शनिवार, 16 जुलाई 2011

जिजीविषा

पिछले दिनों गृहनगर की यात्रा पर था तो जब एक बचपन के मित्र के घर जा रहा था तो वहाँ गली के एक कोने में यह देखा.  एक छोटी सी  दीवार के सहारे फलता फूलता बड़ा सा विशाल वृक्ष. यह पीपल समूह का वृक्ष है.

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आपने भी ऐसे बहुत से पीपल या वट के पेड़ देखे होंगे अकल्पनीय जगहों पर, जहाँ वे जीवन के लिए हर किस्म के संघर्ष करते हुए दिखते होंगे. चट्टानों में, छतों में दीवारों में. और आमतौर पर मरियल, सूखे एक दो डाल युक्त दिखते हैं.

मगर यह एकदम अलग है. विशाल और हरा भरा जबकि इसकी जड़ें जमीन पर नहीं हैं, दीवार पर ही चिपकी हैं.

 

पास पड़ोस के लोगों ने बताया कि यह कोई 15-20 वर्ष पुराना है और मकान मालिक द्वारा कई बार काटने उखाड़ने के बाद भी यह इतना हरा भरा और विशाल है.

जिजीविषा शायद इसे ही कहते हैं.

12 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. जीने वाले अपने लहारे ढूढ़ ही लेते हैं।

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  2. हाँ, बहुत सारी जगहों पर दिखते हैं ऐसे ईंटों और दीवारों पर जमे पेड़। लेकिन जमीन पर तो छोटे-छोटे पौधे को खा जाते हैं। क्या इसे जिजीविषा कहते हैं।

    आज छपरा में बॉस के बारे में कुछ बात हुई। बिहार में पटना में नहीं मेरे जिला मुख्यालय छपरा में, यह बात अजीब है!

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  3. घर के लिए खतरा तो नही है न? ऐसा न हो कि...

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  4. जिजीविषा इसे ही कहते हैं ||

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  5. ये दीवार को फाड़ देगा ,जब तक इसी जड़ नहीं निकाली जायेगी तब तक यह पनपता रहेगा

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  6. सही है जिजीविषा इसे ही कहते हैं।

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  7. घर के लिए खतरा तो नही है न? ऐसा न हो कि...
    आप का बलाँग मूझे पढ कर अच्छा लगा , मैं भी एक बलाँग खोली हू
    लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/

    आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें.

    अगर आपको love everbody का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।
    --
    hai

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  8. पीपल की यह विशेषतावाली प्रवृत्ति अनेक कोणों से व्‍याख्‍यायित की जा सकती है। इस ओर लिखनेवालों का ध्‍यान कम ही गया है।

    आपकी यह सूचना चित्र-कविता लगी। मन को और ऑंखों को आनन्‍द आया।

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  9. kya yeh bharat me badhte hue Brhstachar ka paryay nahi hai.Brhstachar ko bhi panpane ke liye jamin ki jarurat nahi hai. jamin to murdo ke liye hoti hai.is ped ko lakh kat lo khatm hi nahi hota lekin lagta hai mera desh khatm ho jayega agar Brhstachar ka ped nahi kata gay.
    Govind Shah
    Bokaro

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