गुरुवार, 17 सितंबर 2009

अनपढ़ मच्छरों के लिए क़ानून?

machhar kanoon

नए क़ानून के मुताबिक, अब अगर आपके घर में कोई मच्छर दरियाफ़्त किया जाएगा, यदि आप मच्छरों को अपने घरों में प्रश्रय दे रहे होंगे तो आपके ऊपर शुद्ध 500 रुपयों का जुर्माना किया जाएगा. %$#@ बहुत हो गया. मच्छरों से तो अब क़ानून बनाकर ही निपटा जा सकेगा. मेरे नगर की म्यूनिसिपल कमेटी ये क़ानून बना रही है. कल को सारे देश में ये लागू किया जाएगा. इतने बढ़िया क़ानून से देश का कौन सा राज्य, कौन सा शहर और कौन सा गांव अछूता रह सकेगा भला? वो तो इन %#@ अनपढ़ मच्छरों का कसूर है, वरना मच्छरों के लिए क़ानून तो कब का बन चुका होता कि मनुष्यों को काटना मना है और खासकर नेता टाइप को तो कतई नहीं.

वैसे भी सरकारें किसी समस्या से निपटने में अक्षम रहती हैं तो वो नए क़ानून बना डालती हैं. कम से कम सरकारों को कोई दोष तो नहीं दे सकता कि वे अकर्मण्य बैठी रहती हैं. तो नया क़ानून बन गया. जनता को अब चाक चौबन्द चौकन्ना रहना होगा. म्यूनिसिपल कमेटी का कोई दारोगा – डॉग शिट स्क्वॉड किस्म का ही – अब आपके घर पर कभी भी दस्तक दे सकता है. रात को बारह बजे, जब आप अपनी मसहरी में शांति की, चैन की नींद सो रहे होंगे, आपके घर की डोर बैल की चीखती आवाज आपकी नींद तोड़ेगी. आप पाएंगे कि दरवाजे पर म्यूनिसिपल कमेटी का मॉस्किटो स्क्वॉड का इंस्पेक्टर व्यंग्यात्मक मुस्कान लिए खड़ा है. वो दन्न से अंदर घुसता है. आपके बेडरुम में फट से घुसता है. मसहरी देख उसकी मुस्कान और चौड़ी हो जाती है. हो न हो इस घर में मच्छर तो होंगे ही तभी तो ये %$**& मसहरी लगा कर चैन की नींद सो रहा है. वो इधर उधर नजर मारता है. एक मच्छर उसे जल्दी ही नजर आ जाता है. वो फटाक से अपनी पेंट में से चालान की रसीद निकालता है. आपकी मजबूरी है. जुर्माने के पाँच सौ देकर रसीद लीजिए, या मामला आधे में निपटाइए, नहीं तो जेल की हवा खाइए. आपने क़ानून तोड़ा है. आपने अपने घर पर मच्छर को प्रश्रय जो दिया है.

सरकार बड़े बड़े दावे करेगी कि इस क़ानून से ये फ़ायदा हुआ वो फ़ायदा हुआ. जुर्माने से इतने हजार लोगों से उतने लाख वसूले. पर इस क़ानून के बाद भी जब स्थिति नियंत्रण में नहीं आएगी, तो सरकार फिर जागेगी. वो फिर से कड़े कदम उठाएगी. इस क़ानून में कड़े प्रावधान रखेगी. जुर्माना पाँच सौ के बजाए पाँच हजार कर देगी. कैद की न्यूनतम सीमा छः महीने के बजाए साल भर कर देगी. नतीजतन आपको आपके घर रात में बारह बजे घंटी बजाने वाला म्यूनिसिपल कमेटी का मॉस्किटो स्क्वॉड के दारोगा की मुस्कान जरा ज्यादा ही फैली हुई मिलेगी.

आपके झगड़ालू पड़ोसी को आपसे बदला लेने का नया तरीका मिल जाएगा. वो दर्जन भर मच्छर आपके घर छोड़ देगा और म्यूनिसिपल के दारोगा को इत्तिला कर देगा – देखो! इसके घर में एक नहीं, पूरे दर्जन भर मच्छर हैं! वैसे, राज की बात बताऊँ, इस इफ़ेक्टिव आइडिये को आप अपने खड़ूस बॉस के ऊपर प्रभावी तरीके से लागू कर सकते हैं. किसी शाम उनसे मिलने के बहाने चले जाएँ, कुछ चापलूसी मक्खन बाजी कर आएं, और इस बीच डिबिया में साथ लाए मच्छरों को निगाह बचा कर छोड़ दें. दारोगा को पहले से ही टिप दे कर रहें. वो तो आपके बाहर आने का इंतजार खुशी से करता मिलेगा.

वैसे, इस क़ानून से जनता कुछ कमाई भी कर सकती है. आप कछुआ छाप मच्छर भगाओ अगरबत्ती, आलआउट मच्छर भगाओ मशीन तथा मच्छर मार रैकेटों का धंधा चालू कर सकते हैं. इनका स्टाक एकत्र कर इनकी कालाबाजारी कर इनमें अच्छा खासा मुनाफ़ा कमा सकते हैं. इन कंपनियों के शेयरों में निवेश कर सकते हैं, क्योंकि इन कंपनियों का भविष्य मच्छरों के कारण बहुत ही बढ़िया चल रहा है और चलता रहेगा.

अब तो मच्छर मियाँ के कसीदे गाने का समय आ गया है. सरकार के लिए भी, सरकारी कारिंदों के लिए भी, और जनता के लिए भी. क्यों न मच्छर-चरित-मानस का पाठ किया जाए?

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9 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. काटे तो मलेरिया, न काटे तो जूर्माना. वाह! क्या मच्छर-राज मचा रखा है.

    क्या उर्वर मस्तिष्क है, कानुन बनाने वालो के....

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  2. हा हा हा हा ! मजेदार व्यंग्य है

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  3. अच्छी प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...
    मैनें अपने सभी ब्लागों जैसे ‘मेरी ग़ज़ल’,‘मेरे गीत’ और ‘रोमांटिक रचनाएं’ को एक ही ब्लाग "मेरी ग़ज़लें,मेरे गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी"में पिरो दिया है।
    आप का स्वागत है...

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  4. हम लोग नकल करने में उस्ताद हैं। चीन और अमेरिका से इस तरह के बीरबावन कानून बड़े आराम से चुरा लेते हैं, लेकिन इंप्लीमेंटेशन के दौर में ही दुरुपयोग शुरू हो जाते हैं।

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  5. म्यूनिसिपल कमेटी का कोई दारोगा पहले करेगा मच्छर आपके घर में प्लाण्ट फिर एंठेगा पैसे! :-)

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  6. अब मच्छरों के बदला लेने की बारी है

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  7. maine suna tha ki ek machchhar aadmi ko hinzada bana deta hai......par yahaan to enhone saare system ko hila rakha hai....

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  8. nagar palika ke daroga, police ke daroga is desh main shashvat hain /vah raviji majaa aa gaya

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  9. ab to machchharon ko bhi rishvat deni padegi.

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