सोमवार, 7 सितंबर 2009

दिमाग तो, दाल और चीनी के भाव से भी फिर रिएला है…

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व्यंज़ल

कैसे बताएँ किस किस का फिर गया है दिमाग

यकीनन मेरा या फिर तेरा फिर गया है दिमाग


वो लोग जो बातें करते हैं समाज में क्रांति की

जानते नहीं कि उनका तो फिर गया है दिमाग


जो देखते हैं सपने खाने में दाल और चीनी की

इतना तो तय है कि उनका फिर गया है दिमाग


मुहब्बत में तरजीह न दी नून तेल लकड़ी को

मुझे मालूम है कि मेरा तो फिर गया है दिमाग


मंदिरों मस्जिदों की भीड़ में भी बेधर्मी है रवि

उसे गुमान नहीं कि उसका फिर गया है दिमाग

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4 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. मुहब्बत में तरजीह न दी नून तेल लकड़ी को
    मुझे मालूम है मेरा तो फिर गया है दिमाग ।"

    असली बात । व्यंजलों ने लाजवाब किया ।

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  2. चचा गा़लिब से क्षमाप्रार्थना सहित
    दिमाग़ ही तो है ,फ़िर फ़िर जाए न क्यूँ ,
    ग़रचे मंहगी है चीनी औ दाल तो कोई खाए क्यूँ
    उनकी बातों की मिठास से कोई काम चलाए न क्यूँ ,
    इस तरह मर्जे-शुगर से बचें,चुनान्चे इश्क लड़ाए न क्यूँ ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. दिमाग फिराने वाला व्यंज़ल है ।

    उत्तर देंहटाएं

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