April 2010

माइक्रोसॉफ़्ट हिन्दी ऑफ़िस 2003 / 2007 में अंतर्निर्मित हिन्दी वर्तनी जाँच उपलब्ध तो है, मगर बहुत बेकार किस्म का (वैसे ये अब तक उपलब्ध हिन्दी वर्तनी जाँच के तमाम औजारों में सर्वोत्तम भी है, तो इससे असरकारी हिन्दी वर्तनी जाँचक के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है,) – और आमतौर पर लड़की, लड़कियों, लड़कियाँ इत्यादि की वर्तनी जाँच में (स्क्रीनशॉट नीचे देखें-) मार खा जाता है.

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तो, यदि आप शुद्ध हिन्दी का कोई एक पेज का पाठ इसके अंतर्निर्मित वर्तनी जाँच से जाँच करेंगे तो पाएंगे कि आपके पाठ में कोई 10 से 40 प्रतिशत तक अशुद्धियाँ यह बता रहा है!

इसे दूर करने के लिए आपको अपने कस्टम डिक्शनरी में सही वर्तनी वाले शब्दों को एकत्र करते रहना होता है. अच्छी वर्तनी जाँच के लिए हर किस्म और रूप के शुद्ध हिन्दी शब्दों को एकत्र किया जाना टेढ़ी खीर है. फिर भी आपकी सुविधा के लिए एक लाख से ऊपर के हिन्दी शब्दों की एक कस्टम डिक्शनरी फ़ाइल यहाँ अपलोड की गई है जिसका प्रयोग आप कर सकते हैं. कृपया ध्यान दें कि वैसे तो आमतौर पर प्रचलित शब्दों के सही वर्तनी वाले शब्दों को ही इस संकलन में लिया गया है, मगर फिर भी वर्तनी की बहुत सी अशुद्धियाँ इस संकलन में भी समाहित हैं, और यह शत प्रतिशत शुद्धता का दावा नहीं करता. ध्यान दें कि गलत वर्तनी वाले शब्द ऐसे संकलन में होंगे तो वर्तनी जाँच में वे गलत शब्द पकड़ में नहीं आएंगे. फिर भी, आमतौर पर प्रचलन में लिखत-पढ़त की भाषा की वर्तनी जाँच में यह संकलन 99 प्रतिशत शुद्धता तो प्रदान करता ही है. मैं इसका प्रयोग अरसे से कर रहा हूँ.

इसे आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं -

http://cid-60eace63e15a752a.skydrive.live.com/self.aspx/.Public/CUSTOM.zip

यह एक जिप फ़ाइल है. इसे आप अनजिप करें. आपको custom.dic नाम की फ़ाइल मिलेगी. आप चाहें तो इसकी सामग्री को नोटपैड में खोल कर अपने स्वयं के custom.dic में कॉपी-पेस्ट कर सकते हैं (ताकि आपका पुराना संग्रह भी मौजूद रहे) या फिर इस फ़ाइल को अपनी फ़ाइल से बदल सकते हैं. चूंकि शब्द संग्रह अधिक है, अतः ऑफ़िस 2003 में थोड़ा धीमा चल सकता है. ऑफ़िस 2007 में धीमा तो चलता है, मगर उतना नोटिस लेने लायक नहीं.

आमतौर पर custom.dic फ़ाइल यूजर प्रोफ़ाइल में रहता है. उदाहरण के लिए, विंडोज 7 में यह निम्न डिरेक्ट्री में रहता है – (प्रयोक्ता ravi के लिए)

C:\Users\ravi\AppData\Roaming\Microsoft\UProof

अन्य संस्करणों के लिए आप चाहें तो custom.dic फ़ाइल के स्थान के लिए खोज सकते हैं.

ध्यान दें कि यह हिन्दी का custom.dic एमएस ऑफ़िस हिन्दी के 2003 तथा 2007 संस्करणों में अथवा हिन्दी भाषा के वर्तनी जाँचक एनेबल / संस्थापित किए अंग्रेज़ी के संस्करणों (सामान्य अंग्रेज़ी संस्करणों में नहीं) ही काम करता है.

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बोलने की इच्छा तो ये हुई – “साला सांड, बीचों बीच रस्ते में खड़ा है, आने जाने के लिए जगह पर टाँग फैलाकर खड़ा है, परे हट!” मगर प्रकटत: बहुत ही नम्र स्वर में बोला – एक्सक्यूज़ मी, थोड़ा सा जाने देंगे...

जाहिर है, सामने वाले को मेरे मन में उसके प्रति उठे विचारों का कोई भान नहीं था, अतएव मेरे नम्र निवेदन को उसने उतनी ही विनम्रता से स्वीकारा और जाने के लिए उसने जगह दे दी. यदि वो मेरे मन में उठे भावों को जान लेता तो यकीनन, नूरा कुश्ती वहीं शुरू हो जाती.

तो, आपने देखा कि किस तरह से, एक्सक्यूज़ मी का फंडा कितना कारगर होता है. सामने वाले को आप हजार लानत मलामत मन में भेजते रहें, मगर प्रकटत: उससे एक्सक्यूज़ मी, एक्सक्यूज़ मी कहते रहेंगे.

ठीक इसी तरह का एक शब्द है सॉरी - माफ कीजिएगा. सॉरी शब्द ने दुनिया में जाने कितनी लड़ाईयाँ रोकी होंगी. कितनों के आँसुओं को टपकने से रोका होगा. कितने कत्ल और मर्डर रोके होंगे. आपका मन तो सामने वाले के पेट में छुरा भोंकने का हो रहा होता है, मगर आप प्रेम से कहते हैं – सॉरी! भले ही सामने वाले के मन में आपके ऊपर बम फेंकने का हो रहा हो, वो आपसे कहेगा कोई बात नहीं. कभी कभी मामला बनता न देख आप दो चार बार और कह देते हैं, इस बार वज़न देकर - वेरी सॉरी. फिर, मामला कितना भी भयानक, भयंकर, माफ़ी लेने देने लायक न हो, रफा दफा हो जाता है.

और, अब तो बात बे बात सॉरी कहने के एक और सॉलिड कारण आपके सामने है.

 

एक्सक्यूज़ मी, क्या कहा? आप इतने से ही बोर हो गए? सॉरी! कोई बात नहीं, लीजिए पढ़िए व्यंज़ल-

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चुनावों और जंग में सब जायज है, माफ कीजिएगा

तेरी संसद मेरे किसी काम की नहीं माफ कीजिएगा


चेहरे पे कई रंग के चेहरे चढ़ा लिए हैं बहुतेरे मगर

गुनाहों को किस तरह से छुपाएंगे माफ कीजिएगा


वैसे तो जलसे में सभी ने दिए थे बढ़ चढ़ के बयान

क्यों साथ मेरे कोई चलता नहीं है माफ कीजिएगा


हर तरफ आरती गुरबानी और अजान के शोर हैं

आदमीयत की किलकारी कहाँ गई माफ कीजिएगा


इस बेदर्द जमाने ने हमें भी बना दिया जहीन रवि

बात बे बात हम भी कहते हैं सॉरी माफ कीजिएगा


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there is wine, cola, pepsi in city but no water

सच ही तो है. पानी हमारे शहरी परिदृश्य से ग़ायब हो गया लगता है. पानी के नाम पर आसपास जो दिखता है वो या तो बिसलरी या किंगफ़िशर का रिवर्स ऑस्मोसिस फ़िल्टर्ड, यूवी क्लीयर्ड तथाकथित मिनरल वाटर होता है या फिर एक रुपल्ली का पाऊच. और नहीं तो कोला-पेप्सी-स्प्राइट जैसा कोई पेय.

अब न कहीं छागल दिखता है, न मटका. ऊषा और बजाज के वाटर कूलर पानी को कुछ इस तरह से अभिजात्य रंग में रंग देते हैं कि कितना ही चिल्ड वाटर पी लें प्यास नहीं मिटती.

गांवों में ग़नीमत है कि कहीं हैंडपंप और कहीं कुएँ बचे हैं. मगर कितने दिनों तक? प्लास्टिक की पारदर्शी बोतलें तमाम असलहों समेत वहाँ भी सेंघ लगाने की पूरी तैयारी में हैं.

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व्यंज़ल

मेरे शहर में शराब तो है पानी नहीं

जाने क्यों प्यास बुझाती पानी नहीं


मुल्क के वाशिंदों का हाल है अजब

लहू तो है आँखों में मगर पानी नहीं


ग़ुमान है उन्हें कई समंदर रखते हैं

ये पता नहीं है कि उनमें पानी नहीं


जिस्म जला लिए हैं नीट पी पी कर

विकल्पहीन हैं चूंकि पास पानी नहीं


जाग़ीरें खड़ी कर लीं तुमने बहुत रवि

मगर कहीं हवा नहीं कहीं पानी नहीं


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यकीनन. और भी बहुत कुछ, ब्लॉग संबंधी बेबाक बातें आप पाएँगे मेरे साक्षात्कार में जिसे परिकल्पना ब्लॉगोत्सव 2010 के अंतर्गत यहाँ प्रकाशित किया गया है. रवीन्द्र प्रभात जी का शुक्रिया.

फोटोशॉप जैसी सुविधा युक्त, मगर बेहद तेज, पोर्टेबल (इंस्टालेशन की जरूरत नहीं) और छोटा (मात्र 700 किबा का), मुफ़्त का फोटो पेंट प्रोग्राम फोटोग्राफ़िक्स जिसमें तमाम फ़िल्टर इत्यादि भी हैं, अब हिन्दी में भी उपलब्ध है. इस उन्नत पेंट प्रोग्राम में आप चित्रों में यूनिकोड हिन्दी में पाठ भी जोड़ सकते हैं.

कुछ स्क्रीनशॉट देखें -

एम्बॉस फ़िल्टर -

photographics

फोटोग्राफ़िक्स फ़ाइल मेन्यू:

fotographics file menu

 

हिन्दी फोटोग्राफ़िक्स यहाँ - fotografix141HINDI.zip  से डाउनलोड करें. डाउनलोड करने के पश्चात इसे किसी फोल्डर में अनजिप करें. और सीधे फोटोग्राफ़िक्स.ईएक्सई को दोहरा क्लिक कर चलाएँ. किसी इंस्टालनेशन का झंझट नहीं!

फोटोग्राफ़िक्स को एल. माधवन ने बनाया है. मूल साइट http://lmadhavan.com/software/ से भी फोटोग्राफ़िक्स (अंग्रेज़ी संस्करण) डाउनलोड कर सकते हैं.

पॉपुलेशन फर्स्ट तथा यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड (यूएनएफ़पीए) द्वारा जेंडर सेंसिटिविटी के लिए उत्तरी व पश्चिमी क्षेत्र के यूएनएफपीए-लाडली मीडिया पुरस्कारों की घोषणा आज भोपाल के समन्वय भवन में की गई. टाइम्स ऑफ इंडिया, आउटलुक, तहलका जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के मीडिया व्यक्तित्वों के साथ साथ विभारानी को भी उनके हिन्दी ब्लॉग – छम्मकछल्लो कहिस   के लिए एक रंगारंग समारोग में इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया. उन्हें बधाई व शुभकामनाएँ.

पुरस्कार समारोह की कुछ झलकियाँ-

 

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नृत्यांगनाओं द्वारा भव्य शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति.

 

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मुख्य मंत्री, म.प्र. तथा भोपाल मेयर से ट्रॉफ़ी व प्रमाणपत्र ग्रहण करती हुई विभारानी

 

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ट्रॉफ़ी व प्रमाणपत्र के साथ प्रसन्न मुद्रा में विभारानी

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अगर आप समझते हैं कि गूगल बज़ में आप सिर्फ अपने समूह के बीच वार्तालाप कर रहे हैं तो आप गलत हैं. गूगल बज़ में आपकी बजबजाहट एक तरह से सार्वजनिक होती है (अपनी गोपनीयता सेटिंग जाँच लें!) और आमतौर पर उसे हर कोई देख-पढ़ सकता है. यहाँ तक कि सर्च इंजिनों के जरिए आपके बज़ पर खोज-खबर भी रखी जा सकती है.

अतएव, गूगल बज़ पर अपनी निजी वार्तालाप के दौरान – आपको सलाह दी जाती है कि मर्यादा बनाए रखें – कौन जाने कब आपका गुस्सैल बज़ आपके लिए आफत की पुड़िया बन जाए.

ये हैं कुछ बज़ जिन्हें गूगल रीयलटाइम खोज के जरिए खोजा गया है. जाहिर है, बज़ बड़े रोचक होते हैं, इसलिए ही समझ में आ जाता है कि जनता बजबजाने में क्यों पिली रहती है…

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New results will appear below as they become available. PauseUpdating stopped. ResumeUpdating stopped. To resume, reload the page.

  1. धड़कते, साँस लेते, रुकते-चलते मैंने देखा है कोई तो है जिसे अपने मैं पलते मैंने देखा है ... तुम्हारी आदतों में ख़ुद को ढलते मैंने देखा है मेरी ख़ामोशियों में तैरती हैं,तेरी ... - More »

    Rupesh Gupta‎ - Google Buzz -

    258

    4 minutes ago

  2. ना मुज़्दा-ए-विसाल ना नज़ारा-ए-जमाल, मुद्दत हुई की आश्ती-ए-चश्म-ओ-गोश है!!

    Manish Agarwal‎ - Google Buzz -

    974

    16 minutes ago

  3. इस अभागे देश के सौभाग्य से आपको फिर एक बार चुनाव का टिकट मिल गया है। लगता है किसी अंधे ने फिर से रेवड़ियां बांटी हैं। आपके चुनाव-क्षेत्र के अंधे वोटरों के लिए निश्चय ही यह बड़े ... - More »
    आदरणीय प्रत्याशी जी!‎ - chhapas.com

    chhapas kumar‎ - Google Buzz -

    2220

    37 minutes ago

  4. एक अजनबी से मुझे इतना प्यार क्यूँ है, इंकार करके भी चाहत का इकरार क्यूँ है, उसे पाना तकदीर में नहीं, फिर भी हर मोड़ पर उसका इंतज़ार क्यों है?

    Sanjay Shakya‎ - Google Buzz -

    2456

    40 minutes ago

  5. इतना महाग कैसे रे तेरे यहा, वो कोपरेका भैया तो स्वस्त देता है!! कंदा काट के, चिर के मस्त ओम्लेट बनाने का और उपर से थोडा कोथिंबिर भुरभुरानेका!! अरे बाबा गाडी सावली मे लगा! ... - More »

    Avinash Savekar‎ - Google Buzz -

    2662

    44 minutes ago

  6. गम होते हैं तो तकलीफ सभी को होती है पर मुश्किल तो तब होती है जब मुस्कुराना भी पड़ता है और गम छुपाना भी होता हैI

    Vivek Verma‎ - Google Buzz -

    2706

    45 minutes ago

और, यदि आप गूगल बज़ के बाजू में लिखे प्रोफ़ाइल पर क्लिक करेंगे तो आगे उस प्रयोक्ता के सारे के सारे बज़ आप पढ़ सकेंगे. जैसे कि 5 वें नंबर के अविनाश सावेकर पर क्लिक करने पर उनका यह मजेदार बज़ मिला :

Avinash Savekar - Buzz - Public - Muted

मराठी लोकांची हिंदी:
पहलि बार पोहने गया तो क्या हुआ मालुम?
पहिले पानी मे शिरा, फिर पोहा और बाद मे बुडा!!
घाई करो भैया नही तो बस जायेगी, और हमारी पंचाईत होयेगी!!
सरबत मे लिंबु पिळा क्या!!
इतना महाग कैसे रे तेरे यहा, वो कोपरेका भैया तो स्वस्त देता है!!
कंदा काट के, चिर के मस्त ओम्लेट बनाने का और उपर से थोडा कोथिंबिर भुरभुरानेका!!
अरे बाबा गाडी सावली मे लगा!!
ए भाय, मेदुवडा शेपरेट ला, साम्बार मे बूडा के मत लाना!!
केस एकदम बारीक कापो भैया!!
खाओ पोटभर खाओ लाजो मत!!
धावते धावते गिर्‍या तो काडकन हात का हाड मोड्या!!

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आप भी ट्राई मार सकते हैं. गूगल बज़ में सीधे खोजबीन करने की सुविधा अभी नहीं है. अलबत्ता कुछ उपाय हैं. बज़ में खोजने का एक ऑनलाइन उपाय है – बज़ी.कॉम नाम का बज़ सर्च इंजिन -

http://buzzzy.com/

 

वैसे, आप गूगल ट्रेंड http://www.google.com/trends  में जाकर वहाँ मोर हॉट टॉपिक्स पर क्लिक कर रीयल टाइम सर्च में खोज सकते हैं जिनमें गूगल बज़ (ट्विटर इत्यादि की भी,) की ताज़ातरीन पोस्टें आपको सर्च रिजल्ट के रूप में मिलेंगीं. आप चाहें तो बज़ में सीधे खोजने के लिए यहाँ - http://www.google.com/search?q=site:google.com&tbs=mbl:1 जाकर वांछित हिंदी शब्द से गूगल बज़ में खोज-बीन कर सकते हैं.

mtextreader

यदि आपके मोबाइल फ़ोन में हिंदी प्रदर्शन करने की क्षमता है और ये जावा प्रोग्रामों को चला सकता है, तब तो एमटैक्स्टरीडर समझिए कि आपके लिए ही है. आमतौर पर हिंदी सक्षम फ़ोनों में हिन्दी टैक्स्ट को पढ़ने हेतु सीमित मात्रा में सुविधा होती है परंतु आप हिंदी की बड़ी फ़ाइलों – मसलन 100-150 किबा की टैक्स्ट ई-बुक को आप नहीं पढ़ सकते. एमटैक्स्टरीडर के जरिए आप 200 किबा तक की हिंदी टैक्स्ट सामग्री को आसानी से पढ़ सकते हैं.

 

एमटैक्स्टरीडर की और भी खासियतें हैं. इसका इंटरफेस आसान है.  आप इसके फ़ॉन्ट को छोटा-बड़ा कर सकते हैं, पृष्ठभूमि स्क्रीन का रंग, फ़ॉन्ट का रंग बदल सकते हैं. यही नहीं, आप बुकमार्क भी कर सकते हैं ताकि बड़ी किताब को आप जिस जगह से पढ़ रहे होते हैं, बाद में दोबारा सीधे वहीं से खोल सकते हैं. स्वतः स्क्रॉलिंग की सुविधा भी है जिसकी गति आप अपनी पठन गति के अनुसार सेट कर सकते हैं – मोबाइल में पढ़ने हेतु एक अनिवार्य सुविधा.

 

हिंदी फ़ाइल को पढ़ने के लिए खोलने से पहले एमटैक्स्टरीडर की सेंटिंग में जाकर एनकोडिंग को यूटीएफ़ सेट करना होगा.

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(नोकिया सीडीएमए 6275 पर यशवंत कोठारी के व्यंग्य उपन्यास – यथा योग्य {पाठ सामग्री यूनिकोड हिंदी टैक्स्ट रूप में फ़ाइल में सहेजा गया} को बढ़िया प्रदर्शित करता एमटैक्स्टरीडर)

 

एमटैक्स्टरीडर (मुफ़्त, कई स्रोतों पर डाउनलोड हेतु उपलब्ध) यहाँ से डाउनलोड करें -

http://www.olnex.net/products/mtextreader/download_en.html

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अगर आपके मोबाइल फ़ोन में हिंदी तथा जावा समर्थन उपलब्ध है, तब तो “पाणिनी कीपैड” आपके मोबाइल फ़ोन के लिए एक उम्दा औजार है हिंदी लेखन के लिए. इसका उन्नत किस्म का प्रेडिक्टिव तकनॉलाजी और इंटेलिजेंट इनपुट मैथड एक तरह से हिंदी (भारतीय भाषाओं) के लिए ही डिजाइन किया गया है.

इस औजार के जरिए अन्य तमाम भारतीय भाषाओं में भी टाइप कर सकते हैं तथा रोमन में लिखी सामग्री को हिंदी या हिंदी सामग्री को रोमन में भी बदल सकते हैं. इसका इंटेलिजेंट इनपुट दो स्तर पर काम करता है. जैसे ही आप कोई व्यंजन चुनकर टाइप करते हैं, उसके लिए आवश्यक मात्राओं की सूची कुंजीपट पर स्वयमेव आ जाती है. इसी तरह स्वचालित रूप से शब्द पूर्णता (वर्ड कम्प्लीशन), प्रेडिक्टिव टैक्स्ट इत्यादि भी इसमें है. पणिनी कीपैड सांख्यिकिक प्रीडिक्टिव टेक्स्टिंग पर आधारित है, जो शब्द आप लिखना चाहते है, उसके प्रत्येक अक्षर का पूर्वानुमान यह स्वयं लगा लेता है

आप इस औजार को मुफ़्त में डाउनलोड कर अपने मोबाइल में संस्थापित कर जाँच परख कर सकते हैं.

डाउनलोड लिंक - http://www.paninikeypad.com/

वैसे, मैंने इसे नोकिया 6275 (इसमें नोकिया का अंतर्निर्मित, टाइपिंग सहित पूर्ण हिंदी समर्थन है) में संस्थापित कर चलाने की कोशिश की, तो अवैध अनुप्रयोग की त्रुटि आई. सैमसुंग कोर्बी सीडीएमए में यह बेहद आसानी से इंस्टाल हो गया पर टाइपिंग के समय टाइप बक्से में यह हिंदी अक्षरों को नहीं दिखाता (रोमन में कन्वर्ट करने पर अक्षर दिखते हैं). अलबत्ता टाइप बढ़िया करता है. टचस्क्रीन के जरिए पाणिनी कीपैड में हिन्दी में टाइप करना बेहद आसान है. भविष्य में आईपैड जैसे उपकरणों में हिंदी टाइप करने के लिए पाणिनी कीपैड क्रांति ला सकता है.

एक बढ़िया, प्रॉमिस करती टेक्नोलॉज़ी. अवश्य आजमाएँ. भविष्य में शायद हमें वर्तनी जाँच/थिसॉरस/शब्दकोश/पर्यायवाची इत्यादि की सुविधा भी मिले?

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अब अगर दिल है तो धड़केगा ही. सवाल ये है कि वो किसके लिए धड़कता है. दिल आपका है, आप चाहे जिसके लिए धड़काएँ. मगर लोग-बाग आपके दिल के भीतर झांक कर देखने की कोशिश करते हैं और तमाम संभावित तरीकों से तहकीकात करने की कोशिश करते हैं कि आपके पास अगर दिल है, और वाकई धड़क रहा है तो फिर वो किसके लिए धड़क रहा है. यानी, किसी ऐसे वैसे या ऐरे गैरे के लिए तो नहीं धड़क रहा?

और, यदि किसी तरीके से यह स्थापित हो गया कि आपका दिल सामने वाले के हिसाब से किसी अवांछित, ऐरे गैरे वस्तु के लिए धड़क रहा है तब तो समझो हो गई आपके लिए हो गई मुसीबत. इससे क्या फर्क पड़ता है कि दिल आपका है, इसे धड़काना या नहीं धड़काना आपकी मर्जी. मगर नहीं. आपके पास दिल है तो क्या हुआ. इसे धड़काना तो सामने वाले की मर्जी से होगा. या तो बेदिल बन जाओ और दिल धड़काना बंद करो या फिर धड़काना ही है, तो अगले की मर्जी से धड़काओ. चुपचाप जहाँ बताया जाता है वहाँ ले जाकर, उस पर धड़काओ नहीं तो नतीजा भुगतने के लिए तैयार रहो.

एक और खतरा है. आपका दिल ख़ालिस हिन्दुस्तानी है या नहीं इसे चेक करा लें. आपने इसे पिछली मर्तबा कब और कहाँ चेक कराया था? उसका वैध जाँच प्रमाण पत्र आपके पास है या नहीं? आपका दिल हिन्दुस्तानी हो न हो, आपके पास उसके हिन्दुस्तानी होने का प्रमाण पत्र होना बेहद जरूरी है, अन्यथा आपको गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं. लिहाजा जल्द से जल्द अपने दिल का हिन्दुस्तानी होने का प्रमाणपत्र हासिल कर लें. दिल न हो तो और भी बढ़िया. सुविधा और आरक्षण मिलेगा. दरअसल बेदिल वालों को हिन्दुस्तानी दिल का प्रमाण पत्र देने में प्राथमिकता बरती जाती है. तो यदि जल्द से जल्द हिन्दुस्तानी दिल का प्रमाणपत्र हासिल करना चाहते हों तो अपने दिल को कहीं फेंक आएँ.

मेरे दिल की धड़कन डूब रही है. मुझे नहीं मालूम कि अगले के हिसाब से मेरा दिल हिन्दुस्तानी है या नहीं. अलबत्ता मैंने दर्जन भर प्रमाण पत्र बटोर रखे हैं इसके लिए. मगर, ये इन्हें भी नकार दें तब? और, मेरा दिल जिसके लिए अब तक धड़कता आ रहा था, क्या पता अब नए पैमाने के लिहाज से, इन लोगों को जमेगा या नहीं. यदि मेरा धड़कता दिल इन्हें ना पसंद आया तो? अब तो यूँ महसूस हो रहा है जैसे किसी भी क्षण कोई मेरे धड़कते दिल से उसका सबब पूछने चला आएगा कि वो किसके लिए धड़क रहा है. और, कौन जाने, इस बिना पर मैं कभी भी विद्रोही करार दे दिया जा जाऊँ. पैमाने तो सामने वाले ने अपने लिहाज से तय किए हैं. क्या पता मेरा धड़कता दिल उसमें पास हो पाए या नहीं.

खतरा सबके ऊपर मंडरा रहा है. आपके ऊपर भी है ये खतरा. मासूम, अंजान न बने रहिए. पुख्ता जाँच पड़ताल कर लें कि आपका दिल किसके लिए धड़क रहा है!

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व्यंज़ल

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आजकल कोई दिल धड़कता भी है

कोई बाँह यारों अब फड़कता भी है


वो पूछते हैं कि क्या मेरे पास भी

दिल है और क्या वो धड़कता भी है


यूँ लोग तो बताते हैं कि दिल

कांच का होता है तड़कता भी है


बादल तो सूख गए हैं भले ही

गाहे बगाहे तड़ित तड़कता भी है


मत करना यकीन रवि पे यारों

सुना है वो कभी भड़कता भी है

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