टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

मुल्क के मुलायमों को मरना जरूरी…

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व्यंज़ल

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मुल्क में रहना है तो डरना जरूरी

चारे चरवाना व खुद चरना जरूरी


सियासत बची रहे कुछ इसके लिए

मुलायमों लालुओं का मरना जरूरी


यकीन मानों दोस्तों इस जमाने में

ठीक नहीं धर्म ईमान करना जरूरी


दुनिया का यही तो दस्तूर है यारों

औरों से पहले खुद का तरना जरूरी


लड्डू हाथों से ही खा सकते हैं रवि

यूँ काम करना क्यों हो वरना जरूरी


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वास्तव में कश्मीर व नक्सलवाद को देखते हुए "मुलायमों" का मर जाना भारत के जिन्दा रहने के लिए जरूरी है.

एक राजनेता या अमरसिंह को जो भी कह लें, किसी के मरने की इस तरह कामना करें...घोर अमानविय लगता है.

I don't know about this topic, but your poem is good.

चुप रहते हैं सब कुछ देख कर
ऐसे में 'रवियो' को बोलना है जरूरी

बेनामी

खाली मुलायम और लालू क्यों। लालकृष्ण और अटल या सुषमा जैसे नेता क्यों नहीं।

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