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Wednesday, June 03, 2009

सुनिए असली #1 ब्लॉग गान

लीजिए, आपके लिए पेश है हिन्दी में, हिन्दी का पहला, असली #1 ब्लॉग गान.

पर, पहले थोड़ी सी नजर ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर डालें.

लिनस टॉरवाल्ड (अरे! आप लिनस को नहीं जानते?!!!!) ने जब एक माइक्रोसॉफ़्ट के उत्पाद की दिल खोलकर प्रशंसा की तो, लगा कि क्या सूर्य पश्चिम से तो नहीं उग आया है? मगर, सचमुच यहाँ सूर्य कहीं और से ही चमक रहा है.

लिनस ने सांगस्मिथ नाम के एक औजार की घोर, मुक्त कंठ से प्रशंसा की तो मैंने भी उसे डाउनलोड कर लिया क्योंकि उसका ट्रायल वर्जन मुफ़्त डाउनलोड के लिए उपलब्ध है.

सांगस्मिथ का टैगलाइन है – हर एक के दिल में संगीत बजता है.

song-smith

सही कहा. सांगस्मिथ एक ऐसा अनुप्रयोग है जो आपकी आवाज से मिलते जुलते टोन और गति से आपके द्वारा माइक्रोफोन में (बाथरूमिया स्टाइल में ही सही, ) गाए जा रहे गीत के लिए पार्श्व संगीत तैयार करता है जिसे आप पूरी दुनिया को सुनाने के लिए सहेज सकते हैं तथा डबल्यूएमए फ़ॉर्मेट में एक्सपोर्ट भी कर सकते हैं. इसका प्रयोग एकदम आसान है. स्टाइल ड्रापडाउन मेन्यू से मनपसंद पार्श्व संगीत चुनें और लाल रेकार्ड बटन को दबाकर,  माइक में गाना चालू कर दें. जब गाना पूरा हो जाए तो स्टाप बटन दबा दें. आपका गाना स्टूडियो क्लास रेकॉर्डिंग सहित तैयार है!

मेरे पहले प्रयास का नतीजा रहा – हिन्दी का असली # 1 ब्लॉग गान (धन्यवाद सांगस्मिथ और लिनस,). गुलाबी प्ले बटन पर चटका लगाएँ,  सुनें और मज़े लें.

 

पुनश्च – वैसे तो देबाशीष ने बहुत पहले 2004 में ही हिन्दी का प्रथम ब्लॉग गीत छाप दिया था.

12 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

Arvind Mishra said...

अब समझ नहीं आया कि मूल गीत -स्वर मौलिक है या फिर पार्श्व संगीत !
वैसे यह इतना बेवकूफी भरा है ( मुआफी हुजूर ? ) की बीच में ही बंद करना चाहता था पर तभी खुद बंद हो गया !
हाँ तकनीक की जानकारी अच्छी रही मगर हम किसी विदेशी धुन पर गाने को विवश ही क्यों हों ? क्या अपनी धुनों का बना बनाया पार्श्व संगीत इस टूल पर उपलब्ध नहीं हो सकता ?

RAJNISH PARIHAR said...

मुझे तो अच्छा नहीं लगा.....इसी धुन पर दूसरा प्रयास करके देखिये क्यूंकि शुरुआत ऐसी ही होती है..

अभिषेक ओझा said...

जो भी हो है तो बढ़िया. और आप तो अच्चा गा लेते हैं... एक 'ब्लॉग बैंड' बन जाए :)

मोहम्मद कासिम said...

firefor hindi theek se nahi dikha raha hai

please help

संजय बेंगाणी said...

चीज जोरदार ही होगी, मगर अभी सुन नहीं सकता. :( सुनने के बाद टिप्पणी की जाएगी.

RAJ SINH said...

dhanyvad ravijee !
abhee lag jata hoon .

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

काश हमारे कम्प्यूटर का साउंड कार्ड काम कर रहा होता।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

हिमांशु । Himanshu said...

मुझे यह संगत नहीं जमी । चीज तो अच्छी ही होगी ।

anil said...

अच्छी जानकारी ! अच्छा प्रयास !
थोडा़ रियाज़ करने से सुर ठीक हो जाएगा लगे रहीये

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

@ अभिषेक जी- एक 'ब्लॉग बैंड' बन जाए

तो क्या अब ब्लॉग का बैण्ड बजने वाला है? :)
वैसे आइडिया बुरा नहीं है।

यह अनुप्रयोग तो मजेदार है। भले ही इसका पहला उत्पाद अरविन्द जी को बहुत शानदार न लगा हो..।

Neeraj Rohilla said...

मजा आ गया, हमे भी इस तरह के काम बहुत पसन्द हैं। आपकी तो आवाज काफ़ी सही है, हम गाते तो कम्प्यूटर ही बन्द हो जाता।

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

एक बार ए आर रहमान ने कहा था कि घटिया से घटिया गायक से भी वे अच्‍छे संगीत के जरिए हिट संगीत बना सकते हैं।

यह प्रोग्राम तो रहमान को भी फ्लॉप कर रहा है।


खैर चलो आओ ब्‍लॉग लिखें... :)

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