टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

तमिल है, तेलुगु है, मलयालम है, कन्नड़ भी है, पर हिन्दी नहीं!

radio channel

मामला मुझे तो लालू की रेल जैसा ही दिक्खे है. पटना से रेल चली तो पटना में ही पहुँची – वैसे ही डी राजा की गाड़ी दक्षिण में ही घूमी?

प्रसार भारती की डिश टीवी सेवा – डीडी डायरेक्ट प्लस में पिछले कुछ दिनों बिना हो-हल्ला कुछ अपग्रेडेशन हुआ लगता है और उसमें रेडियो चैनलों में तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ – याने तमाम दक्षिण भारतीय भाषाओं में प्रत्येक में 3 - 3 शानदार रेडियो सेवाओं की शुरूआत हुई. जी हाँ, 3 - 3 शानदार रेडियो – क्लासिक, 90’s और लेटेस्ट. इन रेडियो चैनलों में सीडी क्वालिटी का नान-स्टाप 7x24 संगीत बजता है, वो भी धुंआधार और वह भी एफएमिया शैली के घनघोर फोकट फालतू बकवास के बगैर.

और हिन्दी? हिन्दी तो ग़ायब है. मेरे जैसे हिन्दी भाषी के लिए जो संगीत ओढ़ता बिछाता खाता पीता और सोता है, यह बहुत ही निराशाजनक है. उम्मीद करें कि डीडी डायरेक्ट के अगले अपग्रेड में गाड़ी उत्तरी राज्यों तक भी पहुंचेगीभी?

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हिंदी का न होना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है देखते है इन्हें कब अकल आएगी |

इन्हे हिन्दी के चैनल मिले नहीं होंगे... :)

ताज्जुब है !

हिन्‍दुस्‍तान में ही हिन्‍दी की उपेक्षा का एक और प्रमाण ... आखिर कब सुधार होगा इसमें ?

हिंदी विरोधी मंत्री को बैठाओगे तो और क्या होगा? जैसा करोगे वैसा भरोगे:)

ध्यानाकर्षण के लिये धन्यवाद!

वही तो बन्धुवर
कुछ आप ओढ गए, कुछ बिछा दिए, कुछ खा लिए
अब वो जरा सा कुछ खाए तो आप पोस्ट निकाल दिए
सप्रेम
संजय गुलाटी मुसाफिर

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