मंगलवार, 4 अगस्त 2009

हिन्दी में तीन लाख ब्लॉग?

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ये मैं नहीं कह रहा. आलोक तोमर ने अपने ब्लॉग में ने ये खुलासा किया है -

“….मगर जहां तक नेट का समाज नहीं होने की बात है, वहां नेट से रोजी रोटी चलाने के कारण मैं कुछ तथ्य उनके सामने पेश करना चाहता हूं। ब्लॉगर और वर्ल्ड प्रेस नाम की दो मुफ्त ब्लॉगिंग सेवाओं के जरिए भारत में ही करीब नौ लाख ब्लॉग बने हैें और उनमें से तीन लाख हिंदी में हैं। एक ब्लॉग को एक दिन में ज्यादा नहीं, अगर दस लोग भी पढ़ते हैं तो तीन करोड़ का समाज तो ये हो गया।…”

क्या सचमुच? चिट्ठा जगत् की मानें तो हम तो आंकड़ा दस हजार के पार जाने की आस लगाए बैठे थे और साल के अंत तक पच्चीस हजार को छूने की भविष्यवाणी किए बैठे थे. वैसे, रेडिफ, वेब-दुनिया, रोमन हिन्दी इत्यादि इत्यादि के हिन्दी ब्लॉगों को भी मिला दें तो क्या आंकड़ा 3 लाख तक पार हो सकता है? मुझे तो फिर भी नहीं लगता.

आपका क्या विचार है?

आलोक तोमर के ब्लॉग पर टिप्पणी बंद है, अन्यथा वहीं उनसे पूछते कि महोदय, आपने ये चमत्कृत कर देने वाले आंकड़े कहां से प्राप्त किए?

और, अगर ये आंकड़े वाकई सही हैं, तब तो हिन्दी ब्लॉग जगत् के लिए है – पा र् टी टा इ म!

27 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. आप तो टिकट बुक करो...पार्टी मैं दे रहा हूँ.


    अमेरीका वाले फुरसतीयाजी को भी बुलावा भेज रहा हूँ, जब भी गप्पे मारने कानपुर आए...पार्टी हमसे ही लें...

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  2. रतलामी जी,
    आलोक जी बहुत वरिष्ठ और गंभीर पत्रकार माने जाते हैं और राजनीतिक-अपराध जैसे मामलों पर उनकी टिप्पणियां बेबाक और बेहतरीन होती हैं,लेकिन शायद इस मसले पर कुछ गडबड़ हो गई है। या तो किसी ने उन्हें यह फर्जी आंकड़े उपलब्ध कराए हैं या वो किसी चूकवश ये लिख गए। वरना, अभी हिन्दी ब्लॉग के 1 लाख पाठक होने पर ही संदेह है। तीन लाख ब्लॉग होना तो बहुत दूर की कौड़ी है। फिर,आलोक जी ने लिखा है कि भड़ासफॉरमीडिया जैसी साइट पर एक लाख पाठक रोज आते हैं और उनकी खुद की साइट पर 50 हजार तो आ ही जाते हैं-समझ से परे हैं। उन्होंने एलेक्सा का जिक्र किया है। लेकिन,उनकी डेटलाइनइंडिया अभी टॉप एक लाख साइटों में शुमार नहीं है। भड़ास4मीडिया हिन्दी की लोकप्रिय साइटों में है, लेकिन उसकी रैंकिंग अभी 80-90 हजार के आसपास है। वैसे, इस गडबडझाले का यशवंत जी एक झटके में समाधान कर सकते हैं। वो है भड़ासफॉरमीडिया का असल ट्रैफिक बताकर क्योंकि आलोक जी को शायद इस साइट की लोकप्रियता पूरे हिन्दी नेट समाज की लोकप्रियता दिख रही है। और वो इसकी रैंकिंग भर को पाठक समझ रहे हैं या संभवत कुछ और......
    खैर,प्रभाष जी को नेट पर लिखना ही चाहिए....उनका स्वागत है....

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  3. (ख्याली) पुलाव अच्छा बना है! क्या ख्याल है?

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  4. बेनामी2:37 pm

    galatfahmi ho gai hai.website ka gadit alexa se samjhna hi galat hai
    navbharat times jaisi web site har ghante update hoti hai par vah dus lakh me bhi nahi aati jabki desh videsh ki sabhi khabre rahati hai
    aiseme halki fulki gossip vali vebsite ka mahimamandan theek nahi
    hai prabhash ji jin site par likhte
    hai unki ranking 14 lakh ke niche
    hai to kyayah maan le ki lakh do lakh vali site chlane vale unse
    upar ho gaye hai.alok ji ka aakda
    galat pratit hota hai.par dar ke mare naam nahi deraha hu kyoki
    kab bhadas nikal de. par mai bhi unka prasansak hu .

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  5. आलोक जी के मुँह में घी शक्कर!
    घुघूती बासूती

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  6. यह एक ऐसा मजाक है जो मजाक के लिये नहीं किया गया ।
    बल्कि यह हिन्दी ब्लोगिंग के प्रति अग्यान का परिचायक है, पता नहीं ये आंकडे किन तथ्यों पर आधारित हैं ।

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  7. लगता है आलोक जी 2015-या 2020 की बात कर रहे हैं।

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  8. Piyush ne theek likha hai. Hawaee aankarebaaji se koee fayda naheen.
    govind singh

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  9. 3 लाख ब्लागर और 3 करोड़ पाठक ! ही ही ही .............!
    क्या इसीलिए हिंदी ब्लागिंग में 90 % पाठक खुद ब्लागर ही हैं जो टिप्पणियाँ पाने और अपने ब्लॉग पर बुलाने के लिए रोजाना 100 -100 ब्लॉगों पर टिप्पणियां छोड़ते हैं .

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  10. लगता है ये खबर सूत्रों से प्राप्त की गयी है...

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  11. ये सच है या झूठ पर तबियत तो खुश हो गई। इतनी बड़ी संख्या में आखिर हमारा भी तो योगदान है:)

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  12. हिंदी के तीन लाख ब्लॉग है या नहीं यह में नहीं जानता लेकिन इतना जरुर कहूँगा कि चिट्ठाजगत व ब्लोग्वानी में जितने चिट्ठे जुड़े है उनसे हिंदी चिट्ठो की संख्या कहीं बहुत ज्यादा है कितने ही चिट्ठेकार मिल जायेंगे जिन्हें अभी तक चिट्ठजगत या ब्लोग्वानी के बारे में पता ही नहीं होगा मुझे खुद को चिटठा बनाने के कोई एक साल बाद ब्लॉग एग्रीगेटर के बारे में पता चला था | अतः हो सकता चिट्ठो की संख्या बहुत ज्यादा हो |

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  13. संख्या में दस-बीस से भाग देना भूल गये होंगे आलोक तोमर जी। :)

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  14. मुझे तो इतने ब्लॉग होने का बिलकुल यकीन नहीं है... स्पष्टीकर्ण मिले तो यकीन हो. अभी हिंदी के इतने पाठक और ब्लॉग क सवाल ही नहीं उठता भले ही हिंदी ब्लॉग की संख्या तेजी से बढ़ रही हो.

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  15. हुर्र्रे इट्स पार्टी टाइम
    :):):):):):):):):):):):):):):):):):):):):):):):):):):):):):):):):):):):)
    वीनस केसरी

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  16. फर्जीवाडा हर जगह चल रहा है

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  17. सफेद झूठ.....
    ब्लागजगत की जानकारी न रखनेवाले व्यक्ति की रपट...

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  18. मैंने भी वहां पढ़ा था, मगर आलोक जी जब कह रहे हैं तो भला कोई क्या कर सकता है? उन्होंने लगभग 4-5 महिने पहले कमेंट बंद कर दिया था.. तब से कुछ भी कमेंट करने का मन करता है तो बस ऐसे ही रह जाते हैं..

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  19. तीन लाख नहीं
    ये तीन करोड़ होंगे
    मैं विश्‍वास के साथ
    कह सकता हूं
    और प्रमाण
    दे सकता हूं
    इसे ही तो
    कहते हैं
    आलोक बिखेरना।

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  20. और यह "वर्ल्ड प्रेस" क्या है?

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  21. अब क्या कहें, ये साहब पत्रकार हैं तो वैसा ही लिखेंगे ना, टिपिकल रिपोर्टर स्टाइल!

    तीन लाख हिन्दी ब्लॉग की तो छोड़ें, कोई इनको समझाए कि wordpress को वर्डप्रैस बोलते हैं न कि वर्ल्ड प्रैस (world press)। साथ ही यह भी कोई इनको समझाए कि यदि एक ब्लॉग के कम से कम 10 पाठक हैं तो तीन लाख ब्लॉग के तीन करोड़ नहीं हो गए, ऐसे ही गुणा नहीं कर दिया जाता, लोग सिर्फ़ एक ही ब्लॉग नहीं पढ़ते!! विश्लेषण का गणित इतना सरल नहीं होता!! ऐसे विश्लेषण के लिए गणित की सैट थ्योरी (Set Theory) का प्रयोग होता है, इन साहब ने शायद कभी इस चिड़िया के बारे में सुना न होगा! :)

    वैसे कुछ समय पहले इन्होंने हैवी वॉटर (heavy water) के बारे में भी लिखा था, उसको पढ़कर काफ़ी हंसी आई थी मनोरंजन हुआ था, हास्य अच्छा लिखते हैं! :)

    रवि जी, आप भी कैसी-२ बातों पर विश्वास करते हैं!! ;)

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  22. रमण कौल जी का सवाल मेरी तरफ़ से भी रिपीट माना जाये :)

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  23. तीन लाख का आंकडा एक नेट ज्ञाता ने मुझे बताया था. और नेट पर गूगल में घुसते ही जो हर विषय पर ब्लाग उपलब्ध होते हैं...उनसे इस पर भरोसा करने का मन भी करता है. इसमें बड़ी संख्या एक बार बना कर फिर कभी नहीं खोले गए ब्लाग्स की भी है. मेरे ही पांच ब्लाग बन कर बंद पड़े हैं. चिटठा जगत या अलेक्सा अंतिम मानक नहीं है. मेरे इरादा नेट की दुनिया के विस्तार से परिचित कराने का था. ये समाज प्रिंट से ज्यादा ताक़तवर बन चूका है--ख़ास तौर पर सूचनाओं के संसार में. वर्ना हिंदुस्तान टाईम्स जैसे महाबली को गॉसिप अड्डा.कॉम पर मुकदमा क्यों करना पड़ता.

    और हाँ--वर्ल्ड प्रेस नहीं वर्डप्रेस है. भूल चूक लेनी देनी.

    आलोक तोमर

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  24. इन्टरनेट के भ्रमण से कुछ प्राप्त जानकारी
    याहू सर्च हिंदी ब्लोग्स - ७८,३००,००० , हिंदी ब्लोग्स ब्लागस्पाट - ६,३३०,००० , हिंदी ब्लोग्स अग्रीगेटर - १,१७०,०००
    गूगल सर्च हिंदी ब्लॉग साइट्स - २८,२००,०००
    ध्यान रहे ये पृष्ठ हैं ब्लॉग संख्या नहीं
    आपक ब्लॉग सर्च इंजन में है या नहीं ये अपने ब्लॉग का नाम और ब्लॉग लिखकर जाना जा सकता है . जैसे मैंने लिखा " संस्कृति ब्लॉग "

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  25. सही हो या गलत, खबर है अच्छी। अभी नहीं तो सही, अगले कुछ महीनों (या सालों) में तो हम यह आंकड़ा छूएंगे ही।

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  26. द्विवेदी जी , अनूप जी कह ही गए। यह तो दो साल बाद भी लाख में नहीं है, हमें तो तय लगता है…

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