सूचना-तकनीक और जालजगत में वर्ष 2007 के हिट और फ़्लॉप का लेखा जोखा


2007 के प्रारंभ में सूचना तकनीक के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव की संभावनाओं को देखते हुए हमेशा की तरह कुछ वार्षिक भविष्यवाणियां की गई थीं जिनमें कुछ तो पूरे हुए और कुछ का तो पता ही नहीं चला. सबसे बड़े असफल भविष्यवाणियों में से एक - गूगल के कम्प्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम के 2007 में अवतरण की अटकलों को माना जा सकता है जो कि अंततः महज कोरी कल्पना ही सिद्ध हुई. मगर यह कोरी कल्पना 2007 के अंत तक आते-आते गूगल के मोबाइल फ़ोनों के लिए मुक्त स्रोत के ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्राइड के नाम से अंततः परिवर्तित रूप में फलीभूत हो ही गई. अब देखना यह है कि एंड्राइड आने वाले वर्षों में क्या गुल खिलाता है. वैसे, ये बात तो तय है कि आने वाले वर्ष मोबाइल कम्प्यूटिंग के ही होंगे, क्योंकि हर व्यक्ति के जेब में अब एक अदद मोबाइल फोन अब वक्त की जरूरत बन चुकी है.

वर्ष 2007 के कुछ सबसे बड़े फ़्लॉपों की सूची में माइक्रोसॉफ़्ट का विंडोज विस्ता अपने आप को शामिल रखने में सफल रहा है. हालाकि यह नवंबर 2006 में जारी हुआ था, मगर इसे 2007 का उत्पाद कहना उचित होगा. सीनेट और जेडडीनेट से लेकर टेक-रिपब्लिक और पीसीवर्ल्ड तक की 2007 की शीर्ष फ्लॉप सूचियों में विंडोज विस्ता मौजूद है. कारण अनेक हैं, और हर एक के अपने अलग हैं. यदि उपयोक्ता अपने नए नवेले कम्प्यूटरों के साथ आए पूर्व संस्थापित विंडोज विस्ता को निकाल कर विंडोज एक्सपी पर वापस जा रहे हैं तो फिर तो यह कहा ही जा सकता है कि निश्चित ही यह फ़्लॉप रहा है. विंडोज विस्ता के फ्लॉप रहने के कुछ प्रमुख वजहों में शामिल हैं – अत्यधिक उन्नत हार्डवेयर की आवश्यकता तथा विंडोज विस्ता में पुराने अनुप्रयोगों, प्रोग्रामों व हार्डवेयरों के समर्थन का सर्वथा अभाव. देखना दिलचस्प होगा कि 2008 में आने वाले सर्विस पैकों के जरिए विस्ता की इन खामियों को किस हद तक दूर किया जाता है और यह अपना स्थान बना पाने में सफल होता है या नहीं. दूसरी तरफ लिनक्स कई क्षेत्रों में सफल रहा. इस ऑपरेटिंग सिस्टम में उन्नत 3डी डेस्कटॉप संभव हुआ और लिनक्स के अनगिनत, सैकड़ों संस्करण जारी हुए और इनमें से कुछ विशिष्ट संस्करणों ने आम प्रयोक्ताओं के डेस्कटॉपों में अपनी जगह बनाई. विश्व की सबसे ज्यादा पर्सनल कम्प्यूटर बेचने वाली कंपनी डेल ने भी उबुन्टु लिनक्स संस्थापित कम्प्यूटर व लैपटॉप बेचना प्रारंभ किया.....

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(ऊपर का चित्र साभार सीआईओ टुडे)

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महत्वपूर्ण विश्लेषण , ज्ञानवर्द्धन हुआ , आपने तो पूरी तरह प्रत्येक पक्ष पर पूरी दृष्टि डाली है , बधाईयाँ !

सच में यह विण्डो "विष्ठा" बहुत कष्ट दे रहा है। कोई उपाय नहीं दीखता।

ज्ञानदत्त जी,
आप वापस विंडोज एक्सपी पर चले जाएँ. थक हार कर मैंने भी यही किया - अपने लॅपटॉप पर आए विंडोज विस्ता को हटाकर विंडोज एक्सपी व लिनक्स संस्थापित कर लिया है. उम्मीद करें कि विस्ता अगले दोएक साल में अपनाने लायक सुधर जाएगा :)

ज्ञानदत्त जी मैंने अपनी पत्नी के लैपटॉप को विस्टा से नीचे कर विंडोज़ एक्स पी कर दिया। आप भी यही कीजिये।
रवी जी मैं ज्योतिष पर विश्वास नहीं करता हूं पर यह भविष्यवाणी है कि जब आप इस तरह की चिट्ठी जनवरी २००९ में लिखेंगे तब यह भी लिखेंगे कि मोबाइल फोन पर ओपेन सोर्स के ऑपरेटिंग सिस्टम ज्यादा प्रचलित हैं।

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