टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

बजा फरमाया महोदय, अनाज इंडियन है तो सड़ेगा ही…

sadata aanaj सड़ता अनाज

व्यंज़ल

सिस्टम इंडियन है सड़ेगा ही

सियासत में समग्र सड़ेगा ही

 

मुहब्बत कब की मर चुकी

मॉडर्न लव है तो सड़ेगा ही

 

दुनिया बदल देने का यह

खयाली पुलाव है सड़ेगा ही

 

मरा हुआ ही पैदा होता है

जब आदमी तो सड़ेगा ही

 

सोचता रहता है बैठे रवि

करे कुछ नहीं तो सड़ेगा ही

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कितना अच्‍छा होता,
मन्त्रिमण्‍डल होता,
एफसीआई का गोदाम,
न होती जगह,
रख दिए जाते बाहर,
सड जाते पँवार भी।
खा नहीं पाते जानवर,
फेंक दिए जाते पँवार भी।

बदनसीबी है या निकम्‍मापन हमारा,
बने हुए हैं मन्‍त्री,
पँवार अभी भी।

हताशा की अमावस में,
अब उम्‍मीद है 'रवि' ही,
रह गया है जरिया यही
जिन्‍दगी का अभी भी।

जो विकास सोचने लगा,
दिमाग उसका सड़ेगा ही।

बजा फरमाया हूजूर |

पाप लगेगा इन्हें.

सड़ने दीजिये... कुछ तो हो ही रहा है. सड़ना भी एक क्रिया है.

क्या फरमा रहे है ये पवार साहब, खैर.. इनको भी क्या दोष दे हम, बिना प्रयोग किया हुवा दिमाग है ... सड़ेगा ही

सड़ने दीजिये... कुछ तो हो ही रहा है.
सड़ना भी एक क्रिया है. ऐसा ना कहो हँसी आ जाऐगी ।

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