शनिवार, 27 सितंबर 2008

बार कैम्प 4 आ रहा है चिट्ठाकारों के लिए जानकारियों का खजाना लेकर

कैसी जानकारियाँ? नफा नुकसान का विवरण पिछली दफा आयोजित बार कैम्प3  में मौजूद रहे अनिल रघुराज के चिट्ठे पर यहाँ पढ़ें. और यदि आपको लगता है...

बुधवार, 24 सितंबर 2008

मॉजिल्ला फ़ॉयरफ़ॉक्स 3 का हिन्दी संस्करण जारी…

हिन्दी समेत अन्य भारतीय भाषाओं के फ़ॉयरफ़ॉक्स 3.02 बीटा संस्करण यहाँ से डाउनलोड करें :   http://en-us.www.mozilla.com/en-US/firefox/...

मंगलवार, 23 सितंबर 2008

कवि हृदय ओसामा...

आदम और हव्वा...   व्यंज़ल : जमाने की दुश्वारियाँ रही होंगी वरना हम भी तो एक कवि थे जलसे में उस दिन हादसा हुआ सुना है वहाँ ब...

सोमवार, 22 सितंबर 2008

ऑनलाइन हिन्दी प्रोग्रामिंग औजार हिन्दवी जारी

ठेठ भारतीय भाषा में प्रोग्रामिंग की सुविधा उपलब्ध करवाने वाले औजार हिन्दवी   का ऑनलाइन, नया संस्करण http://hindawi.in/online/   जारी किया गय...

रविवार, 21 सितंबर 2008

हिन्दी पखवाड़ा : हिन्दी पुस्तकालय वि. अंग्रेज़ी लाइब्रेरी

किसी ने कहा है कि आप मुझे किताबें दे दीजिए और बियाबान जंगल में छोड़ दीजिए. मैं ताजिंदगी तब तक कभी बोर नहीं होउंगा, जब तक कि मेरे पास पढ...

शनिवार, 20 सितंबर 2008

सॉफ़्टवेयर मुक्ति दिवस और हिन्दी पखवाड़ा पर हिन्दी की ऑनलाइन पत्रिका का इंटरनेट पर आईआरसी चैनल के जरिए लोकार्पण समारोह का स्नेहिल आमंत्रण

इससे बेहतर समय हो ही नहीं सकता था. 19 20 सितम्बर सॉफ़्टवेयर मुक्ति दिवस है और साथ ही साथ हिन्दी पखवाड़ा भी चल रहा है. संयोगवश, भारतीय भा...

बुधवार, 17 सितंबर 2008

गूगल क्रोम : अभी अद्यतन न करें

यदि आपको नई-नवेली चीजें ललचाती हैं, और आप चाहते हैं कि आपके कम्प्यूटर पर हर हमेशा गूगल क्रोम का नया नवेला डेवलपर संस्करण (जिसे आम प्रयोग ...

शुक्रवार, 12 सितंबर 2008

नहीं, नहीं, मेरे मोटापे का राज कुछ और ही है; भागवान्!

अगर आप अपनी कमर के घेरे के ऊपर बाल बराबर भी चिंतित हैं कि लाख जतन करने के बाद भी उसमें बाल बराबर भी कमी नहीं होती, उल्टे उसमें समयबद्ध, च...

सोमवार, 8 सितंबर 2008

उबुन्टु लिनक्स में अतिरिक्त अनुप्रयोगों को अत्यंत आसानी से कैसे संस्थापित करें?

  उन्मुक्त ने अपने पोस्ट में उबुन्टु लिनक्स की तारीफ की थी कि ये किस तरह से मुक्त स्रोत का ऑपरेटिंग सिस्टम हिन्दी वालों के लिए भी बढ़िया ह...

शुक्रवार, 5 सितंबर 2008

अंततः महलों के दिन भी फिरते हैं...

पिछली पोस्ट कमरे कमरे पर... बहुत से पाठकों ने उत्कंठा जताई थी कि आखिर वे क्या वजहें रहीं थीं जिसके कारण एक रतलामी को भोपाली बनने को मजबू...

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