टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 13

आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ

संकलन – सुनील हांडा

अनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी

 

(263)

आदेश देने का तरीका

एक बार एक राजा ने भगवान महावीर से पूछा, "क्या आप मुझे राज-पाट चलाने के लिये कोई परामर्श दे सकते हैं?"

भगवान महावीर बोले - "जरूर। पहले तुम यह सीखो कि आदेश कैसे दिया जाता है।"

राजा ने पूछा - "कैसे"?

महावीर ने कहा - "तुम्हारा आदेश देने का तरीका ऐसा हो कि अन्य व्यक्ति बिना किसी हीनभावना के उनका पालन करें।"

(264)

तुम्हारा फर्नीचर कहाँ है?

पिछली शताब्दी की बात है। एक अमेरिकी पर्यटक सुप्रसिद्ध पुलिस कर्मचारी रब्बी हॉफेज़ चैम से मिलने गया।

उसे यह देखकर बहुत आश्चर्य हुआ कि रब्बी सिर्फ एक कमरे में रहते थे और वह भी किताबों से भरा हुआ था। उसमें फर्नीचर के नाम पर सिर्फ एक मेज और कुर्सी थी।

"तुम्हारा फर्नीचर कहाँ हैं रब्बी?" - पर्यटक ने पूछा ।

"और तुम्हारा कहाँ हैं?" - रब्बी ने कहा ।

"मेरा फर्नीचर ! लेकिन मैं तो यहाँ एक पर्यटक हूँ और यहाँ से गुजर ही रहा था।"

"और मैं भी" -- -- -- रब्बी ने भोलेपन से कहा ।

--

17

वृद्ध रहित भूमि

एक बार एक देश में यह निर्णय लिया गया कि वृद्ध किसी काम के नहीं होते, अकसर बीमार रहते हैं, और वे अपनी उम्र जी चुके होते हैं अतः उन्हें मृत्यु दे दी जानी चाहिए. देश का राजा भी जवान था तो उसने यह आदेश देने में देरी नहीं की कि पचास वर्ष से ऊपर के उम्र के लोगों को खत्म कर दिया जाए.

और इस तरह से सभी अनुभवी, बुद्धिमान बड़े बूढ़ों से वह देश खाली हो गया. उनमें एक जवान व्यक्ति था जो अपने पिता से बेहद प्रेम करता था. उसने अपने पिता को अपने घर के एक अंधेरे कोने में छुपा लिया और उसे बचा लिया.

कुछ साल के बाद उस देश में भीषण अकाल पड़ा और जनता दाने दाने को मोहताज हो गई. बर्फ के पिघलने का समय आ गया था, परंतु देश में बुआई के लिए एक दाना भी नहीं था. सभी परेशान थे. अपने बच्चे की परेशानी देख कर उस वृद्ध ने, जिसे बचा लिया गया था, अपने बच्चे से कहा कि वो सड़क के किनारे किनारे दोनों तरफ जहाँ तक बन पड़े हल चला ले.

उस युवक ने बहुतों को इस काम के लिए कहा, परंतु किसी ने सुना, किसी ने नहीं. उसने स्वयं जितना बन पड़ा, सड़क के दोनों ओर हल चला दिए. थोड़े ही दिनों में बर्फ पिघली और सड़क के किनारे किनारे जहाँ जहाँ हल चलाया गया था, अनाज के पौधे उग आए.

लोगों में यह बात चर्चा का विषय बन गई, बात राजा तक पहुँची. राजा ने उस युवक को बुलाया और पूछा कि ये आइडिया उसे आखिर आया कहाँ से? युवक ने सच्ची बात बता दी.

राजा ने उस वृद्ध को तलब किया कि उसे यह कैसे विचार आया कि सड़क के किनारे हल चलाने से अनाज के पौधे उग आएंगे. उस वृद्ध ने जवाब दिया कि जब लोग अपने खेतों से अनाज घर को ले जाते हैं तो बहुत सारे बीच सड़कों के किनारे गिर जाते हैं. उन्हीं का अंकुरण हुआ है.

राजा प्रभावित हुआ और उसे अपने किए पर पछतावा हुआ. राजा ने अब आदेश जारी किया कि आगे से वृद्धों को ससम्मान देश में पनाह दी जाती रहेगी.

कहावत है –

वृद्धस्य वचनम् ग्राह्यं आपात्काले ह्युपस्थिते

जिसका अर्थ है – विपदा के समय बुजुर्गों का कहा मानना चाहिए.

--

18

क्या मेरा वेतन बढ़ेगा?

प्रेरक सम्मेलन (मोटिवेशन सेमिनार) से लौटकर उत्साहित प्रबंधक ने अपने एक कामगार को अपने ऑफ़िस में बुलाया और कहा – “आज के बाद से अपने काम को तुम स्वयं प्लान करोगे और नियंत्रित करोगे. इससे तुम्हारी उत्पादकता बढ़ेगी.”

“इससे क्या मेरे वेतन में बढ़ोत्तरी होगी?” कामगार ने पूछा.

“नहीं नहीं, -” प्रबंधक आगे बोला – “पैसा कहीं भी प्रेरणा देने का कारक नहीं बनता और वेतन में बढ़ोत्तरी से तुम्हें कोई संतुष्टि नहीं मिलेगी.”

“ठीक है, तो जब मेरी उत्पादकता बढ़ जाएगी तब मेरा वेतन बढ़ेगा?”

“देखो, -” प्रबंधक ने समझाया “जाहिर है कि तुम मोटिवेशन थ्योरी को नहीं समझते. इस किताब को ले जाओ और इसे अच्छी तरह से पढ़ो. इसमें सब कुछ विस्तार में समझाया गया है कि किस चीज से तुममें प्रेरक तत्व जागेंगे.”

वह आदमी बुझे मन से किताब ले कर जाने लगा. जाते जाते उसने पूछा - “यदि मैं इस किताब को अच्छी तरह से पूरा पढ़ लूं तब तो मेरा वेतन बढ़ेगा?”

---

(सुनील हांडा की किताब स्टोरीज़ फ्रॉम हियर एंड देयर से साभार अनुवादित. नित्य प्रकाशित इन कहानियों को लिंक व क्रेडिट समेत आप ई-मेल से भेज सकते हैं, समूहों, मित्रों, फ़ेसबुक इत्यादि पर पोस्ट-रीपोस्ट कर सकते हैं, या अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित कर सकते हैं.अगले अंकों में क्रमशः जारी...)

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रमता जोगी बहता पानी जैसी बात…फर्नीचर वाली कथा में…वृद्ध वाली पारम्परिक है……

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