कौन किसको गंगा में फेंक रहा है - फिंका फिंके को गंगा में फेंक रहा है

गंगा में क्या फेंकें और क्या नहीं?

GANGA ME PHEKEN (Mobile)

गंगा तो वैसे भी पहले ही घोर प्रदूषित हो रही है. ऊपर से अब राजनेताओं को उसमें फेंकने की बात की जा रही है. घोर कलजुग आ गया है. लगता है गंगा को पूर्णतः अपवित्र, मैली करके ही मानेंगे हमारे राजनेता. गंगा की पवित्रता पर इससे ज्यादा और गंभीर खतरा इससे पहले कभी नहीं रहा.

वैसे, गंगा में बहुत सी चीजों को फेंकने का विचार आपको भी यदा कदा आया होगा. ये बाद दीगर है कि आपने जग जाहिर नहीं किया है अब तक. उदाहरण के लिए, आपने उस पुलिस वाले को गंगा में फेंकने का विचार किया होगा जिसने आपका चालान गलत पार्किंग या गलत वाहन चलाने पर काटा होगा और जिसने 100-200 रुपए लेकर मामला रफा दफा नहीं किया होगा.

उस ईमानदार सरकारी बाबू को आपने गंगा में फेंकने का विचार किया होगा जिसने आपका काम कुछ ले-देकर जल्दी नहीं किया होगा. आपने उस गैस वाले को भी गंगा में फेंकने का विचार किया होगा जिसने बिना बारी के आपको आपके इमर्जेंसी कार्य (जैसे कि अनधिकृत गैस किट वाले वाहन में गैस भरने) के लिए अतिरिक्त रुपया लेकर गैस देने से मना कर दिया होगा.

आपने उस टॉप के स्कूल के प्रिंसिपल और प्रशासक को भी गंगा में फेंकने का हिसाब लगाया होगा जिसने आपके होनहार का एडमीशन देने से तब भी मना कर दिया था जबकि आप उनके स्कूल को मनचाहा डोनेशन देने को एक पैर पर तैयार खड़े थे.

ये तो कुछ इंडीकेशन मात्र हैं. अपने अब तक के आद्योपांत जीवन के संपूर्ण इतिहास के गंगाफेंक की समग्र सूची पेश कीजिए तो जरा...

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व्यंज़ल

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देखिए कौन किसको गंगा में फेंक रहा है

खुद फिंका फिंके को गंगा में फेंक रहा है

 

आदमी बेहद चालाक हो गया है आजकल

ईमान का पानी वो गंगा में फेंक रहा है

 

अजीब हाल हो गया है मेरे शहर का मित्रों

हर कोई एक दूजे को गंगा में फेंक रहा है

 

यूँ वक्त नहीं है आजकल किसी के पास

पर हर कोई वक्त को गंगा में फेंक रहा है

 

घंटियाँ, शंख बजाता हुआ वो भगवा रवि

सोचता है पापों को गंगा में फेंक रहा है

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एक टिप्पणी भेजें

देश को देशहित गंगा में फेंक रहा है।

गंगा में तो अपने पुरखों के अस्थि शेष ही तिरोहित करने की परंपरा रही है। जिंदा लोग भी यदि वहाँ डाले जाने लगे तो गंगा माई हिंदुस्तान छोड़ देंगी।

सही है पहले भी कहा ही जाता था कि गंदे नाले में फ़ेंक दूंगा. गंगा का वही तो हाल है.
वैसे कहाँ की गंगा में फेंकने की बात है? कानपुर या ऋषिकेश. उस हिसाब से पता चलता. टॉलस्टोय एक जगह कहते हैं कि शैतान को साफ़ जल में फेंकने की सजा मिलती है. कुछ क्लियर नहीं हुआ यहाँ पर कि साफ़ पानी में फेंकने वाली सजा है या गंदे पानी में.

गंगा में क्या क्या फेंकेंगे हम..

आपने सब कुछ कह दिया। लिखा आपने, लगा हमारा।

ultimate, shandar, dil khush ho gaya padhkar saheb.

यूँ वक्त नहीं है आजकल किसी के पास

पर हर कोई वक्त को गंगा में फेंक रहा है


How true !

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तो सब लोग सब कुछ गंगा में फ़ेक रहे हैं

एक जमाना था जब भारत को "जिस देश में गंगा बहती है" कहते थे

एक दिन आएगा जब गंगा के बारे में हम कहेंगे
"जिस नदी में भारत बहता है"।

शुभकामनाएं
जी विश्वनाथ

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