टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

यू नीड नो एक्शन मैन!

(एएक्सएन प्रतिबंधित)

यूट्यूब के गांधी वीडियो पर बंदिश की कोशिशों की सरकारी मूर्खता की कहानी अभी खत्म ही नहीं हो पाई थी कि उसी तरह की एक नई कहानी आ गई.

केंद्र सरकार ने सोनी नियंत्रित एएक्सएन चैनल पर दो माह के लिए भारत देश के भीतर प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया है.

प्रतिबंध इस लिए लगाया गया है कि एएक्सएन ने अपने किसी प्रसारण में अश्लील सामग्री प्रसारित की. उक्त अश्लील प्रसारण का नाम था - वर्ल्ड्स सेक्सिएस्ट कमर्शियल.

दरअसल, एएक्सएन पर यह सीरियल कोई नया नहीं था. इस सीरियल में तमाम विश्व के विविध उत्पादों के उन विज्ञापनों को दिखाया जाता था जो तथाकथित हॉट की श्रेणी में आते हैं - ऐसे कुछेक सीरियल तो मैंने भी देखे हैं, रोमांटिक दृष्टिकोण से वे थोड़े से गर्म तो होते हैं, परंतु अश्लील तो कतई नहीं.

एएक्सएन एक पे चैनल है, जिसे उपयोक्ता पैसे देकर देखता है. उपयोक्ता की मर्जी है कि वह उस चैनल को देखे या न देखे. अगर वह उसे उसके नियमित मासिक सब्सक्रिप्शन राशि का भुगतान देकर देखता है, तो निश्चित रूप से उसकी सामग्री के प्रति वह खुद जवाबदार होता है कि वह क्या देख रहा होता है और क्या नहीं. यह ठीक वैसे ही है जैसे आप कनाट प्लेस के पालिका बाजार से तमाम किस्म के सीडी लाकर फ़िल्में देखते हैं. वैसे भी एएक्सएन पर 30 सेकण्डस ऑफ़ फ़ेम, हू डेयर्स विन्स, बिकिनी आइलैंड, गिनीज़ रेकॉर्ड, रिप्लीज़ बिलीव इट आर नाट जैसे खासे लोकप्रिय और ज्ञानवर्धक सीरियल आते हैं और इनमें कुछेक में ऐसी सामग्री आमतौर पर दिख जाती है जिसमें तथाकथित मॉरल पुलिसिया दिमाग के व्यक्तियों को तकलीफ़ें हो सकती हैं. परंतु यह तकलीफ़, जाहिर है उनके गंदे दिमागों के भीतर होती है. और, ईमान की बात तो ये है कि किसी भी नए ताज़े हिन्दी फ़िल्म और रीमिक्स वीडियो के बस्ट शैक्स और पेल्विक थ्रस्टों को आप देख लें, वे इन कमर्शियलों से कहीं ज्यादा अश्लील हैं- और वे धड़ल्ले से हम सबके ड्राइंग रूम में मय परिवार देखे जाते रहे हैं.

एएक्सएन पर दो माह के लिए सरकारी प्रतिबंध लगाकर सरकार न जाने क्या दिखाना चाहती है. दो माह के लिए एएक्सएन के जेनुइन दर्शक, चैनल से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी-विज्ञापनदाता इत्यादि सब पर प्रतिबंध लगाया गया है. एएक्सएन चैनल मेरा पूरा परिवार देखता है - जाहिर है, यह प्रतिबंध मुझ पर, मेरे परिवार पर भी लगाया गया है. अब यह सरकार मुझ पर प्रतिबंध लगा रही है - मेरे परिवार पर प्रतिबंध लगा रही है कि मैं क्या देखूं और क्या नहीं!

आजादी के साठ साल हो गए और सरकार अभी भी जवान नहीं हुई - उसे एडल्ट किस्म की किसी भी सामग्री से नकली दिक्कतें होने लगी है, या उसका दिमाग सठिया गया है?

इलाहाबाद के अर्धकुंभ मेले जैसे स्थलों में खुले आम गांजा पीते सैकड़ों की संख्या में नंगे साधुओं को तो हम और हमारी सरकार खुलेआम स्वीकार करते हैं, परंतु किसी प्रसारण में थोड़ी सी नग्नता नहीं! क्या विरोधाभास है.

*-*

व्यंज़ल

**-**

मेरा दिमाग मुझसे रुठिया गया है

और नहीं तो जरूर सठिया गया है


सोचता बैठा रहा था मैं तमाम उम्र

अब तो जोड़-जोड़ गठिया गया है


भला किस तरह मानेगी सरकार

इसका हर अंग जो हठिया गया है


वक्त की ज़ंजीरों को सुलझाते हुए

मेरे भीतर का मर्द पठिया गया है


जुबान बन्द कर ली है मैंने रवि

हर कोई मुझे जो लठिया गया है

**-**

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संजय बेंगाणी

कल शामको ही 'रिप्लीस' वाला कार्यक्रम देखते हुए सोचा था की लगता है सरकारी नियंत्रण लागु नहीं हुआ है. अब घर जा कर देखता हूँ, चैनल आ रहा है या नहीं.

हमारा देश ऐसे बुढ़े लोगो के हाथो में है जो उसे जवान नहीं होने देते.

ब्लोगर पर प्रतिबन्ध, फिर यु-ट्युब पर ऐसा विचार और अब ए.एक्ष.एन. पर रोक. धन्य है हमारे नीतिनिर्माता. इससे पहले फैशन टीवी पर प्रतिबन्ध लगाया गया था.

Jagdish Bhatia

यह सरकार की सांस्कृतिक दादागिरी है। सभी को इसके खिलाफ आवाज उठानी चहिये।

मुद्दा तो विचारणीय है, मगर व्यंजल बहुत बढ़िया है.

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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