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चिठेरों के लिए मंदी की मार से बचने के ठोस #8 तरीके :

slowdown and honda
मंदी की मार ने होंडा को भी नहीं छोड़ा. उसके बगैर टीवी पर फ़ॉर्मूला #1 रेसिंग देखने का मजा ही क्या रहेगा. नतीजतन, फ़ॉर्मूला #1 रेसिंग की और भी वाट लगने वाली है. वहाँ और भी मंदी छाने वाली है. मामला साइक्लिक और एंडलेस सर्कुलर वाला हो गया है. मंदी की मार चिठेरों पर भी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष पड़ रही है. इससे पहले कि होंडा की तरह मंदी की मार से चिट्ठाकारी छोड़कर भागने की नौबत चिठेरों को आए, मंदी की मार से बचने के लिए चिठेरों हेतु सॉलिड #8 तरीके:
1 – नाईजिरियाई फ़िशरों से साझा व्यापार करें. ये धंधा कभी मंदा नहीं पड़ेगा. यकीन मानिए. ऑनलाइन लॉटरी या $12222222.22 को ठिकाने लगाने में मुफ़्त में मिलने वाले नावां का लालच लोगों को होता रहा है और होता रहेगा.
2 – नए, नायाब अनुप्रयोग लाएँ. उदाहरण के लिए, स्वचालित टिप्पणी अनुप्रयोग. आपके ग्राहक चिट्ठाकार जैसे ही चिट्ठा लिखकर पोस्ट करेंगे, आपका यह वेब अनुप्रयोग दन्न से पच्चीस-तीस टिप्पणियाँ विविध नामों व आई डी से ब्लॉग पोस्ट पर डाल देगा. प्रीमियम ग्राहकों के ब्लॉग पर पचास / सौ टिप्पणियों की सुविधा – यानी जितना माल डालो उतना पाओ की तर्ज पर. देखिए, हिन्दी ब्लॉग जगत के सौजन्य से आपका धंधा कितनी जल्दी और कितने बेहतर तरीके से चल निकलता है. और मंदी? काहे की मंदी? ये धंधा सॉलिड मंदी प्रूफ़ रहेगा. ऑलवेज. ग्यारंटीड.
3 – मंदी चिट्ठापोस्टों में न दिखाएँ. मंदी की मार से चिट्ठों से एडसेंस कमाई कम हो गई है? नौकरी पर खतरा दिख रहा है? सेलरी कम हो गई है? ग़म ग़लत करने के लिए चिट्ठा है ना! सुबह एक पोस्ट ठेलो, दोपहर एक, शाम को एक और सोने से पहले एक. अपने सारे गम चिट्ठों में उंडेल कर रख दीजिए फिर देखिए कहाँ है मंदी और कहाँ है मंदी की मार!
4 – चार पुराने ब्लॉग बंद करें, छ: नए खोलें – मुफ़्त के ब्लॉगर-वर्डप्रेस है ना! माना, मंदी की मार सर्वत्र है, मगर ब्लॉग खोलने बंद करने पर नहीं!
5 – लेखन की धार तेज करें, मंद नहीं - मंदी की मार से लिखने की धार कुंद हो गई है? कोई बात नहीं. गूगल अनुवाद औजार है ना. कोई भी साइट लीजिए, उसका स्वचालित अनुवाद कीजिए चाहें तो थोड़ा कांट-छांट कर लीजिए, थोड़ा प्रवचन-ववचन डाल दीजिए, नहीं तो पूरा रॉ मटीरियल भी चलेगा. बस, आपके लंबे, फुरसतिया स्टाइल ब्लॉग पोस्टों के लिए तकनीकी मसाला से भरपूर मसाला मिल गया. वैसे भी तकनीकी मसाला वाले पोस्टों को कौन तो पढ़ता है और कौन समझता है. टिप्पणियों की बात तो दूर की है!
6 – 1 भाषा में लिखें, 25 भाषा में छापें. धन्यवाद गूगल अनुवाद औजार. अब अनुवाद चाहे कचरा हो, सूरज प्रकाश को सन लाइट कर दे, मगर आपका लिखा 25 भाषा में छपेगा तो मंदी कुछ तो दूर होगी – इंटरनेट में सामग्री की मंदी!
7 – सेंसेक्स नहीं चिट्ठाजगत् के आंकड़े देखें : आपके शेयरों, फंडों व स्क्रिपों के दाम जमीन छू रहे हैं, जिन्हें देख देख कर दिमाग खराब हो रहा है? इनके भाव देखना बंद करें और चिट्ठाजगत् के आंकड़े देखते रहें. यहाँ के आंकड़े देखकर सुकून महसूस करेंगे. देख कहाँ है मंदी? इधर तो ग्राफ़ बढ़ता ही जा रहा है. बढ़ते ग्राफ को देखकर सुकून हर किसी को सुकून महसूस होता ही है.
blogs and recession
8 – कोई वेब कंपनी खोलें, उसका दीवालिया निकाल दें. जी हाँ, एकदम सही तरीका है आज के बिजनेस का. या फिर, ज्यादा अच्छा ये है कि किसी दीवालिया होती कंपनी को एक रुपए के टोकन राशि में खरीद लें. सरकार सभी को बेलआउट पैकेज दे रही है. बहती गंगा में आप भी हाथ धोएँ.
mandi ki maar
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समाचार कतरन साभार – दैनिक भास्कर, टाइम्स ऑफ इंडिया

टिप्पणियाँ

  1. वाह ! जबरदस्त गारंटीड आइडिया हैं.........

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  2. 1 भाषा में लिखें, 25 भाषा में छापें.

    यह पंक्ति मजेदार रही.

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  3. वाह, उपाय तो सभी मस्त बताए हैं आपने!! :D

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  4. इस पैकेज का भी स्वागत है ! :-)

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  5. यह 2 – नए, नायाब अनुप्रयोग लाएँ.
    वाला सॉफ्टवेयर किसका है - उड़न तश्तरी जी का कॉपीराइट लगता है! :)

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  6. चिट्ठाकारो को आपने यह बहुत ही लाजवाब बेल आउट पैकेज दिया है ! आशा है इन्हे अपनाने के बाद यहाँ मंदी की मार नही पड़ेगी ! वैसे आईडिया नंबर दो की दूकान किसी ने खोली हो तो पता बताये ! नही तो हम तो यही दूकान खोल कर बैठने की सोच रहे हैं ! :)

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  7. पर एक ही दिन में दो दो पोस्ट ठेलना
    क्या ये भी चिठ्ठाकारी का प्रयोग है गुरुवर!

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  8. इतने शानदार उपाय . दिल बाग बाग हो गया . आपने इस पोस्ट का लेबल दिया है - 'छींटे और बौछारें' . बौछार तो ठीक पर यह छींटे किसके किसके दामन के लिए ....?

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  9. ये सूअरें कहाँ से पकड़ लाते हैं. :)

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  10. लेकिन जो मन्दी दिमाग में घुस गयी है उसका समाधान क्या है। हफ्ता भर तो सोचने की शक्ति ही चली गयी थी। अभी भी कुछ हल्का-फुल्का सोचने और लिखने में कठिनाई हो रही है।

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  11. एक उपाय तो इस पैकेज में रह गया लगता है, बड़ा कारगर नुस्खा है -

    "तूने मेरी पीठ खुजाई
    मैंने तेरी पीठ
    इसी तरह निभती रही
    आपसदारी।"

    संस्कृत में नीतिकार ने यह विधि इन शब्दों में सुझाई थी - "अहो रूपम् अहो ध्वनि:"

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  12. सही आईडिया दिये हैं मगर मंदी में #8 आईडिया पढ़वाने बुलवाये और टिपा दिये #13??

    ये क्या घालमेल किया.

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  13. आपने चिट्टाकारों के लिए शानदार पैकेज मुहेया करा दिया है |

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  14. सही आईडिया दिये हैं|यहाँ टिप्पणियों में मंदी की मार नही पड़ेगी

    उत्तर देंहटाएं
  15. मेरा तो पढ़ के ही इन्फ्लेशन वाला डिप्रेशन उतर गया :)

    उत्तर देंहटाएं

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