गुरुवार, 31 जुलाई 2008

मुझे इन सामाजिक जाल स्थलों से बचाओ!

beware of social web sites

कुछ समय तक हमें स्पैम ईमेल अच्छा खासा परेशान करते रहते थे. काम के कोई तीन ईमेल मिलते थे तो साथ में सस्ती वायग्रा और व्यक्तिगत ऋण के तीन दर्जन. इस बीच तकनॉलाजी थोड़ी परिष्कृत होती गई तो ईमेल सेवा प्रदाता जीमेल और याहू तथा हमारे ईमेल क्लाएंट – आउटलुक/थंडरबर्ड के स्पैम फ़िल्टर भी थोड़े चालाक होते गए और ऐसे ईमेल संदेशों को पकड़ कर तत्काल मिटाने लगे. इस तरह हमारा आवक बक्सा इक्का दुक्का स्पैम को छोड़ दें, तो एक बार फिर से साफ सुथरा रहने लगा.

मगर इस बीच इंटरनेट के प्रयोक्ता ज्यादा सामाजिक होने लगे. जाल स्थल में भी सामाजिकता अपना पैर पसारने लगी. वैसे भी मनुष्य सामाजिक प्राणी है. उसे समाज में घुल मिल कर, भीड़ भड़क्के में रहने में आनंद आता है. इसी लिए मेले ठेले में और डलास के जुआघरों में भीड़ की भीड़ उमड़ पड़ती है. कुछ होशियार प्रोग्रामरों ने जाल स्थल को भी सामाजिक स्थल बना दिया. ओरकुट, फेसबुक, लिंक्डइन और न जाने तमाम तरह की सामाजिक साइटें देखते देखते नमूदार हो गईं. और अब वहां भी भीड़ की भीड़ जमी और जुटी हुई रहती है.

आप ओरकुट में अपना प्रोफ़ाइल बनाते हैं, दोस्तों का समूह खड़ा करते हैं, तो देखते हैं कि उधर फेसबुक में भी लोगबाग आपका इंतजार कर रहे हैं. वहाँ भी अपने को अपना प्रोफ़ाइल बनाना है. लिंक्डइन की तो बात ही क्या – उसमें तो फ़ॉर्चून 500 सूची के कोई दो ढाई सौ लोग भी हैं. उसे तो किसी सूरत छोड़ ही नहीं सकते. उधर माइस्पेस और फ्रेंडस्टर ने आपका क्या बिगाड़ा है भाई? तो, चलिए वहाँ भी अपना प्रोफ़ाइल बना ही लेते हैं – सामाजिक तो हैं ही हम. जितना ज्यादा से ज्यादा समाज से जुड़ें उतना ही अच्छा.

पर, अब ये सामाजिक साइटें समस्या बनती जा रही हैं. अब आप जितने ज्यादा सामाजिक होंगे उतनी ज्यादा समस्याएं होगीं. इन साइटों की संख्या कब की सैकड़ा पार कर चुकी है. ऊपर से नई नई सामाजिक साइटें नित्य बनती जा रही हैं और उनमें आपका कोई न कोई मित्र जुड़ता है तो वो चाहता है कि आप भी उस सामाजिक साइट से जुड़ जाएं – मित्रता निभाएं. अब मेरे ईमेल बक्से में स्पैम के बजाए इस तरह के संदेश ज्यादा आने लगे हैं –

raviratlami,
I'd like to add you to my travel network on WAYN
आपका प्यारा मित्र (नाम हटा लिया गया है)
Here is the link:
कड़ी (कड़ी हटा ली गई है)
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What is WAYN?
WAYN (Where Are You Now?) is the global meeting place.

· Meet people from different places

· Share your traveling experiences

· Make a difference on global issue

और जानें... (कड़ी हटा ली गई है)

या फिर कुछ इस तरह के संदेश –

Check out my Facebook profile

I set up a Facebook profile where I can post my pictures, videos and events and I want to add you as a friend so you can see it. First, you need to join Facebook! Once you join, you can also create your own profile.
Thanks,
आपका प्यारा दोस्त (नाम हटा लिया गया है)

और कुछ इस तरह के भी –

आपका प्यारा दोस्त (नाम हटा दिया गया है) would like to be your friend on hi5!

I set up a hi5 profile and I want to add you as a friend so we can share pictures and start building our network. First you need to join hi5! Once you join, you will have a chance to create a profile, share pictures, and find friends.
Thanks,
आपका प्यारा दोस्त

हाई फ़ाइव से जुड़ें (कड़ी हटा ली गई है)

अभी मैं यह लिख ही रहा था कि एक जीमेल की खिड़की चमकने लगी. जाहिर है, एक नया ईमेल आया था. देखा तो एक और मित्र का निमंत्रण था –

Hi,
आपके प्रिय दोस्त ने sent you a friend request from www.Paisawaisa.com.
To accept/reject this request click on the below link:
(कड़ी हटा ली गई है)
To check the sender's profile click on the below link:
(कड़ी हटा ली गई है)


If you are not a member of Paisawaisa and would like to join it, click on the below link
(कड़ी हटा ली गई है)

अब भयंकर दिक्कत की बात ये है कि इस तरह के नए सामाजिक साइटों के लिए आने वाले ईमेल स्पैम नहीं हो सकते – क्योंकि आमतौर पर ये आपके प्रिय मित्रों, परिचितों के जरिए से, और आमतौर पर स्वचालित रूप से उन सामाजिक साइटों से भेजे गए होते हैं और इसलिए इनसे बचना नामुमकिन है.

अब यदि मैं इन सभी सामाजिक जाल स्थलों में जुड़ने का निमंत्रण स्वीकार कर लूं, तो इन साइटों में अपना प्रोफ़ाइल बनाते व इनमें जुड़े अपने दोस्तों के प्रोफ़ाइलों को देखते ही मेरी जिंदगी पूरी हो जाएगी, और शायद फिर भी समय कम पड़े. जैसा कि पहले भी कहा है, ऐसी सैकड़ों साइटें हैं और दर्जन भर के हिसाब से रोज नए बन रहे हैं. किसी में कुछ नया है तो किसी में कुछ. किसी में कुछ खास है तो किसी में कुछ. सवाल ये है कि किस सामाजिक साइट से जुड़ा जाए और किस से नहीं. फिर यदि आपका जिगरी दोस्त किसी सामाजिक साइट से जुड़ जाता है, वो वहां अपना प्रोफ़ाइल बना लेता है तो फिर तो आपको वहां अपना प्रोफ़ाइल बनाना ही पड़ेगा – उसकी पूरी सुविधा का पूरा लाभ उठाने के लिए.

एक सामाजिक जाल स्थल कुछ समय पहले आया था – शेल्फरी. उसमें प्रयोक्ता अपने द्वारा पढ़े गए किताबों के बारे में बता सकता है कि मैंने ये ये इतनी किताबें पढ़ रखी हैं और अभी मैं ये पढ़ रहा हूं. अपना ज्ञान झाड़ने के लिए - भइये मैंने ये और इतनी किताबें पढ़ रखी हैं – तूने कितना पढ़ा है? तेरा ज्ञान कितना है – तो ठीक है. पर मेरे जैसे लोगों के लिए इससे क्या लेना देना कि भइए, तूने कितना, क्या पढ़ा है, क्या पढ़ रहा है और आइंदा क्या पढ़ने वाला है. और यदि मैं शेल्फरी के जरिए दुनिया को बता दूं कि मैंने रामायण, महाभारत, गीता, पुराण, कुरान, बाइबिल, ग्रंथसाहब सब पढ़ रखा है तो क्या दुनिया मेरी विद्वता का लोहा मान लेगी? मगर वो सोशल, सामाजिक साइट है, आपका दोस्त उससे जुड़ा है. उसने आपको निमंत्रण (चाहे जाने-अनजाने) भेजा है, लिहाजा आपको उसका सदस्य बनना है और वहाँ अपनी पढ़ी और पढ़ी जाने वाली किताबों को दर्ज करना है.

हालात ये हैं कि आज की स्थिति में मेरे इनबॉक्स में अढ़ाई दर्जन ऐसे निमंत्रण है. आत्मीय, मित्रता से भरपूर. इन्हें न स्पैम की तरह फेंक पा रहा हूं, न इनका निमंत्रण स्वीकार कर पा रहा हूं – आखिर कितनी सामाजिक साइटों में मैं अपना फोटू और अपनी रुचियाँ भरूं? इन आमंत्रणों में दिनों दिन इजाफ़ा भी होता जा रहा है.

इनसे बचने का कोई बस एक ही जरिया मुझे समझ में आ रहा है -

 

हेल्प! मदद! SOS! बचाओ! कोई मुझे इन सामाजिक साइटों से बचाओ!

*****

(प्रभासाक्षी में संपादित रूप में पूर्व प्रकाशित)

15 blogger-facebook:

  1. बच्चा, अपना कम्प्यूटर बन्द कर। कोई सामाजिकता नहीं आयेगी तेरे पास। मस्त रह जा मौज कर। :)

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  2. मेरा मानना है कि इस तरह के निमंत्रण वाले इमेल आने से, जरिया बने हुए दोस्त, की विश्वसनीयता घटती है। अब उसने गलती की है तो सजा उसको भुगतनी ही चाहिए।

    सीधा सीधा सा तरीका है, एक फिल्टर बनाओ, जो भी इमेल ऐसे स्थलों से आए, (या फिर कुछ शब्द सिलेक्ट करो), सीधे, इन बॉक्स को छोड़ते हुए, कूड़ेदान मे दम तोड़े। इन सबसे तो पार पा लेते है, लेकिन कई हिन्दी ब्लॉगर अपनी नयी रचना जब तक 50 लोगों को इमेल ना कर लें, चैन की सांस नही लेते। इनका भी इलाज ऐसा हो करो।

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  3. सार्थक लेखन,
    युवाओं पर इसका दुष्प्रभाव देखा जा सकता है ।

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  4. कंप्यूटर में एक की है - delete बस इसी का प्रयोग कीजिये। मैं यही करता हूं।

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  5. सही कहा आपने, ऎसी ढेरों मेल रोज आती है, और भेजने वाले भी बेखबर है, जब एक मैने पुछा तो जबाब मिला क्या फर्क पड़ता है..

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  6. सर जी......सही कह रहे हो.

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  7. khuda bachaye samajik hone se.isliye maine kisi me nibandhan nahi karwaya.

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  8. प्रतिष्‍ठा में
    हे भगवान
    चहुं ओर विराजमान

    विषय--बचाओ बचाओ बचाओ

    महोदय
    विनम्र निवेदन है कि मुझे कृपा करके निम्‍नांकित चीजों से बचा लें

    1-सामाजिक जाल स्‍थलों से बचाओ ( कृपया रवि जी को भी बचा लो भगवान । वो हमारे गुरू जो हैं । चाहो तो पहले उन्‍हें बचा लो फिर मुझे बचाना )
    2- भगवान मुझे उन ई मेलों से भी बचाओ जिनमें ब्‍लॉगों पर नई कविताओं या नई पोस्‍टों की सूचना होती है ।
    3- हे भगवान मुझे उन ई मेलों से भी बचाओ जिनमें किसी की विरासत की सूचना होती है । लॉटरी में मिले पैसों को ले लेने का निमंत्रण्‍ा होता है ।
    4- आजकल ना जाने कहां कहां से मेरा ईमेल सार्वजनिक होता जा रहा है । कई बच्‍चे लिखते हैं कि वो गीतकार संगीतकार गायक अभिनेता आदि इत्‍यादि बनना चाहते हैं वो कहां जाएं । हे भगवान उन्‍हें सदबुद्धि दें । और इन बच्‍चों के मेलों से बचाएं ।
    5- हे भगवान उन लोगों के ईमेलों से भी बचाओ जो अपने मेल में ये लिखते हैं कि विविध भारती पर उनकी फरमाईशी चिट्ठियां शामिल नहीं होतीं ।
    6- हे भगवान पहले इतनों से बचा लो तो आगे की लिस्‍ट देते हैं

    जै हो ।

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  9. हुह! आराम से डीलीट करते जाईये, मै तो आराम से कर लेती हूँ, समाजिक जो नही ठहरी :P

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  10. भगवान,
    जब इन दोनों भाई साहब को बचा लो तो थोड़ी कृपा दृष्‍टि हम पर भी डाल देना.. हम भी सताये हुए हैं। लीजिये यह टिप्प्णी करते समय एक आमंत्रण और मिला है

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  11. युनूस जी का मामला सिरियस लगता है। हमारा इन बॉक्स भी कचरे का डिब्बा बना हुआ है, हमें भी नहीं पता कि लोगो को हमारा ई मेल कैसे मिल जाता है, म्युचुअल फ़ंड से ले कर सब सामाजिक साइटस के निमंत्रण…यहां तक तो ठीक। लेकिन कुछ लोग हमें जीवन का ज्ञान देना अपना धर्म समझते हैं इस लिए रोज हजारों की तादाद में प्रेरणादायी कहानियां, तस्वीरें, कोट्स, ठेलते रहते हैं ।

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  12. रवि जी आप की कविता नहीं साथ में। उसके बिना तो मजा ही नहीं न, प्लीज इस पोस्त के साथ अपनी कविता भी डालें

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  13. वाकई यार त्रस्त कर रखा है मित्रों ने ऐसे ऐसे मेल्स भेज कर!
    कोई समझाए इन सबको कि अपन सामाजिक नई असामाजिक हैं ;)

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  14. बिल्कुल सही कहा आपने, ये दोस्तियाँ बस दिखावे की दोस्तियाँ होती हैं...वक्त की बर्बादी और कुछ नही, लेकिन युवाओं की इसी कमजोरी का फायदा ऐसी साइटों के बाज़ार को मिल रहा है..अब हमें समझ जन चाहिए की इसका सच क्या है?

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  15. आम समस्या है।
    बरसों से इससे झूझ रहा हूँ।
    ऐसे सन्देश मलते ही एक ही क्षण में उन्हें मिटा देता हूँ।
    कभी किसी की धर्म सम्बन्धी सन्देश किसी और को अग्रेषित नहीं करता।
    उन्हें पढ़ता भी नहीं।
    रोज सौ से भी ज्यादा ई मेल मिलते हैं मुझे।
    निकट सम्बन्धियों के सन्देश अपने आप चुने हुए फ़ोल्डरों में चले जाते हैं।
    बाकी सब को फ़ुर्सत मिलने पर केवल सूची पर नज़र डालता हूँ और फ़िर एक साथ पूरे "इन बॉक्स" को मिटा देता हूँ।
    कई दिनों से सोच रहा हूँ कि अपने लिए एक नया ई मेल आइ डी बनवा लूँ लेकिन अब तक निश्चय नहीं कर पाया। पुराना आई डी से इतना लगाव है कि उसे त्यागना आसान नहीं।

    उत्तर देंहटाएं

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