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मेरा नारद कैसा हो? बिलकुल तेरी चाहत सा हो...

मैथिली जी ने मेरी एक पोस्ट पर टिप्पणी लिखी थी - आपकी निगाह में एक ब्लाग एग्रीगेटर में क्या क्या खूबियां होनी चाहिये? आपकी चाहत का ब्लाग एग्रीगेटर कैसा हो, क्या कभी इस पर भी एक पोस्ट लिखेंगे?सवाल उठता है - मेरी चाहत का ब्लॉग एग्रीगेटर कैसा हो? यूँ तो व्यक्ति की इच्छाएँ व आकांक्षाएँ अनंत होती हैं. आदमी का पेट न कभी भरा है न भरेगा. एक इच्छा पूरी होती है तो दूसरी खड़ी होती है. बक़ौल ग़ालिब – ख्वाहिशें हैं ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले. और, ख्वाहिशें पालनी भी ऐसी ही चाहिएँ – तभी न आदमी कुछ मेहनत करेगा. ख्वाहिशें जो दम न निकालें – वे भी कोई ख्वाहिशें होती हैं लल्लू? तो, चलिए आपको बताता हूँ – कि मेरा वाला नारद कैसा हो. वह कुछ-कुछ ऐसा हो – चिट्ठों में कोई डिस्क्रिमिनेशन न हो – चिट्ठों की सक्रियता के आधार पर उनका कोई वर्ग न हो. अभी तो होता यह है कि कोई कम सक्रिय चिट्ठा पोस्ट होता है तो वह नारद पर वर्ग 2 या 3 में होने के कारण नारद पर दृष्टव्य ही नहीं हो पाता है. यह नारद की अपनी कार्यकुशलता बढ़ाने और उपलब्ध रिसोर्स में उपयुक्त परिणाम देने के लिए किया गया है. इसके लिए चिट्ठों को दंड देना कतई उचित…

चिट्ठा चोरी

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ब्लॉग पोस्ट की चोरी करो क्योंकि तुम पर निगाह नहीं रखी जा रही है... एक और हिन्दी ब्लॉग पोस्ट की चोरी. वह भी चित्र समेत!आमतौर पर साभार, कड़ी सहित व लेखक रचनाकार के नाम-अता-पता सहित रचनाओं को कई-कई मर्तबा पुनर्प्रकाशित करने में कहीं कोई हर्ज नहीं होता और अगर व्यावसायिक हितों को नुकसान नहीं पहुँचता है तो लेखकों को इसमें आपत्ति नहीं होती और वे प्रकाशित होने में खुशी ही महसूस करते हैं. ध्येय यह होता है कि रचनाएँ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचे व ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ें. परंतु जब लेखक की रचनाओं को बिना श्रेय दिए, बिना नाम दिए या अपने नाम से या किसी और नाम से प्रकाशित करने की घटनाओं को क्या कहें? काव्या विश्वनाथन? नहीं. ये तो कोई प्रिंसेस मलेशिया हैं! मूल रचना रचनाकार पर यहाँ देखें – इसके प्रथम भाग को जैसा का तैसा टीप कर प्रकाशित किया गया है यहाँ पर.
आप देखेंगे कि रचनाकार – रघुवीर सहाय का नाम मिटा दिया गया है. चिट्ठा सामग्री की चोरी आम बात है. इस बारे में तथा कुछ सावधानियों के बारे में चर्चा यहाँ पर की गई है. वह तो इस चिट्ठे पर रेखा की बनाई कलाकृति पर निगाह पड़ गई और जाना पहचाना चित्र होने…

बेनामों – होशियार हो जाओ...

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आप सोचते हैं कि आप बेनाम या अनाम रहकर इंटरनेट पर गुल-गपाड़ा कर सकते हैं? तो आप गलत सोचते हैं या, रुकिए, शायद आप सही सोचते हैं... क्योंकि सरकारें ऐसा सोचती हैं... अब सरकार चाहे भारत की हो या जर्मनी की... सरकारें समय समय पर हम बेनामी इंटरनेट प्रयोक्ताओं पर नकेल कसने का असफल प्रयास करती रहती हैं. अभी मैं पिछले दिनों प्रवास पर था तो इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए एक सायबर कैफ़े में गया. वहाँ एक गंदा सा फटा-पुराना रजिस्टर रखा था. इंटनरेट का इस्तेमाल करने से पूर्व उस पर नाम पता लिखना आवश्यक था. मैंने सायबर कैफ़े संचालक से पूछा – नाम पता लिखना क्या जरूरी है? उसने बताया कि साहब क़ानून है और पुलिस वाले जब तक आकर चेक करते हैं कि रजिस्टर भरा जा रहा है या नहीं. अब, सभी से तो भरवाने से रहे – धंधे का सवाल है, आप भर दें तो अच्छा. मैंने मजाक में शाहरूख़ का नाम पता भर दिया – जो जाहिर है चल निकला – किसी ने तवज्जो ही नहीं दी कि क्या भरा है. यह है क़ानून, और उसका पालन और उसके फल स्वरूप सरकारी कामों में सुविधा. दरअसल यह कानून इस लिए बनाया गया है कि साइबर अपराधी किसी साइबर कैफ़े से गुल गपाड़ा करें तो वे स…

साइबर क़ैफ़े के विंडोज़ 98 पर यूनिकोड हिन्दी में काम कैसे करें

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If you can't read Hindi, then Read this article in English here :

How to work in Unicode Hindi at Cyber Café's Windows 98 PCs
अभी भी, भारत में तमाम कारणों के चलते आमतौर पर सभी साइबर कैफ़े में आपको विंडोज़ 98 ही मिलते हैं.विंडोज़ 98 में डिफ़ॉल्ट रूप में यूनिकोड हिन्दी संस्थापित नहीं होता है. इस वजह से साइबर कैफ़े में यूनिकोड हिन्दी में काम करना कुछ समय पहले तक बहुत ही मुश्किल भरा था. तमाम औजार जुटाने पड़ते थे तब कहीं विंडोज़ 98 में यूनिकोड हिन्दी दिखाई देती थी और उस पर काम किया जा सकता था.अब कुछ अच्छे ऑनलाइन कुंजीपट के जरिए विंडोज़ 98 में यूनिकोड हिन्दी में काम करना अत्यंत आसान हो गया है. अतः साइबर कैफ़े में जहाँ विंडोज़ 98 पीसी ही आमतौर पर मिलते हैं, उनमें भी आसानी से यूनिकोड हिन्दी में काम किया जा सकता है. प्रस्तुत है चरण-दर-चरण विवरण -प्रथम चरण - बीबीसी हिन्दी की साइट पर उपलब्ध यूनिकोड फ़ॉन्ट यहाँ से डाउनलोड कर उसे संस्थापित करें. इसे संस्थापित करने के लिए आपको कुछ नहीं करना है, बस इसे दोहरा क्लिक कर एक नियमित प्रोग्राम की तरह चलाना है. इसके बाद कम्प्यूटर को एक बार रीबूट अवश्य…

संदर्भ नारद : इंटरनेट कभी नहीं भूलता - कभी भी नहीं.

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कल अपने चिट्ठे पर मैंने लिखा था - नारद के आगे जहाँ और भी हैं. मैं गलत था. मैंने गलत लिखा था. आज स्थिति यह है कि हर तरफ नारद ही नारद नजर आ रहा है. मैं अपना बयान वापस लेता हूँ. मेरे खुद का पैर मेरे मुँह में है. मैं शर्मिंदा हूँ. वाकई शर्मिंदा. तो, मित्रों, भले ही आमने सामने रह कर जी भर कर बोल-गरिया लो, इंटरनेट पर ऐसा कुछ न लिखो कि मेरी तरह आपको भी अपना पैर मुँह में डालना पड़े. क्यों? क्योंकि इंटरनेट कभी नहीं भूलता.इंटरनेट कभी नहीं भूलता. अफ़लातून जी नारद के प्रति आज निर्मम दिख रहे हैं, परंतु शायद वे 4 फ़रवरी 2007 को अपनी कही गई बात भूल गए. नारद ने पहले भी भाषा की अभद्रता के चलते एक ब्लॉग को प्रतिबंधित किया था. उस ब्लॉग को मेरे द्वारा सूचित करने पर नारद में जोड़ा गया था. तब नारद पर पंजीकरण इत्यादि की प्रथा ही नहीं थी. पंजीकरण की प्रथा इस अप्रिय प्रकरण के बाद ही बनी थी, और ब्लॉग प्रतिबंध की भी. ब्लॉग पर एक कहानी थी, जिसकी भाषा तथाकथित तौर पर अप्रिय थी. किसी पर कोई व्यक्तिगत आक्षेप भी नहीं था और न ही व्यक्तिगत गाली गलौच भी थी. मगर फिर भी, चूंकि जनता चाहती थी, अफ़लातून जी भी उसमें शामिल थे …

नारद के आगे जहाँ और भी हैं

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जी हाँ, नारद के आगे जहाँ और भी हैं...यूं मैंने तो अपनी बात अपरोक्ष और व्यंग्यात्मक लहज़े में पहले ही कह दी थी, परंतु जब ई-पंडित की ये भयंकर चेतावनी मिली -"...नारद के इस कदम के प्रति अपना समर्थन (या विरोध) जाहिर करें। यदि आज भी उन्होंने ऐसा न किया तो यह बहुत बड़ा नैतिक अपराध होगा जैसा कि कहा भी गया है, "जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनके अपराध"।..."तो फिर से कुंजीपट को गंदा करने से मैं अपने आप को रोक नहीं पाया.अब, पहली बात पहले.कल ही मैं किसी एक वेब अनुप्रयोग में पंजीकृत हो रहा था तो उसमें सेवा-शर्तों में से एक यह भी था -"...upload, post or otherwise transmit any content that is unlawful, harmful, threatening, abusive, harassing, tortious, defamatory, vulgar, obscene, libelous, invasive of another's privacy, hateful, or racially, ethnically or otherwise objectionable;... will be removed immediately and user will be banned..."आपके गूगल ब्लॉगर खाते के ऊपर नेविगेशन बार में ये लिंक भी रहता है - रिपोर्ट एब्यूज. यह लिंक भी ऐसी ही सामग्री की रपट ब्लॉगर को देने के ल…

.... क्योंकि ये ब्लॉग मेरा है!

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तुझे मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं?मैं अपने ज्ञान और स्वज्ञान के भरोसे अपने ब्लॉग पोस्टों में, अपने हिसाब से, अपने विचार से, स्तरीय सामग्री ही लिखता हूं. मेरे ये पोस्ट दूसरों को मेरे अज्ञान, अल्पज्ञान से भरे कूड़ा लगते हैं तो इसमें मैं क्या करूं? मैं अपने ब्लॉग में अपने संपूर्ण होशोहवास व ज्ञान के हिसाब से, अपने हिसाब से सही-सही ही लिखता हूँ. दूसरों को ये भले ही गलत लगें. अब मैं दूसरों के हिसाब से तो नहीं लिख सकता. ....क्योंकि ये ब्लॉग मेरा है.मेरे विश्वास, मेरी धारणाएँ मेरे अपने हैं. मैं उन्हें किसी के कहने से और किसी वाजिब-ग़ैर-वाजिब तर्क-कुतर्क से तो नहीं बदल सकता और मैं अपने उन्हीं विश्वासों और उन्हीं धारणाओं की बदौलत और अकसर उन्हें पुख्ता करने के लिए, दुनिया को बताने-समझाने के लिए, अपने ब्लॉग पोस्ट लिखता हूँ. मैं दूसरों के विश्वास और दूसरों की धारणाओं के अनुसार तो नहीं लिख सकता. ....क्योंकि ये ब्लॉग मेरा है.मैं अपनी भाषा, अपनी शैली में लिखता हूँ. अपने ब्लॉग पोस्ट पर किसी को गाली देता हूँ या किसी की वंदना करता हूँ तो इससे किसी को क्या? मैं अपने ब्लॉग पर छिछली उथली भाषा का इस्तेमाल क…

ब्लॉगर इन ड्रॉफ़्ट - ब्लॉगर में सुविधाओं की झड़ी?

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ब्लॉगर पर अब सुविधाओं की झड़ी लगने वाली है. कम से कम ऐसा तो प्रतीत हो ही रहा है. गूगल ब्लॉगर अब अपने ब्लॉग प्लेटफ़ॉर्म पर अन्य तमाम वेब अनुप्रयोगों व सुविधाओं को अंतर्निर्मित प्रस्तुत करने जा रहा है. इस सुविधा की पहली कड़ी के रूप में उसने ब्लॉगर इन ड्रॉफ़्ट प्रस्तुत करने की घोषणा की है.ब्लॉगर इन ड्रॉफ़्ट - एक नए ब्लॉगर संस्करण का बीटा स्वरूप जैसा ही है जो कि कुछ प्रारंभिक ब्लॉगर खाता धारकों को जांच परीक्षण के लिए उपलब्ध है. अभी इसमें वीडियो अपलोड की सुविधा जोड़ी गई है. यानी कि अब आप अपने ब्लॉग पोस्ट में यू-ट्यूब और ब्लिंक जैसी सुविधाओं के बगैर, सीधे ही वीडियो अपलोड कर सकते हैं - ठीक वहीं पर जहाँ आप अपना पोस्ट लिखते हैं.यह परीक्षण ऑपेरा ब्राउज़र में असफल रहा. फ़ॉयरफ़ॉक्स में वीडियो अपलोड अत्यंत धीमा था. क्या यह नेटवर्क की समस्या थी या ब्लॉगर इन ड्रॉफ़्ट की? कहा नहीं जा सकता. 16 मेबा के 30 सेकण्ड के वीडियो को अपलोड होने में आधे घंटे से भी अधिक का समय लग गया.मगर फिर, यह है तो जांच - परीक्षण ही. पूर्ण संस्करण उम्मीद है चलेगा. और खूब चलेगा. हर संभव उपकरण में डिजिटल कैमरा और डिजिटल वीडियो क…

निरंतर के पिछले अंकों में प्रकाशित रचनाएँ

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वेबारू : इंटरनेट खोज का नया आयाम

एक अनुमान के अनुसार इंटरनेट पर 20 अरब जालपृष्ठ हैं जिनका कुल सम्मिलित आकार लगभग 10 लाख जी.बी. है। इसे खंगालना आसान नहीं और सर्च इंजन, निर्देशिकायें और न जाने किन किन और माध्यमों से हम इसकी थाह पाने में जुटे रहते हैं। जाहिर है कि यह खोज आनलाईन रहकर ही करना संभव है।वेबारू एक विंडोज़ एप्लीकेशन है जो आपको किसी भी वेब ब्राउजर पर ऑफलाइन खोज तथा ब्राउज़ करने की सुविधा देता है।ताज़ातरीन इंटरनेट स्टार्टअप वेबारू ने एक ऐसा अनोखा मुफ्त उत्पाद प्रस्तुत किया है जो विशिष्ट अल्गोरिद्म यानि समीकरण का प्रयोग कर इस 10 लाख गीगाबाइट डाटा को महज़ 40 गीगाबाइट में कंप्रेस यानि संपीडित कर विषयवार टुकड़ों में विविध वेब पैकों की रचना करता है जिन्हें पर्सनल कम्प्यूटरों के हार्डडिस्क, पीडीए और स्मार्टफ़ोनों में संचित करना संभव होगा। इन वेब पैकों में संपीडित जानकारी में से इंटरनेट की तमाम सामग्री तीव्र गति से, ऑफलाइन रहते हुए ढूंढी जा सकती है। समय-समय पर इस डाटा को अपडेट यानि अद्यतित भी किया जा सकता है। वेबारू की इन वेब पैकों को विविध मीडिया, जैसे कि सीडी रॉम, मेमोरी स्टिक, बाहरी ह…

तरकश में पिछले माहों में प्रकाशित रचनाएँ

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***-*** ताजमहल - अजूबा चुनने का अजूबा! वैसे भी, ये दुनिया कम अजूबा नहीं है. ऊपर से लोगबाग और भी ज्यादा अजूबाई करने लग जाते हैं. अब देखिए ना, इस अजूबी दुनिया में अजूबा चुनने का अजूबा चल रहा है. और हमारे देसी भाईलोग ताजमहल को अजूबा के रूप में चुनने और चुनवाने को पिले पड़ रहे हैं. गोया ताजमहल, ताजमहल न हुआ इंडियन आइडल का बेसुरा, अजूबा किस्म का गायक जैसा अजूबा हो गया जिसे एसएमएस और ईमेल और ऑनलाइन वोटिंग के द्वारा चुना जाना है जिसे उतने ही वैसे ही अजूबे वोट मिलते हैं - क्षेत्रीयता और जातीयता से मिश्रित - आमतौर पर उसे प्राप्त वोटों के प्रतिशत में उसके गायकीय गुणों का कोई लेना देना नहीं होता!
अख़बार रंगे हुए हैं. दीवारें पोस्टरों से अटी पड़ी हैं. जुलूस निकल रहे हैं. ताजमहल को अजूबा के रूप में चुनने के लिए वोट करो. वोट करो भई वोट करो. और, विरोधाभास देखिए, आज ही एक बड़ा अजूबा हुआ है - मायावती पर ताजकॉरीडोर प्रकरण पर साक्ष्य के अभाव में मुकदमे की अनुमति नहीं मिलने वाली खबर से ज्यादा बड़ी सुर्खी ताजमहल को अजूबा चुनने के अपील ने आज के अखबारों में बटोरी है.
अजूबा चुनने के लिए वोटिंग ऑनलाइन हो रही है…

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इंटरनेट पर हिंदी साहित्य का खजाना:

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