February 2008


(हम सभी नित्य सीखते हैं. तकनीक नित्य छलांगें मार रही है और उससे कदमताल मिलाना मुश्किल है. मगर, इच्छा शक्ति है, सीखने का जज्बा है तो कोई राह मुश्किल नहीं. हमारा वतन हमारा समाज नामक चिट्ठे के डॉ. मान्धाता सिंह ने अपने हिन्दी ब्लॉग लेखन के संघर्ष की रोचक दास्तां लिखी तो मेरा सिर उनके जज्बे, उनके उत्साह के आगे खुद-ब-खुद झुक गया. मुझे लगा कि ये संघर्ष गाथा हम आप को एक बार फिर से पढ़नी चाहिए. कभी कहीं पर कदम थकने लगे, रास्ता दुरूह लगने लगे तो इस संधर्ष गाथा को फिर से पढ़ लें, यकीनन, आपके कदमों में शक्ति आएगी और राह आसान होने लगेगी. मूल आलेख यहाँ पर पढ़ें . और, हो सकता है हिन्दी चिट्ठाकारी पर पांव जमाने की आपकी कथा भी कोई कम रोचक, कम प्रेरणाप्रद नहीं होगी... तो क्यों न उन्हें हमें बताएँ?)

एक हिंदी ब्लागर की आत्मकथा
कंप्यूटर पर खबरें लिखने और पेज बना लेने तक कंप्यूटर का सीमित ज्ञान तो था मगर अंतर्जाल पर हिंदी में खुद कुछ लिखने की जगह बन सकती है, यह बिल्कुल नहीं जानता था। अंतर्जाल में कुछ हिंदी पोर्टल वेबदुनिया और गूगल, याहू, एमएसएन वगैरह में जाकर हिंदी खबरें पढ़ लेता था। हिंदी अखबार जो नेट पर उपलब्ध थे, उन्हें भी खाली समय में पढ़ने तक सीमित था। कुछ ब्लाग ( हिंदी के कम मगर ज्यादा अंग्रेजी के थे ) को भी देखकर उन्हें जानने की जिज्ञासा होती थी, मगर यह डर भी समाया रहता था कि खर्चील होगा। इस खर्च के डर ने काफी समय तक आगे बढ़ने नहीं दिया। मेरे मित्र पलाश विश्वास ने बताया कि ईब्लागर में फ्री है। उन्होंने कई महीने पहले अंग्रेजी में अपना ब्लाग बना लिया था और बाकायदा लिख रहे थे। बहरहाल फ्री ब्लाग की सूचना ने मुझे हिंदी ब्लाग बनाने के लिए और भी प्रेरित किया। इस बीच ईबीबो में भी ब्लाग बनाकर लिखना शुरू किया। ईबीबो में हिंदी लिखना ईब्लागर से आसान था इसी लिए हिंदी लिखने का सीधा प्रयास ईबीबों में करने लगा और उसी को कापी करके ईब्लागर के चिंतन ब्लाग पर भी पोस्ट करने लगा। बाद में उसमें भी इतनी तकनीकी खामियां आईँ कि अंततः ईबीबो के ब्लाग को बंद ही कर दिया। सच यह है कि ईब्लागर में आज भी सीधे गति के साथ हिंदी लिखना दुरूह ही है। लेकिन आभारी ईब्लागर्स का ही हूं जहां से ब्लागिंग की दुनियां में अपनी उपस्थिति दर्ज करा पाया। आइए फिर वहीं चलते हैं जब ईब्लागर्स पर ब्लाग बनाने जुटा था।


यह सन् २००७ का मार्च महीना था। कई महीने की चिंतन और काफी मशक्कत के बाद ईब्लागर्स पर चिंतन नामक ब्लाग बना पाया। इस ब्लाग के चिंतन नामकरण की वजह भी यही है कि इसका प्रादुर्भाव बिना किसी की मदद के व्यक्तिगत प्रयास व चिंतन से हुआ। पर असली मुश्किल यह थी कि ब्लाग बना लेने के बाद भी उस पर लिख पाना संभव नहीं हो पा रहा था। कंप्यूटर का तकनीकी ज्ञान अल्प होने के कारण ही सबकुछ समझने में देरी हो रही थी। मेरे मित्र पलाश विश्वास ने तो हिंदी में लिख पाने की उम्मीद छोड़कर अंग्रेजी में ब्लाग लिखना शुरू कर दिया। हालांकि मेरे हिंदी ब्लाग के थोड़ा निखार पर आ जाने पर और वेब दुनिया में ब्लाग बना लेने के बाद उन्होंने भी अंततः हिंदी ब्लाग वेबदुनिया में पूरे एक साल के बाद बना ही लिया है। इसे मैं अपने हिंदी ब्लाग लिखने के निरंतर खोज की जीत मानता हूं। मेरे ही कारण मेरे कई और मित्र हिंदी ब्लाग बना चुके हैं। मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि इनमें से कई वे भी हैं जो मेरे ब्लागिंग या ब्लागिंग का ही उपहास हाल तक उड़ाया करते थे।
क्षमा करें प्रसंगवश मूल कथा से भटक गया। आइए फिर वहीं चलते हैं जब अपने मित्र पलाशजी का अंग्रेजी ब्लाग देखकर हिंदी में ब्लाग बनान का दृढ़ निश्चय करके हिंदी ब्लाग बनाने में जुटा रहा। रोक के हताश होजाने वाले प्रयास के बावजूद मैंने हार नहीं मानी। रोज पलाशजी कहते कि डाक्टर साहब हिंदी लिखने की कोई तरकीब सूझी ? मेरा उत्तर निराश करने वाला ही होता था। अपनी ड्यटी करने से जो थोड़ा वक्त निकलता उसे मैं हिंदी लिखने की खोज में लगा देता था। ईब्लागर्स और नारद अक्षरग्राम की साइट में जाकर पढ़ता था। सबकुछ उसमें साफ-साफ समझाया गया था मगर मुझे यह अबूझ पहेली ही लगती थी। अंततः ईब्लागर्स में हिंदी में लिखने का टूल दिख गया। जहां रोमन में लिखने पर वह हिंदी में बदल देता है। इसमें कुछ मित्रों की मदद से लिखना तो शुरू किया मगर संतुष्ट नहीं हुआ। इस सारी प्रक्रिया में किसी इंजीनियर या ऐसे ब्लागर्स से मुलाकात भी नहीं हो पाई जो मेरे साथ बैठकर दो मिनट में मेरी मुश्किल आसान कर दे। जंगल में भटके राही की तरह खुद ही मंजिल तलाशा मैंने। विस्तार से हिंदी लिखना तब शुरू हो पाया जब हिंदी भाषा समूह की ओर से किसी शुभचिंतक ने कालूआनलाइन का लिंक भेज दिया। अब तक तो इसी टूल से काम चला रहा था मगर अब मायवेबदुनिया के ब्लाग ने सीधे ब्लाग में हिंदी लिखने की ऐसी आजादी मुहैया करायी है कि पिछली सारी तकलीफे अब याद तक नहीं आतीं। मगर ब्लागर्स की दुनिया में मेरे ब्लाग चिंतन ने जब पहला कदम रखा था तो इतनी गर्मजोशी से स्वागत हुआ कि मैं एकदम अवाक रह गया। जो मुझे न जानते हैं और न पहचानते हैं, वे अपने भाई बंधु से भी ज्यादा करीबी लगे।


अब मेरे पास तीन ब्लाग हैं। एक ही ब्लाग लिखने के लिए काफी था मगर तकनीकी दिक्कतें थीं कि पीछा ही नहीं छोड़ रहीं थीं। एक दुर्घटना घटी मेरे साथ। एक दिन एक लेख लिखकर अपने चिंतन ब्लाग पर पोस्ट किया तो किसी तकनीकी कारण से पोस्ट ही नहीं हुआ। बेहद निराश हुआ। लगा कि सब चौपट हो गया। जब चिंतन ब्लाग को तकनीकी तौरपर खराब मान लिया तो मजबूर होकर दूसरा ब्लाग हमारा वतन बनाया। फिर से इस दूसरे ब्लाग को सजाना पड़ा और सभी एग्रीगेटर पर डालने की जहमत उठानी पड़ी। इसे जहमत इस लिए कह रहा हूं क्यों कि तकनीकी कारणों से अक्सर इसमें उलझ जाता हूं। हालांकि अब यह कुछ आसान हो गया है। खासतौर पर नारद ने अपनी जटिल प्रक्रिया को आसान कर दिया है। बहरहाल हमारावतन पर लिखने के क्रम में खुद ही चिंतन की तकनीकी दिक्कतें भी दूर कर लिया। अब दोनों ब्लाग को मिलाकर सौ से अधिक प्रविष्टियां हैं।


अब ब्लाग पर लिखने के मकद पर कुछ बात न करूं तो लगेगा कि कुछ कहना भूल गया हूं। मैंने किसी खास व्यावसायिक मकसद की पूर्ति को जेहन में रखकर ब्लाग नहीं बनाया। यह इस लिए कह रहा हूं क्यों कि ब्लाग अब लोगों की कमाई का भी जरिया बन गया है। मैं इससे परे रहकर जब जिस विषय पर लिखने की तबियत हुई लिख डाला। किसी पार्टी या समुदाय की तरफदारी का तरजीह देना भी जरूरी नहीं समझा। बिल्कुल आजाद तबियत से जो कहना चाहा कह दिया। पत्रकारों के एक ब्लाग भड़ास का सदस्य बना। मगर उसमें जिस भाषा में प्रविष्टियां छप रही थीं या फिर छप रही हैं, उस पर भी ब्लाग के प्रशासक यशवंत से अपनी बात कही। असहमति जताते हुए उस ब्लाग पर भी उनकी भाषा का अनुकरण नहीं किया। अब भी व्यवसायिक ब्लाग समूहों की चकाचौंध से बेफिक्र रहकर लिखे जा रहा हूं।
इस लिखने के दौर में एक और पड़ाव का भी जिक्र करूंगा। अब मैं हिंदी में और बेहतर तरीके से इसी नए पड़ाव पर पहूंचकर ही लिख पारहा हूं। यह है वेबदुनिया का मेरा नया व्लाग कालचिंतन। हिंदी लिखने की इसी सुविधा का इस्तेमाल करके यह पूरी आत्मकथा भी लिख पारहा हूं। आखिर में इसकी शान में इतना ही कहना काफी होगा कि वेबदुनिया पर मुझे लिखते देखकर ही मेरे कई मित्र और वे भी ब्लाग बना लिए जो ब्लाग को तुच्छ समझते थे।


नीचे इसी आत्मकथा की मेरी वह काव्यमय अभ्व्यक्ति है जिसे ब्लाग बनाने के दौर में मैंने महसूस किया। शास्त्रीय काव्य के मानदंड से दूर महज अभिव्यक्ति है। साहित्य जगत के मित्रों से इस धृष्टता के लिए क्षमा चाहूंगा। इस ब्लागर्स राही ने अभी चलना बंद नहीं किया है। दौर जारी है। फिर मिलेंगे।


जलती रहे ब्लागर्स मशाल
अक्सर सोचा करता था, क्या होती है चीज ब्लाग
लगा खोजने इंटरनेट पर, तब भी नहीं खुला यह राज।।

अंग्रेजी के थे बड़े धुरंधर, हिंदी लिखना था बड़ा सवाल।
जिद हिंदी की ठानी थी, और नहीं कुछ आता रास।

अंतर्जाल की घुमक्कड़ी में, खोज लिया ही हिंदी ब्लाग।।
इसी खोज में साधो इक दिन, पाया नारद-अक्षरग्राम व हिंदी ब्लाग।

ब्लाग बनाने, हिंदी लिखने की है यह पाठशाला।
इन्हीं को अपना गुरू मानकर, ब्लाग बनाया हिंदी वाला।।

ई-ब्लागर के तहखाने में, जाकर पाया नया मुकाम।
श्रीश जैसे स्नेही मित्रों ने, हिंदी लिखना कर दिया आसान।।

अंग्रेजी के तोड़ चक्रव्यूह,, हिंदी चिंतन ने लिया अवतार।
साल भर के नन्हें शिशु का, पहला जन्मदिन है आज।।

युग-युग जिओ हिंदी ब्लागर्स, उत्साह बढ़ाया दिया सम्मान।
कामना करें सभी मिलकर, शिशु चिंतन भी बने महान।।

हिंदी चिट्ठों की द्रुतगामी नदियां, बह चलीं पहुंचीं सागर पार।
दुनिया के हर कोने में, अब बह रही है ब्लागर्स बयार।।

ब्लागवाणी चिट्ठाजगत औ नारद जैसा खेवनहार,
अंग्रेजी को मार दुलत्ती, हिंदी पर उड़ेला प्यार।।

बेलौस बको अब खूब लिखो, अभिव्यक्ति का यह नया आकाश।
अब नहीं करना है तुझे, अखबार पत्रिका की तलाश।।

कभी तो थे गिनती के यारों, अब हैं हम हजारों पार।
पाठकों की तो मत ही पूछो, वे भी हैं कई लाखों आज।।

हर विधा हर रंगा के ब्लागर्स, कुछ छोड़ते नहीं सब लिखते खास।
मोहल्ला चिंतन रिजेक्ट माल, कितने गिनाउं छा गए भड़ास।।

कोई कम नहीं हैं सभी धुरंधर, सबके अलह-अलग हैं राग।
किसी लेख से बहती कविता, कोई उगल रहा है आग।।

हिंदी जगत को अंतर्जाल पर, धुरंधर ब्लागर्स ने पहनाए ताज।
एग्रीगेटर्स की महिमा से, अखबारों में भी ब्लागर्स राज।।

ई-ब्लागर्स चिंतन नहीं अकेला अब, हमारा वतन भी देता साथ।
धूम मचाती ब्लागर्स दुनिया के, दोनों योद्धा हैं जांबाज।।

वेबदुनिया का भी लिया सहारा, जहां कालचिंतन है ब्लाग हमारा।
हिंदी लेखन मेल टिप्पणी , सब हिंदी में इसका नारा।।

हिंदी पोर्टल वेबदुनिया को, करता हू शत-शत प्रणाम।
ब्लागर्स की फैलती दुनिया में, यह भी है अब नया मुकाम।।

समानान्तर मीडिया की यह मशाल, ब्लागर्स बन्धु तुम्हारे हाथ।
जले निरंतर कभी बुझे ना, लो अभी शपथ मिला लो हाथ।।

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डा. मान्धाता सिंह, कोलकाता


और, पप्पू रो दिया...

ये वही पप्पू हैं, जिनके जेल में भी जश्न मनाने की चटपटी खबरें आती रही थीं. जीवन सचमुच बहुत कटु होता है. जश्न और रोने का हिसाब आज नहीं तो कल, बरोबर!

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व्यंज़ल

कभी जश्न तो कभी रोना

जिंदगी का है यही रोना


प्रेम में ये कहां से आया

दाल रोटी का वही रोना


हँसते हँसते आते आँसू

आंखें भूलते हैं कभी रोना


कब तक हँसेंगे दूसरों पे

जब खुद पे है वही रोना


जिंदगी आसां होती रवि

याद होता कल वही रोना


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(ये उपयोगी नुस्ख़े केडीई 4 के 'केटिप' अनुप्रयोग से सीधे ही निकाले गए हैं. यदि आप केडीई इस्तेमाल करते हैं (केडीई 4 - लिनक्स, विंडोज व मॅक ओएसX पर उपलब्ध है, और, हिन्दी में भी) तो ये आपके लिए खासे उपयोगी होंगे. यदि लिनक्स और केडीई इस्तेमाल नहीं भी करते हैं तो भी कोई बात नहीं, इन नुस्ख़ों को पढ़कर आप ये जानकारियाँ तो प्राप्त कर ही सकते हैं कि लिनक्स तंत्र में केडीई के जरिए कम्प्यूटिंग के कौन कौन से काम किए जा सकते हैं.)

· केडीई के बारे में यहाँ बहुत सारी जानकारियाँ हैं-जो कि केडीई की आधिकारिक वेब साइट है. यहाँ पर और भी उपयोगी साइटें हैं जिनमें प्रमुख अनुप्रयोगों जैसे कि- कॉन्करर के लिए, के-ऑफिस के लिए तथा के-डेवलप के लिए जानकारियाँ हैं

· केडीई कई भाषाओं (80 से अधिक) में अनूदित हो चुका है. आप देश तथा भाषा को तंत्र विन्यास से क्षेत्रीय तथा भाषा चुनकर बदल सकते हैं.

· केडीई अनुवादों तथा अनुवादकों के बारे में और अधिक जानकारी के लिए देखें - http://l10n.kde.org .

· प्रोग्राम क्लिपर जो कि डिफ़ॉल्ट रूप में स्वचालित प्रारंभ होता है तथा तंत्र तश्तरी में बना रहता है, चयनित पाठों को रखे रहता है. इन्हें पुनर्प्राप्त किया जा सकता है और (उदाहरण के लिए यदि यूआरएल हो तो) चलाया भी जा सकता है. क्लिपर के प्रयोग के बारे में और अधिक जानकारी के लिए देखें: क्लिपर हैण्डबुक

· किसी विंडो के शीर्षक पट्टी में दोहरा क्लिक करने पर उसे छायादार बनाता है, जिसका अर्थ है कि सिर्फ शीर्षक पट्टी ही दिखाई देगी. शीर्षक पट्टी पर दूसरी बार दोहरा क्लिक करने पर विंडो फिर से दिखाई देने लगेगा.
परंतु, निश्चित रूप से, आप इस व्यवहार को तंत्र विन्यास (सिस्टम सेटिंग्स) में जाकर बदल सकते हैं.

· केडीई में विंडो के मेनिपुलेशन के बारे में और अधिक जानकारी के लिए यहाँ पर देखें : केडीई उपयोक्ता गाइड.

· आप आभासी डेस्कटॉप में विंडो को साइकल कर सकते हैं. इसके लिए ऑल्ट कुंजी को दबाए रख कर टैब या शिफ़्ट+टैब कुंजी दबाएँ. अधिक जानकारी के लिए देखें केडीई उपयोक्ता गाइड.

· केडीई परियोजना की नींव 1996 में रखी गई तथा इसका पहला संस्करण1.0, जुलाई 12, सन् 1998 में जारी हुआ.

· आप केडीई परियोजना को सहयोग कर सकते हैं अपने कार्यों से (प्रोग्रामिंग, डिजाइनिंग, डॉक्यूमेंटिंग, प्रूफ़ रीडिंग, अनुवादों, इत्यादि के जरिए.) तथा आर्थिक या हार्डवेयर अंशदानों से. यदि आप अनुदान देने में दिलचस्पी रखते हैं तो kde-ev@kde.orgपर संपर्क करें या फिर kde-quality@kde.org पर संपर्क करें यदि आप किसी भिन्न तरीके से अपनी सेवा देना चाहते हैं.

· विंडो के आकार को बदलने के लिए केडीई में कुछ शॉर्टकट ये हैं:

विंडो को अधिकतम करने के लिए...

अधिकतम बटन को क्लिक करें...

...पूरा स्क्रीन के लिए,

...माउस के बाएँ बटन से

...सिर्फ खड़े में,

...माउस के मध्य बटन से

...सिर्फ आड़े में,

...माउस के दाएँ बटन से

· इसके वेब http://www.kde.org साइट पर नियमित जाकर केडीई के नए डेवलपमेंट तथा संस्करणों के बारे में आप अपनी जानकारी ताज़ातरीन बनाए रख सकते हैं.

· केडीई, बढ़िया डिजाइन किए सी++ फ़ाउण्डेशन पर आधारित है. सी++ एक प्रोग्रामिंग भाषा है जो डेस्कटॉप डेवलपमेंट के लिए बढ़िया काम करता है. केडीई ऑब्जैक्ट मॉडल सी++ की शक्ति को और आगे बढ़ाता है. विवरण के लिए, देखें http://techbase.kde.org/ .

  • आप टार अभिलेख में ब्राउज़ करने के लिए, कॉन्करर का इस्तेमाल कर सकते हैं. कॉन्करर के जरिए आप संपीडित फ़ाइलों में भी ब्राउज़ कर सकते हैं. आप फ़ाइलों को नई जगह यानी किसी दूसरी कॉन्करर विंडो या डेस्कटॉप पर खींचकर भी उन्हें एक्सट्रेक्ट कर सकते हैं.

· केडीई का मदद तंत्र न सिर्फ केडीई के स्वयं के एचटीएमएल आधारित मदद को प्रदर्शित करता है, बल्कि मेन (मेनुअल) पृष्ठों की जानकारियों को भी बताता है.

· मदद प्राप्त करने के और भी अन्य तरीकों के लिए देखें - केडीई उपयोक्ता गाइड.

· अगर किसी औज़ार पट्टी पर सारे बटन दिखाई नहीं पड़ रहे हैं तो पट्टी के दाहिने छोर पर बने तीर के निशान पर क्लिक करें.

· अगर आप समय काटना चाहते हैं तो केडीई में एक से एक मज़ेदार खेल भी हैं.

· यदि आप किसी प्रोग्राम का नाम जानते हैं तो आप उस प्रोग्राम को इस तरह से भी चला सकते हैं - ऑल्ट+एफ़2 दबाएँ तथा जो कमांड लाइन विंडो प्रकट होगा उसमें प्रोग्राम का नाम भरें.

· आप कोई भी यूआरएल में कहीं से भी ब्राउज़ कर सकते हैं इसके लिए ऑल्ट+एफ़2 दबाएँ तथा यूआरएल को दिए गए कमांड-लाइन विंडो में भरें.

  • यदि आप कॉन्करर इस्तेमाल कर रहे हैं तथा स्थान फ़ील्ड में अन्य स्थान को टाइप करना चाह रहे हैं ताकि आप वहां पर जा सकें तो आप उस पूरे फ़ील्ड को बड़ी शीघ्रता से साफ कर सकते हैं. इसके लिए सफ़ेद क्रॉस युक्त काले बटन का प्रयोग करें जो कि स्थान लेबल के बाईं ओर स्थिति है और फिर टाइपिंग प्रारंभ करें.

· स्थान फ़ील्ड को साफ करने के लिए तथा पाठ संकेतक को वहाँ पर रखने के लिए आप कंट्रोल+एल कुंजी दबा सकते हैं.

· यदि आप शीर्षक पट्टी को एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं तब भी आप स्क्रीन को माउस के जरिए विंडो को खिसका सकते हैं. इसके लिए ऑल्ट कुंजी को दबाए रख कर विंडो में कहीं पर भी क्लिक करें तथा इसे माउस के जरिए खींचें . और हाँ, आप इस व्यवहार को भी तंत्र विन्यास में बदल सकते हैं.

· स्क्रीन पर विंडो को छोटा बड़ा करने के लिए ऑल्ट कुंजी दबाकर, विंडो में कहीं भी दायाँ क्लिक करें और माउस को खिसकाएँ.

· आपके ईमेल संदेशों को एनक्रिप्ट करने व भेजने के लिए केडीई का ईमेल क्लाएंट (केमेल) परिशुद्धता के साथ पीजीपी/ग्नूपीजी एकीकरण की सुविधा प्रदान करता है. एनक्रिप्शन की सेटिंग के लिए केमेल हैण्ड बुक देखें.

· सारे विश्व में केडीई डेवलपर मौजूद हैं, उदाहरण के लिए, जर्मनी में, स्वीडन, फ्रांस, कनाडा, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया, नामीबिया, अर्जेंटीना, तथा यहाँ तक कि नॉर्वे में भी! केडीई डेवलपर और कहाँ मिल सकते हैं ये देखने के लिए जाएँ http://worldwide.kde.org पर.

· केडीई का सीडी प्लेयर, केएससीडी, इंटरनेट सीडी डाटाबेस फ्रीडीबी को एक्सेस करता है और आपको शीर्षक/ट्रैक के बारे में जानकारी देता है.

· केएससीडी के फ़ंक्शन के बारे में पूरी जानकारी केएससीडी हैण्डबुक में उपलब्ध है.

· प्रकटन मॉड्यूल में तंत्र विन्यास के भीतर ही, उदाहरण विंडो के शीर्षक पट्टी में क्लिक करके आप विंडो शीर्षक पट्टी के रंग को बदल सकते हैं.

· आप उदाहरण ग्राफ़िक्स के अन्य पहलू का प्रयोग केडीई के रूप रंग को अपने कम्प्यूटर पर मनोनुकूल बनाने के लिए कर सकते हैं.

· विंडो प्रबंधन शैलियों और पुरानी थीम शैलियों में यह फ़र्क़ है कि विंडो प्रबंधन शैली नियंत्रण केंद्र में ही विंडो शीर्षक पट्टी की रंग सेटिंग दिखाती है, इसीलिए उसे वहीं से लागू किया जा सकता है.

· यदि आप केडीई के अगले संस्करण के जारी करने की प्लानिंग के बारे में जानना चाहते हैं तो, रिलीज कार्यक्रम-सूची के लिए यहाँ देखें: http://techbase.kde.org . यदि आप वहां पर सिर्फ पुरानी तिथियों को देख पा रहे हैं तो इसका अर्थ है कि संभवतः कुछ सप्ताह/माह का सघन डेवलपमेंट कार्य बकाया है - अगले संस्करण के जारी होने के लिए.

  • विंडो सजावट के अंदर, शीर्षक पट्टियाँ स्वयं ही स्वचालित खिसकती हैं ताकि वे हमेशा दिखाई देती रहें. आप अपने विंडो के शीर्षक पट्टी सजावट को अपने शीर्षक पट्टी में दायाँ क्लिक कर तथा विंडो बर्ताव कॉन्फ़िगर करें... चुनकर कर सकते हैं.

· यदि आप डिफ़ॉल्ट पूर्णता मोड को पसंद नहीं करते हैं (जैसे कि कॉन्करर में), आप विजेट संपादित करें में दायाँ क्लिक करके एक भिन्न मोड चुन सकते हैं जैसे कि स्वचालित या हस्तचालित पूर्णता. हस्तचालित पूर्णता ठीक उसी तरह काम करता है. जैसे कि यूनिक्स शैल में शब्द पूर्णता काम करता है. इसे चालू करने के लिए कंट्रोल+E का प्रयोग करें.

· यदि आप अपनी स्वयं की दिन की युक्ति , जमा करना चाहते हैं तो कृपया उन्हें यहाँ भेजें- kde-doc-english@kde.org

· अगर आप कॉन्करर या डेस्कटॉप से कोई फ़ाइल खींच कर कंसोल में ले जाएंगे तो आपको यूआरएल चिपकाने या उस फ़ोल्डर को दाखिल करने का विकल्प मिलेगा. जो आपको चाहिए वह चुनें ताकि आपको टर्मिनल विंडो में पूरा पथ न लिखना पड़े.

· आप अपने स्वयं के वेब शॉर्टकट कॉन्करर में जोड़ सकते हैं. इसके लिए सेटिंग्स->कॉन्करर कॉन्फ़िगर करें->वेब शॉर्टकट चुनें. फिर नया... पर क्लिक करें तथा फ़ील्ड को पूरा करें.

· आगे के निर्देशों तथा उन्नत विशेषताओं के विवरणों लिए जो वेब शॉर्टकट में उपलब्ध हैं, देखें कॉन्करर हैण्डबुक.

साभार :- माइकल लैचमेन तथा थॉमस डाइहल

· हर यूनिक्स उपयोक्ता के पास एक घर फ़ोल्डर होता है, जिसमें उसकी अपनी फ़ाइलें तो होती ही हैं, उपयोक्तानुसार कॉन्फ़िगरेशन फ़ाइलें भी सुरक्षित रखी जाती हैं. यदि आप कंसोल विंडो में काम कर रहे हैं तो बिना किसी पैरामीटर के cd कमांड चलाने पर आप अपने घर फ़ोल्डर में जा सकते हैं.

· आपको आश्चर्य होगा कि यहाँ, यूनिक्स तंत्र पर बहुत ही कम ऐसी फ़ाइलें हैं जिनका अंत .exe या .bat से होता है ऐसा इसलिए है कि यूनिक्स तंत्र में किसी फ़ाइल का कोई निश्चित एक्सटेंशन होना आवश्यक कतई नहीं है. चलाने योग्य फ़ाइलों को केडीई में कॉन्करर में गरारी प्रतीक द्वारा प्रदर्शित किया जाता है तथा कंसोल में लाल रंग में दिखाए जाते हैं (यह आपके तय किए गए विन्यास पर भी निर्भर करता है, जिसे आप बदल सकते हैं).

· यदि आप चाहते हैं कि आपका डेस्कटॉप ज्यादा आकर्षक दिखाई दे, आप अतिरिक्त प्रसंग, विजेट शैलियाँ, विंडो सजावट तथा और भी बहुत कुछ यहां kde-look.org से प्राप्त कर सकते हैं.

· क्या आप जानते हैं कि आप अपने माउस के मध्य बटन का इस्तेमाल पाठ चिपकाने के लिए कर सकते हैं? अपने माउस के बाएँ बटन से कुछ पाठ चुनें व माउस के मध्य बटन से इसे अन्यत्र कहीं चिपकाने की कोशिश करें. चयनित पाठ क्लिक किए स्थान पर चिपक जाएगा. यह भिन्न-भिन्न प्रोग्रामों के बीच भी काम करता है.

· यदि आप स्क्रीन पर दूरी को नापना चाहते हैं तो इसके लिए प्रोग्रामके-रूलर बहुत उपयोगी है.

· इसके अलावा, यदि आप स्केल के सिंगल पिक्सेल को गिनना चाहते हैं तो इसके लिए, के-मैग बहुत उपयोगी होगा. (ये केडीई बेस स्थापना का भाग नहीं है अत: इन्हें अलग से स्थापित करना होगा और हो सकता है कि आपके वितरण में यह शामिल हो भी और नहीं भी) के-मैग ठीक एक्स-मैग की तरह काम करता है, अंतर बस यह है कि यह बढ़िया काम करता है.

सौजन्य: जेस्पर पेडरसन

  • आप केडीई इवेंट के साथ ध्वनियों, पॉपअप विंडो तथा और भी बहुत कुछ को सम्बद्ध कर सकते हैं. इसे तंत्र विन्यास में सूचनाएँ चुन कर कॉन्फ़िगर किया जा सकता है.

· केडीई पूर्णतः नेटवर्क पारदर्शी वातावरण प्रदान करता है : आप किसी भी केडीई अनुप्रयोग में नेटवर्क के यूआरएल का प्रयोग कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, आप कोई यूआरएल जैसा कि ftp://www.server.com/myfile केराइट के फ़ाइल ओपन संवाद में भर सकते हैं तथा केराइट इसे आपके लिए खोल देगा तथा बाद में जब आप इसके 'सहेजें' बटन पर क्लिक करेंगे तो यह इसे वापस एफटीपी सर्वर पर सहेज देगा

· आप कॉन्करर का प्रयोग अपनी फ़ाइलों को एक्सेस करने के लिए कर सकते हैं जो किसी भी सर्वर पर एसएसएच एक्सेस प्रदान करता है. इसके लिए कॉन्करर के स्थान पट्टी पर यह भरें fish://उपयोक्ता नाम@होस्टनाम .

· वस्तुतः सभी केडीई अनुप्रयोग fish:// यूआरएल कमांड समर्थित करते हैं- ऐसा कोई एक आजमा कर देखें - केराइट के खोलें संवाद में.

· केमेल - केडीई के ईमेल क्लाएंट में बहुत से लोकप्रिय स्पैम फ़िल्टर करने वाले अनुप्रयोगों का अंतर्निर्मित समर्थन है. केमेल में स्वचालित स्पैम फ़िल्टर करने के लिए, अपने मनपसंद स्पैम फ़िल्टर को जैसा कि आप पसंद करते हैं कॉन्फ़िगर करें फिर केमेल में औजार->एंटी-स्पैम विजार्ड में जाएँ. अधिक जानकारी के लिए केमेल हैण्डबुक एंटी-स्पैम विजार्ड अध्याय देखें.

· आप किसी विंडो को उसके शीर्षक पट्टी पर मध्य माउस बटन से क्लिक कर अन्य विंडो के नीचे भेज सकते हैं.

· केडीई अनुप्रयोगों में आपको यह क्या है? मदद पाठ सुविधाएँ मिलती हैं. विंडो शीर्षक पट्टी में प्रश्न वाचक चिह्न को क्लिक करें तथा उस वस्तु पर क्लिक करें जिसके लिए आपको मदद चाहिये. (कुछ प्रसंगों में, यह बटन प्रश्नवाचक चिह्न के बजाए अंग्रेजी का लोअरकेस i होता है).

· केडीई में बहुत से विविध विंडो फ़ोकस मोड का समर्थन है: इसके लिए विंडो बर्ताव में तंत्र विन्यास में देखें. उदाहरण के लिए, यदि आप माउस का प्रयोग ज्यादा करते हैं तो आप फ़ोकस माउस को फ़ॉलो करता है विन्यास पसंद कर सकते हैं.

· जाल पृष्ठों को कॉन्करर लगातार ऊपर या नीचे स्क्रॉल करता रह सकता है: इसके लिए शिफ़्ट+ऊपर तीर या शिफ़्ट+नीचे तीर कुंजियों को दबाएँ. गति को बढ़ाने के लिए इन्हीं कुंजी संयोजन को फिर से दबाएँ या स्क्रॉलिंग रोकने के लिए कोई भी अन्य कुंजी दबाएँ.

· आप कॉन्करर के help:/ kioslave का प्रयोग आसान तथा त्वरित तरीके से अनुप्रयोगों के हैण्डबुक को देखने के लिए कर सकते हैं. इसके लिए आपको कॉन्करर के स्थान पट्टी में सिर्फ help:/, तथाउसके बाद अनुप्रयोग नाम लिखना होगा. उदाहरण के लिए, केराइट के हैण्डबुक को देखने के लिए टाइप करें: help:/kwrite.

· कॉन्करर की वेब शॉर्टकट विशेषता आपको किसी क्वैरी को सीधे सर्च इंजिनों में जमा करने देता है वेब साइटों में जाए बिना ही उदाहरण के लिए, स्थान पट्टी में gg:कॉन्करर प्रविष्ट करने व एंटर कुंजी दबाने से यह कॉन्करर से संबंधित वस्तुओं के लिए गूगल पर ढूंढेगा.

· यह देखने के लिए कि और भी कौन से वेब शॉर्टकट आपके लिए उपलब्ध हैं या अपने स्वयं के वेब शॉर्टकट कॉन्करर में बनाने के लिए,चुनें विन्यास->कॉन्करर कॉन्फ़िगर करें... जिससे विन्यास संवाद बक्सा खुलेगा फिर उसमें वेब शॉर्टकट प्रतीक को क्लिक करें.

· केडीई की एक्सेसिबिलिटी को उन्नत बनाने के लिए हमेशा प्रयास किए जाते हैं तथा केटीटीएस (केडीई पाठ से वार्ता) को जारी करने के साथ ही आपके पास पाठों को सुनने लायक वार्ता में बदलने की शक्ति आ चुकी है. फेस्टिवल के जरिए हिन्दी पाठ को भी सुना जा सकता है.

· केटीटीएस में लगातार सुधार हो रहा है तथा वर्तमान में यह पाठ फ़ाइलों के सभी या आंशिक भाग को पढ़कर सुना सकता है (जैसा कि केएटीई में दिखाई देता है), साथ ही कॉन्ककर केएचटीएमएल पृष्ठों, केडीई क्लिपबोर्ड के पाठ तथा केडीई सूचनाएँ (केनोटिफ़ाई) को भी बोलकर बताता है.

· केटीटीएस तंत्र को प्रारंभ करने के लिए आप या तो केडीई मेन्यू में केटीटीएस चुनें या कमांड चलाने के लिए आल्ट+F2 कुंजियाँ दबाएँ तथा kttsmgr टाइप करें. केटीटीएसके बारे में अधिक जानकारी के लिए देखें केटीटीएसडी हैण्डबुक.

· हालांकि केडीई बहुत ही सुव्यवस्थित डेस्कटॉप वातावरण है, कुछ प्रोग्राम यदा कदा फ्रीज हो सकते हैं या क्रैश हो सकते हैं खासकर तब जब आप किसी प्रोग्राम का डेवलपमेंट संस्करण चला रहे होते हैं या कोई तीसरी पार्टी का प्रोग्राम चला रहे होते हैं. ऐसी स्थिति में आप ऐसे प्रोग्रामों को जबरदस्ती बंद कर सकते हैं यदि आवश्यक हो तो.

· कंट्रोल+ऑल्ट+एस्केप को दबाने पर खोपड़ी व हड्डी का खतरा चिह्न युक्त माउस संकेतक प्रकट होगा और इसके द्वारा आप किसी फ़्रीज प्रोग्राम के विंडो पर क्लिक करेंगे तो वह प्रोग्राम स्वचालित, तुरंत बन्द हो जाएगा. परंतु टीप लें कि यह किसी प्रोग्राम को बन्द करने का बेहद गंदा तरीका है क्योंकि इस तरीके से प्रोग्रामों को बन्द करने पर आपका डाटा गुम हो सकता है तथा कुछ पार्टनर प्रक्रियाएँ अब भी चलती रह सकती हैं. इसका प्रयोग अंतिम हथियार के रूप में ही किया जाना चाहिए.

· केमेल केडीई का ईमेल क्लाएंट है परंतु क्या आपको पता है कि आप इसे अन्य प्रोग्रामों के साथ जोड़ सकते हैं? कॉन्टेक्ट को व्यक्तिगत सूचना प्रबंधन सूट के रूप में बनाया गया है तथा यह केमेल के सभी अवयवों के साथ पूरी तरह जुड़ सकता है.

· कॉन्टेक्ट के साथ अन्य प्रोग्राम जुड़ सकते हैं वे हैं केएड्रेसबुक (संपर्कों का प्रबंधन करने के लिए), केनोट्स (नोट लिख रखने के लिए), केनोड (ताजा समाचारों से अद्यतन रहने के लिए), तथा केऑर्गेनाइजर (एक संपूर्ण कैलेण्डर के लिए).

· कॉन्करर में F4 कुंजी दबाने पर आप अपने वर्तमान स्थान में टर्मिनल खोल सकते हैं.

· हालांकि केडीई आपके उन केडीई अनुप्रयोगों को स्वचालित रूप से बहाल कर सकता है जिन्हें आपने लागआउट करते समय चलते हुए छोड़ रखा था, मगर आप केडीई को विशेष रूप से विशिष्ट अनुप्रयोगों को लॉगिन के समय प्रारंभ में ही प्रारंभ करने के लिए सेट कर सकते हैं अधिक जानकारी के लिए बारंबार पूछे जाने वाले प्रश्न प्रविष्टि देखें.

· आप केडीई के व्यक्तिगत सूचना प्रबंधन सूट प्रोग्राम कॉन्टेक्ट को केडीई के इंस्टैंट मैसेंजर क्लाएंट केऑप्टी के साथ जोड़ सकते हैं. इससे आप सम्पर्कों के ऑनलाइन स्थिति को देख सकते हैं तथा उन्हें आसानी से केमेल के भीतर से ही प्रतिक्रिया दे सकते हैं. चरण दर चरण गाइड के लिए, देखें केडीई उपयोक्ता गाइड.

· कंसोल में kmail --composer प्रविष्ट कर आप सिर्फ केमेल के कंपोजर विंडो को ही खोल सकते हैं और आपको पूरा ईमेल क्लाएंट खोलने की आवश्यकता नहीं होती यदि आप किसी को सिर्फ ईमेल लिखकर भेजना चाह रहे हों.

· कॉन्करर में टैब्ड ब्राउजिंग बहुत ही उपयोगी है, आप इसे और भी उपयोगी बना सकते हैं यदि आप विभाजित दृश्य चुनते हैं ताकि आप दो स्थानों को एक ही समय में देख सकें. इस विशेषता के लिए अपनी पसंद के अनुसार कॉन्करर में चुनें विंडो->विभाजित दृश्य, या तो ऊपर/नीचे या फिर बायाँ/दायाँ. यह विन्यास किसी खास टैब पर लागू होगा, न कि सारे टैब्स पर जिन्हें आपने खोल रखे हैं ताकि आप किन्हीं खास टैब्स जिन्हें आप समझते हैं कि उपयोगी होंगे, में विभाजित दृश्य लागू कर सकें.

· न्यूम-लॉक को केडीई के प्रारंभ होने पर चालू या बन्द होने के लिए सेट किया जा सकता है. इसके लिए तंत्र विन्यास खोलें, फिर चुनें कुंजीपट व माउस फिर अपने पसंद का चुनाव करें.

· केडीई छपाई प्रबंधक पर तत्काल पहुँचने के लिए टाइप करें- print:/manager ... कहाँ टाइप करें?, आप पूछ सकते हैं. इनमें से कहीं भी......या तो कॉन्करर के पता फील्ड में, या टर्मिनल में.

· केडीई-प्रिंटिंग (I)

· के-प्रिंटर, केडीई का नया छपाई यूटिलिटी विभिन्न छपाई उप-तंत्र समर्थित करता है. ये उप-तंत्र अपनी क्षमताओं में खासी भिन्नताएँ रखते हैं. समर्थित तंत्रों में हैं:

  • CUPS, नया सामान्य यूनिक्स छपाई तंत्र;
  • LPR/LPD, पारंपरिक बीएसडी शैली छपाई;
  • RLPR (नेटवर्क प्रिंटर उपयोग के लिए printcap संपादन या रूट विशेषाधिकार आवश्यक नहीं.
  • जब बाहरी प्रोग्राम के द्वारा छपाई (ज़ेनेरिक) की जानी हो.

· केडीई डेस्कटॉप पर आप केडीई के अलावा दूसरे अनुप्रयोगों को आराम से चला सकते हैं. इन्हें मेन्यू में सम्मिलित भी किया जा सकता है. केडीई का प्रोग्राम KAppfinder ज्ञात अनुप्रयोगों के लिए ढूंढता है तथा उन्हें मेन्यू में सम्मिलित करता है.

· आप डेस्कटॉप की पृष्ठभूमि को फटाफट बदलने के लिए छवियों को कॉन्करर विंडो से खींच कर डेस्कटॉप पृष्ठभूमि में ला सकते हैं.

· डेस्कटॉप की पृष्ठभूमि का रंग बदलने के लिए किसी भी अनुप्रयोग के रंग चयनक से रंग खींच कर डेस्कटॉप पृष्ठभूमि में लाएँ

· अपने फलक पर अतिरिक्त ऐप्लेट डालने के लिए फलक मेन्यू->जोड़ें->ऐप्लेट चुनें जो के-मेन्यू पर मौजूद है.

· दुनिया के किसी भी कोने में बैठे अपने मित्रों या व्यावसायिक सहयोगियों का स्थानीय समय जानना चाहेंगे?इसके लिए फलक घड़ी पर माउस के मध्य बटन को दबाएँ.

· गैर-केडीई अनुप्रयोगों में केडीई जैसी मुद्रण शक्ति चाहिए? तो प्रिंट कमांड के तौर पर 'kprinter' इस्तेमाल कीजिए. आप देखेंगे कि यह नेटस्केप, मोज़िला, गैलियन, घोस्टव्यू, एक्रोबेट रीडर, स्टार-ऑफ़िस, ओपनऑफ़िस.ऑर्ग, या किसी भी गनोम अनुप्रयोग में बढ़िया काम करता है...अधिक विवरण के लिए देखें http://printing.kde.org जहाँ आपको अतिरिक्त संकेत मिलेंगे...

केडीई कमांड पंक्ति छपाई (II)

आप चाहें तो आदेश पंक्ति से किसी छपाई की फ़ाइल या मुद्रक को निर्देशित कर सकते हैं:

उदाहरण –


kprinter -d infotec


  "   /home/kurt/paragliding.jpg


  "   ../kdeprint-handbook.pdf 


  "   /opt/kde3/flyer.ps


इससे प्रिंटर infotec के जरिये (विविध फ़ोल्डरों से) तीन अलग अलग फ़ाइलें छापी जा सकती हैं .



सौजन्य: कर्त फ़ीफ़ल



· पेनल पर शिफ़्ट बटन को दबाकर किसी कंटेनर (जैसे कि बटन या ऐपलेट को) को आगे पीछे करने पर अन्य कंटेनर को आगे पीछे किया जा सकता है.

16-17 फरवरी 2008 को रायपुर में हुए अंतर्राष्ट्रीय लघुकथा सम्मेलन के दौरान जगार 2008 देखने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ. जगार के बारे में संजीव जी ने अपने चिट्ठे पर विस्तार से लिखा है.

लीजिए, आपके लिए प्रस्तुत है जगार में प्रदर्शित एक से एक बेहतरीन हस्तशिल्पों के कुछ नमूने. इनमें से एक दो शिल्प मैंने भी खरीद लाए. रेखा ने ये चित्र देखे तो उसका कलाकार मन जाग उठा और उसने लगभग हर चित्र को देखकर मुझसे पूछा कि ये क्यों नहीं लाए, ये वाला क्यों नहीं और इसे तो लाना ही था! कुल मिलाकर हर लोक शिल्प अपने आप में अनूठा और संग्रह योग्य.
(लकड़ी का शिल्प)


(नारियल की जटाओं से बना बेशकीमती घोड़ा. जीवंत. कीमत सिर्फ साठ रुपए. - क्या कलाकारों को उनकी कला का सही मूल्य मिल पाता है?)


(लकड़ी, हड्डी व ऐसे ही प्राकृतिक वस्तुओं से बना गले का हार, जो किसी भी नवलखा हार से ज्यादा ख़ूबसूरत है )


(लौह शिल्प - असीमित, अनंत कल्पनाओं के रूपाकार...)


(पेपरमैशी की कलाकृति - जीवंत और रंगों से भरपूर)


(इस सुंदर कला नमूने को कोई भी चूमना चाहेगा...)


(बांस के छिलकों व टुकड़ों से बने गुलदस्ते के फूल)



(काष्ठ शिल्पों के बीच लौहशिल्प के रूप में गांधी जी)

इंडलिनक्स के बैनर तले, सराय फेलोशिप के तहत स्वीकृत केडीई 3.5 हिन्दी को इस वर्ष के फॉस इंडिया पुरस्कार के लिए चुना गया है. इस परियोजना में हिन्दी अनुवाद का कार्य मैंने किया है तथा तकनीकी कोआर्डिनेशन जी. करूणाकर का है.

विस्तृत विवरण उन्मुक्त जी के चिट्ठे पर यहाँ देखें.

केडीई 4 हिन्दी परियोजना के लिए काम जारी है. आज की स्थिति आपको चित्रमय आंकड़ों में निम्नवत् दिखाई देगी –

ज्ञातव्य हो कि केडीई 4 हिन्दी परियोजना को भी सराय से फेलोशिप मिली है, जिसके लिए राजीवगांधी फ़ाउन्डेशन ने धन प्रदान किया है. अभी इस पर धुंआधार काम चल रहा है और जैसा कि ऊपर चित्र में स्पष्ट है, आज तक की अनुवाद प्रगति 81% है.

फॉस इंडिया में अभिषेक चौधरी के सिस्टम लेवल पर हिन्दी प्रोग्रामिंग वातावरण प्रस्तुत करने वाली परियोजना – हिन्दवी को लीड पुरस्कार प्रदान किया गया है. संदर्भवश, हिन्दवी के शुरुआती संस्करण को भी सराय फेलोशिप स्वीकृत हुआ था.

संबंधित कड़ियाँ – केडीई 4.0 संस्करण जारी, जो विंडोज़ ओएस पर भी चलता है.

रायपुर, छत्तीसगढ़ में पं. राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल की 78 वीं जयंती पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय लघुकथा सम्मेलन तथा सृजन सम्मान 2008 समारोह 16-17 फरवरी 2008 में शिरकत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. वहाँ चराग़े दिल की देवी नागरानी, अभिव्यक्ति हिन्दी की पूर्णिमा वर्मन, आवारा बंजारा के संजीत त्रिपाठी, आरंभ के संजीव तिवारी, संवेदनाओं के पंख के डॉ. महेश परिमल, युग मानस के डॉ. जय शंकर बाबु, लघुकथा.कॉम के रामेश्वर काम्बोज हिमांशु व सुकेश साहनी, हिन्दी साहित्य सरिता के कुमुद अधिकारी, भारत दर्शन के रोहित कुमार हैप्पी समेत सैकड़ों अन्य साहित्यकारों से प्रत्यक्ष मिलना हुआ जिनमें छत्तीसगढ़ी के लोक-रचनाकार लक्ष्मण मस्तूरिहा का विशेष सान्निध्य भी प्राप्त हुआ जिनके गीतों का प्रशंसक मैं अपनी किशोरावस्था से ही रहा हूँ, और जिनसे मिलकर लगा कि रायपुर प्रवास सफल हो गया. उनकी एक बेहद लोकप्रिय रचना – मोर संग चलव रे (मेरे संग चलो जी...) वीडियो पर रेकॉर्ड किया है जिसका आनंद आप शीघ्र ही रचनाकार पर उठाएंगे. सम्मेलन का कुछ विवरण आवारा बंजारा में यहाँ पर दर्ज है. सम्मेलन में मेरी एक प्रस्तुति थी – जिसका विषय था - अपनी रचनाओं को पाठकों तक सदैव, सदा सर्वदा, सर्वत्र उपलब्ध करने हेतु आइए इंटरनेट पर रचनाएँ प्रकाशित करें.

चोंच में आकाश की चिट्ठाकार पूर्णिमा वर्मन को अभिव्यक्ति-अनुभूति हिन्दी.ऑर्ग के लिए हिंदी गौरव सम्मान हिन्दी वेबसाइट के लिए दिया गया तथा मुझे कंप्यूटर अनुप्रयोगों के स्थानीयकरण (हिन्दी व छत्तीसगढ़ी) हेतु सम्मान प्रदान किया गया.

सम्मेलन के कुछ जीवंत चित्र प्रस्तुत हैं –


(दाएँ से - पूर्णिमा वर्मन, देवी नागरानी, कुमुद अधिकारी)



(दाएँ से - संजीव तिवारी, संजीत त्रिपाठी)


(दाएँ से - संजीत त्रिपाठी, महेश राजा, महेश परिमल, मैं, जयशंकर बाबु)

(छत्तीसगढ़ी लोक-रचनाकार-गायक लक्ष्मण मस्तूरिहा)

(पूर्णिमा वर्मन को सम्मानित करते छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री रमन सिंह)

और, ये मैं.

संबंधित प्रविष्टि – फ़िफ्टीन सेकण्ड्स ऑफ़ फ़ेम रीवाइन्डेड...


ये सुविधा अब तक यूनिक्स व लिनक्स (संभवतः मॅक में भी,) तंत्रों में ही उपलब्ध थी. परंतु अब विंडोज पावरशैल के जरिए न सिर्फ आप हिन्दी में कमांड देकर अपने विंडोज अनुप्रयोगों को चालू बन्द कर सकते हैं, बल्कि हिन्दी में स्क्रिप्ट भी बना सकते हैं – जिनमें पाइप इत्यादि का प्रयोग कर अपने कठिन क्म्प्यूटिंग कार्यों को आसान बना सकते हैं.

आप हिन्दी में कमांड का प्रयोग अलियास बनाकर ही कर सकेंगे - यानी हिन्दी में अंतर्निर्मित कमांड नहीं हैं. उदाहरण के लिए विंडोज पावरशैल के सेट-अलियास कमांड का प्रयोग कर नोटपैड के लिए निम्न अलियास बना सकते हैं –

Set-Alias नोटपैड "c:\windows\notepad.exe"

अब आप विंडोज पावरशैल के कमांड इनपुट विंडो (शैल टर्मिनल) में हिन्दी में नोटपैड कमांड देकर आप नोटपैड प्रारंभ कर सकते हैं.

यदि आप नोटपैड मेरी फ़ाइल कमांड देंगे, तो नोटपैड प्रारंभ होगा, यदि मेरी फ़ाइल टैक्स्ट फ़ाइल मौजूद होगा तो उसे खोलकर आपके सामने प्रस्तुत करेगा नहीं तो आपसे उस नाम की नई फ़ाइल बनाने के लिए आपसे पूछेगा.

आप अन्य अनुप्रयोगों के लिए भी अलियास बना सकते हैं. उदाहरण के लिए एमएस वर्ड के लिए यदि आप दस्तावेज़ के नाम से अलियास बनाते हैं तो निम्न तरह से बनाएँ –

Set-Alias दस्तावेज़ "C:\Program Files (x86)\Microsoft Hindi Office\Office12\winword.exe"

और, अब आपको एमएस वर्ड को खोलने के लिए स्टार्ट मेन्यू में जाकर माउस क्लिक करने की आवश्यकता नहीं है. विंडोज पावरशैल में कमांड दें दस्तावेज़. बस, आपका एमएस वर्ड चालू हो जाएगा.

यहाँ पर पावरशैल का टर्मिनल विंडो दस्तावेज को सही तरीके से दिखा नहीं पा रहा है. आधे अक्षरों को हलन्त युक्त दिखा रहा है. लिनक्स तंत्रों में भी कुछ ग्राफ़िकल शैल को छोड़ दें तो शैल टर्मिनल में इस किस्म की समस्या अभी बरकरार है. अगले संस्करणों में उम्मीद करें कि इन्हें ठीक कर लिया जाएगा.

इन अलियासों के जरिए विंडोज पावरशैल में हम अन्य यूनिकोडित भाषाओं में भी मसलन पंजाबी या गुजराती में भी कमांड बनाकर उनमें काम कर सकते हैं.

विंडोज पावरशैल के लिए वृहत गाइड भी है, जिसकी सहायता से आप कठिन स्क्रिप्टिंग हिन्दी में भी कर सकते हैं. परंतु वो अंग्रेजी हिन्दी की मिक्स खिचड़ी होगी. उम्मीद करें कि शीघ्र ही विंडोज पावरशैल हमें पूरा हिन्दी में ही मिलेगा. अभी यह अर्ली अल्फा संस्करण में है, और मुफ़्त उपलब्ध है.

विंडोज़ पावरशैल सेटअप यहाँ से डाउनलोड करें

विंडोज पावरशैल मदद के दस्तावेज़ यहाँ से डाउनलोड करें

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संबंधित आलेख -

एमएस ऑफ़िस हिन्दी - एक त्वरित नज़र

ओपन ऑफ़िस में हिन्दी वर्तनी जांचक लगाएँ

हिन्दी डेटा रिकवरी सॉफ़्टवेयर

मित्रों, अरविंद कुमार जी का निम्न पत्र मुझे प्राप्त हुआ है:

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प्रिय रतलामी जी

मैं आप का ब्लाग जब तब बड़े शौक़ से पढ़ता हूँ.

मैं हूँ अरविंद कुमार--समांतर कोश और अभी प्रकाशित द पेंगुइन इंग्लिश-हिंदी हिंदी-इंग्लिश थिसारस ऐंड डिक्थनरी का रचेता. मैं केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा की हिंदी लोक शब्दकोश परियोजना का अवैतनिक प्रधान संपादक भी हूँ. इस योजना के अंतर्गत हिंदी परिवार की भाषाओं के जो 48 कोश बन रहे हैं, उन में हम अब मालवी को लेना चाहते हैं, मुझे हर सहृदय मालवी बुद्धिजीवी से सहायता चाहिए. कृपया मुझ से संपर्क करें--

samantarkosh (--AT--) gmail.com
आपर चाहें तो मेरे नीचे दिए मोबाइल पर फ़ोन भी कर लें...

आप की ऊर्जा से बहुत प्रभावित हूँ। आप जैसे आधुनिक विज्ञान की शिक्षा लिए लोग ही और लाइनक्स पर हिंदी के लिए इतना कुछ कर जाने वाले लोगों से ही अपेक्षा है कि न केवल हिंदी बल्कि हिंदी  परिवार की भाषाओं के लिए, जिन्हें हम लोग बोलियाँ कह कर टाल देते हैं, कुछ आधुनिक काम किया जा सकता है....

कृपया यह भी बताएँ कि हम किन लोगों से कैसे सहायता मिल सकती है. हो सके तो उन के नाम पते भी भेजें. मेरी अपील अपने ब्लाग  पर भी डाल दें, तो कृपा होगी.

आगरा में हमारे  पास एक प्रोग्राम है जिस पर हन  लोग काम कर रहे हैं.

लेकिन आप की निगाह में लाइनक्स पर कोई ऐसा कार्यक्रम है जिस की सहायता से कोशों पर काम किया जा सके... हम लोग 48 भाषाओं के कोश बनाना चाहते हैं, फ़िलहाल 6 पर  काम चल रहा है. मेरे सपनों का प्रोग्राम बड़ी कैपेसिटी का होगा जिस में हिंदी, इंग्लिश, रोमन हिंदी के साथ साथ 48 भाषाओं का डाटाबेस बनाया जा सके, जिन दो या तीन भाषाओं के कोश बनाने हों उन में आउटपुट लाया जा सके--formatting  के टैगों के साथ. मैं  तो डाटा ऐसे फ़ीड करा रहा हूँ कि बाद में तुलनात्मक कोश और थिसारस भी बनाए जा सकें..

उत्तर श्री अभिषेक अवतंस को भी cc कर सकें तो अच्छा रहेगा. मैं दिल्ली से काम करता हूँ. आगरा में सारा काम वह सँभालते हैं.

शुभ कामनाओं सहित

अरविंद कुमार

सी-18 चन्द्र नगर, गाजियाबाद 201011 (उप्र)

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पाठकों से आग्रह है कि मालवी भाषा के जानकारों, मालवी भाषा के साहित्यकारों तक अरविंद जी का यह संदेश व अरविंद कुमार जी का संपर्क पता उन तक अवश्य और अतिशीघ्र पहुँचाएं. धन्यवाद.


रेडहैट ईकोर्ट : ये तूने क्या किया....

मेरे एक मित्र ने मुझे रेडहैट द्वारा भारतीय न्यायालयों के लिए विशेष रूप से जारी रेडहैट लिनक्स एंटरप्राइज 5 ईकोर्ट संस्करण 5 तथा ईकोर्ट पैकेज जांच पड़ताल के लिए भेजा क्योंकि उसमें कुछ समस्या आ रही थी.

रेडहैट का ईकोर्ट संस्करण, रेडहैट के मूल संस्करण का ही प्रसंस्कृत रूप है, परंतु इसका एनाकोंडा इंस्टालर बहुत ही बेकार डिजाइन किया गया है.

आप पूछेंगे कितना बेकार? उतना ही बेकार जितना कि किसी मोबाइल फ़ोन में सबसे ज्यादा बैटरी खाने वाला टीएफ़टी स्क्रीन बैटरी कम होने की जानकारी अपनी स्क्रीन चालू कर उसको झपकाता हुआ संदेश देता है कि बंधु बैटरी खत्म हो रही है सावधान और इसे बताने के लिए आपकी और बैटरी खाता है.

मेरे कम्प्यूटर में दो हार्डडिस्क 80 गीबा तथा 20 गीबा के लगे हैं और उनमें कोई आठ पार्टीशन्स हैं. दो पार्टीशन्स तो लिनक्स तंत्रों की जांच पड़ताल के लिए ही रख छोड़े हैं. तो जब मैंने इस रेडहैट ईकोर्ट को संस्थापित करना चाहा, तो सामान्य विकल्प अक्षम किया गया मिला. ईकोर्ट संस्थापना विकल्प में एक लाइन में चेतावनी सी दी गई थी कि आपकी समस्त डाटा मिटा दी जाएगी और उसमें रेडहैट संस्थापित कर दिया जायेगा. मैं आश्वस्त इस लिए था कि चूंकि मेरे सिस्टम में दो से अधिक हार्डडिस्क और आठ पार्टीशन्स हैं – यह चेतावनी तो एक पार्टीशन और एक हार्डडिस्क वाले सिस्टमों के लिए होगी, और आगे विकल्प मिलेंगे. मैंने बस, एक क्लिक करने की गलती कर दी.

जैसे ही मैंने ‘अगला’ बटन दबाया और, बस, ये एनाकोंडा तो फ़ाइल ट्रांसफर करने लगा. बिना कुछ पूछे या चेतावनी दिए! इससे पहले कि बम फूटे, मैंने तत्काल कम्प्यूटर बंद किया. मुझे पता था कि नुकसान हो चुका है.

रेडहैट ईकोर्ट के इंस्टालर एनाकोंडा ने मेरे हार्डडिस्कों के पार्टीशन टेबल को बदल दिया था. और दोनों ही हार्डडिस्क के सारे पार्टीशन को लिनक्स ईएक्सटी2 फ़ाइल सिस्टम में फ़ॉर्मेट कर दिया था. अब मैं अपने डेटा, प्रोग्रामों, फ़ाइलों तक पहुँचने में असमर्थ था. इनमें बहुत सी फ़ाइलें और फ़ोल्डर हिन्दी में भी थे. मुझे एक ऐसे डेटारिकवरी सॉफ़्टवेयर की तलाश थी अब जो हिन्दी सामग्री को रिकवर कर सके.

आर स्टूडियो – हिन्दी सामग्री के लिए बढ़िया डेटारिकवरी सॉफ़्टवेयर

मैंने कुछेक सॉफ़्टवेयरों के ट्रायल आजमाए. काम नहीं बना. अंततः आर-स्टूडियो संस्करण 4.2 आजमाया. और, यूरेका! इसने न सिर्फ हिन्दी फ़ाइलों को हूबहू पहचान लिया बल्कि उन्हें बढ़िया तरीके से रिकवर भी कर लिया.

आर-स्टूडियो आपके हार्ड-डिस्क से जो बारंबार फ़ॉर्मेट हो चुके हों से भी डाटा रिकवर कर सकता है. यह विंडोज के फैट, एनटीएफएस तथा लिनक्स के ईएक्सटी2 फ़ाइलसिस्टमों को भी समर्थित करता है. इसने मेरे तमाम डेटा रिकरवर कर लिए, जिसके लिए मैं आशंकित था.

रिकवर्ड हिन्दी डेटा को सीडी पर (हिन्दी फ़ाइल / फ़ोल्डर नाम से) बर्न करने के लिए विंडोज के अंतर्निर्मित सीडी राइटर या लिनक्स के गनोम बेकर (या केडीई का सीडी बर्निंग औजार) का प्रयोग करें. नीरो एक्सप्रेस तथा बाद के संस्करण हिन्दी (यूनिकोड) नामधारी फ़ाइल व फ़ोल्डरों को हैण्डल तो कर सकते हैं, परंतु वे उनके नामों को टर्नकेट (बदल) कर देते हैं.

यदि आपको हिन्दी (यूनिकोड) नामधारी फ़ाइलों के डेटा रिकवरी व सीडी बर्नर सॉफ्टवेयरों के बारे में कुछ जानकारी है तो उन्हें हमें यहाँ अवश्य बताएँ.


कल मेरी मुलाकात अचानक प्रोब्लॉगर से हो गई. मैंने उनसे सफलता के कुछ मूल मंत्र जानने चाहे कि कैसे दस लाख से अधिक लोग प्रतिदिन मेरे हिन्दी चिट्ठे को पढ़ें और मेरी हिन्दी ब्लॉग से आय एक करोड़ रुपए प्रतिमाह हो...

उन्होंने मुझे बताया कि जब मैं अपना पोस्ट लिख लेता हूँ तो मैं अपने आप से 13 प्रश्न पूछता हूँ. उनके उत्तरों से संतुष्ट होने पर ही मैं अपना लिखा पोस्ट करता हूँ. आप भी ऐसा ही किया कीजिए. मैंने उनसे पूछा, - ये 13 प्रश्न कौन कौन से हैं? उन्होंने एक एक कर बताया – और मैं मन ही मन उनका उत्तर देता रहा -

1. इस प्रविष्टि की मुख्य बातें क्या हैं? क्या मैंने इन्हें सही सही समझाया है?

(उत्तर – मुख्य बातें? हिन्दी चिट्ठों में? और, समझाना? पहले खुद तो समझ लिया करूं...)

2. मेरे विचार में इस प्रविष्टि के पाठक इसे पढ़ने के उपरांत क्या करेंगे? क्या मैंने उन्हें सही दिशा प्रदान की है?

(उत्तर – क्या करेंगे? हुम्म्... दिशा? ? ? हुम्म... सोचना पड़ेगा...)

3. क्या मैंने कुछ उपयोगी लिखा भी है?

(उत्तर – उपयोगी? हिन्दी चिट्ठों में??)

4. क्या मैंने कुछ विशिष्ट लिखा भी है?

(उत्तर – विशिष्ट? इसके लिए तो विशिष्ट सोचना पड़ेगा... क्या विशिष्ट लिखना जरूरी है?)

5. यह जो मैंने लिखा है क्या वो मेरे ब्लॉग के लक्ष्य करीब ले जाता है या उससे दूर करता है?

(उत्तर – लक्ष्य? कौन सा, कैसा लक्ष्य? विवाद का लक्ष्य? चिट्ठा हिट का लक्ष्य? ?)

6. क्या मैंने कोई धांसू शीर्षक लिख मारा है जो लोगों को मेरी पोस्ट की ओर धकेलेगा?

(उत्तर – धांसू शीर्षक तो लिखता रहा हूं, पर वो पोस्ट से मेल नहीं खाता रहा है...)

7. क्या मेरी वर्तनी और व्याकरण सही हैं?

(उत्तर – वर्तनी? व्याकरण? मजाक मत करो, हिन्दी वर्तनी और व्याकरण का कम्प्यूटर पर कोई टूल, औजार बताओ यार! फिर, जब बिन्दु, चंद्र बिंदु, अर्धचंद्र बिंदु, आधा ‘न’, आधा ‘म’ तथा नुक्ते पर अच्छे अच्छे भाषाविद् जब तब अपने कमर कस लेते हैं तो फिर हिन्दी में वर्तनी और व्याकरण की बातें? फ़िजूल!)

8. क्या मैं इसे और संक्षिप्त रूप से लिख सकता हूँ?

(उत्तर- संक्षिप्त? संक्षिप्त ही तो लिखा है.. इससे संक्षिप्त तो बस पूर्णविराम का चिह्न ही हो सकता है...)

9. क्या मैंने इसके स्रोत, उद्धरण और प्रेरक तत्वों को यथोचित श्रेय दिया है?

(उत्तर – हिन्दी में? जो दिमाग में आया लिख मारा, अब स्रोत, उद्धरण और प्रेरक तत्व कहाँ से लाऊँ?)

10. क्या मैंने इससे पहले ऐसा ही कुछ लिखा है जिसे यहाँ पर लिंकित कर सकूं? या किसी और ने लिखा हो?

(उत्तर – हाँ... मेरे विचार से तो सब कुछ पहले ऐसा ही लिखा है... क्या सारा का सारा लिंकित कर दूं...? चंद दूसरे भी ऐसाइच लिखते हैं... वो भी लिंकित कर दूं?)

11. क्या मैंने अपने पोस्ट में पाठकों को इस विषय में अपने विचारों को जोड़ने के लिए कुछ छोड़ रखा है? क्या मैंने उन्हें आमंत्रित किया है?

(उत्तर – जोड़ने के लिए छोड़ना? बुड़बक समझ रखा है क्या? मैंने अब तक का अर्जित अपना सारा ज्ञान उंडेल मारा है भाई! अलबत्ता – वाद विवाद के लिए जरूर ताल ठोंक कर प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से आमंत्रित किया है...)

12. इस विषय पर लोगबाग गूगल में किन कुंजी शब्दों से खोजेंगे? क्या मैंने इस पोस्ट को इन शब्दों के लिए अनुकूलतम बनाया है?

(उत्तर – हाँ... पर, नहीं....! हिन्दी में तो लोग बाग़ गूगल पर जाने क्या क्या चीजें खोजते रहते हैं....)

13. इस पोस्ट को मैं कैसे अपने दूसरे अन्य पोस्टों के रूप में विस्तारित कर सकता हूँ?

(उत्तर – हाँ, जैसे कि अपने पिछले पोस्ट से इसे विस्तारित किया है... मेरा हर पोस्ट आजाद खयाल है... टेबुल पर बैठा, टेबुल राइटिंग किया और विस्तारित हो गया...)

प्रोब्लॉगर से और आगे बातें जारी थीं ही कि इतने में किसी ने मुझे पीछे टहोका मारा और मेरा नाम पुकारा.

क्या टेबुल राइटिंग टेबुल राइटिंग चिल्ला रहे हो जी? अब नींद में और सपने में भी ब्लॉग लिखने और टिप्पणियाँ करने लगे क्या? इसी लिए कहती हूँ कि देर रात तक ब्लॉगों में उलझे मत रहा करो... यह पत्नी की आवाज थी...

यार, मैं अपने ब्लॉग में करोड़ों हिट पाने और करोड़ों रुपये कमाने के बारे में बढ़िया सपना देख रहा था और तुमने ये क्या किया – मुझे जगा दिया मेरे सुहाने सपने पर पानी फेर दिया.... मैंने उसे उलाहना दिया.

मैंने घड़ी देखी. सुबह के छः बज रहे थे. ब्लॉग लिखने, पोस्ट करने, पढ़ने, टिप्पणियां लिखने का समय वैसे भी हो गया था...

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