मेरा देश यारों देखो ऐसे गिरफ़्तार हो गया...

बाबा रामदेव गिरफ्तार baba ramdeo arrested

घूसखोरों और भ्रष्टाचारियों में हर्षोल्लास - एक और खबर.

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व्यंज़ल

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मेरा देश यारों देखो ऐसे गिरफ़्तार हो गया
भ्रष्टाचार के हाथों ईमान गिरफ़्तार हो गया

 

कौन भारतीय नेता नहीं है भ्रष्टाचारियों में
इस सवाल पर हर जवाब गिरफ़्तार हो गया

 

कोशिशें तो की थी वैसे मैंने जमाने भर की
भूली बिसरी यादों में मगर गिरफ़्तार हो गया

 

वक्त की बात है ये एक है और वो एक था
वक्त के हाथों मैं यूँ ही गिरफ़्तार हो गया

 

ले के तो गया था रवि भी भाले बरछे तीर
यार की गली में कैसे गिरफ़्तार हो गया

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http://jeevandagar.blogspot.com/2011/06/blog-post.html
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and comment

रवि जी, तेवरआनलाइन(http://tewaronline.com/) पर कल का और आज का लिखा मेरा आलेख देखें, यही टिप्पणी कर फिलहाल कर सकता हूँ। और कुछ अभी नहीं कहूंगा।

बहुत हलके से ले रहे थे बाबा........ ये पता नहीं था पाला किस से पड़ रहा है.

अगर राजनीति करनी है.. तो राजनीति करो... योग और राजनीति मिक्स काहे करते हो... बाबा बहुत arrogant हो गया था...

राजनीति को इसी लिए तवायफ का अंचल कहते है | ये आँचल किसी के आंसू पोछने के कब काम आता है |यंहा कोइ किसी का नही हुआ है |

@ ranjan ji desh ki gadbadiyon par baat karna rajneeti nahi ek jagruk nagrik ki nishani hai...
@ ravi ji apki madad ki jarurat hai... plz contact mob. 9893072930
dar asal mere blog par kuch proble aa rahi hai...

योगशिविर के लिये अनुमति और मँच के पीछे उसी का बैनर लगा कर,
आमरण अनशन (?) करना क्या देश के मूल सुरक्षा कानून का उललघँन नहीं था !
जो व्यक्ति मौज़ूदा सँविधान का आदर नहीं कर सकता, वह व्यवस्था में कौन सी स्वच्छता लाने जा रहा है ?
तार्किक दृष्टि से पायज़ामें के अँदर रह कर पतलून की लड़ाई लड़ने से कौन मना करता है ?

ले के तो गया था रवि भी भाले बरछे तीर
यार की गली में कैसे गिरफ़्तार हो गया


यह एक बिडम्बना है ...!

कोई गिरफ्तार नहीं है यह तो हुंकार है !

एक साथ बहुत सारे काम करने का यही हश्र होता है, योग राजनीती, काला धन, अनशन और पता नहीं क्या क्या ...रही बात भ्रस्टाचार कि तो पता नहीं क्या होने वाला है ....??

आदर्श या बेहतर स्थितियां के लिए कल्‍पना हो, विचार या प्रयास, स्‍वागतेय होना चाहिए. हां, यह मिस काल और एसएमएस से संभव करने का विचार निरर्थक होगा.

सब कुछ टाला जा सकता था।

मैं धारा के प्रतिकूल हूँ। फिल्‍म के मध्‍यान्‍तर के बाद वाले भाग की ही समीक्षा की जा रही है और प्रतिक्रिया को मूल क्रिया की तरह लिया जा रहा है।
इसे मैं यूँ कहता हूँ - आत्‍म प्रचार और खुद को स्‍थापित करने क्षुद्र महत्‍वाकांक्षा पूरी करने के लिए (रामदेव की) की गई क्रिया पर सरकार की नृशंस, अविवेकी, आत्‍मघाती मूर्खता।
डॉ. अमरकुमार की बात पर ध्‍यान दिया जाना चाहिए।

Who was right n who was wrong, could be a debate..But no body is talking about real issues..

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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