टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

लीक से हटकर कुछ हिन्दी पत्रिकाएं




(1) कोंगु निधि
नाम आपको थोड़ा अजीब सा प्रतीत हो सकता है. यह हिन्दी पत्रिका कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कोयंबत्तूर की गृह पत्रिका है. इसके प्रधान संपादक हैं युगमानस के चिट्ठाकार डॉ. सी. जयशंकर बाबु. यह पत्रिका कोयंबत्तूर क्षेत्र की राजभाषा गृह पत्रिका है जो मूलत: इस संगठन के ऑफ़िस में आंतरिक वितरण के लिए प्रकाशित होती है. इसकी ख़ूबी ये है कि इसमें प्रकाशित रचनाओं के प्रायः तमाम लेखक दक्षिण भारतीय हैं. इस वजह से भाषागत अनगढ़ता भले ही प्रकट होती हो, मगर कथ्य और भावों में उथलापन कहीं से नजर नहीं आता. कोंगु निधि भले ही सरकारी गृह पत्रिका के रूप में प्रकाशित हो रही हो, परंतु इसका कलेवर शानदार है. 60 पृष्ठों की पत्रिका (मार्च 08 अंक) में हर किस्म की रचनाओं को स्थान दिया गया है. हिन्दी तमिल सीखें पर एक पूरा आलेख है तो पूरा एक पृष्ठ हिन्दी के जालस्थलों की कड़ियों पर समर्पित है. पत्रिका विक्रय हेतु नहीं है, परंतु नमूना प्रतियों के लिए संपादक से संपर्क किया जा सकता है.

कहीं कहीं हिन्दी भाषा की अपरिपक्वता नजर आती है – जैसे कि कुरुक्किया काइन नाम के पकवान बनाने की विधि के लेखक का नाम कुछ यूँ दिया गया है – ‘ए. के. अच्युतन कुट्टी नायर की पत्नी’

संपर्क:
संपादक कोंगु निधि
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन
क्षेत्रीय कार्यालय, डॉ. बालसुंदरम रोड,
कोयंबत्तूर (तमिलनाडु) - 641018
kongunidhi@gmail.com
ऑनलाइन संस्करण http://knogunidhi.wordpress.com
******

(2)

समीरा

हिन्दी पत्रिका समीरा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे हस्तनिर्मित (इकोफ्रेण्डली) काग़ज़ पर मुद्रित किया जाता है. समीरा एक परिपूर्ण हिन्दी वैचारिक व साहित्यिक पत्रिका है. साहित्यिक रचनाओं के अलावा इसमें सामाजिक सरोकारों से संबंधित विचारोत्तेजक आलेखों को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है. हस्तनिर्मित काग़ज़ पर मुद्रित होने के बावजूद पत्रिका की साज सज्जा कमाल की है, और किसी भी ग्लॉसी काग़ज़ पर मुद्रित पत्रिका के मुकाबले ज्यादा आकर्षक प्रतीत होती है. काग़ज़ का त्रिआयामी मैटी रूप सुखद अहसास देता है. दृष्टिहीनों, दृष्टिबाधितों व बुजुर्ग पाठकों के लिए समीरा ने एक और पहल की है. समीरा पत्रिका का ऑडियो सीडी संस्करण भी उपलब्ध है, जिसे सुनकर पत्रिका का आनंद लिया जा सकता है. पत्रिका का मूल्य 20 रुपए है जो सामग्री व पृष्ठ संख्या के हिसाब से बहुत ही वाजिब प्रतीत होती है.

संपर्क:
संपादक समीरा
डीके 3/229/2 कोलार रोड, भोपाल.

ईमेल – sameera.magazine@gmail.com

******.

(3)

पर्यावरण विमर्श


भारत की पहली द्विभाषी (अंग्रेजी व हिन्दी) त्रैमासिक पर्यावरण केंद्रित पत्रिका है पर्यावरण विमर्श. पत्रिका, जैसा कि नाम से जाहिर है, पर्यावरण विषयों पर केंद्रित है. पचास पृष्ठों की पत्रिका के आधे पृष्ठों में हिन्दी में आलेख होते हैं तो बाकी के आधे पृष्ठों में अंग्रेजी में. पत्रिका द्विभाषीय तो है, परंतु दोनों ही भाषाओं में आलेख अलग अलग हैं. एक ही लेख का अंग्रेजी हिन्दी अनुवाद नहीं है. इसके संपादक रमेश मिश्र ‘चंचल’ हैं. पत्रिका पिछले 12 बर्षों से प्रकाशित हो रही है. यदि आप पर्यावरण प्रेमी हैं तो इसकी एक प्रति की कीमत 25 रुपए बहुत ही वाजिब लगेगी.

सम्पर्क
संपादक पर्यावरण विमर्श
एम. आई. जी. , 153 (भूतल)
सरिता विहार नई दिल्ली 110076
ईमेल - paryavaran.vimarsh@gmail.com
------.
विषय:

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हिंदी की सेवा में लगी इन पत्रिकाओं के जन्मदाता हिन्दीसेवियों को प्रणाम्।

aap ne bahut hin achchhi jankari di hai,jald hin main in 3no patrikaon ka varshik sadasya ban jaunga...is jankari ke liye dhanyawaad.
Guneshwar Anand.

"kongunidhi" patrika ka online sanskaran to kaam nahi kar raha hain, jara dekh lijye kahin koi spelling mistake to nahi hai...

sadar,
Guneshwar Anand.

बेनामी

http://paryavaran-digest.blogspot.com/

पर्यावरण डाइजेस्ट के बारे में आपका क्या ख़याल है?

बेनामी

Achhi Patrika hai
Tushar

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