमा रहे अतिआवश्यक संदेश के प्रतीक चिह्न से ज्यादा महत्वपूर्ण मानें, और पहले उन पर और उनकी समस्याओं पर पूरा ध्यान दें.


72.    सम्मेलनों/वीडियो कॉन्फ्रेंस में वक्तव्य देने से पहले अपनी पूरी तैयारी पहले कर लें, रिहर्सल कर लें और अपने प्रजेन्टेशन को थोड़ा सा चलाकर देख लें.



73.    वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान आसपास के वातावरण को जाँचें कि अधिक-कम प्रकाश या पृष्ठभूमि शोर तो नहीं है.

74.    वीडियो कॉन्फ्रेंस की शुरूआत अनौपचारिक बातचीत से करें और बातचीत का माहौल प्रदर्शित करने के लिए 360 अंश का पैन शॉट भी दिखा सकते हैं.

75.    वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कैमरे की स्थिति अपने आँख के लेवल पर रखें. और बढ़िया क्वालिटी का कैमरा प्रयोग करें.

76.    कैमरे को देखकर बात करें, न कि कंप्यूटर स्क्रीन पर वीडियो को देखते हुए. कैमरे को अन्यत्र न ले जाएँ.
77.    वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कैमरे की जद में आए सभी का परिचय दें, यदि वो आपकी बिल्ली हो तब भी.

78.    वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अन्य वक्ताओं के वक्तव्य के दौरान ट्रांसमिशन को क्लीयर बनाए रखने के लिए बीच-बीच में हाँ-हूँ इत्यादि न करें.
79.    यदि आप किसी म्यूजिक वीडियो के लिए ऑनलाइन ऑडीशन नहीं दे रहे हों, तब वेब कैम के सामने अपने मूवमेंट को सीमित रखें. सही मुद्रा (पोश्चर) बनाए रखें.


80.    वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान अपने अगल बगल के व्यक्तियों से बातचीत न करें और न ही बीच-बीच में बोलकर व्यवधान डालें. सामने वाले वक्ता की बात पूरी होने के उपरांत ही बोलें.

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101 ई-शिष्टाचार

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एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.

ई-शिष्टाचार – 61-70

61.    लोगों को पहले ही ब्लॉक कर दें बजाय इसके कि उन्हें बाद में अपनी मित्र मंडली से बाहर फेंकना पड़े.


62.    मित्रमंडली से बाहर करना या बाहर निकलना उत्तम उपाय है. परंतु रिश्ता तोड़ने से पहले सभी पहलुओं की न्यायोचित जाँचपड़ताल जरूर कर लें.



63.    मित्रता निवेदन को अनदेखा करना कोई गलत बात नहीं है.चुनिंदा कनेक्शन और मंडलियाँ बनाना ज्यादा मायने रखता है बजाय भीड़ के.



64.    अपने आभासी दोस्तों से ज्यादा उम्मीदें न पालें. सोशल नेटवर्क के मित्र मंडली वास्तविक दुनिया से बेहद अलग होते हैं.

65.    कोशिश करें कि यथासंभव सभी व्यक्तिगत टैक्स्ट मैसेजों का प्रत्युत्तर दें.

66.    जब किसी को काम के लिए संदेश भेजते हैं तो उनके आराम के समय का खयाल रखें. ऐसे संदेशों को शेड्यूल भी कर सकते हैं.

67.    आवागमन, परिवहन और स्थिति की जानकारी संबंधी संदेशों का जवाब जितनी जल्दी संभव हो दें.

68.    ईमेल में एसएमएसिया संदेश व पाठ्य से दूरी बनाए रखें भले ही अपने जिगरी दोस्त को ईमेल भेज रहे हों.

69.    संदेशों में संक्षिप्त नामों यथा – डीडीएलजे, सीसीडी, डीबी ... का प्रयोग न करें. इनके अनेकार्थ निकाले जा सकते हैं.


70.    यदि आप कैप्टन जैक स्पैरो नहीं हैं, तो मीटिंग के दौरान अपने मोबाइल में आए संदेशों को टेबल के नीचे से छुपकर देखने से बचें.

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101 ई-शिष्टाचार

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एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.

ई-शिष्टाचार – 51-60

51.    आपका मोबाइल फ़ोन दूसरों से संपर्क में बने रहने के लिए है. यदि यह अकसर बंद या बिजी मिलता है या नौ-रिप्लाई होता है तो फिर किस काम का? इसीलिए इन बातों का ध्यान रखें.


52.    आप अपने ऑनलाइन फ़ोटो और अवतारों पर ध्यान दें. स्वयं फूल कर कुप्पा दर्शाने वाली फ़ोटो न लगाएँ.
53.    चित्रों, पोस्टों में टैग विषयानुरूप लगाएँ, अन्यथा नहीं ही लगाएँ.



54.    घरेलू, पार्टी, दोस्तों के बीच मस्ती के और बदन दर्शाती फोटुएँ निजी संग्रह के लिए ही होती हैं, इंटरनेट पर खुलेआम प्रदर्शन के लिए नहीं. ऐसे चित्र नेट पर अपलोड कर ही रहे हैं तो प्राइवेट एलबम में करें और उसे सिर्फ निमंत्रितों के लिए सुरक्षित रखें.

55.    अपने स्वयं के फ़ोटो बार बार प्रदर्शित करने से बचें.

56.    सार्वजनिक या ऑनलाइन प्रयोग हेतु सार्वजनिक स्थल पर कोई फ़ोटो ले रहे हों तो इस बात का खयाल रखें कि कोई अजनबी फ्रेम में न आ जाए. किसी अजनबी को दर्शाती फोटो नेट पर न लगाएँ.

57.    सिर्फ वही फोटो नेट पर अपलोड करें जिन्हें आपकी माता जी भी बिनी किसी समस्या के, प्रेमपूर्वक देख सकती हों.

58.    पुराने मित्रों से जिनसे आउट आफ टच हो चुके हैं, यदाकदा वार्तालाप कर लें. ऐसे समय साधारण हैलो लिखना भी लंबे ई-मेल जितना प्रभावकारी होता है.

59.    मित्रता बनाते समय अपने व अपने कनेक्टेड मित्रों के बारे में भी लिखें.


60.    सोशल नेटवर्किंग में अपने करीबी संबंधियों, सहयोगी कर्मियों या अपने बॉस को मित्र रूप में शामिल करने से पहले दोबारा सोच लें.

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101 ई-शिष्टाचार

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एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.

ई-शिष्टाचार – 41-50

41.    दूसरे के कमरे से या मोबाइल से बात कर रहे हों तो बातचीत संक्षिप्त रखें.


42.    वार्तालाप के दौरान किसी मोबाइल काल का जवाब देने से पहले वार्तालाप में शामिल लोगों से क्षमा मांगें.

43.    कार्यस्थल पर अपने मोबाइल का प्रयोग कार्यालयीन कार्यों के लिए व न्यूनतम करें.

44.    जब आप सार्वजनिक टॉयलट में हों तो अपने मोबाइल में आ रहे फ़ोन काल को होल्ड में रखें और जवाब बाहर निकल कर दें.

45.    यदि आप अपने मोबाइल को टेबल पर रखते हैं तो इसे पीछे पलट कर रखें. रेस्त्राँ इत्यादि में मोबाइल अपनी जेब या पर्स में ही रखें.

46.    हवाई जहाज में जब निर्देश दिया जाए में अपने मोबाइल फ़ोनों को बंद कर रखें. अस्पतालों, लाइब्रेरी, कंसर्ट इत्यादि में मोबाइल साइलेंट मोड में रखें.

47.    पूर्व परिचित संपर्कों के मिस कॉल या छूटे कॉल को कॉलबैक अवश्य करें, परंतु अपरिचित नंबरों को नहीं.
48.    यदि बातचीत के दौरान काल ड्रॉप हो जाता है तो जिसने पहले पहल कॉल किया था उसे ही दोबारा कॉल लगाना चाहिए. दोनों ओर से कॉल की कोशिश न की जाए.

49.    किसी को मिसकाल इस भरोसे से न मारें कि वो आपको कॉलबैक करेगा, जब तक कि इस बारे में पहले से आपसी सहमति न बनी हो.


50.    किसी अज्ञात नंबर/अपरिचित को काल करते समय सबसे पहले अपना पूरा नाम बताएँ.

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एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
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ई-शिष्टाचार – 31-40

31.    किसी की ऑनलाइन मौजूदगी से यह अर्थ न निकालें कि वो आपके टाइमपास वीडियो काल या चैट के लिए उपलब्ध है. पहले विनम्रता से पूछ लें.


32.    यदि आपकी उपलब्धता स्थिति समय-समय पर बदलती नहीं है तो दूसरे इसका सम्मान नहीं करेंगे. अपनी ऑनलाइन स्थिति समयानुसार बदलें या ऑफ़लाइन बने रहने का विकल्प चुनें.



33.    ऑनलाइन टिप्पणी युद्ध से दूरी हमेशा बनाए रखें. घसीटे जाने पर भी कदापि शामिल न हों.

34.    गूगल में स्वयं के बारे में बार-बार न ढूंढें. अलबत्ता अपने गूगल-क्लोनों के बारे में जानने के लिए यदा कदा ऐसा कर सकते हैं.

35.    यदि आपके मित्र अनुरोध अस्वीकारे जाते हैं तो उन्हें सम्मानपूर्वक स्वीकारें और उसकी चर्चा न करें.

36.    यदि आपको किसी के ई-मेल या अन्य सेवाओं / खातों के पासवर्ड किसी वजह से पता चल जाता है तो उन्हें अपना पासवर्ड बदल देने को कहें.

37.    विकिपीडिया आपके सारे विवादों का निपटारा नहीं कर सकता. इसका दुरूपयोग नहीं करें.

38.    सार्वजनिक स्थल पर मोबाइलों से बात करते समय आवाज यथासंभव धीमी रखें, और लोगों से न्यूनतम दस फ़ीट की दूरी बनाए रखें.

39.    सार्वजनिक स्थल पर मोबाइल फ़ोनों से बातचीत करते समय चिल्लाएँ नहीं और अपनी बातचीत यथासंभव छोटी रखें.


40.    डिनर के दौरान मोबाइल फ़ोनों का प्रयोग न करें, एसएमएस के लिए भी नहीं.

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101 ई-शिष्टाचार

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एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.

ई-शिष्टाचार – 21-30

21.    दूसरों के कंप्यूटर स्क्रीन पर तांक-झांक नहीं करें. दूसरों की निजता का खयाल रखें.


22.    दूसरों के ई-मेल, डाक्यूमेंट या अन्य फ़ाइलों को गोपनीय तरीके से पढ़ना एक तरह से चोरी है - अतः ऐसा न करें.



23.    जब लोग कंप्यूटर, एटीएम अथवा अन्य टर्मिनल पर कोई पासवर्ड भर रहे हों तो पीछे हट जाएँ और दूसरी तरफ देखें.

24.    पेन और काग़ज की शक्ति को भूलें नहीं. हाथ से लिखा धन्यवाद पत्र किसी भी फैंसी ई-मेल से लाख गुना ज्यादा असरकारी होता है.

25.    एक छोटा सा फ़ोन कॉल बहुत से ई-मेल संदेशों के आदान-प्रदान की बचत कर सकता है.

26.    लगातार हल्ला मचाते रहना कि आप बहुत बिजी हैं, ठीक विपरीत अर्थ निकालता है.

27.    भूखे हैं, थक गए हैं जैसे स्टेटस अपडेट न तो दिलचस्प होते हैं और न ही धनात्मक प्रभाव छोड़ते हैं. वही चीजें बताएं जो आपके प्रशंसकों के लिए दिलचस्प हों.

28.    ट्विटर में आप उन्हें भी फ़ालो कर सकते हैं जिन्हें आप जानते भी नहीं.

29.    अपनी पोस्टों में बारंबार सुधार करते रहने से मामला और बिगड़ता है. पब्लिश बटन दबाने से पहले थोड़ा और सोच विचार कर लें.


30.    अपने पोस्टों और सोशल नेटवर्किंग वाल पर अवांछित और अप्रिय टिप्पणियाँ कतई न आने दें और यदि आ भी गई हैं तो उन्हें तत्काल हटाएँ.

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एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.

ई-शिष्टाचार – 11-20




11.    बड़े आकार वाले ई-मेल संलग्नक भेजना कुछ-कुछ ऐसा ही है जैसे कि भारी-भरकम लगेज के साथ यात्रा करना. यह तंत्र को बेहद धीमा बना सकता है.

12.    जब आप पहली-पहली बार किसी को ई-मेल भेज रहे हैं तो उपयुक्त अभिवादन अवश्य लगाएँ. बाद के पत्र-व्यवहार में आवश्यकतानुसार परिवर्तन कर सकते हैं.

13.    कैपिटल (रोमन लिपि के लिए लागू) अक्षरों में ई-मेल भेजना जोर-जोर से चिल्लाने का प्रतीक समझा जाता है और यह पठन-पाठन में कठिन भी होता है.

14.    अपने ई-मेल में आवश्यकतानुसार विराम चिह्नों का प्रयोग अवश्य करें. इसका अभाव आपकी अज्ञानता अथवा आपके आलस्य का प्रदर्शन करता है.

15.    महत्वपूर्ण ई-मेल जिनका जवाब लिखने में समय लग सकता हो तो उनकी पावती पहले दें.

16.    देर से दिए गए प्रत्युत्तर के लिए क्षमा अवश्य मांगें.

17.    घर पर/काम पर नहीं/छुट्टी पर रहने का संदेश फ़ायदेमंद होता है. ऐसे संदेशों को छोटा रखें और अत्यावश्यक संदेशों हेतु वैकल्पिक संपर्क पता दें.

18.    ई-मेल लिखते समय कार्यालयीन व मशीनी भाषा का प्रयोग न करें, बल्कि ऐसी भाषा का प्रयोग करें जिससे अपनेपन का भान हो.

19.    ई-मेल, चैट, फ़ेसबुक इत्यादि में दिन-भर मस्त न रहें. ई-मेल चेक करने के लिए भी कोई समय नियत करें – सुबह-शाम तथा वाकई जरूरी हो तो दोपहर भी.

20.    यदि आपके ऑफ़िस क्यूबिकल पास पास हैं, तो ऐसा कीबोर्ड प्रयोग करें जिसमें टाइपिंग के दौरान न्यूनतम आवाज निकलती हो. कीस्ट्रोक भी हल्का लगाएं, न कि मशीनगन की तरह इसे चलाएँ.

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101 ई-शिष्टाचार
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एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.

ई-शिष्टाचार – 1-10

1. किसी नए संचार चैनल का प्रयोग करने से पहले ठीक से अवलोकन कर लें और बुनियादी शिष्टाचार सीख लें.

2. प्रत्येक व्यक्तिगत ई-मेल का (जहाँ तक संभव हो) प्रत्युत्तर समय के भीतर दें.

3. पत्राचार व संवाद प्रारंभ कर सामने वाले के प्रति अपनी अपेक्षाओं को स्पष्ट करें.

4. ई-मेल को संक्षिप्त व विषय पर सीमित रखें. यदि आप लंबे ई-मेल लिखते हैं तो उतने ही लंबे प्रत्युत्तर की आकांक्षा न पालें.

5. लंबे ई-मेल अथवा अन्य किसी ई-मेल का अपरिहार्य कारणों से तत्काल जवाब नहीं दिया जा सकता हो तो ऐसे ई-मेल की पावती दें.

6. अपने प्रश्नों को सरल रखें जिनका उत्तर आसानी से दिया जा सके. इसी प्रकार प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अलग से दें.

7. एसएमएस किस्म के, वर्तनी की गलतियों समेत औपचारिक ई-मेल से खराब छवि बनती है.

8. किसी दूसरे की वर्तनी की ग़लतियों को सरेआम न उछालें.

9. व्यक्तियों के नामों – खासकर अंग्रेज़ी व अन्य भाषा के नामों की गलत वर्तनी से बचने के लिए कॉपी-पेस्ट का सहारा लें.

10. यदि आपको संदेश के अंत में यह लिखा मिले – ‘मेरे मोबाइल फ़ोन से भेजा गया’ तब फिर आप संदेश की संक्षिप्तता और यदा कदा वर्तनी गलतियों को स्वीकारें.

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    फ़ेकिंग न्यूज़ फेकिंग न्यूज faking news

    आह! हिंदी इंटरनेट को तो इसका जैसे बरसों से इंतजार था.

    फ़ेकिंग न्यूज़ - एक किस्म का द ऑनियन इन हिंदी. पर क्या ये सचमुच द ऑनियन की तरह है?

    शायद कुछ-कुछ. यदि फ़ेकिंग न्यूज़ को अनबायस्ड तरीके से बिना किसी पॉलिटिकल-रिलीजियस एजेंडा के तहत सिर्फ और सिर्फ हास्य-व्यंग्य पर सीमित रख कर परोसा जाए तो इसको सुपरह हिट होने से कोई नहीं रोक सकेगा. अभी की पोस्टों में वैसे साफ तौर पर राजनीतिक झुकाव परिदृश्य तो होता ही है.

    जिस तरह की सामग्री इसमें अभी आ रही है उस हिसाब से इसके हिट होने में देरी नहीं है. फिर भी, सामग्री की प्रचुरता और निरंतरता इसे बनाए रखनी होगी.

    फ़ेकिंग न्यूज के कुछ नए ताज़ा समाचार के शीर्षकों से इसकी सामग्री का अंदाजा लगाएँ -

      • हरभजन के खिलाफ चलेगा “प्रतिभा से अधिक विकेट” का मामला
      • संदेसे आते हैं, हमें फुसलाते हैं!
      • हॉल ऑफ शेम
      • विवाह-बंधन में बंधे राहुल गांधी, कलावती की बेटी से की शादी
      • सुरेश कलमाड़ी करेंगे जेलगांव का निर्माण!
      • कश्मीरियों के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका से मांगे पत्थरों के ट्रक
      • जानवरों पर भी पड़ता है रिएलिटी शो का बुरा असर!
      • “किसी काले कुत्ते को ग्रिल्ड सैंडविच खिलाएं”
      • अब दिल्ली मैट्रो की छत पर भी बैठ सकेंगी सवारियां
      • दाऊद दे दो, अमर सिंह ले लो!

    इनमें से कुछ प्रविष्टियों को सैकड़ों हजारों बार ईमेल फारवर्ड किया गया है. अब ये दीगर बात होगी कि इन प्रविष्टियों को ऐसे ईमेल फारवर्डों के जरिए ही जमा किए गये हैं.

    यदि कभी आपके पास करने को कुछ खास काम नहीं हो, और थोड़ा हंसना मुसकुराना चाहें तो फ़ेकिंग न्यूज में भ्रमण कर लें.

    (हैट टिप - गिरिजेश राव की पोस्ट - लैंड ऑफ काऊस, बुल्स एंड बुलशिट )

    (मूलतः प्रकाशित - छींटे और बौछारें में.)

    यदि आपकी साइट की सारी की सारी सामग्री की चोरी कर कोई अन्य साइट अपनी दुकान सजा ले तो आपको कैसा लगेगा?

    आज मैं गूगल में कुछ सर्च कर रहा था तो नईख़बर.कॉम (http://www.naikhabar.com/poems-story-and-jokes.html) सर्च रिजल्ट में पहले आया. जबकि सामग्री ठेठ रचनाकार.ऑर्ग (http://rachanakar.org) की थी.

    मेरा माथा ठनका. मुझे लगा कि रचनाकार.ऑर्ग की रचनाओं को उदाहरण के लिये फिर से छापा गया होगा या कोई एकाध सामग्री साभार पुनःप्रकाशित हुई होगी या किसी लेखक की सहमति से उसकी रचनाएँ रचनाकार.ऑर्ग सहित दोबारा वहाँ प्रकाशित हुई होगी. तो मैं महज जाँच पड़ताल के लिए वहाँ गया.

    वहाँ दुख और आश्चर्य के साथ मैंने पाया कि रचनाकार.ऑर्ग की तमाम रचनाएँ वहाँ बड़े शान से प्रकाशित हैं. प्रकटतः रचनाकार.ऑर्ग की फुल फ़ीड को वो बेशर्मी से पुनः प्रकाशित कर रहे हैं और अपने साइट में सामग्री भर रहे हैं. नईखबर के साहित्य खंड के आज का स्क्रीनशॉट ये है जिसमें रचनाकार.ऑर्ग की तमाम नई रचनाएँ यहाँ कॉपी-पेस्ट की गई हैं -

    nai khabar-chori

    आप देखेंगे कि रचनाकार की तमाम रचनाओं को यहाँ बड़ी ही खूबसूरती से सजाया गया है. यहाँ तक कि अजय 'अज्ञात' की पूरी की पूरी 85 ग़ज़लों को भी रचनाकार स्टाइल में छाप दिया गया है जबकि इस तरह की साइटों में आमतौर पर बड़ी सामग्री को मल्टी पेज (स्क्रॉलिंग नहीं, ताकि बार बार पेज लोड हो) में प्रकाशित किया जाता है! और, कोढ़ में खाज यह कि न तो कहीं रचनाकार.ऑर्ग का नाम दिया गया है और न ही कहीं रचनाकार.ऑर्ग की लिंक दी गई है.

    इससे पहले भी रचनाकार.ऑर्ग की विशिष्ट-वृहद सामग्रियों को अन्यत्र प्रकाशित किया जाता रहा है - खासकर एक सरकारी-वित्त-पोषित साइट में, मगर सारी की सारी सामग्रियों को अपनी साइट पर कॉपी-पेस्ट करने की यह विशिष्ट घटना है.

    आप सभी पाठकों से आत्मीय आग्रह है कि नेट पर इस तरह के सामग्री डाका के खिलाफ आवाज बुलंद करें नहीं तो कल आपकी साइट की सामग्री के साथ भी यही खतरा हो सकता है. साथ ही नईख़बर.कॉम (http://www.naikhabar.com/poems-story-and-jokes.html)  में छपी चोरी की रचनाओं के नीचे टिप्पणियों में इस संबंध में अपना कड़ा विरोध दर्ज करें. नईख़बर.कॉम में कोई संपर्क सूत्र भी प्रकाशित नहीं है, अलबत्ता डोमेन नेम रजिस्ट्रार के यहाँ कंटेंट चोरी का मामला दर्ज करने की शिकायत प्रारंभ की जा रही है.

    आप सभी के सहयोग के लिए हार्दिक धन्यवाद.

    --

    अद्यतन -

    यह जाल-स्थल - नईख़बर.कॉम पर एक मित्र की प्रतिक्रिया, जिनकी भी सामग्री को उनसे बिना अनुमति के प्रकाशित किया गया है :

    "इस तरह के चोर-उचक्के किसी की अनुमति क्या लेंगें.
    नाम-पता तो छोड़ो, ये भूतनी का तो अपने फ़ेसबुक की wall तक पर ढक्कन
    लगाए बैठा है. ये कमीना चोर ही नहीं है, अव्वल दर्ज़े का डरपोक भी है.
    इसके फेसबुक के सभी मित्रों को ये ख़बर दे रहा हूं."

    मित्र की बात सत्य प्रतीत होती है क्योंकि डोमेन-टूल्स द्वारा इस जाल-स्थल के बारे में जानकारी प्राप्त करने पर इसके संपर्क-सूत्रों का कोई अता पता दर्ज नहीं मिलता है -

     

    naikhabar domain name

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