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August, 2006 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
आसपास की कहानियाँ ||  छींटें और बौछारें ||  तकनीकी ||  विविध ||  व्यंग्य ||  हिन्दी || 2000+ तकनीकी और हास्य-व्यंग्य रचनाएँ -

वंदेमातरम्...

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गंदे - मातरम् या गन - दे - मातरम् ?

अर्जुन सिंह को गुमान नहीं रहा होगा कि उनके कार्यालय से निकला यह फरमान कि 7 सितम्बर को वंदेमातरम् गीत रचना के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में समस्त स्कूलों में इसे अनिवार्य रूप से गाया जाना उनके लिए इतनी मुसीबतें पैदा कर देगा.वंदेमातरम् पर तमाम तरह की ओछी और गंदी राजनीति शुरू हो चुकी है और 7 सितम्बर के आते आते तो यह पता नहीं कहाँ तक जाएगी.कवियों, रचनाकारों, स्तम्भ लेखकों, चिट्ठाकारों को भी वंदेमातरम् नाम का मसाला मिल गया है- अपनी रचनाधर्मिता को नए आयाम देने का.हमारे मुहल्ले में भी गणेशोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है. गणेशोत्सव के दौरान एक कविसम्मेलन का आयोजन भी किया गया. इस कवि सम्मेलन में श्री तुलसी राम शर्मा ने वंदेमातरम् पर अपनी ओजस्वी कविता सुनाई.श्री तुलसी राम शर्मा 75 बरस के वृद्ध हैं, परंतु उनका कविता सुनाने का अंदाज 20 बरस के युवा जैसा होता है. इस कविता में उनका ओज देखते ही बनता है. आप भी देखें..
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(वीडियो क्वालिटी के लिए क्षमा चाहता हूँ, चूंकि मूल आकार की उच्च गुणवत्ता की फ़ाइल 45 मेबा से अधिक थी, जो अनावश्यक तथा डाउनलोड में भारी थी, अतः कम ग…

अश्लीलता का लाभांश...

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अश्लीलता का बढ़िया लाभांश : आखिर सर्कुलेशन का सवाल है भाई!लगता है कि टाइम्स ऑफ़ इंडिया को डीएनए तथा हिन्दुस्तान टाइम्स से कड़ी टक्कर मिल रही है लिहाजा वह अपने गिरते सर्कुलेशन को थामने की कोशिश में अश्लीलता का सहारा लेने लगा है. वैसे भी अश्लीलता से बढ़िया लाभांश मिलता है - और खुद टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित एक खबर का शीर्षक भी यही कहता है!उदाहरण स्वरूप, टाइम्स ऑफ इंडिया में पिछले कुछ दिनों में नियमित अंतराल से प्रकाशित इन चित्र युक्त खबरों की ओर गौर फ़रमाएँ -टाइम्स लाइफ़ - रविवारीय परिशिष्ट में प्रकाशित सेक्स आदतों संबंधी एक आलेख के साथ का चित्र-









‘टिट्स एन क्लिट्स एन एलीफेंट डिक' नाम से मुम्बई के एक आर्ट गैलरी में लगी कला प्रदर्शनी के बारे में बताती खबर के साथ का चित्र-







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टाइम्स इंटरनेशनल पर नित्य प्रकाशित होने वाले चित्रों में से एक. प्रायः नित्य इसी तरह के मसालेदार चित्र प्रकाशित होते हैं-











मस्तराम जैसी सड़कछाप अश्लील किताबों के बारे में तथाकथित खोजपरक आलेख के साथ दिया गया चित्र-











अब आप कहेंगे कि इन चित्रों को दुबारा छाप कर रविरतलामी ने अपने ब्लॉग का सर्कुलेशन बढ़ाने का घटिया प्रया…

मरफ़ी के नियम - किश्त 4: भारतीय घरेलू महिला

. भारतीय घरेलू महिला के लिए मरफ़ी के कुछ नियम1. जिस हसीन शाम को आप अपने पति के लिए नाश्ता व चाय पहले से तैयार कर रखती हैं, उस दिन वे बेसाख्ता देरी से आते हैं.उपप्रमेय 1 : जिस हसीन शाम को आप नाश्ता तैयार नहीं कर पाती हैं, उस दिन आपके पति जल्दी घर आ धमकते हैं और इतने भूखे होते हैं कि पूरा का पूरा डाइनिंग टेबल मय फर्नीचर व मर्तबान खा जाने को तत्पर होते हैं.
उपप्रमेय 2 : जिस हसीन शाम के लिए आपके पतिदेव आपसे वादा कर रखते हैं कि वे जल्दी घर लौटकर आपको बाजार लेकर चलेंगे, उस दिन आप ऐसी कोई तैयारी मत रखिए. चूंकि वे बेसाख्ता देरी से आने वाले होते हैं.2. जब आप खाना खाने बैठती हैं, आपका दो वर्ष का बच्चा तभी सूसू या पॉटी करने के लिए अजीब चेहरे बनाता है, या दूध वाला जल्दी (या देरी से) आकर आवाज लगाता है या कोई अजनबी दरवाजा खटखटा कर किसी चीज की मार्केटिंग करने का असफल प्रयास करता है या कोई वह पता पूछता है जो कि आपकी कॉलोनी का नहीं होता है.3. जब आप अपनी किसी महत्वपूर्ण सहेली के फोन काल का इंतजार करते बैठी होती हैं, तो पता चलता है कि आपके कार्डलेस फ़ोन की बैटरी पूरी तरह डिसचार्ज हो गई है या लैंडलाइन फ़…

हिन्दी की अति महत्वपूर्ण , उपयोगी कड़ियाँ

अनुनाद ने अपने ब्लॉग स्थल प्रतिभास पर अत्यंत श्रमसाध्य तरीके से जालघर के हिन्दी के तमाम उपयोगी व महत्वपूर्ण कड़ियों को एक सूत्र में पिरोया है.
अधिक जानकारी के लिए इस कड़ी पर क्लिक करें :http://pratibhaas.blogspot.com/2006/01/blog-post_25.html .

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एमपी3 प्लेयर बजाने से पहले...

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पोर्टेबल, पर्सनल एमपी3 प्लेयर : संगीत के बेहतर आनंद के लिए कुछ अंदरुनी बातें







आप अपने लिए एक बढ़िया सा नन्हा सा पोर्टेबल, पर्सनल एमपी3 प्लेयर खरीदना चाहते हैं? या खरीद चुके हैं? आइए, आज आपको कुछ युक्तियाँ बताते हैं ताकि आपकी खरीद बढ़िया हो और अगर आप खरीद चुके हों तो आप अपने प्लेयर का सर्वोत्तम इस्तेमाल कर सकें.पोर्टेबल एमपी3 प्लेयर खरीदने से पहले निम्न बातों का ध्यान रखें-• आईपॉड नाम सबको ललचाता है. परंतु उससे बेहतर खरीद एक दो नहीं, कई कई हैं.
• एमपी3 प्लेयर ऐसा खरीदें जिसमें बैटरी इनबिल्ट न हो. इनबिल्ट बैटरी युक्त प्लेयर में हो सकता है कि आप कोई बढ़िया सी ग़ज़ल सुन रहे हों और उसके दूसरे शेर में बैटरी खत्म हो जाए, और आस-पास उसे चार्ज करने का साधन भी न हो. बदली जा सकने वाली बैटरी युक्त सेट में कम से कम आप पाँच रुपए की बैटरी पास के पान दुकान या ड्रगस्टोर से खरीद कर काम तो चला ही सकते हैं. साथ ही, कोई भी रीचार्जेबल बैटरी अनंत काल तक रिचार्ज कर इस्तेमाल में नहीं ली जा सकती. अंततः रीचार्जेबल बैटरी का भी नया सेट लेना ही पड़ता है.
• हार्डडिस्क युक्त एमपी3 प्लेयर कतई नहीं खरीदें. साल भर के भीतर…

मरफ़ी के नियम - 2

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मरफ़ी के घरेलू नियम
• किसी बच्चे द्वारा घरेलू कार्य में दिए जाने वाले सहयोग हेतु उसकी उत्सुकता उसकी उस कार्य को करने की क्षमता के व्युत्क्रमानुपाती होती है.• उपलब्ध बर्तनों में रख लेने के बाद भी एक अतिरिक्त बर्तन लायक बासी भोजन बच रहता है.
• नई नई साफ की गई खिड़की गंदी खिड़की से दो-गुना ज्यादा गति से धूल पकड़ती है.
• घर पर बाल प्वाइंट पेन की उपलब्धता उसकी अत्यंत आवश्यकता के व्युत्क्रमानुपाती होती है.
• जो कबाड़ा आपका एक गैराज भर सकता है, उतना ही कबाड़ा आपके दो गैराज को भरा हुआ होता है.
• तीन बच्चे + दो बिस्किट = लड़ाई
• संकट की संभावना, उपलब्ध टीवी रिमोट कंट्रोल भाजित दर्शकों की संख्या के व्युत्क्रमानुपाती होती है.
• आपके घर के खुले हुए दरवाजे-खिड़कियों की संख्या बाहरी तापक्रम के उलटे अनुपात में होती है.
• किसी भी वाटर हीटर की क्षमता डेढ़ बच्चे के नहा लेने लायक भर होती है.
• जो ऊपर जाता है, वह नीचे आता ही है - सिवाय बबल गम तथा अध खाए भोजन के.
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मरफ़ी के कंप्यूटरी नियम
• कोई भी चलता हुआ प्रोग्राम अप्रचलित (ऑब्सलीट) होता है.
• दिया गया कोई भी प्रोग्राम जब भी चलाया जाता है तो प्रत्येक बार पिछले बार…

द ग्रेट इंडियन बाबूडम भाग - 2

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. भारतीय बाबू बाहुबली...भारत के सरकारी बाबुओं द्वारा भारत के स्वतंत्रता दिवस पर कार्य करने पर दंडनीय अपराध हेतु कार्यवाही की धमकी देने की कहानी मेरे पिछले पोस्ट पर आपने पढ़ी.ऐसी ही, मिलती जुलती एक और कहानी अभी मीडिया के कुछ खास हिस्सों में चल रही है.आपने आह्लादित करने वाली खबर पढ़ी होगी - भारतीय मूल की इंदिरा नूई, अमरीकन पेप्सी कंपनी की पहली महिला सीईओ चुनी गई हैं, और वे अपना पद भार 1 अक्तूबर 06 से ग्रहण करेंगीं.



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पर साथ में यह भी खबर थी - भारत की नैना लाल किदवई बहुराष्ट्रीय बैंक एचएसबीसी इंडिया के सीईओ पद के लिए चुन ली गई थीं. परंतु उनके पद को भारतीय रिजर्व बैंक ने स्वीकृति देने से मना कर दिया क्योंकि वे नेस्ले कंपनी के बोर्ड पर भी विराजमान हैं, और नेस्ले कंपनी एचएसबीसी की ग्राहक है. ..
एचएसबीसी का कहना है कि वैश्विक कार्पोरेट गवर्नेंस के मानकों तथा प्रैक्टिस के अनुसार नैना लाल किदवई की नियुक्ति में कुछ भी गलत नहीं है.पर, भारतीय कानून की किसी धारा में कहीं पर यह लिखा होगा, और लकीर के फ़क़ीर बाबुओं ने अपनी टाँग अड़ा दी.
**-**व्यंज़ल
**-**नहीं तब्दीली अपनी लकीर
बैठे रहे यूँ बन कर फ़क़ीर …

द ग्रेट इंडियन बाबूडम - भाग 1

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कॉमरेड, स्वतंत्रता दिवस पर काम करना तो आपराधिक-दंडनीय अपराध है!चहुँ ओर स्वतंत्रता दिवस पर खुशियों की धूम थी. बधाइयों की धूम थी. छुट्टी की खुशियाँ थीं. और दारू-शारू के ढक्कनों के खोले जाने की लंबी लाइनें थीं.परंतु इस बीच एक छोटे से खबर ने बहुत कम लोगों का ध्यान आकर्षित किया.

केरल में कुछ बीपीओ कंपनियों ने जिनका धंधा ही 24x7 चलता है, पंद्रह अगस्त के दिन भी अपने ऑफ़िस खुले रखने चाहे.मगर यह क्या? केरल के कॉमरेडी बाबुओं ने उन कंपनियों को नोटिस दिया कि वे पंद्रह अगस्त, राष्ट्रीय त्यौहार के दिन काम करेंगे तो सरकारी नियमानुसार, उन पर आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकेगा. स्वतंत्रता दिवस पर कार्य करना तो सच्चे भारतीयों के लिए सचमुच आपराधिक कार्य है. इस दिन कार्य करना दंडनीय अपराध है. आखिर सैकड़ों वर्षों की गुलामी से मुक्ति उसी दिन मिली थी तो उस दिन को कार्य कर क्यों नष्ट किया जाए. उस दिन भरपूर छुट्टी मनाया जाए, छुट्टी की खुशियाँ मनाया जाए, मटरगश्ती किया जाए, तब वह दिन सार्थक होगा. और अगर कोई उस दिन कार्य करने को भी सोचेगा तो उस पर आपराधिक मुकदमा दायर कर ही देना चाहिए...
रेखा (पत्नी) के कॉले…

इंटरनेट के जरिए आपके करोड़पति बनने में देर नहीं...

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बस, एक नए आइडिया - नए, नायाब विचार का सवाल है बाबा!
**-**विचारवान मनुष्य ही धनवान होता है. इस कहावत को इंटरनेट ने पूरी तरह सत्य सिद्ध कर दिया है. अगर आपके पास विचार हैं, तो बस ले आइए उसे इंटरनेट पर. अगर विचार नया सा, नायाब हो तो क्या कहने. आपका यह नया विचार देखते-देखते आपको रंक से राजा बना सकता है, दरिद्र से करोड़पति, अरब-खरब-नील-पद्म-शंखपति बना सकता है.और, हम कोई पुरानी, हॉटमेल वाली बात नहीं करेंगे कि किस तरह सबीर भाटिया के दिमाग में इंटरनेट के जरिए मुफ़्त ईमेल सेवा प्रदान करने का विचार आया, और उनकी उधार मांग कर शुरू की गई कंपनी को माइक्रोसॉफ़्ट ने 400 मिलियन डॉलर में कुछ ही वर्षों पश्चात् खरीद लिया.और, ऐसे तो कई उदाहरण हैं - ताज़ातरीन राइटली जिसे गूगल ने खरीदा और फ़्लिकर, जिसका बीटा संस्करण ही अभी ढंग से निकाला नहीं गया था, और जिसे याहू! ने खरीदा. ये इंटरनेट अनुप्रयोग भी लाखों डालर में खरीदे गए.इस दफा हम बात करेंगे - सिर्फ एक विचार के जरिए, एक नायाब खयाल के जरिए, इंटरनेट से लाखों कमाना - वह भी बिना कोई पूंजी लगाए, बिना कोई सेवा प्रदान किए, बिना किसी अनुप्रयोग को जारी किए, पूरी ईमा…

ये रहे आपके रिटर्न गिफ़्ट...

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सधन्यवाद, ये रहे आपके रिटर्न गिफ़्ट-

भाई इन्द्र अवस्थी ने अपनी बधाइयाँ देते हुए मुझसे गुज़ारिश की थी कि मेरे जन्म दिन पर मुझे क्या उपहार मिले उसे कविता या ग़ज़ल के माध्यम से बताया जाए. सबसे बड़ा उपहार तो निःसंदेह, हिन्दी चिट्ठाजगत् के महाचिट्ठाकार द्वारा एक नहीं, बल्कि दो-दो चिट्ठा पोस्टों के माध्यम से मुझे मिले, वह भी 22 टिप्पणियों सहित. इस उपहार के सामने तो निःसंदेह बाकी सारे उपहार फ़ीके ही रहेंगे.रिटर्न ग़िफ़्ट के माध्यम से जीतू भाई ने मेरी व्यंज़ल मशीन उधारी मांगी है. तो उन्हें यह बता दूं कि व्यंज़ल की यह मशीन हिन्दी चिट्ठा जगत् में उनकी सक्रियता की ऊर्जा की बदौलत चलती है.बहरहाल, आप सभी का, जिन्होंने अपनी टिप्पणियों के माध्यम से तथा दूसरे माध्यमों से मुझे बधाइयाँ दीं, आभार प्रकट करता हूँ तथा धन्यवाद देता हूँ.मेरे साक्षात्कार में अनूप जी ने पूछा था कि मेरे चिट्ठे पर टिप्पणियाँ नहीं मिलने पर मुझे कैसा लगता है. इस दफ़ा फ़ुरसतिया के पन्नों पर जन्मदिन की बधाइयों के संदेश के रूप में कुल जमा 22 टिप्पणियाँ मिलीं तो ऐसा लगा कि न सिर्फ अब तक का हिसाब चुकता हो गया, बल्कि आने वाले समय का…

नया नवेला ब्लॉगर बीटा..

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कल मैंने ब्लॉगर के गुण गाए ही थे कि आज पता चला कि ब्लॉगर ने नया अपना नया बीटा संस्करण जारी किया है जिसमें सुविधाओं में खासी बढ़ोत्तरी की गई है.मैंने एक नज़र नए नवेले ब्लॉगर बीटा पर डालने की कोशिश की, तो पाया कि इसमें ब्लॉगरों की तमाम पुरानी समस्याओं से छुटकारा पाने की ईमानदार कोशिश तो की ही गई है, बहुत सी नई विशेषताओं को भी शामिल किया गया है.हालाकि नया ब्लॉगर बीटा वर्तमान में सभी पुराने ब्लॉगरों को उपलब्ध नहीं है - (संभवतः कुछ पुराने ब्लॉगर टैम्प्लेटों द्वारा नए फ़ीचरों को समर्थन नहीं मिल पाने के कारण), परंतु देर सबेर यह सबको उपलब्ध होना ही है.आइए, देखें कि नए ब्लॉगर बीटा में हमें क्या-क्या नया मिलता है - • ब्लॉगर ने चिट्ठाकारों की सबसे बड़ी समस्या सुन ली लगती है - परंतु नए अंदाज में. अब ब्लॉगर में आप अपने चिट्ठों को श्रेणियों में विभाजित कर सकते हैं. ब्लॉग पोस्टों को विषय वार "लेबल" लगाकर उन्हें विषयानुसार एक साथ देख सकते हैं. ठीक वैसे ही जैसे कि जीमेल पर लेबल लगाकर कार्य किया जा सकता है. चिट्ठों के लिए श्रेणियों की सुविधा वर्डप्रेस में अरसे से उपलब्ध था, और यह एक बड़ी व…

ब्लॉगर की जगह खत्म ?

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प्रिये, मैंने गूगल की सारी जगह इस्तेमाल कर डाली!क्या कहा? नहीं मानते. चलो कोई बात नहीं. मैंने भी कौन सा सच कहा है. परंतु गूगल का ब्लॉगर जब अपने विशाल डाटाबेस को संभाल नहीं पाता है तो यदा कदा इसी किस्म के विचित्र त्रुटि संदेश दिखाता रहता है. उदाहरण के लिए, यह त्रुटि संदेश मेरे एक ब्लॉग के प्रकाशन के दौरान कल प्रकट हुआ, परंतु ब्लॉगर को धन्यवाद कि आज सुबह सब कुछ फिर से सामान्य हो चला.001 java.io.IOException: No space left ...
क्या आश्चर्य कि बहुत से लोग ब्लॉगर से वर्डप्रेस की ओर दौड़ लगा रहे हैं, और कई लाइन में लगे हैं.और मैं?..
नहीं. कभी नहीं. ब्लॉगर तो रेस का वह काला घोड़ा है जिस पर आप दांव लगा सकते हैं. लंबे रेस में, मेरी बात का यकीन कीजिए, इसमें तमाम तरह के प्रॉडक्टिविटी औज़ार और जुड़ेंगे जिससे यह सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म बना रहेगा.**-**इस बीच अगस्त 2006 के प्रथम सप्ताह में रचनाकार के प्रकाशन का गौरवशाली एक वर्ष पूरा हो गया. इस एक वर्ष में रचनाकार में विभिन्न विधाओं में कुल जमा निम्न रचनाएँ प्रकाशित हुईँ-संस्मरण - 10
व्यंग्य - 25
लघुकथा - 19
चुटकुले - 23
गजल - 24
कहा…

हाय ये मेरी खटमली खटिया...

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खटमली खटिया







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इस अजीबोग़रीब समाचार को अगर सही मानें, तो मात्र दो रुपया प्रति खाट के हिसाब से कमाने हेतु गरीब लोग अपने आप को खटमली खटिया के हवाले कर देते हैं.
यह समाचार एक तरफ से तो रोचक हो सकता है कि खटमलों को यूँ इस तरह से भरपेट खाना दिया जा रहा है. परंतु दूसरी ओर हृदयहीन समाज का यथार्थ व्यंग्य दिखाई देता है.सच है. ख़ून ग़रीबों का ही चूसा जाता है. ग़रीबों के खून में ही तो सच्चाई और ईमानदारी का शानदार ज़ायक़ा होता है./**/**/..
व्यंज़ल
//*//किसी को नसीब है खटिया खटमली
तो किसी के पास बिछौना मखमलीमेरे खुदा मुझे बता कि क्यूं नहीं है
मुझे मयस्सर रोटियाँ भली अधजलीतमाम उपाय आजमाए जा चुके हैं
मचती नहीं नसों में क्यों खलबलीअपनी वेदनाओं का पता है हमें ही
जमाना समझे है किस्सा झिलमिलीकैसे बताए रवि कि उसके देश में
हो चुकी तमाम व्यवस्था पिलपिली **-**

नए कदमों को सफलता की सीढ़ी नहीं, आलोचना के गड्ढे मिलते हैं....

मरफ़ी के नियम(मरफ़ी के नियमों ने सबको सदैव आकर्षित किया है. अंग्रेज़ी में तो कई देखीं, परंतु हिन्दी में मरफ़ी के नियमों की किसी किताब बाबत जानकारी मुझे नहीं है. इंटरनेट पर तो ख़ैर है ही नहीं. इंटरनेट पर हिन्दी में इन नियमों के संग्रह को लाने की ख्वाहिश मुझे प्रारंभ से ही थी. अब लगता है यह सपना पूरा हो सकेगा. प्रभासाक्षी ने इन नियमों को सिलसिलेवार प्रकाशित करने का भरोसा दिलाया है - जिसके लिए वे पारिश्रमिक भी देंगे. - हिन्दी ब्लॉग की व्यावसायिकता में पहला कदम? अभिव्यक्ति में भी इन्हें सिंडीकेट रुप में प्रकाशित किया जा सकेगा. बाद में किताब की शक्ल देने की कोशिश भी की जाएगी - परंतु तभी जब कोई प्रकाशक इसे ‘मुफ़्त' में या ‘कुछ दान-दक्षिणा' जैसी रॉयल्टी देकर छापे. अन्यथा अभी तो मेरे जैसे हिन्दी के नए नवेले लेखकों को अपनी किताबें खुद पैसे खर्च कर छपवानी पड़ती हैं - शायद इसीलिए मेरी कोई भी किताब अब तक प्रकाशित नहीं हुई और अगर यही स्थिति रही तो कभी प्रकाशित भी नहीं होगी :) मरफ़ी के हिन्दी में अनुवादित ये नियम यूं तो अनियमित प्रकाशित होंगे, परंतु वर्षांत तक एक अच्छा खासा संग्रह तैयार कर…

ब्लॉग और विज्ञापन - चोली दामन का साथ?

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ब्लॉग - विज्ञापनों के लिए नया, सशक्त माध्यम उस परिस्थिति की कल्पना करें जब आपको एक ऐसा माध्यम दिया जाता है जिसके जरिए आप ताजा तरीन घटनाओं पर अपनी बेलौस राय व्यक्त कर सकते हों या नए उभरते विचारों और धारणाओं पर अपनी नजर डाल सकते हों या फिर नए उत्पाद व तकनॉलाज़ी की समीक्षा कर सकते हों. क्या यह आपको वरदान सदृश्य नहीं लगता जहाँ आप बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के अपने विचारों को स्वतंत्रता पूर्वक सबके सामने रख सकते हैं?

जी हाँ, ब्लॉग के आने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ने नए आयामों को छुआ है. देखा गया है कि प्रत्येक नया, नायाब कदम, नया इतिहास रचता है. जब ऐसे विचार सफल और प्रसिद्ध हो जाते हैं तो उनमें व्यापार और वाणिज्य की संभावनाएँ भी लोगों को दिखाई देने लगती हैं - और जल्दी ही दिखाई देने लगती हैं. अब तो ब्लॉग भी सक्षम विज्ञापनों के सफल माध्यम के रुप में इस्तेमाल किए जाने लगे हैं. ब्लॉग के साथ विज्ञापनों को प्रायोजन, विज्ञापन या सम्बद्धन - इन तीन प्रकारों से इस्तेमाल किया जा रहा है.

प्रायोजन (स्पांसरशिप) : यदि कोई ब्लॉग क्रिकेट के बारे में है, तो क्रिकेट के सामानों का उत्पादक उस ब्लॉग को प्र…

डिजिटल कैमरों से बढ़िया फ़ोटो कैसे खींचें?

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डिजिटल कैमरा से बढ़िया फ़ोटो खींचने के चंद नुसख़ेपिछले दिनों मैंने डिजिटल फ़ोटोग्राफ़ी पर एक कार्यशाला में हिस्सा लिया जिसमें भारत के नामी, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत तथा कई फ़ोटोग्राफ़ी पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखक-छायाचित्रकार गुरदास दुआ ने अच्छे, प्रोफ़ेशनल गुणवत्ता युक्त फ़ोटोग्राफ लेने के कई गुर सिखाए. गुरदास दुआ संपूर्ण मप्र व छत्तीसगढ़ में एकमात्र फ़ोटोग्राफर हैं जो लार्ज फ़ॉर्मेट के सिनार कैमरा इस्तेमाल करते हैं. उनके द्वारा खींचे गए चित्रों से बनाए गए कुछ विज्ञापन कैंपेन खासे चर्चित रहे, जिनमें से एग-कोआर्डिनेशन-कमिटी का अंडों का चित्र जिसमें एक अंडे को कम्प्यूटर माउस की शक्ल दी गई थी, शामिल हैं. जो कुछ मैंने उनसे सीखा, आइए, आज मैं उनमें से चंद महत्वपूर्ण बातों को आपके साथ साझा करता हूँ.अगर आप पासपोर्ट आकार का फ़ोटोग्राफ - वीज़ा या किसी आवेदन में चिपकाने के लिए नहीं ले रहे हैं, तो फिर किसी भी सूरत में सब्जैक्ट (विषय वस्तु) को बीचों बीच मत रखें. विषय के सामने की ओर (मुख की ओर) थोड़ा ज्यादा जगह छोड़ें.दृश्यावलि चित्रण में हमेशा 2/3 नियम का पालन …

भूल गया सबकुछ...

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लो, मैं तो कुछ और ही कारण सोच रहा था...



अगर आपको भूलने की समस्या है - अपने प्रिय के जन्मदिन और अपनी शादी की सालगिरह जैसी महत्वपूर्ण बातें भी आप भूल जाते हैं, तो अब अपने खानदानी जेनेटिकल गुणदोषों को दोष मत दीजिए. नई खोजों के मुताबिक, हो सकता है कि आपकी सफाई पसंद की आदत इसके लिए जिम्मेदार हो....जी हाँ, अगर आप हर रोज अपने बालों को शैम्पू करते हैं तो भले ही यह बात आपके डैण्ड्रफ युक्त बालों के लिए ठीक हो, यह कार्य आपकी याददाश्त के लिए कतई ठीक नहीं है. शैम्पू में मिले हुए रसायन डैण्ड्रफ के साथ आपके दिमाग की याददाश्त को भी धो डालने की क्षमता रखते हैं!**-**.

.व्यंज़लभूल गयाक्या बताऊँ कि कैसे भूल गयामैं तो जानबूझ कर भूल गयाजिंदगी के मसले उलझे बहुतकुछ याद रहा कुछ भूल गयाप्यार की बातें हमने भी कींभूख से जल्दी ही भूल गयावो कानून संसद को किसलिएकल याद था आज भूल गयाबन गया रवि भी राजनीतिज्ञतभी वह खुद को भूल गया**-**

जुलाई 2006 में छींटें और बौछारें में प्रकाशित रचनाएँ...

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(अमरीका और भारत के बीच सभ्यता की तुलना हिन्दी चिट्ठा जगत् में आगे बढ़ चुकी है. छींटे और बौछारें में अकसर भारतीय व्यवस्था पर छींटे उड़ते ही रहते हैं. दैनिक भास्कर के संपादकीय पृष्ठों पर आज प्रकाशित स्तंभकार गुरचरण दास का आलेख समीचीन है. आलेख दैनिक भास्कर को साभार सहित, यहाँ पुनः प्रकाशित किया जा रहा है.) महान राष्ट्र प्रतिभा और समानता के दावों में सही संतुलन बनाने का प्रबंधन करते हैं। वहां प्रतिभा के आड़े वरिष्ठता नहीं आती। लेखक : - गुरचरनदास मुझे दो सप्ताह पूर्व न्यूयार्क में ‘राइज ऑफ इंडिया’ शीर्षक से प्रकाशित विदेशी मामलों की प्रतिष्ठित पत्रिका के विशेषांक के लोकार्पण के लिए आमंत्रित किया गया। समारोह के संचालक ने जिम रोजर्स की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए शुरुआत की कि ‘हम भारत में पूंजी नहीं लगा सकते, क्योंकि वहां की नौकरशाही दुनियाभर में सबसे बदतर है।’ जिम रोजर्स उपभोक्ता वस्तुओं के विशेषज्ञ हैं। एक ऐसे समारोह में जहां भारत उदय का जश्न मनाया जा रहा था वहां यह खटकने वाली बात थी, लेकिन बाद में स्पष्ट हो गया कि हम ‘पब्लिक इंडिया’ नहीं अपितु ‘प्राइवेट इंडिया’ के उदय का समारोह मना रहे …

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