August 2006

.
गंदे - मातरम् या गन - दे - मातरम् ?

अर्जुन सिंह को गुमान नहीं रहा होगा कि उनके कार्यालय से निकला यह फरमान कि 7 सितम्बर को वंदेमातरम् गीत रचना के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में समस्त स्कूलों में इसे अनिवार्य रूप से गाया जाना उनके लिए इतनी मुसीबतें पैदा कर देगा.

वंदेमातरम् पर तमाम तरह की ओछी और गंदी राजनीति शुरू हो चुकी है और 7 सितम्बर के आते आते तो यह पता नहीं कहाँ तक जाएगी.

कवियों, रचनाकारों, स्तम्भ लेखकों, चिट्ठाकारों को भी वंदेमातरम् नाम का मसाला मिल गया है- अपनी रचनाधर्मिता को नए आयाम देने का.

हमारे मुहल्ले में भी गणेशोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है. गणेशोत्सव के दौरान एक कविसम्मेलन का आयोजन भी किया गया. इस कवि सम्मेलन में श्री तुलसी राम शर्मा ने वंदेमातरम् पर अपनी ओजस्वी कविता सुनाई.

श्री तुलसी राम शर्मा 75 बरस के वृद्ध हैं, परंतु उनका कविता सुनाने का अंदाज 20 बरस के युवा जैसा होता है. इस कविता में उनका ओज देखते ही बनता है. आप भी देखें.

.

.

(वीडियो क्वालिटी के लिए क्षमा चाहता हूँ, चूंकि मूल आकार की उच्च गुणवत्ता की फ़ाइल 45 मेबा से अधिक थी, जो अनावश्यक तथा डाउनलोड में भारी थी, अतः कम गुणवत्ता की इस 1.7 मेबा की फ़ाइल में रूपांतरित किया है.)

तो, आइए, सुर से सुर मिलाएँ - वंदेमातरम्!


.
अश्लीलता का बढ़िया लाभांश : आखिर सर्कुलेशन का सवाल है भाई!

लगता है कि टाइम्स ऑफ़ इंडिया को डीएनए तथा हिन्दुस्तान टाइम्स से कड़ी टक्कर मिल रही है लिहाजा वह अपने गिरते सर्कुलेशन को थामने की कोशिश में अश्लीलता का सहारा लेने लगा है.

वैसे भी अश्लीलता से बढ़िया लाभांश मिलता है - और खुद टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित एक खबर का शीर्षक भी यही कहता है!

उदाहरण स्वरूप, टाइम्स ऑफ इंडिया में पिछले कुछ दिनों में नियमित अंतराल से प्रकाशित इन चित्र युक्त खबरों की ओर गौर फ़रमाएँ -

टाइम्स लाइफ़ - रविवारीय परिशिष्ट में प्रकाशित सेक्स आदतों संबंधी एक आलेख के साथ का चित्र-











‘टिट्स एन क्लिट्स एन एलीफेंट डिक' नाम से मुम्बई के एक आर्ट गैलरी में लगी कला प्रदर्शनी के बारे में बताती खबर के साथ का चित्र-









.

.

टाइम्स इंटरनेशनल पर नित्य प्रकाशित होने वाले चित्रों में से एक. प्रायः नित्य इसी तरह के मसालेदार चित्र प्रकाशित होते हैं-













मस्तराम जैसी सड़कछाप अश्लील किताबों के बारे में तथाकथित खोजपरक आलेख के साथ दिया गया चित्र-













अब आप कहेंगे कि इन चित्रों को दुबारा छाप कर रविरतलामी ने अपने ब्लॉग का सर्कुलेशन बढ़ाने का घटिया प्रयास किया है.

तो संभवतः आप सही कह रहे हैं.

कल इसी विषय पर विस्तृत बात करेंगे - कला जगत की - वहाँ श्लील और अश्लील के बीच की कोई सीमा है भी या नहीं?

.

भारतीय घरेलू महिला के लिए मरफ़ी के कुछ नियम

1. जिस हसीन शाम को आप अपने पति के लिए नाश्ता व चाय पहले से तैयार कर रखती हैं, उस दिन वे बेसाख्ता देरी से आते हैं.

उपप्रमेय 1 : जिस हसीन शाम को आप नाश्ता तैयार नहीं कर पाती हैं, उस दिन आपके पति जल्दी घर आ धमकते हैं और इतने भूखे होते हैं कि पूरा का पूरा डाइनिंग टेबल मय फर्नीचर व मर्तबान खा जाने को तत्पर होते हैं.
उपप्रमेय 2 : जिस हसीन शाम के लिए आपके पतिदेव आपसे वादा कर रखते हैं कि वे जल्दी घर लौटकर आपको बाजार लेकर चलेंगे, उस दिन आप ऐसी कोई तैयारी मत रखिए. चूंकि वे बेसाख्ता देरी से आने वाले होते हैं.

2. जब आप खाना खाने बैठती हैं, आपका दो वर्ष का बच्चा तभी सूसू या पॉटी करने के लिए अजीब चेहरे बनाता है, या दूध वाला जल्दी (या देरी से) आकर आवाज लगाता है या कोई अजनबी दरवाजा खटखटा कर किसी चीज की मार्केटिंग करने का असफल प्रयास करता है या कोई वह पता पूछता है जो कि आपकी कॉलोनी का नहीं होता है.

3. जब आप अपनी किसी महत्वपूर्ण सहेली के फोन काल का इंतजार करते बैठी होती हैं, तो पता चलता है कि आपके कार्डलेस फ़ोन की बैटरी पूरी तरह डिसचार्ज हो गई है या लैंडलाइन फ़ोन के केबल में खराबी आ गई है या मोबाइल फ़ोन की बैटरी को आपका नन्हा उस पर गेम खेलकर खत्म कर चुका है.

उपप्रमेय 1: यदि फोन काल किसी टेलिमार्केटिंग कंपनी से आया होता है तो आपका बंद फ़ोन अचानक बढ़िया काम करने लगता है.

4. जिस दिन आप स्विमिंग पूल जाने का प्लान बनाती हैं, उसी दिन आपका बच्चा तेज सर्दी-बुखार से ग्रस्त हो जाता है.

उपप्रमेय: जिस दिन आप स्विमिंग पूल जाने का विचार करती हैं, और आपका बच्चा भी स्वस्थ रहता है, तो फिर उस दिन बारिश हो जाती है.

5. आपका कचरा उठाने वाला, आपके गैस पर रखे दूध के उबलने के ठीक 10 सेकण्ड पहले आता है. आप दूध को उबलते तक रुक नहीं सकतीं क्योंकि तब तक कचरा उठाने वाला अगली सड़क नाप चुका होता है. आप गैस बन्द कर कचरा डालने जाती हैं, तब भी पाती हैं कि अंततः दूध गैस की बची गर्मी से ही उबल कर बिखर गया.

.

.

6. जिस दिन आप सोचती हैं कि आप आज हर हाल में रात्रि दस बजे से पहले सब काम खत्म कर आराम फरमाएँगी, और आप ऐसा कर भी लेती हैं - तो पाती हैं कि उस दिन रात भर बिजली गुल रही.

7. जिस दिन आपकी काम वाली बाई काम पर नहीं आती है, उसी दिन आपके घर में मेहमानों का तांता लगता है.

8. जब आप ढेर सारे कपड़े पानी में भिगो देती हैं, तब आपकी काम वाली बाई का संदेश मिलता है कि वह आज छुट्टी पर रहेगी.

9. जब घर में आलू-प्याज खत्म हो जाता है, और उसकी बहुत जरूरत होती है तो गली-गली सब्जी बेचने वाला हॉकर नहीं आता और फिर जब आप बाजार जाकर ये सब ले आती हैं तो पता चलता है कि वह हॉकर तमाम मुहल्ले में बार-बार हांक लगा रहा है.

10. जिस दिन आप अपने पति की गंदी-फटी-बदबूदार जीन्स धोकर बाहर धूप में सूखने डालती हैं, तो मौसम के अनुमान के विपरीत बरसात हो जाती है और जीन्स में फंगस लगकर वह और गंदा-बदबूदार हो जाता है.

उपप्रमेय: आपके पति को उस जीन्स के अलावा कुछ और पहनना भाता ही नहीं.

11. किसी आवश्यक खरीदारी के लिए आप अपने पतिदेव को बाजार भेजती हैं तो पाती हैं कि आपके पतिदेव तमाम दूसरे कार्य निपटा आते हैं और वही आवश्यक खरीदारी भूल आते हैं. और अंततः वह आवश्यक खरीदारी आपको ही करनी होती है.
उपप्रमेय: यदि आपके पति आवश्यक खरीदारी कर आते हैं तो या तो सामान खराब होता है या भाव उचित नहीं होता लिहाजा आपको स्वयं जाकर वह सामान वापस कर सही सामान उचित भाव में लाना होता है.

साभार - लक्ष्मी का चिट्ठा http://www.arunn.net/personalblog/2006/08/27/murphys-laws-for-the-home-maker/

मरफ़ी के कुछ और नियम यहाँ पढ़ें - किश्त 1 किश्त 2 किश्त 3

अनुनाद ने अपने ब्लॉग स्थल प्रतिभास पर अत्यंत श्रमसाध्य तरीके से जालघर के हिन्दी के तमाम उपयोगी व महत्वपूर्ण कड़ियों को एक सूत्र में पिरोया है.


अधिक जानकारी के लिए इस कड़ी पर क्लिक करें :

http://pratibhaas.blogspot.com/2006/01/blog-post_25.html

.

.

.

पोर्टेबल, पर्सनल एमपी3 प्लेयर : संगीत के बेहतर आनंद के लिए कुछ अंदरुनी बातें









आप अपने लिए एक बढ़िया सा नन्हा सा पोर्टेबल, पर्सनल एमपी3 प्लेयर खरीदना चाहते हैं? या खरीद चुके हैं? आइए, आज आपको कुछ युक्तियाँ बताते हैं ताकि आपकी खरीद बढ़िया हो और अगर आप खरीद चुके हों तो आप अपने प्लेयर का सर्वोत्तम इस्तेमाल कर सकें.

पोर्टेबल एमपी3 प्लेयर खरीदने से पहले निम्न बातों का ध्यान रखें-

• आईपॉड नाम सबको ललचाता है. परंतु उससे बेहतर खरीद एक दो नहीं, कई कई हैं.


• एमपी3 प्लेयर ऐसा खरीदें जिसमें बैटरी इनबिल्ट न हो. इनबिल्ट बैटरी युक्त प्लेयर में हो सकता है कि आप कोई बढ़िया सी ग़ज़ल सुन रहे हों और उसके दूसरे शेर में बैटरी खत्म हो जाए, और आस-पास उसे चार्ज करने का साधन भी न हो. बदली जा सकने वाली बैटरी युक्त सेट में कम से कम आप पाँच रुपए की बैटरी पास के पान दुकान या ड्रगस्टोर से खरीद कर काम तो चला ही सकते हैं. साथ ही, कोई भी रीचार्जेबल बैटरी अनंत काल तक रिचार्ज कर इस्तेमाल में नहीं ली जा सकती. अंततः रीचार्जेबल बैटरी का भी नया सेट लेना ही पड़ता है.


• हार्डडिस्क युक्त एमपी3 प्लेयर कतई नहीं खरीदें. साल भर के भीतर ही फ्लैश मेमोरी कार्ड 32 गी.बा. तक की क्षमता में मिलने लगेगा, और सस्ता ही मिलने लगेगा. अभी ही 1-2 गी.बा. युक्त मेमोरी फ़्लैश कार्ड हजार-पंद्रह सौ रुपए में मिलने लगे हैं. मशीनी घूमने वाले उपकरणों युक्त हार्डडिस्क में घर्षण व क्षरण से अंततः खराबी उत्पन्न होती ही है, जबकि स्टैटिक फ़्लैश कार्ड मेमोरी में खराबी की संभावना तुलनात्मक रूप से अत्यंत कम होती है. ये कम बैटरी भी खाते हैं.


• एमपी3 प्लेयर ऐसा खरीदें जिसमें अलग से या अतिरिक्त मेमोरी कार्ड डाली जा सकती हो. इससे आप अपनी मर्जी के गानों युक्त दो-चार मेमोरी कार्ड भी साथ रख सकते हैं और इस तरह से आपके एमपी3 प्लेयर की मेमोरी कभी भी फुल नहीं होगी. साथ ही आपके पास विकल्प रहेगा कि आने वाले वर्षों में अधिक क्षमता युक्त तुलनात्मक रुप से सस्ते मेमोरी कार्ड के जरिए अपने पोर्टेबल संगीत भंडार को और विशाल बना सकें. आजकल 500-600 रुपयों में बिना मेमोरी कार्ड युक्त पोर्टेबल पर्सनल एमपी3 प्लेयर बिक रहे हैं. अगर इनके ऑडियोफ़ाइल पर ज्यादा जोर न दें तो यह सर्वोत्तम खरीद होगी.
• नए पोर्टेबल एमपी3 प्लेयर में वीडियो प्लेबैक की भी सुविधा मिल रही है और अंतर्निर्मित छोटे से वीडियो स्क्रीन के जरिए रंगीन वीडियो का भी आनंद लिया जा सकता है. ऐसा प्लेयर बेहतर तब होता है जब उसमें अंतर्निर्मित स्पीकर भी हो तथा टीवी आउट का भी फ़ंक्शन हो.


• अगर आप व्यावसायिक या अपने पेशे के कारण आमतौर पर दौरे पर रहते हैं तो अच्छा यह होगा कि आप ऐसा एमपी3 प्लेयर पसंद करें जो कि आपके मोबाइल फ़ोन में अंतर्निर्मित हो. अनावश्यक रूप से एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक ग़जेट लेकर घूमना तो मूर्खता है. परंतु ध्यान रहे कि एमपी3 युक्त मोबाइल फ़ोन में अतिरिक्त फ़्लैश मेमोरी कार्ड जोड़ने की सुविधा हो, अन्यथा स्थिर मेमोरी युक्त पोर्टेबल एमपी3 प्लेयर तो एक तरह से बेकार ही होता है.


• इयरबड वाले इयरफ़ोन जो अकसर एमपी3 प्लेयर के साथ आते हैं, हो सकता है कि वे आपके कानों के आकार के अनुरूप न हों. इससे हो सकता है कि आपके कानों में दर्द या इनफ़ैक्शन की समस्या पैदा हो जाए. इस लिए बेहतर यह होगा कि अपने कान के लिए योग्य आकार वाले उच्च गुणवत्ता के इयरफ़ोन खरीदें. जहां तक संभव हो बड़े, कान को ढंकने वाले इयरफ़ोन प्रयोग करें. इनसे बाहरी शोर से भी एक हद तक छुटकारा पाया जा सकता है.


• अगर आपके पास कार है और उसमें पहले से ही म्यूजिक सिस्टम लगा है जिसमें एफ़एम रेडियो भी है, तो ऐसा पोर्टेबल एमपी3 प्लेयर खरीदें जिसमें स्टीरियो एफ़एम ट्रांस्मीशन की भी सुविधा हो. इससे आप अपने पोर्टेबल एमपी3 प्लेयर के जरिए बजाए जा रहे संगीत को बिना किसी तार के अपने कार के म्यूजिक सिस्टम में भी सुन सकते हैं.

• अब अंततः आपने अपने लिए कोई बढ़िया, धांसू पोर्टेबल, पर्सनल एमपी3 पसंद कर ही लिया. आपके पास एमपी3 प्लेयर खरीदने का जो बजट अभी है, उसे दो बराबर हिस्से में बाटें. इसके आधे हिस्से से अभी कोई दूसरा सस्ता सा पोर्टेबल पर्सनल एमपी3 प्लेयर खरीदें. बाकी बचे दूसरे आधे हिस्से से दो साल बाद आप जैसा धांसू प्लेयर खरीदना चाह रहे थे, उससे दस गुना ज्यादा क्षमता और खासियत वाला प्लेयर खरीदें.

और, अगर आपने अपना पसंदीदा पोर्टेबल एमपी3 प्लेयर खरीद ही लिया है, तो इसका बेहतर और सर्वोत्तम इस्तेमाल के लिए निम्न बातों का ध्यान रखें-

• एमपी3 फ़ॉर्मेट में गानों के डाटा को संपीडित किया जाता है जिसके कारण उसमें सुनने में ऑडियो सीडी जैसी गुणवत्ता नहीं आ पाती. अतः घर पर जहाँ अन्य सुविधाएँ उपलब्ध हों, ऑडियोफ़ाइल ग्रेड सीडीप्लेयरों युक्त म्यूजिक सिस्टम से गीत संगीत सुनने का आनंद अलग ही होता है.

.

.









• एमपी3 फ़ॉर्मेट में गानों को अलग अलग बिटरेट पर संपीडित किया जाता है. न्यूनतम 32 केबीप्रसे (Kbps) से लेकर 320 केबीप्रसे तक संपीडन आमतौर पर प्रचलित है. वैसे सामान्य रूप में उपलब्ध एमपी3 फ़ॉर्मेट में संगीत प्रायः 128 केबीप्रसे पर एनकोडिंग किया हुआ होता है. 32 केबीप्रसे से एनकोडित फ़ाइल के संगीत की गुणवत्ता न्यूनतम होती है, वहीं 320 केबीप्रसे से एनकोडित फ़ाइल में उच्च गुणवत्ता का संगीत मिलता है. अतः यदि आप चाहते हैं कि संगीत की गुणवत्ता में कोई समझौता न हो तो उच्च बिटरेट वाली एमपी3 फ़ाइलें इस्तेमाल करें. वैसे, वेरिएबल बिटरेट भी कुछ मामलों में बेहतर होता है.


• अगर आप लंबे समय के लिए बाहर जा रहे हैं और चाहते हैं कि आपके पोर्टेबल एमपी3 प्लेयर (या फ्लैश मेमोरी कार्ड) में ज्यादा से ज्यादा संगीत आए, तो आप अपने संगीत फ़ाइलों को न्यूनतम बिटरेट पर एनकोडिंग करें. यह भी देखें कि क्या आपका एमपी3 प्लेयर डबल्यूएमए फ़ॉर्मेट को समर्थित करता है. अगर आपका प्लेयर डबल्यूएमए फ़ॉर्मेट को समर्थित करता है तो आप डीबीपावरएम्प (या ऐसे ही किसी औजार के जरिए) के जरिए 128 केबीप्रसे से एनकोडित अपने एमपी3 संगीत फ़ाइलों को 20 केबीप्रसे युक्त डबल्यूएमए फ़ॉर्मेट में एनकोडिंग कर रूपांतरित करें. इस तरह से सामान्य 128 केबी मेमोरी युक्त एमपी3 प्लेयर में जहाँ 20 से 25 एमपी3 गाने ही आ पाते हैं, आप 125 से अधिक गाने भर सकते हैं. 128 केबीपीएस वाला 5 मिनट का एमपी3 संगीत फ़ाइल लगभग 5 मे.बा. का होता है वहीं 20 केबीपीएस का डबल्यूएमए संगीत फ़ाइल 0.6 मे.बा. जगह घेरता है. ठीक है, कम केबीपीएस एनकोडिंग से गुणवत्ता में थोड़ी सी कमी आएगी, परंतु जब आप सफर पर हों, गाड़ी घोड़ों की आवाजें हों, तो वैसे भी संगीत सुनने में इतनी गुणवत्ता में कमी कोई खास तौर पर नजर नहीं आती. डीबीपावरएम्प से संगीत को कम बिटरेट पर रूपांतरित करना अत्यंत आसान है. डीबीपावरएम्प अपने कंप्यूटर पर संस्थापित करिए, तमाम आवश्यक एनकोडिंग इसकी साइट से उतार कर संस्थापित करिए, फिर किसी भी संगीत फ़ाइल को दायाँ क्लिक करिए. संगीत फ़ाइल को रूपांतरित करने के लिए पूछा जाएगा. हाँ करिए और वांछित जानकारी भरिए. बस हो गया.


• कम बिट रेट से सहेजे गए संगीत फ़ाइलों को बजाने में आपके एमपी3 प्लेयर को कम ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है. अतः यह ज्यादा देर तक और ज्यादा संगीत फ़ाइलों उतनी ही बैटरी में बजा सकता है. इसीलिए, जब आप सफर पर हों तो कम बिटरेट वाली संगीत फ़ाइलें ही लोड कर साथ ले जाएँ. और, जैसा कि ऊपर के अनुच्छेद में बताया गया है, कम बिटरेट वाली फ़ाइलें कम जगह घेरती हैं, दुहरा फ़ायदा - यानी आपके एमपी3 प्लेयर में ज्यादा गाने समाएँगे.

हो सकता है कि आपके मन में कोई शंका अब भी हो. हो सकता है कि आपके पास इनसे भी बढ़िया टिप्स, नुसख़े और युक्तियाँ हों. तो, उन्हें हमारे साथ यहाँ अवश्य साझा करें.

.

मरफ़ी के घरेलू नियम

• किसी बच्चे द्वारा घरेलू कार्य में दिए जाने वाले सहयोग हेतु उसकी उत्सुकता उसकी उस कार्य को करने की क्षमता के व्युत्क्रमानुपाती होती है.

• उपलब्ध बर्तनों में रख लेने के बाद भी एक अतिरिक्त बर्तन लायक बासी भोजन बच रहता है.


• नई नई साफ की गई खिड़की गंदी खिड़की से दो-गुना ज्यादा गति से धूल पकड़ती है.

• घर पर बाल प्वाइंट पेन की उपलब्धता उसकी अत्यंत आवश्यकता के व्युत्क्रमानुपाती होती है.

• जो कबाड़ा आपका एक गैराज भर सकता है, उतना ही कबाड़ा आपके दो गैराज को भरा हुआ होता है.

• तीन बच्चे + दो बिस्किट = लड़ाई

• संकट की संभावना, उपलब्ध टीवी रिमोट कंट्रोल भाजित दर्शकों की संख्या के व्युत्क्रमानुपाती होती है.

• आपके घर के खुले हुए दरवाजे-खिड़कियों की संख्या बाहरी तापक्रम के उलटे अनुपात में होती है.

• किसी भी वाटर हीटर की क्षमता डेढ़ बच्चे के नहा लेने लायक भर होती है.

• जो ऊपर जाता है, वह नीचे आता ही है - सिवाय बबल गम तथा अध खाए भोजन के.

.


.

मरफ़ी के कंप्यूटरी नियम

• कोई भी चलता हुआ प्रोग्राम अप्रचलित (ऑब्सलीट) होता है.

• दिया गया कोई भी प्रोग्राम जब भी चलाया जाता है तो प्रत्येक बार पिछले बार से ज्यादा समय व रुपया खाता है.

• यदि कोई प्रोग्राम उपयोगी होता है तो फिर अंततः उसे बदला ही जाता है.

• यदि कोई प्रोग्राम अनुपयोगी होता है तो उसे दस्तावेज़ीकृत किया जाना आवश्यक होता है.

• कोई भी दिया गया प्रोग्राम उपलब्ध मेमोरी को पूरी तरह घेर लेता है.

• किसी प्रोग्राम का मूल्य उसके आउटपुट के भार के व्युत्क्रमानुपाती होता है.

• किसी प्रोग्राम की पेचीदगी उसको मेंटेन करने वाले प्रोग्रामर की क्षमता से आगे तक बढ़ती जाती है.

• हर महत्वपूर्ण प्रोग्राम में कम से कम एक बग तो होता ही है.
उपप्रमेय 1 - किसी प्रोग्राम की तुच्छता के लिए पर्याप्त शर्त यह होती है कि उसमें कोई बग नहीं होता है.
उपप्रमेय 2 - जब प्रोग्राम का लेखक संस्था को छोड़ता है तो प्रोग्राम में कम से कम एक बग तो दिखाई दे ही जाता है.

• किसी प्रोग्राम के एक हिस्से में बग अवश्य दिखाई देता है जब उस प्रोग्राम के असंबद्ध हिस्से में कुछ परिवर्धन किया जाता है.
सूक्ष्म बग विशाल क्षति करते हैं व बड़ी समस्याएँ पैदा करते हैं.

• कोई ‘डिबग्ड' प्रोग्राम जो कि क्रैश हो जाता है, भंडार उपकरणों से स्रोत फ़ाइलों को भी तब मिटा देता है जब बैकअप उपलब्ध नहीं होता है.

• हार्यवेयर की असफलता तंत्र सॉफ़्टवेयर को क्रैश करती है और सेवा-प्रदाता इंजीनियर सॉफ़्टवेयर प्रोग्रामर को दोष देता है.

• तंत्र सॉफ़्टवेयर क्रैश से हार्डवेयर फेल होने पर प्रोग्रामर सेवा-प्रदाता इंजीनियर को दोष देते हैं.

• ढूंढी नहीं जा सकी त्रुटियाँ असंख्य किस्म की होती हैं, जबकि ढूंढी जा चुकी त्रुटियाँ, परिभाषानुसार सीमित मात्रा में होती हैं.

• पहले से ही विलंबित हो चुके किसी सॉफ़्टवेयर परियोजना में अतिरिक्त प्रोग्रामरों को शामिल करने पर परियोजना में और भी विलंब होता है.

• यदि आप यह संभव बना दें कि प्रोग्रामर हिन्दी में प्रोग्रामिंग कर सकें, तो आप पाएंगे कि प्रोग्रामर हिन्दी नहीं लिख सकते.

• मानक सॉफ़्टवेयर मॉड्यूलों के दस्तावेज़ीकृत इंटरफ़ेसेस में अ-दस्तावेज़ीकृत विशिष्टताएँ होती हैं.

• हार्डवेयर असफलता की संभावना ग्राहक सेवा इंजीनियर के उपलब्ध स्थान की दूरी के सीधे अनुपात में होती है.
उपप्रमेय- हार्डवेयर असफलता के स्वयमेव ठीक हो जाने की संभावना ग्राहक सेवा इंजीनियर के उपलब्ध स्थान की दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है.

• कार्यशील प्रोग्राम वे होते हैं जिनमें तब तक ढूंढे नहीं जा सके बग होते हैं.

• दिए गए समय में आपके पास चाहे जितने भी कंप्यूटर रिसोर्सेस होते हैं, आपके लिए वे कभी भी पर्याप्त नहीं होते हैं.

• किसी भी बढ़िया प्रोग्राम के लिए आपके पास उपलब्ध मेमोरी से ज्यादा आवश्यक होता है.

• अंततः जब आप अपने कम्प्यूटर के लिए पर्याप्त मेमोरी खरीद लेते हैं तो पाते हैं कि आपके डिस्क में पर्याप्त जगह नहीं है.

• डिस्क तो हमेशा ही पूरे भरे होते हैं. और अधिक डिस्क जगह के लिए प्रयास करना तो निरर्थक ही होता है. डाटा की फितरत है कि वह किसी भी खाली जगह को भरने के लिए फैल ही जाता है.

• यदि कोई प्रोग्राम मेमोरी में वास्तविक रूप में फिट हो जाता है तथा डिस्क में समा जाता है तो फिर इस बात की गारंटी हो जाती है कि वह प्रोग्राम क्रैश होगा ही.

• यदि ऐसा कोई प्रोग्राम क्रैश नहीं हुआ है, तो यह मानकर चलिए कि वह क्रैश करने के लिए किसी बढ़िया समय के इंतजार में है.

• चाहे आप जितनी भी बढ़िया खरीदारी कर लें, जब आप कोई कम्प्यूटर सामग्री खरीदते हैं तो पाते हैं कि ठीक उसके बाद ही भावों में भारी कमी हो गई.

• आपके कंप्यूटर के सभी अवयव अप्रचलित (ऑब्सलीट) हैं.

• जिस गति से कंप्यूटरों के अवयव अप्रचलित होते हैं वह गति उस अवयव की कीमत के सीधे अनुपात में होती है.

• सॉफ़्टवेयर बगों को उपयोक्ता के अलावा अन्य किसी के द्वारा खोजा जाना आमतौर पर संभव नहीं होता.

• ग्राहक सेवा इंजीनियर के द्वारा आपके जैसा विचित्र उपयोक्ता या आपके पास उपलब्ध विचित्र तंत्र पहले कभी देखा नहीं गया होता है.

• यह स्वयंसिद्ध है कि जो कल-पुर्जे आवश्यक होते हैं वे स्टाक में नहीं होते तथा उनका उत्पादन बन्द कर दिया गया होता है.

• कोई भी वीडियो डिस्प्ले यूनिट, चाहे वह कितना ही कीमती क्यों न हो, स्वयं जलकर पचास पैसे के फ़्यूज एलिमेंट को खराब होने से बचा लेता है.

• किसी उपकरण में यदि गारंटी में अर्थवायर का जिक्र होगा तो उपकरण के पावर केबल में सिर्फ दो पिन होंगे.

• यदि किसी सर्किट (सुधारने या बनाने) में n अवयवों की आवश्यकता होगी तो स्थानीय स्टॉक में n-1 अवयव ही उपलब्ध होते हैं.

• कोई उपकरण तब तक असफल नहीं होता जब तक कि वह फाइनल इंसपेक्शन पास नहीं कर लेता.

• कोड जनरेटर प्रोग्राम ऐसे कोड जनरेट करता है जिसमें प्रोग्राम से ज्यादा बग होते हैं.

• किसी वर्कबेन्च से कोई पुरजा उसके महत्व के समानुपाती, पहुंच से दूर जाकर गिरता है.

• आप चाहे जितना भी ईमानदार, श्रमसाध्य काम कर लें, आपका बॉस तभी प्रकट होता है जब आप इंटनरेट पर चैट कर रहे होते हैं.

• हार्ड ड्राइव तभी क्रैश होते हैं जब आप उसमें से जरूरी जानकारी बैकअप नहीं किए हुए होते हैं.

• कंप्यूटर त्रुटियाँ पैदा नहीं किया करते - उन्हें ऐसा करने के लिए प्रोग्राम किया जाता है.

.

भारतीय बाबू बाहुबली...

भारत के सरकारी बाबुओं द्वारा भारत के स्वतंत्रता दिवस पर कार्य करने पर दंडनीय अपराध हेतु कार्यवाही की धमकी देने की कहानी मेरे पिछले पोस्ट पर आपने पढ़ी.

ऐसी ही, मिलती जुलती एक और कहानी अभी मीडिया के कुछ खास हिस्सों में चल रही है.

आपने आह्लादित करने वाली खबर पढ़ी होगी - भारतीय मूल की इंदिरा नूई, अमरीकन पेप्सी कंपनी की पहली महिला सीईओ चुनी गई हैं, और वे अपना पद भार 1 अक्तूबर 06 से ग्रहण करेंगीं.





.

पर साथ में यह भी खबर थी - भारत की नैना लाल किदवई बहुराष्ट्रीय बैंक एचएसबीसी इंडिया के सीईओ पद के लिए चुन ली गई थीं. परंतु उनके पद को भारतीय रिजर्व बैंक ने स्वीकृति देने से मना कर दिया क्योंकि वे नेस्ले कंपनी के बोर्ड पर भी विराजमान हैं, और नेस्ले कंपनी एचएसबीसी की ग्राहक है.

.

.

एचएसबीसी का कहना है कि वैश्विक कार्पोरेट गवर्नेंस के मानकों तथा प्रैक्टिस के अनुसार नैना लाल किदवई की नियुक्ति में कुछ भी गलत नहीं है.

पर, भारतीय कानून की किसी धारा में कहीं पर यह लिखा होगा, और लकीर के फ़क़ीर बाबुओं ने अपनी टाँग अड़ा दी.
**-**

व्यंज़ल
**-**

नहीं तब्दीली अपनी लकीर
बैठे रहे यूँ बन कर फ़क़ीर

जमाना कहाँ से कहाँ चला
और हम पीटते रहे लकीर

सबने बढ़ाए थे हाथ अपने
हमने ही खींची नहीं लकीर

अपनी खिंच नहीं पाई तो
मिटा दी दूसरों की लकीर

अपनी बढ़ाई नहीं रवि ने
देखा किए औरों की लकीर

**-**

.

कॉमरेड, स्वतंत्रता दिवस पर काम करना तो आपराधिक-दंडनीय अपराध है!

चहुँ ओर स्वतंत्रता दिवस पर खुशियों की धूम थी. बधाइयों की धूम थी. छुट्टी की खुशियाँ थीं. और दारू-शारू के ढक्कनों के खोले जाने की लंबी लाइनें थीं.

परंतु इस बीच एक छोटे से खबर ने बहुत कम लोगों का ध्यान आकर्षित किया.



केरल में कुछ बीपीओ कंपनियों ने जिनका धंधा ही 24x7 चलता है, पंद्रह अगस्त के दिन भी अपने ऑफ़िस खुले रखने चाहे.

मगर यह क्या? केरल के कॉमरेडी बाबुओं ने उन कंपनियों को नोटिस दिया कि वे पंद्रह अगस्त, राष्ट्रीय त्यौहार के दिन काम करेंगे तो सरकारी नियमानुसार, उन पर आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकेगा.

स्वतंत्रता दिवस पर कार्य करना तो सच्चे भारतीयों के लिए सचमुच आपराधिक कार्य है. इस दिन कार्य करना दंडनीय अपराध है. आखिर सैकड़ों वर्षों की गुलामी से मुक्ति उसी दिन मिली थी तो उस दिन को कार्य कर क्यों नष्ट किया जाए. उस दिन भरपूर छुट्टी मनाया जाए, छुट्टी की खुशियाँ मनाया जाए, मटरगश्ती किया जाए, तब वह दिन सार्थक होगा. और अगर कोई उस दिन कार्य करने को भी सोचेगा तो उस पर आपराधिक मुकदमा दायर कर ही देना चाहिए.

.

.

रेखा (पत्नी) के कॉलेज में बहुत पहले ऐसे ही एक कॉमरेडी प्रिंसिपल हुआ करते थे. अपने आप को डॉक्टर प्रिंसिपॉल कहलाना पसंद करते थे और जब तक वे प्रिंसिपल की कुर्सी से रिटायर नहीं हुए, पैंट-कोट-टाई युक्त सूट में ही मिलते थे भले ही बाहर-भीतर जून के महीने में आग बरस रही हो. तो किस्सा यह है कि नई-नई नौकरी में आई रेखा ने किसी ऐसे ही राष्ट्रीय त्यौहार पर झंडा वंदन के पश्चात् उन डॉक्टर प्रिंसिपॉल महोदय से पूछ लिया कि कुछ लड़कियों के काम अधूरे रह गए हैं, तो क्या मैं आधे घंटे की क्लास ले लूं?

बस, वे कॉमरेडी डॉक्टर प्रिंसिपॉल भड़क उठे. भले ही वे स्वयं साल भर पहले साथी प्राध्यापक के पद पर रहे थे, परंतु उस वक्त वे प्रिंसिपॉल बन चुके थे. वे गुर्राए - जैसा कि सरकारी अफसर अपने मातहत पर गुर्राना अपना अधिकार समझता है - राष्ट्रीय त्यौहार के दिन कोई काम नहीं होता. राष्ट्रीय छुट्टी होती है. आपने ऐसे कैसे पूछ लिया? आपको ज्ञान होना चाहिए कि सरकारी नियम के अनुसार इस दिन कोई कार्य नहीं होता है. रेखा ने पलट कर कहा, मैंने सरल शब्दों में सिर्फ अनुमति के लिए पूछा था, हाँ या ना और इस लैंग्वेज में बात करने का आपको कोई अधिकार नहीं है.

तब से रेखा को पता चल गया कि राष्ट्रीय त्यौहार को कोई काम करता है भला? हमें भी पता होना चाहिए कि राष्ट्रीय त्यौहार मौज मजे के लिए होते हैं. छुट्टी मनाने के लिए होते हैं. उस दिन अगर कोई कार्य करता है तो वह आपराधिक कार्य करता है. उस पर अवश्य मुकदमा चलाया जाना चाहिए.

बहरहाल, आपने उस दिन क्या किया? सच में? झूठ!! नहीं चलेगा!!!

(कल एक और कहानी)

.

बस, एक नए आइडिया - नए, नायाब विचार का सवाल है बाबा!


**-**

विचारवान मनुष्य ही धनवान होता है. इस कहावत को इंटरनेट ने पूरी तरह सत्य सिद्ध कर दिया है. अगर आपके पास विचार हैं, तो बस ले आइए उसे इंटरनेट पर. अगर विचार नया सा, नायाब हो तो क्या कहने. आपका यह नया विचार देखते-देखते आपको रंक से राजा बना सकता है, दरिद्र से करोड़पति, अरब-खरब-नील-पद्म-शंखपति बना सकता है.

और, हम कोई पुरानी, हॉटमेल वाली बात नहीं करेंगे कि किस तरह सबीर भाटिया के दिमाग में इंटरनेट के जरिए मुफ़्त ईमेल सेवा प्रदान करने का विचार आया, और उनकी उधार मांग कर शुरू की गई कंपनी को माइक्रोसॉफ़्ट ने 400 मिलियन डॉलर में कुछ ही वर्षों पश्चात् खरीद लिया.

और, ऐसे तो कई उदाहरण हैं - ताज़ातरीन राइटली जिसे गूगल ने खरीदा और फ़्लिकर, जिसका बीटा संस्करण ही अभी ढंग से निकाला नहीं गया था, और जिसे याहू! ने खरीदा. ये इंटरनेट अनुप्रयोग भी लाखों डालर में खरीदे गए.

इस दफा हम बात करेंगे - सिर्फ एक विचार के जरिए, एक नायाब खयाल के जरिए, इंटरनेट से लाखों कमाना - वह भी बिना कोई पूंजी लगाए, बिना कोई सेवा प्रदान किए, बिना किसी अनुप्रयोग को जारी किए, पूरी ईमानदारी से...

क्या यह संभव है?

हाँ. यह संभव है. और ऐसे कई-कई उदाहरण हैं. दो ताज़ा-तरीन उदाहरण आपके सामने हैं.

1 मिलियन डॉलर जाल पृष्ठ का विचार

विल्टशायर, इंग्लैंड के रहने वाले एलेक्स ट्यू नामक 21 वर्षीय निर्धन विद्यार्थी को अपने कालेज की पढ़ाई के लिए धन की आवश्यकता थी. उसके सामने विकल्प था - बैंक से आसानी से मिलने वाले ऋण के जरिए अपनी पढ़ाई का खर्च पूरा करे और फिर आने वाले 15-20 साल तक उस ऋण को किश्तों में चुकाता रहे.

उसे यह विकल्प नहीं जँचा.

वह निर्धन था. परंतु विचारों से नहीं. उसके जेहन में कई विचार आए. अंततः एक नायाब सा विचार उसके जेहन में कौंधा. और यह नायाब विचार न सिर्फ उसके कालेज की पूरी पढ़ाई का खर्चा दिला गया, न सिर्फ उसे करोड़पति बना गया, बल्कि इंटरनेट के इतिहास में उसका नाम दर्ज करा गया.

क्या विचार किया था उसने?

कोई जटिल विचार भी नहीं था वह.

उसने सादा सा विचार किया. इंटरनेट पर अपने घर-पृष्ठ का नाम उसने दिया - मिलियन डॉलर होम पेज. फिर उसने इस पृष्ठ को 100 पिक्सेल खण्ड (10x10 पिक्सल के) के 10000 खण्डों को (कुल एक मिलियन यानी दस लाख पिक्सल) प्रति पिक्सेल 1 डालर में बेचने का निर्णय किया ताकि उससे मिले पैसों को वह अपनी पढ़ाई में लगा सके, और हो सके तो कुछ कमाई भी. ध्यान रहे कि आपके सामान्य कंप्यूटर स्क्रीन पर आमतौर पर 800x600=240000 पिक्सेल होते हैं. इन पिक्सलों को कंपनियाँ या कोई भी व्यक्ति खरीद कर अपना विज्ञापन उतने आकार में लगा सकता था. यह पृष्ठ कम से कम 5 वर्षों के लिए उपलब्ध रखने की गारंटी दी गई थी.

देखते देखते ही इस पृष्ठ पर जगह पाने की व्यक्तियों और कंपनियों में होड़ लग गई. कंपनियों को अपना विज्ञापन देने का सबसे सस्ता साधन यह नजर आया तो चर्चा में बने रहने के लिए व्यक्तियों को. अब एलेक्स ने अपने प्रति पिक्सेल 1 डालर वाली जगह को बोली लगाकर बेचना प्रारंभ कर दिया. आखिरी पिक्सेल भरते तक तो आखिरी के 1000 पिक्सेल को तो उसने 38100 डॉलर में ई-बे के जरिए बेचा!

उसका यह विचार न सिर्फ उसकी पढ़ाई का खर्चा उसे दिलवा गया, बल्कि इंटरनेट के जरिए, हींग लगे न फिटकरी , रंग चोखा कहावत को सिद्ध करता हुआ सिर्फ विचारों के जरिए वह करोड़पति (मिलियॉनेर) भी बन गया.

.

.

आ रहा है ऐसा कोई विचार आपके दिमाग में?

2 लाल रंग के एक पेपर क्लिप के बदले मकान का विचार

मॉट्रियल, कनाडा के रहने वाले काइली मॅकडोनॉल्ड को अपने लिए स्वयं का एक घर पाने की चाहत हुई. इसे पाने सबसे आसान, सदियों पुराना व्यवसाय उसने चुना. इंटरनेट के जरिए वस्तुओं की अदला-बदली कर घर प्राप्त करना. और उसने इस काम की शुरूआत के लिए अपने पास उपलब्ध सबसे सस्ता, सबसे पास उपलब्ध वस्तु चुनी - पेपर क्लिप, जिससे उसकी उंगलियाँ खेल रही थीं - जब उसके दिमाग में यह विचार आया.

ब्लॉगस्पॉट पर मुफ़्त उपलब्ध साइट पर उसने अपने विचार को रखा. शीघ्र ही उसे अदला-बदली के प्रस्ताव आने लगे.

दस महीने से चल रहे व्यापार की कड़ी में सबसे ताज़ा प्रस्ताव उन्हें अमरीका के फ़ीनिक्स शहर में एक घर में साल भर बिना कोई किराया दिए रहने का मिला है.

मॅकडोनॉल्ड ने पिछले साल जुलाई में पहले इंटरनेट पर अपने पेपर क्लिप के बदले मछलीनुमा एक कलम का प्रस्ताव स्वीकार किया था जिसे बाद में उन्होंने उस कलम के बदले सिरामिक से बने दरवाज़े के हत्थे से बदला था. दरवाज़े के हत्थे को उन्होंने एक स्टोव से बदला, और स्टोव के बदले उन्होंने एक जेनरेटर का प्रस्ताव स्वीकार किया.

जेनरेटर को उन्होंने एक पार्टी बीयर सेट से, पार्टी बीयर सेट को स्नोमोबाइल यानी बर्फ़ पर चलने वाले स्कूटर से बदला. बर्फ़ पर चलने वाले इस स्कूटर को बदलना कठिन प्रतीत हो रहा था कि ऐसे में एक स्नोमोबाइलिंग पत्रिका ने स्कूटर के बदले कनाडा की रॉकी पर्वतमाला के साथ लगे कस्बे याक की यात्रा की व्यवस्था की. जाहिर है, इस यात्रा प्रस्ताव की तो अदला-बदली करनी ही थी ताकि मॅकडोनॉल्ड का अदला-बदली के व्यापार के जरिए, पेपर क्लिप के सहारे घर पाने का सपना साकार हो जाए. इसलिए उन्होंने यात्रा के ऑफ़र को एक सफ़ेद वैन से बदल लिया.

मॅकडोनॉल्ड का अदला-बदली का यह व्यापार जारी है. इन पंक्तियों के लिखे जाने तक मॅकडोनॉल्ड को उसके सपनों का मकान तो मिल ही गया है.

कौन जाने उन्हें सचमुच स्वयं का मकान किसी दिन मिल जाए. और हो सकता है इस अदला-बदली को वे जारी रखें तो किसी दिन अदला-बदली में अपने लिए कोई महल ही न ले आवें.

पेपर क्लिप के बदले महल?

ऐसा तुच्छ सा विचार आपके मन में पहले क्यों नहीं आया?

कोई बात नहीं. आइए विचार करते हैं. कोई न कोई नया आइडिया हमारे मन में भी क्लिक करेगा और हम भी उड़ानें भरेंगे - अपने स्वयं के जेट विमान पर.

**-**

.

सधन्यवाद, ये रहे आपके रिटर्न गिफ़्ट-

भाई इन्द्र अवस्थी ने अपनी बधाइयाँ देते हुए मुझसे गुज़ारिश की थी कि मेरे जन्म दिन पर मुझे क्या उपहार मिले उसे कविता या ग़ज़ल के माध्यम से बताया जाए.

सबसे बड़ा उपहार तो निःसंदेह, हिन्दी चिट्ठाजगत् के महाचिट्ठाकार द्वारा एक नहीं, बल्कि दो-दो चिट्ठा पोस्टों के माध्यम से मुझे मिले, वह भी 22 टिप्पणियों सहित. इस उपहार के सामने तो निःसंदेह बाकी सारे उपहार फ़ीके ही रहेंगे.

रिटर्न ग़िफ़्ट के माध्यम से जीतू भाई ने मेरी व्यंज़ल मशीन उधारी मांगी है. तो उन्हें यह बता दूं कि व्यंज़ल की यह मशीन हिन्दी चिट्ठा जगत् में उनकी सक्रियता की ऊर्जा की बदौलत चलती है.

बहरहाल, आप सभी का, जिन्होंने अपनी टिप्पणियों के माध्यम से तथा दूसरे माध्यमों से मुझे बधाइयाँ दीं, आभार प्रकट करता हूँ तथा धन्यवाद देता हूँ.

मेरे साक्षात्कार में अनूप जी ने पूछा था कि मेरे चिट्ठे पर टिप्पणियाँ नहीं मिलने पर मुझे कैसा लगता है. इस दफ़ा फ़ुरसतिया के पन्नों पर जन्मदिन की बधाइयों के संदेश के रूप में कुल जमा 22 टिप्पणियाँ मिलीं तो ऐसा लगा कि न सिर्फ अब तक का हिसाब चुकता हो गया, बल्कि आने वाले समय का एडवांस भी फ़्री हो गया. यानी अब आने वाले समय में एक भी टिप्पणी न मिले, तो भी कोई वांदा नहीं प्यारयो!

.

.

आप सभी 22 टिप्पणीकारों को, सधन्यवाद, समर्पित है निम्न व्यंज़ल : (रिटर्न ग़िफ़्ट मान लिया जाए!)

**-**
ईस्वामी ने दी प्रतिबद्धता की मिसाल
ई-छाया ने खड़े किए कई कई सवाल

रमण कौल के शब्दों ने दिए संबल
शुभकामनाएँ बांटते रहे समीर लाल

अनुनाद तो स्वयं है प्रेरणा के स्रोत
हिन्दीब्लॉगर के आशीष से हैं निहाल

प्रतीक पाण्डे ने दी है सूर्य की उपमा
नितिन की कामनाएं भी हैं कमाल

सृजन शिल्पी के शब्दों ने दी दिशा
अतुल के बोलों ने जलाया मशाल

अनूप भार्गव को अच्छे लगे जवाब
व्यंज़ल हेतु जीतू ने मचाया बवाल

प्रमेन्द्र ने दिखाया दूसरा एक पहलू
प्रेमलता ने सौंपे कामनाओं के ढाल

कुछ कामनाएँ टिकाईँ अमित ने भी
तो सागर ने बुना बधाइयों का जाल

देर से मिली थीं सुनील की बधाइयाँ
तो इन्द्र पूछ रहे थे उपहारों के हाल

शुभकामनाओं सहित प्रकटीं प्रत्यक्षा
शशि सिंह ने कहा जिओ हजारों साल

अनूप के चिट्ठों ने मचाई है धूम तो
रवि को टिप्पणियों का क्या मलाल

**-**

.
कल मैंने ब्लॉगर के गुण गाए ही थे कि आज पता चला कि ब्लॉगर ने नया अपना नया बीटा संस्करण जारी किया है जिसमें सुविधाओं में खासी बढ़ोत्तरी की गई है.

मैंने एक नज़र नए नवेले ब्लॉगर बीटा पर डालने की कोशिश की, तो पाया कि इसमें ब्लॉगरों की तमाम पुरानी समस्याओं से छुटकारा पाने की ईमानदार कोशिश तो की ही गई है, बहुत सी नई विशेषताओं को भी शामिल किया गया है.

हालाकि नया ब्लॉगर बीटा वर्तमान में सभी पुराने ब्लॉगरों को उपलब्ध नहीं है - (संभवतः कुछ पुराने ब्लॉगर टैम्प्लेटों द्वारा नए फ़ीचरों को समर्थन नहीं मिल पाने के कारण), परंतु देर सबेर यह सबको उपलब्ध होना ही है.

आइए, देखें कि नए ब्लॉगर बीटा में हमें क्या-क्या नया मिलता है -

• ब्लॉगर ने चिट्ठाकारों की सबसे बड़ी समस्या सुन ली लगती है - परंतु नए अंदाज में. अब ब्लॉगर में आप अपने चिट्ठों को श्रेणियों में विभाजित कर सकते हैं. ब्लॉग पोस्टों को विषय वार "लेबल" लगाकर उन्हें विषयानुसार एक साथ देख सकते हैं. ठीक वैसे ही जैसे कि जीमेल पर लेबल लगाकर कार्य किया जा सकता है. चिट्ठों के लिए श्रेणियों की सुविधा वर्डप्रेस में अरसे से उपलब्ध था, और यह एक बड़ी वजह थी ब्लॉगर के चिट्ठाकारों द्वारा वर्डप्रेस की ओर दौड़ लगाने की. ब्लॉगर के चिट्ठाकारों के लिए यह बड़े राहत की बात है! चिट्ठों में एक साथ दो-तीन या अधिक श्रेणियों में भी लेबल लगाया जा सकता है - जैसे कि आपका नया चिट्ठा राजनीतिक तथा व्यंग्यात्मक है तो आप उसे इन दोनों श्रेणियों में एक साथ रख सकते हैं. यह आसान भी है. ब्लॉग पोस्ट करते समय टैगिंग के रूप में लेबल लिखें - बस. अगर पहले से लेबल निर्धारित नहीं है तो स्वचालित एक लेबल तैयार हो जाता है. यदि पहले से लेबल है, तो यह उस लेबल के साथ संलग्न हो जाता है.
• ब्लॉगर के टैम्प्लेट में परिवर्तन करने के लिए अब आपको एचटीएमएल भाषा का जानकार होना कतई आवश्यक नहीं है. और, लगभग सारा परिवर्तन आप माउस क्लिक और साधारण टाइप कर कर सकते हैं. खींच-कर-व-छोड़ कर (ड्रैग एंड ड्रॉप) आप ब्लॉगर टैम्प्लेट के रूप रंग भाषा फ़ॉन्ट इत्यादि सभी प्रकार के परिवर्तनों को मन माफ़िक अंजाम दे सकते हैं, और बढ़िया तरीके से अंजाम दे सकते हैं.
• ब्लॉगर में चिट्ठा पोस्ट अब तीव्र हो गया है. पहले किसी भी चिट्ठे को पोस्ट करने के लिए पूरे ब्लॉग की इंडेक्सिंग व पब्लिशिंग नए सिरे से की जाती थी, व सिलसिला स्टेटिक था जिस कारण समय लगता था. अब इस समस्या से डायनॉमिक सर्विंग के जरिए छुटकारा पा लिया गया है जिससे आपका ब्लॉग न सिर्फ तत्क्षण प्रकाशित हो जाता है, बल्कि ब्लॉगर में काम करना तेज भी हो गया है.

.

.

• अपने ब्लॉग की प्रविष्टि को आप आम, खास व गोपनीय बना सकते हैं. उदाहरण के लिए किसी प्रविष्टि को आप चाहते हैं कि आपके द्वारा निर्धारित व्यक्ति ही देख पाएँ, तो ब्लॉगर में अब यह संभव है. और यह आसान भी है. ब्लॉग पोस्ट करते समय इस हेतु दिए गए विकल्प को चुनें, बस.
• नए ब्लॉगर में चिट्ठा तथा टिप्पणियों की फ़ीड भी जारी की जा सकती है. अब तक सिर्फ चिट्ठा फ़ीड ही संभव था तथा टिप्पणियों की फ़ीड के लिए तीसरे औज़ारों की आवश्यकता होती थी. एटम तथा आरएसएस फ़ीड दोनों ही मिलेंगे तथा टिप्पणियों के लिए भी विकल्प हैं - साइट की सारी टिप्पणियों की फ़ीड या सिर्फ एक विशिष्ट पोस्ट की टिप्पणियों की फ़ीड.
• नए ब्लॉगर बीटा में टैम्प्लेट में हिन्दी भाषा का विकल्प चुनने पर आने वाली समस्या से निजात मिल गई लगती है. नया ब्लॉग बनाकर इसकी जाँच की गई तो पाया गया कि कहीं भी कोई समस्या नहीं आई.
• नए विशेषताओं की पूरी विस्तृत सूची यहाँ देखें तथा यदि आपके विचार में कुछ आवश्यक विशेषताएँ ब्लॉगर में छूट रही हैं तो अपनी इच्छा-सूची भी यहाँ लिख सकते हैं.

.
प्रिये, मैंने गूगल की सारी जगह इस्तेमाल कर डाली!

क्या कहा? नहीं मानते. चलो कोई बात नहीं. मैंने भी कौन सा सच कहा है. परंतु गूगल का ब्लॉगर जब अपने विशाल डाटाबेस को संभाल नहीं पाता है तो यदा कदा इसी किस्म के विचित्र त्रुटि संदेश दिखाता रहता है.

उदाहरण के लिए, यह त्रुटि संदेश मेरे एक ब्लॉग के प्रकाशन के दौरान कल प्रकट हुआ, परंतु ब्लॉगर को धन्यवाद कि आज सुबह सब कुछ फिर से सामान्य हो चला.

001 java.io.IOException: No space left ...


क्या आश्चर्य कि बहुत से लोग ब्लॉगर से वर्डप्रेस की ओर दौड़ लगा रहे हैं, और कई लाइन में लगे हैं.

और मैं?

.

.

नहीं. कभी नहीं. ब्लॉगर तो रेस का वह काला घोड़ा है जिस पर आप दांव लगा सकते हैं. लंबे रेस में, मेरी बात का यकीन कीजिए, इसमें तमाम तरह के प्रॉडक्टिविटी औज़ार और जुड़ेंगे जिससे यह सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म बना रहेगा.

**-**

इस बीच अगस्त 2006 के प्रथम सप्ताह में रचनाकार के प्रकाशन का गौरवशाली एक वर्ष पूरा हो गया. इस एक वर्ष में रचनाकार में विभिन्न विधाओं में कुल जमा निम्न रचनाएँ प्रकाशित हुईँ-

संस्मरण - 10
व्यंग्य - 25
लघुकथा - 19
चुटकुले - 23
गजल - 24
कहानी - 42
कविता - 49
आलेख - 20
बालकथा - 4
समीक्षा - 2

यानी कुल जमा 200 से अधिक पोस्ट रचनाकार में किए गए, जिनमें से अधिकांश ऐसे लेखकों की रचनाएँ हैं, जिनके पास अपना स्वयं का जरिया रचनाओं को इंटरनेट पर देखने का भी नहीं है - लिखना तो दूर की बात है. कई अच्छी व घरोहर रचनाओं को अनुमति सहित या साभार पुनर्प्रकाशित भी किया गया है.

आने वाले दिनों में रचनाकार में विस्तार की और कोशिशें की जाएंगी. रचनाकार में क्या हिन्दी का प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग बन सकने की काबिलियतें दिखती हैं? या हिन्दी का प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग बनने में क्या कुछ और साल लग जाएंगे?

**-**

.
खटमली खटिया









.

इस अजीबोग़रीब समाचार को अगर सही मानें, तो मात्र दो रुपया प्रति खाट के हिसाब से कमाने हेतु गरीब लोग अपने आप को खटमली खटिया के हवाले कर देते हैं.


यह समाचार एक तरफ से तो रोचक हो सकता है कि खटमलों को यूँ इस तरह से भरपेट खाना दिया जा रहा है. परंतु दूसरी ओर हृदयहीन समाज का यथार्थ व्यंग्य दिखाई देता है.

सच है. ख़ून ग़रीबों का ही चूसा जाता है. ग़रीबों के खून में ही तो सच्चाई और ईमानदारी का शानदार ज़ायक़ा होता है.

/**/**/

.

.

व्यंज़ल
//*//

किसी को नसीब है खटिया खटमली
तो किसी के पास बिछौना मखमली

मेरे खुदा मुझे बता कि क्यूं नहीं है
मुझे मयस्सर रोटियाँ भली अधजली

तमाम उपाय आजमाए जा चुके हैं
मचती नहीं नसों में क्यों खलबली

अपनी वेदनाओं का पता है हमें ही
जमाना समझे है किस्सा झिलमिली

कैसे बताए रवि कि उसके देश में
हो चुकी तमाम व्यवस्था पिलपिली

**-**


मरफ़ी के नियम

(मरफ़ी के नियमों ने सबको सदैव आकर्षित किया है. अंग्रेज़ी में तो कई देखीं, परंतु हिन्दी में मरफ़ी के नियमों की किसी किताब बाबत जानकारी मुझे नहीं है. इंटरनेट पर तो ख़ैर है ही नहीं. इंटरनेट पर हिन्दी में इन नियमों के संग्रह को लाने की ख्वाहिश मुझे प्रारंभ से ही थी. अब लगता है यह सपना पूरा हो सकेगा. प्रभासाक्षी ने इन नियमों को सिलसिलेवार प्रकाशित करने का भरोसा दिलाया है - जिसके लिए वे पारिश्रमिक भी देंगे. - हिन्दी ब्लॉग की व्यावसायिकता में पहला कदम? अभिव्यक्ति में भी इन्हें सिंडीकेट रुप में प्रकाशित किया जा सकेगा. बाद में किताब की शक्ल देने की कोशिश भी की जाएगी - परंतु तभी जब कोई प्रकाशक इसे ‘मुफ़्त' में या ‘कुछ दान-दक्षिणा' जैसी रॉयल्टी देकर छापे. अन्यथा अभी तो मेरे जैसे हिन्दी के नए नवेले लेखकों को अपनी किताबें खुद पैसे खर्च कर छपवानी पड़ती हैं - शायद इसीलिए मेरी कोई भी किताब अब तक प्रकाशित नहीं हुई और अगर यही स्थिति रही तो कभी प्रकाशित भी नहीं होगी :) मरफ़ी के हिन्दी में अनुवादित ये नियम यूं तो अनियमित प्रकाशित होंगे, परंतु वर्षांत तक एक अच्छा खासा संग्रह तैयार करने की कोशिश होगी.)


• यदि कहीं कुछ गलत हो सकने की संभावना होती है तो अंततः ऐसा होता ही है.

• यदि बहुत सी गलतियों के हो सकने की संभावनाएँ होती हैं, तो वही एक गलती होती है जिससे कि सर्वाधिक नुकसान पहुँचता है.

• उपप्रमेय: यदि किसी गलती के हो सकने का सबसे खराब समय होता है, तो गलती भी उसी सबसे खराब समय में होती है.

• यदि कहीं, कभी, कोई गलती हो ही नहीं सकती हो तो फिर वहाँ अंततः गलती होती ही है.

• यदि आप यह महसूस करते हैं कि चार संभावित तरीकों से गलती हो सकती है, और आप इन सभी तरीकों से बच निकलते हैं, तभी, गलती हो सकने का एक पाँचवाँ अप्रत्याशित तरीका तत्परता से पैदा हो जाता है.

• यदि चीज़ों को अपने हाल पर छोड़ दिया जाए, तो वे बद से बदहाल होने की कोशिशें करती हैं.

• यदि सब कुछ अच्छा चलता प्रतीत हो रहा है, तो यकीन मानिए, आपने कुछ अनदेखा किया ही है.


• प्रकृति हमेशा गुप्त दोषों के पक्ष में होती है

• मरफ़ी का दर्शन-
मुस्कराओ... कल तो और बुरा होगा.


• मरफ़ी के नियम में क्वांटाइज़ेशन संशोधन-
गलत होता है तो सारा कुछ एक साथ होता है.

• मरफ़ी का स्थिरांक :
पदार्थ अपने मूल्य के सीधे अनुपात में क्षतिग्रस्त होता है.

• मरफ़ी का अनुसंधान का नियम :
ज्यादा अनुसंधान आपके सिद्धान्त का समर्थन करने के लिए अग्रसर होते हैं

• मरफ़ी के नियम में संयोजन :
प्रकृति में सब कुछ कभी भी सही नहीं होता. अतः यदि सब कुछ सही हो रहा हो... तो कहीं कुछ गलत है.

• कुछ भी जो गलत हो सकता है, उसे अंततः गलत होना ही है.


• परिशुद्धता का नियम: किसी समस्या के समाधान पर कार्य करते समय, यदि आपको समाधान पहले से पता होता है तो इस बात से हमेशा ही मदद मिलती है.

• उपप्रमेय: परंतु तभी, जब आपको पता हो कि वहाँ सचमुच समस्या है.

• कोई भी चीज उतनी आसान नहीं होती जितनी वह दिखाई देती है

• हर चीज के लिए उससे ज्यादा समय लगता है जितना आप समझते हैं

• यदि कोई चीज कभी गलत हो ही नहीं सकती तो अंततः उसे गलत होना ही है

• जब आप कोई कार्य करने के लिए निकल पड़ते हैं तो पता चलता है कि कोई अन्य कार्य पहले करना जरूरी है.

• हर समाधान नई समस्याओं के साथ आता है

• किसी प्रतिलिपि (फ़ोटोकॉपी) की पठनीयता उसके महत्व के उलटे अनुपात में होती है

• आप पहले से यह सफलतापूर्वक निर्धारित कर नहीं रख सकते कि ब्रेड के किस तरफ मक्खन लगाया जाए.

• किसी ब्रेड के मक्खन लगे हुए तरफ से कालीन पर गिरने की संभावना कालीन की क़ीमत के सीधे अनुपात में होता है.


• आखिरी असंभावित जगह पर देखने पर कुछ न कुछ मिल ही जाता है


• आप चाहे जितनी भी मशक्कत कर सबसे सस्ती दर पर कोई वस्तु अपने लिए खरीदते हैं तो खरीदने के तुरंत बाद पता चलता है कि वह कहीं सेल पर और सस्ते में पहले से बिक रहा होता है

• आपके सामने वाली लाइन ज्यादा तेजी से चलती है और यदि आप लाइन बदल लेते हैं तब भी यही स्थिति रहती है.

• ऋण प्राप्त करने के लिए आपको यह साबित करना होता है कि आपके पास तमाम संपत्तियाँ पहले से हैं और आपको ऋण की तो कतई आवश्यकता ही नहीं है.

• किसी भी चीज को अगर आप सुधारना चाहते हैं तो जितना सोचा गया होता है उससे कहीं ज्यादा समय लगता है और ज्यादा धनराशि खर्च होती है.

• यदि ढक्कन खुल नहीं रहा है, तो ताकत लगाएँ. यदि यह टूट भी जाता है तो कोई बात नहीं चूंकि अंततः इसे फेंकना तो है ही.

• यदि किसी खराब उपकरण को मेकैनिक को दिखाया जाता है तो वह उपकरण अचानक भली भांति कार्य करने लग जाता है.

• यदि कोई ऐसा आसान तंत्र या उपकरण बना लिया जाता है जिसका इस्तेमाल कोई बेवक़ूफ़ भी कर सकता हो तो फिर उसका इस्तेमाल सिर्फ बेवक़ूफ़ ही करेंगे.

.

.

• हर एक के पास धनवान बनने की योजनाएँ होती हैं जो काम नहीं करतीं.

• किसी भी पदानुक्रम (हियरऑर्की) में प्रत्येक व्यक्ति अपने स्वयं के अयोग्यता स्तर के चरम पर पहुँच जाता है और फिर वह वहीं बना रहता है.

• किसी भी काम को सबसे बढ़िया करने के लिए कोई समय नहीं होता, परंतु उस काम को निपटा लेने के लिए समय हमेशा होता है.


• जब आप संशय में हों, बुदबुदाएँ. जब मुश्किल में फंसे हों तो अपने कार्य अधिकार दूसरों को दे दें.

• जीवन में कोई भी अच्छी चीज या तो अवैधानिक, या अनैतिक होती है.


• मरफ़ी का स्वर्णिम नियम : जिसके पास स्वर्ण होता है वही नियम बनाता है.

• संशय के समय अपनी आवाज में ज्यादा विश्वसनीयता लाएँ.

• किसी बेवकूफ़ के साथ तर्क कभी नहीं करें, संभवतः लोगों को भिन्नता का पता न चल पाए.

• गणित के सबक पर पेन्जा का नियम:
सबक के सबसे महत्वपूर्ण समय पर ही बेयरा दरवाजे पर दस्तक देता है.

• जहाँ सहनशक्ति और धैर्य असफल हो जाता है, बल और शक्ति की जीत होती है.


• यदि आप कुछ गलत चाहते हैं, अधिक संभावना है कि आपको वह न मिले.

• यदि आप समझते हैं कि आप सही और बढ़िया काम कर रहे हैं, तो इसके आपके सामने ही गलत ठहराए जाने की पूरी संभावना है.

• जब किसी ट्रैफ़िक में इंतजार कर रहे हों, तो जब तक आपका लेन साफ होता है वह दूसरा लेन जाम हो जाता है जिस पर आपको बदलकर जाना होता है.

• जब आप सोचते हैं कि अब इससे बुरा कुछ हो ही नहीं सकता तब ऐसा हो ही जाता है.

• बूमरेंग प्रभाव याद कीजिए; आपके कार्य आपके पास लौट कर वापस आते हैं.

• किसी क्रिया पर की गई प्रतिक्रिया भी एक क्रिया ही है


• दूसरों के कार्यों पर अगर आपको गुस्सा आता है तो इसका अर्थ है कि आपको दूसरे नियंत्रित करते हैं तथा अपने गुस्से पर तो आपका नियंत्रण ही नहीं है.

• किसी भी समय यदि कोई वस्तु सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है तो वह फिर कभी दुबारा दिखाई नहीं देता - काम के समय तो बिलकुल नहीं.

• जब आप अकेले खेल रहे होते हैं तभी गेंद पर आपका बढ़िया शॉट लगता है.

• गेंद पर आपका सबसे बुरा शॉट तभी लगता है जब आप उनके सामने खेलते होते हैं जिन्हें आपको प्रभावित करना होता है.

• आप चाहे जितनी भी कोशिश कर लें, आप एक धागा भी नहीं खींच सकते.
(उदाहरण के लिए, कार में परिवार के सभी लोगों को बिठाने की कोशिश करना)

• बाल सेटिंग करवाने की कीमत बयार की तेजी के सीधे अनुपात में होती है.

• ग्रेट आइडिया कभी भी याद नहीं किए जाते और मूर्खता भरे वक्तव्य कभी भूले नहीं जाते.


• वाशिंग मशीन में जोड़ में से हमेशा एक ही मोजा ग़ायब होता है

• जो आप चाहते हैं आपको नहीं मिलता जो आपके पास है उसे आप हरगिज नहीं चाहते.

• जो आप करना चाहते हैं वह संभव नहीं है, जो आप कर सकते हैं उसे आप करना नहीं चाहते.

• ट्रैफ़िक की रफ़्तार आप कितने लेट हो चुके हैं या होने वाले हैं उसके उलटे अनुपात में होती है.

• पेचीदगी तथा कुण्ठा का गुणांक, उस कार्य को पूरा करने में कितना समय बाकी होता है तथा वह कितना महत्वपूर्ण होता है उसके उलटे अनुपात में होता है.

• क्रेसपिन का अवलोकन का सिद्धांत:
लोगों के द्वारा किसी व्यक्ति का अवलोकन किए जाने की संभाव्यता उसके द्वारा किए जा रहे मूर्खता पूर्ण कार्य के सीधे अनुपात में होती है.

• यदि आप खुजाते हुए सोएंगे तो बदबूदार उंगलियों के साथ उठेंगे.

• मरफ़ी के नियमों की जानकारी होने मात्र से किसी भी परिस्थिति में कोई मदद नहीं मिलती है.

• यदि आप अपना प्रभाव जमाने के लिए कुछ कहते हैं तो यकीन मानिए, आपका प्रभाव खतम हो जाता है.

• जहाँ धैर्य असफल होता है, वहाँ शक्ति सफल होती है.

• वैक्समेन का नियम:
सभी चीजों का स्वाद एक जैसा ही होता है- अच्छा या बुरा

• स्कारस्टाड का अवलोकन
आपके गुम चुके चिल्लर में से उससे अधिक तो आपको कभी भी वापस नहीं मिलेंगे.

• यदि अधिकार द्रव्यमान है तो मूर्खता गुरुत्व-बल है.

ब्लॉग - विज्ञापनों के लिए नया, सशक्त माध्यम

उस परिस्थिति की कल्पना करें जब आपको एक ऐसा माध्यम दिया जाता है जिसके जरिए आप ताजा तरीन घटनाओं पर अपनी बेलौस राय व्यक्त कर सकते हों या नए उभरते विचारों और धारणाओं पर अपनी नजर डाल सकते हों या फिर नए उत्पाद व तकनॉलाज़ी की समीक्षा कर सकते हों. क्या यह आपको वरदान सदृश्य नहीं लगता जहाँ आप बिना किसी दबाव या पूर्वाग्रह के अपने विचारों को स्वतंत्रता पूर्वक सबके सामने रख सकते हैं?

जी हाँ, ब्लॉग के आने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ने नए आयामों को छुआ है. देखा गया है कि प्रत्येक नया, नायाब कदम, नया इतिहास रचता है. जब ऐसे विचार सफल और प्रसिद्ध हो जाते हैं तो उनमें व्यापार और वाणिज्य की संभावनाएँ भी लोगों को दिखाई देने लगती हैं - और जल्दी ही दिखाई देने लगती हैं. अब तो ब्लॉग भी सक्षम विज्ञापनों के सफल माध्यम के रुप में इस्तेमाल किए जाने लगे हैं. ब्लॉग के साथ विज्ञापनों को प्रायोजन, विज्ञापन या सम्बद्धन - इन तीन प्रकारों से इस्तेमाल किया जा रहा है.

प्रायोजन (स्पांसरशिप) : यदि कोई ब्लॉग क्रिकेट के बारे में है, तो क्रिकेट के सामानों का उत्पादक उस ब्लॉग को प्रायोजित (स्पांसर) कर सकता है. इस तरह से उनके उत्पादों के विज्ञापनों के लिए एक स्थान मिल सकेगा और ब्लॉग को पैसा. साथ ही, यह सब सन्दर्भयुक्त होगा, न कि उस तरह का गैर संदर्भित - जहाँ कि किसी गंजे को शैम्पू या कंघी बेचने का प्रयास किया जा रहा हो. जाहिर है, इस तरह का एकीकरण सबके लिए मददगार होता है.

.


.

विज्ञापन: ब्लॉग के विषय-सामग्री से संबंधित सामग्रियों के विज्ञापनों को गूगल के एडसेंस व ब्लॉगएड्स के जरिए बेहतर तरीके से प्रभावी बनाया जा सकता है. ब्लॉग के पाठकों को यह गैर संदर्भित व गैर जरूरी भी नहीं लगेगा व वे ऐसे विज्ञापनों के जरिए अतिरिक्त जानकारियों को प्राप्त करने की आशा करेंगे - चूंकि वे ब्लॉग तथा संदर्भित विज्ञापनों में उस तरह की सामग्री को पढ़ रहे होते हैं जिनमें उनकी रुचि है. यह एक तरह का आकर्षण प्रभाव ही है जो निश्चित रूप से ज्यादा प्रभावी होता है.

समबद्धन (एफ़िलिएट्स): पुस्तक प्रकाशकों के साथ साझेदारी तथा सहयोग भी बहुत काम का होगा. यदि कोई पाठक कला विषयक ब्लॉग को पढ़ रहा हो, तो उसे ब्लॉग स्थल पर ही कला विषयक पुस्तकों, उनके प्रकाशक व विक्रय कर्ता के बारे में बताना बुद्धिमानी ही होगी. उदाहरण के लिए, http://www.drawn.ca/ कला, कार्टून व ड्राइंग पर समर्पित ब्लॉग है. इसका प्रयोजन है कला विषयक विविध संसाधनों व कड़ियों को एक ही स्थल पर उपलब्ध करवाकर पाठकों में सर्जनात्मक रुचि जगाना. सार तत्व यह कि यह समस्त विश्व के कला प्रेमियों को एक स्थल पर जोड़कर लाता है तथा उनके लिए रूचिपूर्ण, उपयोगी जानकारियों को प्रस्तुत करता है - जिनमें कला से सम्बन्धित वस्तुओं के विज्ञापन भी हैं. कला प्रेमियों को एक ही स्थल पर ऐसी सुविधाएँ मिलें तो यह विचार निश्चित रूप से सफल है.

विज्ञापनों के लिए सार्थक, शक्तिशाली माध्यम के रुप में ब्लॉग की पहचान बन चुकी है. पीक्यू मीडिया द्वारा जारी एक रपट के मुताबिक, वैकल्पिक मीडिया उद्योग के रुप में ब्लॉग, पॉडकास्ट तथा आरएसएस के जरिए विज्ञापनों के खर्च में पिछले वर्ष सर्वाधिक वृद्धि देखी गई. वर्ष 2005 में इन सभी माध्यमों में विज्ञापनों में कुल एक अरब रुपयों से अधिक खर्च किए गए जो कि पिछले वर्ष से 198.4 प्रतिशत अधिक था. वर्ष 2006 के लिए अनुमान है कि इसमें अतिरिक्त 144.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होगी और कुल ढाई अरब रुपयों से अधिक के विज्ञापन इन माध्यमों में दिए जाएंगे. अपने उत्पादों के बारे में कई तरह के आंतरिक जानकारियों तथा फ़ीडबैक प्राप्त करने में कंपनियों के लिए ब्लॉग महत्वपूर्ण हैं. बहुत बार सुधारों अथवा बेहतर संस्करणों के लिए सुझाव आंतरिक उत्पाद विकास विभाग से नहीं आता बल्कि ब्लॉगरों जैसे नेट-प्रयोक्ताओं से आता है. एचपी तथा सन माइक्रोसिस्टम जैसी कंपनियाँ अपने कर्मचारियों तथा समान सोच वाले समूहों के साथ संवाद स्थापित करने हेतु ब्लॉग का बखूबी इस्तेमाल करती हैं.

तकनीकी विकास ने बिखरते हुए मीडिया के इस युग में कुछ नए मीडिया प्रदान किए हैं और मीडिया योजनाकारों को इन पर ध्यान देना ही होगा. इंटरनेट उपयोक्ता दिन दूने रात चौगुने बढ़ते जा रहे हैं, ब्रॉडबैण्ड की दरें सस्ती हो रही हैं. ऑनलाइन मीडिया के लिए भविष्य सुनहरा है. ब्लॉग को भी भरोसेमंद विज्ञापन माध्यम के रुप में पहचान मिल चुकी है. जैसे ही कोई विशेष ब्लॉग प्रसिद्ध होता है, उसकी पाठक संख्या में वृद्धि होती है, विज्ञापन दाताओं की कतार वहां निवेश करने में लग जाती है. यह सचमुच रोचक है कि इंटरनेट उपयोक्ता के व्यक्तिगत विचार, विज्ञापनों को परोसने के लिए सशक्त माध्यम भी बन गया है.

(मीडिया व विज्ञापनों की पत्रिका - पिच (जून15-जुलाई15) के मूल अंग्रेजी लेख का साभार अनुवाद. )


डिजिटल कैमरा से बढ़िया फ़ोटो खींचने के चंद नुसख़े

पिछले दिनों मैंने डिजिटल फ़ोटोग्राफ़ी पर एक कार्यशाला में हिस्सा लिया जिसमें भारत के नामी, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत तथा कई फ़ोटोग्राफ़ी पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखक-छायाचित्रकार गुरदास दुआ ने अच्छे, प्रोफ़ेशनल गुणवत्ता युक्त फ़ोटोग्राफ लेने के कई गुर सिखाए. गुरदास दुआ संपूर्ण मप्र व छत्तीसगढ़ में एकमात्र फ़ोटोग्राफर हैं जो लार्ज फ़ॉर्मेट के सिनार कैमरा इस्तेमाल करते हैं. उनके द्वारा खींचे गए चित्रों से बनाए गए कुछ विज्ञापन कैंपेन खासे चर्चित रहे, जिनमें से एग-कोआर्डिनेशन-कमिटी का अंडों का चित्र जिसमें एक अंडे को कम्प्यूटर माउस की शक्ल दी गई थी, शामिल हैं. जो कुछ मैंने उनसे सीखा, आइए, आज मैं उनमें से चंद महत्वपूर्ण बातों को आपके साथ साझा करता हूँ.

  • अगर आप पासपोर्ट आकार का फ़ोटोग्राफ - वीज़ा या किसी आवेदन में चिपकाने के लिए नहीं ले रहे हैं, तो फिर किसी भी सूरत में सब्जैक्ट (विषय वस्तु) को बीचों बीच मत रखें. विषय के सामने की ओर (मुख की ओर) थोड़ा ज्यादा जगह छोड़ें.
  • दृश्यावलि चित्रण में हमेशा 2/3 नियम का पालन करें- यानी कि पूरे फ्रेम को तीन हिस्सों में बाटें तथा जिस चीज को महत्व देना है उसे फ्रेम के दो-तिहाई हिस्से में रखें. बराबर बराबर भागों में कतई नहीं रखें. उदाहरण के लिए, यदि आप आकाश के बादलों की छटा दिखाना चाहते हैं तो आकाश आपके पूरे फ्रेम में ऊपरी ओर दो तिहाई हिस्सों में रहे. यदि आप पहाड़ों घाटियों या मैदानों की हरियाली दिखाना चाहते हैं तो इसे फ्रेम के नीचे दो तिहाई हिस्सों में रखें. इस तरह से आपके फ़ोटोग्राफ में दर्शक को बांधने की क्षमता होगी और उसका ध्यान नहीं भटकेगा.
  • जहां तक बन पड़े दृश्यावलियों में जीवंतता-जीवन का चिह्न अवश्य डालें. उदाहरण के लिए, खूबसूरत बादलों की छटा व बढ़िया हरियाली युक्त पहाड़ों की शृंखला में यदि कोई उड़ता पक्षी, दौड़ता जानवर या दूर से आती जाती हुई गाड़ियाँ फ्रेम के किसी हिस्से में आ जाएँ तो बात ही क्या. और, ऐसे स्थानों पर जीवन के ऐसे चिह्नों के प्रकट होने का इंतजार लंबे समय के लिए भी किया जा सकता है.
  • अगर दृश्यावलि के किसी हिस्से में सड़क दिख रही है, तो इंतजार करें कि उस सड़क से कोई वाहन, कोई यात्री गुजरे. तब फिर क्लिक करें. यह भी ध्यान रखें कि यात्री या वाहन के गंतव्य की दिशा में - आगे की ओर सड़क का अधिकांश हिस्सा हो.
  • व्यक्ति चित्रण में रंगों के जमावट का ध्यान रखें. विपरीत व कंट्रास्ट रंगों का प्रयोग व्यक्ति चित्रण में भ्रम पैदा करता है. कलर हॉर्मनी से चित्र सुंदर व प्यारा लगता है. व्यक्ति के पोशाक के रंग से मिलता व मैत्री करता रंग पृष्ठ भूमि में रखें.

ये तो थीं व्यवहारिक, कलात्मक बातें. ये हैं कुछ तकनीकी बातें जो आपके फ़ोटोग्राफ को सर्वोत्तम बनाने में मददगार हो सकेंगी-

  • जहाँ तक संभव हो, उस समय पर उपलब्ध अच्छे, डिजिटल एसएलआर कैमरों का प्रयोग करें. नवीनतम तकनॉलाजी युक्त कैमरे का इस्तेमाल करें. कैमरा जितना ज्यादा अच्छा और प्रोफ़ेशनल क्वालिटी का होगा, वह उतना ही बढ़िया परिणाम देगा. अगर गौतम राजाध्यक्ष भी पाइंट एंड शूट कैमरे से फोटो खींचेंगे तो परिणाम वही होगा जो उस कैमरे से आपके द्वारा खींचे गए फोटो में होता है. अतुल कस्बेकर यदि आपके मोबाइल कैमरे से किसी बिकिनी पहनी मॉडल का फोटो खींचेंगे तो आपके द्वारा खींचे गए फोटो में कोई खास अंतर नहीं होगा.
  • क्लिक करते समय कैमरे को स्थिर रखें. जहाँ तक बन पड़े ट्रिपॉड का इस्तेमाल करें और यदि संभव न हो तो आसपास की किसी भी स्थिर वस्तु पर कैमरा टिका लें.
  • कैमरे के लिए बैग उच्च क्वालिटी का खरीदें जो पूरी तरह से वातावरण से सील हो जाता हो तथा उसमें सिलिकाजेल का थैला भी रखें ताकि आर्द्रता की वजह से उसके लैंस में फंगस न लगे.
.


.

अंत में, प्रोफ़ेशनल फ़ोटोग्राफी की इस कार्य शाला में जो सार तत्व मैंने सीखा वह ये हैं-

  • प्रोफ़ेशनल फ़ोटोग्राफी के लिए आपका कैमरा, आपके उपकरण, प्रोफ़ेशनल गुणवत्ता के होने चाहिएँ. यानी आपके पास डिजिटल एसएलआर (उदाहरण के लिए, न्यूनतम रेंज निकॉन डी-70) युक्त कैमरा होना चाहिए, एक्सपोजर मीटर होना चाहिए, फ़्लैश व डिफ़्यूज्ड प्रकाश, तथा प्रकाश फ़िल्टर इत्यादि उपकरण होने चाहिएँ. यानी कुल मिलाकर न्यूनतम खर्च - 60 हजार से 1 लाख रुपए तक का कैमरा पर, तथा 4-5 लाख विभिन्न उपकरणों पर. तभी आप उम्मीद करें कि आपके चित्र व्यवसायिक गुणवत्ता युक्त हो सकेंगे. वैसे, शौकिया फ़ोटोग्राफ़ी के लिए तो आपके मोबाइल का अंतर्निर्मित कैमरा भी काफ़ी है.
  • पुरस्कार योग्य फ़ोटोग्राफी के लिए फ़ोटोग्राफ में अतिरिक्त प्रभाव पैदा करने के लिए फ़ोटोशॉप सीएस2 का इस्तेमाल अब जायज है. उदाहरण के लिए, गुरदास दुआ के एक पुरस्कृत फ़ोटोग्राफ में उन्होंने फ़ोटोशॉप के जरिए प्रकाशित झील में चाँद व नाव के चित्र अतिरिक्त रूप से डाले, तथा रंगों का संतुलन (कलर बैलेंसिंग) भी उन्होंने सॉफ़्टवेयर के जरिए किया - इस तरह से, डिजिटल फ़ोटोग्राफी में नई कलात्मकता घुस आई है.

मेरे पास कोई एसएलआर कैमरा नहीं है, न भविष्य में कभी खरीदने की कोई योजना है. मेरे पास कोडक का पाइंट एंड शूट किस्म का डिजिटल कैमरा, cx7220 है जिसका अधिकतम रीजॉल्यूशन 2 मेगापिक्सल का है. ऊपर का चित्र तथा नीचे दिया गया चित्र इसी कैमरे से खींचा गया है. किसी सॉफ़्टवेयर से इसे ठीक नहीं किया गया है. हाँ, ऊपर बताए कुछ कलात्मक बातों का ध्यान रखने की कोशिश मैंने की है.

आपके विचार में चित्रों में प्रोफ़ेशनल क्वालिटी आई है या नहीं? या मेरे द्वारा कार्यशाला के लिए खर्च किए गए फ़ीस के रुपए 500/- बेकार ही चले गए?

.

लो, मैं तो कुछ और ही कारण सोच रहा था...





अगर आपको भूलने की समस्या है - अपने प्रिय के जन्मदिन और अपनी शादी की सालगिरह जैसी महत्वपूर्ण बातें भी आप भूल जाते हैं, तो अब अपने खानदानी जेनेटिकल गुणदोषों को दोष मत दीजिए. नई खोजों के मुताबिक, हो सकता है कि आपकी सफाई पसंद की आदत इसके लिए जिम्मेदार हो....

जी हाँ, अगर आप हर रोज अपने बालों को शैम्पू करते हैं तो भले ही यह बात आपके डैण्ड्रफ युक्त बालों के लिए ठीक हो, यह कार्य आपकी याददाश्त के लिए कतई ठीक नहीं है. शैम्पू में मिले हुए रसायन डैण्ड्रफ के साथ आपके दिमाग की याददाश्त को भी धो डालने की क्षमता रखते हैं!

**-**

.


.

व्यंज़ल

भूल गया

क्या बताऊँ कि कैसे भूल गया

मैं तो जानबूझ कर भूल गया

जिंदगी के मसले उलझे बहुत

कुछ याद रहा कुछ भूल गया

प्यार की बातें हमने भी कीं

भूख से जल्दी ही भूल गया

वो कानून संसद को किसलिए

कल याद था आज भूल गया

बन गया रवि भी राजनीतिज्ञ

तभी वह खुद को भूल गया

**-**

(अमरीका और भारत के बीच सभ्यता की तुलना हिन्दी चिट्ठा जगत् में आगे बढ़ चुकी है. छींटे और बौछारें में अकसर भारतीय व्यवस्था पर छींटे उड़ते ही रहते हैं. दैनिक भास्कर के संपादकीय पृष्ठों पर आज प्रकाशित स्तंभकार गुरचरण दास का आलेख समीचीन है. आलेख दैनिक भास्कर को साभार सहित, यहाँ पुनः प्रकाशित किया जा रहा है.) महान राष्ट्र प्रतिभा और समानता के दावों में सही संतुलन बनाने का प्रबंधन करते हैं। वहां प्रतिभा के आड़े वरिष्ठता नहीं आती। लेखक : - गुरचरनदास मुझे दो सप्ताह पूर्व न्यूयार्क में ‘राइज ऑफ इंडिया’ शीर्षक से प्रकाशित विदेशी मामलों की प्रतिष्ठित पत्रिका के विशेषांक के लोकार्पण के लिए आमंत्रित किया गया। समारोह के संचालक ने जिम रोजर्स की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए शुरुआत की कि ‘हम भारत में पूंजी नहीं लगा सकते, क्योंकि वहां की नौकरशाही दुनियाभर में सबसे बदतर है।’ जिम रोजर्स उपभोक्ता वस्तुओं के विशेषज्ञ हैं। एक ऐसे समारोह में जहां भारत उदय का जश्न मनाया जा रहा था वहां यह खटकने वाली बात थी, लेकिन बाद में स्पष्ट हो गया कि हम ‘पब्लिक इंडिया’ नहीं अपितु ‘प्राइवेट इंडिया’ के उदय का समारोह मना रहे थे। समाजवादी व्यवस्था के दौर में हम अपने आर्थिक विकास को लेकर चिंतित रहते थे, पर विश्वस्तर की न्यायिक व्यवस्था, प्रशासन व पुलिस पर गर्व करते थे। अब जबकि हमने अच्छी आर्थिक प्रगति की है तब इन संस्थाओं को लेकर शर्मसार हैं। दुनिया के शायद सबसे बेहतरीन लोग भारतीय लोकसेवा में हैं, लेकिन व्यवस्था के निकम्मेपन ने उनसे यह माद्दा छीन लिया है कि अच्छाई को प्रोत्साहित करें व बुराई को दंडित। जब कोई व्यक्ति बिना किसी दक्षता के पदोन्नति पाता है तो वह आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति खो देता है। 1938 में 81 प्रशासनिक अधिकारी केंद्र सरकार की व एक हजार से भी कम आईसीएस 30 करोड़ की आबादी वाले देश की व्यवस्था कुशलतापूर्वक इसलिए संचालित करते थे, क्योंकि उस जमाने की व्यवस्था प्रतिभा को प्रोत्साहित करती थी। वह वरिष्ठता की बीमारी से दूर थी। कुछ हद तक यह लोकतंत्र का दोष है। लोकतंत्र यह भ्रम पैदा करता है कि यदि हम एक मामले में बराबर हैं तो सभी मामलों में बराबर होना चाहिए। इसलिए हम प्रतिभाशाली को प्रोत्साहित करने व निकम्मों को दंडित करने में संकोच करते हैं। जब संस्थाएं प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देना बंद कर देंगी, तब आप रिश्वत और सिफारिश की बीमार दुनिया में धंस जाएंगे। उस दुनिया में जहां अदालतों में वर्र्षों से लाखों मामले लंबित हैं, जहां सरकारी डाक्टर और अध्यापक अपने काम से जी चुराते हैं। जहां गरीबों तक पीने का साफ पानी नहीं पहुंचता। जहां बिजली बोर्ड के इंजीनियर खुद बिजली चोरी की जुगत सुझाते हैं और विश्वविद्यालय अयोग्य प्राध्यापकों को तरक्की देता है। महान राष्ट्रों का निर्माण प्रतिभाशाली लोगों द्वारा होता है। काेई भी जो संस्थान या व्यवसाय चलाता है वह 80 : 20 के नियम को जानता है, जहां 20 प्रतिशत लोग 80 प्रतिशत परिणाम देते हैं। कुशल प्रबंधक 20 प्रतिशत प्रतिभाशाली लोगों को प्रोत्साहित करता है, शेष 80 प्रतिशत को हतोत्साहित किए बिना। प्रतिभाएं हर कहीं होती हैं, दलितों में, ब्राह्माणों में और पिछड़े लोगों में भी। महान देश ऐसी संस्थाएं बनाता है जो इन्हें चिन्हित और प्रोत्साहित कर सकती हैं। पिछले तीन हफ्तों से हर रात हमने टीवी पर फुटबॉल का विश्वकप देखा है। गोरे, काले, भूरे व पीले खिलाड़ियों के बीच प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को। भारत के पास भी विश्वकप में खेलने लायक प्रतिभाएं हैं। लेकिन हमारी खेल संस्थाएं ऐसे लोगों द्वारा संचालित हैं जो रिश्वत और सिफारिश की बीमार दुनिया से ताल्लुक रखते हैं। जैसे कोई भी आरक्षण के आधार पर फुटबॉल टीम का चयन नहीं करता, उसी तरह किसी संस्थान के प्रवेश के नियम नहीं तोड़ने-मरोड़ने चाहिए। जब आप ऐसा करेंगे तो युवाओं को गलत संकेत देंगे। भारतीय कंपनियां विश्वस्तर पर आगे आ रही हैं, क्योंकि वे प्रतिभा को मौका देने के सिद्धांत का सम्मान करती हैं। और यदि मनमोहन सिंह वाकई शासन के प्रति गंभीर हैं, तो देश की नौकरशाही में अभिशप्त वरिष्ठता के सिद्धांत को खत्म करें। महान राष्ट्र प्रतिभा और समानता के दावों में सही संतुलन बनाने का प्रबंधन करते हैं। (लेखक प्राक्टर एंड गैंबल के पूर्व सीईओ हैं।)
888888888
क्या ये पोप और बुश की तालिबानी सोच नहीं है? Re-exposure of   sexual-preferences 002 **-** जैसा कि कई मर्तबा सुनील और क्षितिज ने लिखा है, आमतौर पर सेक्सुअल प्रेफ़रेंसेज़ में किसी भी तरह के डेविएशन्स को समाज स्वीकार नहीं करता है – जिसमें पोप और बुश भी शामिल हैं. तकलीफ तब ज्यादा होती है, जब असामान्य सेक्सुअल प्रेफ़रेंस के व्यक्तियों को उनके घर परिवार वाले, मां-बाप ही अस्वीकार कर देते हैं. यह निश्चित ही उन व्यक्तियों के लिए अत्यंत दुखदायी होता है. कोई भी व्यक्ति अपने सेक्सुअल प्रेफ़रेंस में डेविएशन्स के लिए स्वयं उत्तरदायी नहीं होता है – बल्कि उसके मन में डेविएशन्स के बीज तो गर्भ में ही पड़ चुका होता है. और, माह जून 2006 के गॉयनकोलॉजी जर्नल के अनुसार, बच्चे के हर 2000 जन्म में से 1 जन्म में (बाह्य शारीरिक चिह्नों की मौजूदगी समेत) ऐसा होता है. तो बहुत से मामले तो सामाजिकता के नाते दबे-ढंके-छुपे ही रहते हैं और लोग शर्म के मारे भयंकर कष्टप्रद, अनर्थक जिंदगी जीते हैं. जब समलैंगिक, द्विलैंगिक और अंतर्लैंगिक व्यक्तियों के ‘पैदा होने’ के असली कारण उनके मां-बाप होते हैं तो सही मायनों में बहिष्कार के काबिल तो ये पालक ही हैं – जो घोर अज्ञानता में स्वयं अपने बच्चों का बहिष्कार करते हैं. पोप और बुश की सोच भी ऐसी ही है. उनकी यह सोच किसी भी तालिबानी सोच से कम नहीं है. समाज का एक औसत परिवार तो माफ़ी के काबिल है क्योंकि वह बहुत से मामलों में अज्ञानी हो सकता है. परंतु विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली राष्ट्र प्रमुख और विश्व के सबसे बड़े धर्म के प्रमुख ऐसी बात कहते हैं तो उनकी बातों में अज्ञानता कम, तालिबानियत ज्यादा झलकती है. ईश्वर इन्हें माफ़ करें, ये नहीं जानते – ये ‘सचमुच’ नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं.
88888888
हिन्दी यूनिकोड के इंटरनेट पर उपयोगिता सिद्ध हो जाने के बाद आमतौर पर यह सर्वमान्य तो हो गया है, परंतु पुरानी तकनॉज़ी से लोग अभी भी जुड़े हुए हैं. इसके पीछे यूनिकोड पर शिफ़्ट होने में उनकी तकनीकी दिक्कतें ही ज्यादा दिखाई देती हैं, बनिस्वत पुराने फ़ॉन्ट पर निर्भर उनके वर्तमान पाठक संख्याओं के. यह तो तय है कि अंततः हिन्दी के प्रत्येक कॉन्टेंट प्रोवाइडर, प्रत्येक सामग्री प्रदाता को इंटरनेट पर यूनिकोड में अंततोगत्वा आना ही होगा. वैसे, धीरे से ही सही रुपांतरण की प्रक्रिया कहीं कहीं जारी भी है. जहाँ अभिव्यक्ति का यूनिकोड पर आने का उसका अंडरग्राउंड कार्य जारी है, हिन्दीनेस्ट पुराने फ़ॉन्ट के साथ साथ ही यूनिकोड में भी आ चुका है. एक बड़ी समस्या पुरानी सामग्री को यूनिकोड में रूपांतरित करने की है. जो उपकरण और औजार पुराने हिन्दी फ़ॉन्ट की सामग्रियों को यूनिकोड में परिवर्तित करने के लिए लिखे गए हैं, वे प्रायः कामचलाऊ जैसे ही हैं. उनका यूज़र इंटरफ़ेस आज के लिहाज से अत्यंत बेतुके, बचकाने और प्राचीन किस्म के हैं. उनमें प्रोफ़ेशनलिटी नजर नहीं आती तथा रूपांतरण में, एक साधारण लंबाई के दस्तावेज़ में ही वर्तनी की सैकड़ों ग़लतियाँ घुस जाती हैं. ऐसे में सामग्री का उपयोग इंटेंसिव संपादन-सुधार के बगैर संभव नहीं हो पाता. मगर कुछ सहूलियतें तो ख़ैर मिलती ही हैं – और आपको दस्तावेज़ों को निश्चित रूप से, नए सिरे से लिखने से छुटकारा तो मिलता ही है. कई दफ़ा तकनीकी पहलुओं को छोड़ देने पर फ़ॉन्ट रूपांतरण हो ही नहीं पाता, या होता भी है तो गलत. पुराने हिन्दी फ़ॉन्ट युक्त सामग्रियों के यूनिकोड में रूपांतरण के लिए यूँ तो कई औजार हैं, मगर दो औजार विशेष रूप से आपके काम आ सकते हैं. एक है परिवर्तन नाम का औजार तथा दूसरा फ़ॉयरफ़ॉक्स का पद्मा प्लगइन.
फ़ॉयरफ़ॉक्स का पद्मा प्लगइन
फ़ॉयरफ़ॉक्स का पद्मा एक्सटेंशन संस्थापना में आसान है, और उपयोग में भी अत्यंत आसान है. परंतु इसमें विशाल आकार की फ़ाइलों को रूपांतरित करने में समस्या आ सकती है. अतः फ़ाइलों को छोटे आकार में खण्डों में सहेज कर कार्य किया जाना चाहिए. इस औजार में इंटरनेट के प्रचलित साइटों के पुराने फ़ॉन्टों का ही यूनिकोड में परिवर्तन संभव है, अतः आसान होते हुए भी इसकी उपयोगिता कम ही है. दैनिक भास्कर, अभिव्यक्ति, नवभारत, दैनिक जागरण इत्यादि के फ़ॉन्ट युक्त सामग्रियों को आप ब्राउज़र के भीतर ही, स्वचालित रूप से यूनिकोड में बदल सकते हैं व कॉपी-पेस्ट के जरिए इस्तेमाल में ले सकते हैं. बाहरी सामग्री को आप सादा एचटीएमएल फ़ाइल के रूप में सहेज कर फ़ॉयरफ़ॉक्स ब्राउज़र के जरिए खोल कर, परिवर्तन की जाने वाली सामग्री को चुन कर दायाँ क्लिक कर यूनिकोड में परिवर्तन का चुनाव कर यूनिकोड में बदल सकते हैं. इसमें हिन्दी के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं – तेलुगू तमिल इत्यादि के लिए भी फ़ॉन्ट परिवर्तन की सुविधाएँ हैं.
परिवर्तन
प्रिया इनफ़ॉर्मेटिक्स द्वारा जारी परिवर्तन नाम का सॉफ़्टवेयर पुराने हिन्दी फ़ॉन्टों की वेब सामग्री तथा ऑफ़िस दस्तावेज़ों वाली सामग्री (डाटाबेस तथा एक्सेल सामग्री सहित) को कुशलता से यूनिकोड में (या आपस के फ़ॉन्ट कोड में) परिवर्तित करने में सक्षम है. इसका यूज़र इंटरफ़ेस बेकार किस्म का, तथा उपयोग में थोड़ा सा बगी होने के बावजूद भी यह उपयोगी तो है. अगर इसके इस्तेमाल में थोड़ा सा ध्यान दिया जाए तो सटीक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं. परिवर्तन का सही इस्तेमाल करने के लिए प्रोग्राम के साथ विस्तृत मदद फ़ाइल में चित्रमय, चरण दर चरण विवरण दिया गया है, उसे ध्यानपूर्वक पढ़ लेना चाहिए. परिणाम सही प्राप्त करने के लिए निम्न बातों का खयाल अवश्य रखा जाना चाहिए- 1. परिवर्तन में रूपांतरण के लिए एमएस वर्ड में तैयार किए गए दस्तावेज़ ज्यादा सही परिणाम देते हैं. अन्य फ़ाइल फ़ॉर्मेट या पाठ फ़ॉर्मेट के दस्तावेज़ों में फ़ॉन्ट रूपांतरण में समस्याएँ आती हैं. अतः किसी अन्य प्रोग्राम – जैसे पेजमेकर में तैयार किए दस्तावेज़ों को पहले कॉपी पेस्ट कर एमएस वर्ड में सहेज लें फिर परिवर्तन के जरिए उस एमएस वर्ड फ़ाइल को यूनिकोड में बदलें. आमतौर पर उपयोक्ताओं से गलतियाँ यहीं होती हैं. 2. परिवर्तन की जा रही फ़ाइल के सही फ़ॉन्ट का विवरण इनपुट परिवर्तन फ़ाइल के लिए दें. फ़ॉन्ट में परिवर्तन आपके द्वारा दिए गए इनपुट विवरण पर ही निर्भर होता है, अतः यह विवरण यदि गलत हुआ तो परिवर्तित फ़ाइल काम की नहीं होगी. parivartan 3. परिवर्तन के दौरान यदि इस प्रोग्राम के आंतरिक डाटाबेस में किसी भी फ़ॉन्ट का विवरण दर्ज नहीं होता है तो यह आपसे उस फ़ॉन्ट का विवरण पूछता है कि यह अंग्रेजी का है या हिन्दी का. और यदि हिन्दी का है तो किस प्रदाता का है. इसे भी ध्यान से और उचित प्रकार से भरना चाहिए, क्योंकि बाद के सभी परिवर्तन उसी आधार पर होंगे. प्रोग्राम में इस सेटिंग को बाद में ठीक करने के उपाय भी नहीं है. (उम्मीद है इस लेख से मित्रों की फ़ॉन्ट परिवर्तन संबंधी समस्याओं का समाधान हो सकेगा. यदि फिर भी उन्हें कोई समस्या आती है तो लेखक को ईमेल भेजें या चिट्ठाकार पर या परिचर्चा फोरम में अपनी समस्या लिखें)
888888888
दीवारों पर लिखी इबारतें-
** “ख़तरों से नहीं डरें. अपनी जवाबदेही स्वीकारें. एंटीवायरसों को बिजनेस से बाहर का रास्ता दिखाएँ.” ** “आईटी गुरुओं को राजनीति में कोई रुचि नहीं होती चूंकि सरकार अपनी क्षमता, कुशलता और गति प्रत्येक 18 महीनों में दोगुना नहीं करती. " ** “सूचना क्रांति की लड़ाइयाँ कमांड लाइन पर लड़ी जाएंगी.” ** “जीयूआई (ग्राफ़िकल यूज़र इंटरफ़ेस) ने कम्प्यूटर साक्षरता को कतई नहीं बढ़ाया है. इसने तो बस स्तर गिराया है.” ** “अन्दाज़ा लगाएँ कि यह किसका नियम है?: प्रत्येक 18 महीनों में सॉफ़्टवेयर की गति आधी हो जाती है.”
कुछ विज्ञापनी नमूने:
** रिपेयरिंग शॉप पर : "हम उन सभी चीजों को रिपेयर करते हैं जिन्हें आपके पति रिपेयर कर चुके होते हैं." ** एक अन्य रिपेयरिंग शॉप पर: "टपकते पानी के बीच मत सोइए. हमें बुलाइए." ** बिजली के उपकरणों के रिपेयरिंग शॉप पर: "हमारे यहाँ आपके शॉर्ट सर्किट को ठीक करने की पूरी व्यवस्था है." ** जच्चा बच्चा वार्ड के दरवाजे पर: "पुश. पुश. पुश." ** नेत्र चिकित्सालय पर: "यदि आपको वह चीज दिखाई नहीं देती है जिसे आप देखना चाहते हैं तो फिर आप एकदम सही जगह पर आए हैं." ** एक विशाल कोठी के विशाल दरवाजे पर: "सेल्समेनों का स्वागत है. कुत्तों के भोजन मंहगे हो चले हैं." ** एक रेस्त्रां की खिड़की पर: "वहाँ भूखे खड़े मत रहिए. भीतर आकर पेट पूजा करें" ** एक कब्रिस्तान की दीवार पर: "सावधानी से गाड़ी चलाएँ. हम इंतजार कर लेंगे” **21 वीं सदी में मनुष्य को ईश्वर का भय नहीं होता. अब उसे अपने सिस्टम के क्रैश हो जाने या सिस्टम के वायरस से संक्रमित हो जाने का भय सताता है. **ए लिटिल रैम इज़ डैंजरस थिंग. **पर्याप्त प्रोसेसिंग पॉवर युक्त पीसी तो शायद कभी आएगा ही नहीं. **क्रैश हो चुके तंत्र कोई कहानी नहीं कहते. **मैं अपने पीसी को देखता हूँ और पीसी मुझे देखता है. ईश्वर हम दोनों को शांति प्रदान करें. **प्रोग्रामों के नए-नए संस्करण निकाल निकाल कर बेचना भी एक कला है. **जीवन के बेहतरीन लम्हे कम्प्यूटर पर मिलते हैं. **बीवी के बगैर कुछ समय रह लेना अच्छा है बजाए कम्प्यूटर के बगैर एक क्षण के.
आपका पीसी बेहतर है आपके बॉय फ्रेंड से ...
• मौसम का मिजाज और आपका मूड कैसा भी हो आप इससे चिपके रहना पसंद करती हैं। • आपकी माँ आपको इसके साथ देखकर अपनी भवें टेढ़ी नहीं करती। • यह अंतर्निर्मित हेल्प फंक्शन के साथ आता है। • यह आपके पुराने पीसी से जलन नहीं रखता बल्कि इसका नया संस्करण और नया प्रतिरूप ज्यादा आकर्षक और ज्यादा उपयोगी होता है। • आपकी सहेलियां इसके साथ अपना समय गुजार सकती हैं, परन्तु फिर भी सिस्टम कंट्रोल का रूट पासवर्ड आपके पास होता है। • आपके हर अच्छे बुरे और कठिन, कुसमय में यह आपका साथ देता है। • आपकी हर समस्या और प्रश्न का उत्तर बिना किसी चिड़चिड़ाहट और गुर्राहट के देता है। • आप अपने जेहन की गोपनीय बातें इसके साथ बिना किसी भय के शेयर कर सकती हैं। • जैसा, जिस हिसाब से आप चाहती हैं, उस हिसाब से इसे कार्य करने हेतु सेट कर सकती हैं। • सेक्सी आई-मेक से लेकर छोटे सुंदर पाम पायलट तक में से अपनी पसंद का माडल आप चुन सकती हैं और यदि इनमें से भी आपको कोई न जंचे तो आप अपना स्वप्निल, खूबसूरत डिजाइनर मशीन स्वयं असेंबल कर सकती हैं।
आपका पीसी बेहतर है आपके गर्लफ्रेंड से ...
• मनोरंजन हेतु इसे किसी कैफे या सिनेमा के कोने की सीट पर नहीं ले जाना होता है। • यह तैयार होने के लिए मेकअप टाइम नहीं लेता। • कारण अकारण यह न तो हंसते खिलखिलाते रहता है न आंसू बहाता है। • यह बातें नहीं करता मगर फिर भी आप इससे सारे ब्रम्हांड की विश्वसनीय जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। • आप इस बात पर गर्व अनुभव करते हैं कि दूसरे इसे देखें और इस पर एक हाथ आजमा कर इसके खासियतों- मसलन सिस्टम स्पीड और मल्टीमीडिया कैपेबिलिटी इत्यादि के गुण गाएं। • इसे आसानी से प्रोग्राम किया जा सकता है ताकि यह आपकी मर्जी के मुताबिक प्रोग्रामों को डिलीवर कर सके। • आप इसके साथ हर तरह के खेल किसी भी पोजीशन में खेल सकते हैं। • जी हां, आप अपने आपको इसके द्वारा शिक्षित कर सकते हैं तथा पैसे भी कमा सकते हैं। • इसे आपकी सहायता की जरूरत नहीं होती, उल्टे यह तो हर विषय में आपकी सहायता कर सकता है। • यह आपके हर आदेशों का पालन बिना किसी बहस के मानता है- हर बार।
एक नर्ड (कंप्यूटर गुरू) से लिए गए साक्षात्कार से कुछ उद्धरण:
प्र.: वास्तविक आनंद क्या है? उ.: डिबगिंग. प्र.: आपके स्वप्न क्या हैं? उ.: एक खूबसूरत दिन जब आपकी अपनी शारीरिक आवश्यकताएँ भी बेमानी हो जाएँ और आप प्रोग्रामिंग के अलावा कुछ नहीं करें. प्र.: जब आप प्रोग्रामिंग नहीं करते हैं तो क्या करते हैं? उ.: उन चीज़ों को करता हूं जो मुझे यथासंभव प्रोग्रामिंग में वापस ले जाते हैं. प्र.: यदि दुनिया में कम्प्यूटर नहीं होते? उ.: काल्पनिक प्रश्नों के उत्तर नहीं होते – काल्पनिक उत्तर भी नहीं. प्र.: आपने किस उम्र में प्रोग्रामिंग प्रारंभ किया? उ.: काश मैं और पहले प्रोग्रामिंग प्रारंभ कर सकता. प्र.: अपने एक सम्पूर्ण दिन की व्याख्या करेंगे? उ.: प्रोग्रामिंग खाना, प्रोग्रामिंग पीना और हां, प्रोग्रामिंग सोना!. प्र.: एक अच्छे प्रोग्रामर के क्या सीक्रेट हैं? उ.: हमेशा दिल लगाकर प्रोग्राम करो! प्र.: क्या आपको किसी से प्यार हुआ है? उ.: हाँ, और मैं भी अपने कम्प्यूटर से बेहद प्यार करता हूँ. प्र.: यदि आप कम्प्यूटरों की दुनिया में नहीं होते तो किस क्षेत्र में होते? उ.: ओह! यह प्रश्न हमेशा से मुझे सताता रहा है. मैं इसका उत्तर नहीं दे सकूंगा. (आंखें डबडबा जाती हैं) प्र.: आपके जीवन का दर्शन क्या है? उ.: मैं प्रोग्रामिंग में यकीन करता हूं… हमेशा. प्र.: अपने खाली समय में आप क्या करते हैं ? उ.: प्रोग्राम लिखता हूँ. दूसरों के प्रोग्राम पढ़ता हूं. प्र.: आपकी प्रेरणा कौन है? उ.: बग्स. और वे हमेशा मुझे और ज्यादा संजीदगी से प्रोग्राम लिखने को प्रेरित करते हैं. प्र.: प्रोग्रामिंग की परिभाषा देंगे? उ.: प्रोग्रामिंग तो आपके दिल की आंतरिक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है जिसे आप सिंटेक्स, बूलिए, लूप, पाइंटर और ऐसे ही अन्यों के द्वारा समस्त विश्व को प्रस्तुत करते हैं. प्र.: आपके कार्य की विशेषताएँ क्या हैं? उ.: मैं बग मुक्त प्रोग्राम लिखना चाहता हूं. वास्तविक मनुष्यों के लिए वास्तविक प्रोग्राम. प्र.: आप किसे पसंद करेंगे – बुद्धि या धन? उ.: किसी को भी नहीं. मैं कम्प्यूटरों को पसंद करता हूँ. यदि फिर भी आप जोर देंगे तो मैं धनी होना पसंद करूंगा चूंकि फिर मैं बड़े पॉवरफुल और ताजातरीन कम्प्यूटर खरीद सकूंगा. और प्रोग्रामरों को हायर कर सकूंगा. प्र.: आपके विचार में प्यार का बोध क्या हो सकता है? उ.: प्यार तो मन की एक अवस्था है जिसमें हर वस्तु – अच्छी हो या बुरी अत्यंत प्रिय लगती है. उदाहरण के लिए, जब आप प्रोग्राम लिखते हैं तो प्रोग्राम के प्रथम कुछ पंक्तियों में ही जो बग निकल आता है – आपको वह अच्छा लगता है. मुझे तो लगता है कि हर किसी को अपने कम्प्यूटर से प्यार करना चाहिए. प्र.: छींटे और बौछारें के बारे में आपके विचार? उ.: शानदार. जब प्रोग्रामिंग के बीच कभी कोई ब्रेक मैं ले लेता हूँ तो यहाँ चुटकुले पढ़ता हूँ. 88888888 प्रसिद्धि के पाँच पल... दैनिक भास्कर इंदौर तथा भोपाल के संस्करणों में मध्यप्रदेश के दो साहित्यकारों को माइक्रोसॉफ़्ट द्वारा पुरस्कृत करने की खबर अख़बार के पहले पन्ने पर छपी तो सहारा समय मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ के न्यूज एडीटर्स को भी इसमें समाचार मूल्य दिखाई दिया. लिहाजा सहारा समय मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ चैनल में रविवार दिनांक 9 जुलाई को एक विशेष प्रोग्राम के तहत मेरा तथा डॉ. जगदीश व्योम जी का जीवंत साक्षात्कार दोपहर साढ़े बारह बजे प्रसारित किया गया, जिसकी क्लिपिंग बाद में देर रात तक दिखाई जाती रही. जीवंत प्रसारण का यह मेरा पहला अनुभव था और वाइस ओवर तंत्र में अपनी स्वयं की गूंजती हुई आवाज सुनाई देते रहने से दिमाग पूरे समय कन्फ्यूजन में रहा और मैं ज्यादा कुछ बोल नहीं पाया. कम से कम जो सोचा था वह बोल नहीं पाया. मैं उस वक्त क्या बोला क्या नहीं यह भी याद नहीं रहा. बाद में लोगों ने बताया कि साक्षात्कार अच्छा रहा – परंतु मुझे पता था कि मैं खरा नहीं उतरा था. व्योम जी ने काफी संतुलित तरीके से अपने कार्यों, प्रेरणाओं तथा इंटरनेट पर हिन्दी साहित्य की स्थिति के बारे में देर तक बहुत सी बातें कहीं. उन्होंने बताया कि इंटरनेट पर उन्होंने हिन्दी के कोई तीस ब्लॉग अकेले के प्रयासों से बनवाए हैं तथा इनमें बच्चों की कहानियों से लेकर कई खण्डकाव्य तक भी प्रकाशित किए हैं. उन्होंने अपनी स्वयं की रचनाओं से लेकर साथी साहित्यकारों तथा अन्य प्रसिद्ध कृतियों को भी इंटरनेट पर ब्लॉगों के जरिए उतारा है. यह मेरे लिए खबर थी (संभवतः हिन्दी चिट्ठा जगत् को भी भान नहीं है) और मैंने उन्हें अनुरोध किया कि उन सभी ब्लॉग की कड़ियों को उपलब्ध करवाएं ताकि उन्हें हिन्दी प्रयोक्ताओं के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके. व्योम जी के ब्लॉगों की सूची नीचे दी गई है. मुझे लगता था कि लोग स्टार के सास-बहू, सोनी के इंडियन आइडल और जी टीवी के सारेगामा से आगे कुछ नहीं देखते होंगे. कभी समाचार देखने का मूड होता भी होगा तो आजतक , इंडियाटीवी या सीएनबीसी देखते होंगे. और, इसीलिए इस प्रसारण के बारे में लोगों को मैंने पहले से किसी को भी नहीं बताया. परंतु मैं गलत था.
  • मानोशी ने कनाडा से सुखद सूचना दी. घर पर भी स्थानीय रतलाम निवासियों ने बधाइयाँ दीं. परिचितों - रिश्तेदारों ने जैसा कि अमरीकी ट्विन टॉवर पर हमले के समय लाइव शो देखने के लिए एक दूसरे को फोन किए थे, वैसे ही मेरे प्रसारण को देखने-दिखाने के लिए फोन करने लगे.

  • घर पर फोन लगातार बजता रहा और लोगों का बधाई देने का सिलसिला चलता रहा. मुहल्ले के कुछ लोग स्वतःस्फूर्त होकर आए, गले लगे और कहा कि वे ऐसा व्यक्ति अपने मोहल्ले में पाकर अपने आपको गौरवान्वित महसूस करते हैं. गर्व करने वालों में मेरा वो पड़ोसी भी शामिल हो गया है जो पहले मेरे जैसा असभ्य पड़ोसी पा कर बड़ा दुःखी रहता था – ऐसा असभ्य पड़ोसी जो अपने गमले और क्यारियों में पानी देते समय थोड़ा बहुत पानी उसके दरवाजे पर भी बहा देता है. शायद अब मेरी क्यारियों के बहते पानी से उसे तकलीफ नहीं होगी और शायद वह इस बात पर भी गर्व करेगा – अरे भाई, इसे माइक्रोसॉफ़्ट पुरस्कार मिला है, मेरा पड़ोसी है. इसके तो गमले का पानी मेरे दरवाजे पर आता है.

  • प्रसिद्धि के इन पाँच पलों का आनंद मैं ले रहा हूं.

  • मुझे उम्मीद है कि आप भी मुझे मेरे आनंद के इन पलों को बढ़ाने में बधाइयों के नए सिलसिले बनाकर सहयोग देंगे.

  • *****-*****
  • व्योम जी द्वारा बनाए गए हिन्दी ब्लॉगों की सूची –

  • हिन्दी गगन

  • हिन्दीपत्रिकाएँ

  • हाइकुदर्पण

  • हिन्दीसाहित्य


  • साहित्य अकादमी

  • भ वानी प्रसाद मिश्र

  • कवि सरल

  • राजभा षासंवाद

  • संस्कृत भाषा

  • हिन्दी कोंपल

  • कुत्ते की पूँछ

  • गजल कमल

  • राजभाषा संवाद

  • सरल चेतना

  • काव्य कुंज

  • हाइकु कानन

  • नर्मदातीरे

  • डॉ॰ कृष्णगोपाल मिश्र

  • डॉ॰ जगदीश व्योम

  • शब्द प्राणायाम

  • प्रमो द ग्रोवर स्मृतिमंच

  • बाल फुलवारी

  • महाप्राण निराला

  • केन्द्रीय विद्यालय होशंगाबाद

  • शुभम आर्ट

  • गाइडिंग एवं काउंसलिंग

  • डॉ॰ दिनेश पाठक शशि

  • सितम की उम्र छोटी है

  • हिन्दी की १०० सर्वश्रेष्ठ प्रेम कविताएँ

  • मित्रों, यह कड़ी है सहारा समय द्वारा प्रसारित किए गए लाइव प्रोग्राम की रेकॉर्ड की हुई डाउनलोड योग्य फ़ाइल का. फ़ाइल विंडोज मीडिया फ़ॉर्मेट में है और लो-क्वालिटी की होने के बावजूद 4.5 मे.बा. आकार की है. विंडोज में आप इसे डाउनलोड कर विंडोज मीडिया प्लेयर, विनएम्प में देख सकते हैं तथा लिनक्स में एमप्लेयर पर. 88888888888

    ये कैसा धर्म स्वातंत्र्य?

    dharma**-** मध्यप्रदेश की हिंदूवादी बीजेपी सरकार एक नया कानून ला रही है. इस कानून का नाम बहुत ही सुंदर है - धर्म स्वातंत्र्य कानून. वैसे तो इसका नाम है धर्म स्वातंत्र्य कानून, परंतु इसका असली काम अब तक आपको प्राप्त आपकी धर्म संबंधी स्वतंत्रता को समाप्त करना है. इस कानून के लागू हो जाने पर अब आप अपना धर्म आसानी से परिवर्तित नहीं कर सकेंगे. अब यदि आपको अपना धर्म परिवर्तित करना होगा तो आपको सरकारी कारिंदों को अपने धर्म के परिवर्तन किए जाने की सूचना महीना भर पहले से देना होगा. अन्यथा आपको अपराधी माना जाएगा और आपको जेल की हवा भी खानी पड़ेगी. अभी तो आपको सरकारी कारिंदों को सूचित भर करना है. हो सकता है कि बाद में इस कानून में उप धाराएँ भी जोड़ दी जाएँ - आप अपना धर्म क्यों और किसलिए बदलना चाहते हैं - कारण भी बताएँ. फिर आप अपने आवेदन में धर्म परिवर्तन ऑफ़ीसर को लिखेंगे - महोदय, मुझे अपना धर्म - जो गलती से किसी धर्म विशेष के परिवार में पैदा होने के कारण मुझे मिल गया था, उसे बदलना चाहता हूँ. अतः मुझे धर्म परिवर्तन करने हेतु आवश्यक अनुमति देने का कष्ट करें. आपके आवेदन पर धर्म परिवर्तन ऑफ़ीसर का कोई अन्य मातहत ऑफ़ीसर तहकीकात करेगा कि आपके आवेदन में कही गई बातें सत्य हैं या असत्य. फिर वह अपनी टीप के साथ अनुशंसा जोड़ेगा और रपट अपने बॉस को प्रस्तुत करेगा. आपके आवेदन पर निर्णय लेने में हो सकता है कि साल दो साल लग जाएँ. यह भी हो सकता है कि उस ऑफ़ीसर की राय धर्म परिवर्तन के आवेदन में आपके द्वारा दी गई दलील से मेल न खाए. ऐसी स्थिति में आपको धर्म परिवर्तन की अनुमति भी नहीं मिल सकेगी. फिर आप कुढ़ते हुए, अपने धर्म को अरबों खरबों गालियाँ देते हुए ताउम्र उसी में बने रहने को लाचार होंगे. सरकार आपको अपना धर्म बदलने की इजाजत अकारण, बेवजह दे नहीं सकती! जैसा कि शबरीमला और तिरुपति के पोंगा पंडितों ने किसी स्त्री के मंदिर गर्भगृह प्रवेश पर हो हल्ला मचाया, कल को यह भी हो सकता है कि सरकार ही हो हल्ला मचाने लगे, कानून बना दे. किसी हिन्दू के ईद मिलन पर या किसी मुसलिम के दीपावली शुभकामनाएँ देने पर रोक लगा दे. लगता है कि विधर्मी व्यक्ति यानी एक धर्म के व्यक्ति का किसी अन्य धर्म के परंपराओं को मानने पर सरकारी रोक लगनी ही चाहिए. कोई मुझे बताए कि इस सरकार का धर्म क्या है और इसने अपना धर्म - कानून-व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी चीजें मुहैया करवाना भूलकर इंसानी धर्मों को नियंत्रित करने में क्यों लग गई है? ----****----

    व्यंज़ल

    --/-- भुलाया सरकार ने अपना धर्म क्यों याद रखें हम अपना धर्म पुरवाई हो प्रपात हो या सरिता संप्रति सबने बदला अपना धर्म सब के सब तो हो गए विधर्मी चलो हम भी बदलें अपना धर्म अग्नि बहुत लगाई है धर्मों ने बनाएँ किंचित नया अपना धर्म अन्यों के अवगुण में उलझ रवि कब का भूल चुका अपना धर्म **-**
    8888888888888

    असफलता छुपाने के लिए दीवार से अपना ही सिर फोड़ना... भारत सरकार मुम्बई धमाकों पर अपनी असफलता का ठीकरा कुछ भारतीय चिट्ठा स्थलों पर सरकारी प्रतिबन्ध लगाकर फोड़ रही है. एक असफल आदमी हमेशा दूसरों को दोष देता है और निराशा में कभी कभी वह दीवार पर सिर टकराकर अपना ही नुकसान करता है. भारत सरकार में बैठे दृष्टिहीन नुमाइंदों का यह कदम अत्यंत बेहूदा, अविवेकपूर्ण और बेवकू फ़ी भरा है. उन्हें क्या नहीं मालूम कि इंटरनेट पर मात्र कुछ स्थलों को प्रतिबंधित करने से कुछ नहीं होगा ? सर्च इंजनों के तमाम आर्काइव, प्रॉक्सी, मिरर साइटों, आरएसएस फ़ीड के जरिए इस प्रतिबंध को पतली गली से हटाया जा सकता है. इस प्रतिबन्ध से समाज के आम जनता का ही नुकसान होगा - तकनीकी रूप से कौशल आतंकवादियों का नहीं. आइए, इस प्रतिबन्ध के विरूद्ध हम भी अपनी आवाज उठाएँ. जय हिन्द, जय भारत. 8888888888888

    मैं और तुम

    mai-aur-tum1
    स्त्री और पुरुष संबंधों की एकमात्र हिन्दी मासिक पत्रिका का प्रकाशन अभी हाल ही में प्रारंभ हुआ है. पत्रिका के जून 2006 अंक के मुख पृष्ठ पर मर्दाना ताक़त की दवा का विज्ञापन ही दर्शाता है कि पत्रिका किस किस्म की होगी.
    वैसे, पत्रिका का यह दावा है कि वह सेक्स शिक्षा जैसे हिन्दी में अब तक के अछूते विषय को जन सामान्य तक पहुँचाएगी. निःसंदेह ऐसे किसी भी प्रयास का तहे दिल से स्वागत किया जाना चाहिए.
    पत्रिका का प्राइवेट लाइफ स्पेशल अंक देखने पर पता चलता है कि इस विषय पर हिन्दी में स्तरीय लेखन और लेखकों का घोर अकाल तो है ही, अंग्रेजी से अनूदित और टीपी गई जो सामग्री परोसी गई है, वह निहायत ही फ़ूहड़, उबाऊ और रिपीटीटिव है.भाषा का स्तर भी निम्न ही है. पत्रिका पत्रिका कम, अख़बार ज्यादा नजर आती है. सेक्स जैसे विषय पर बात करते हुए जब आप उसे उबाऊ बना देंगे तो फिर कल्पना की जा सकती है कि आप अपने प्रयास में कितने सफल रहे!
    एक रात पराई औरत के साथ जैसे लेखों को कॉस्मोपॉलिटन जैसी पत्रिकाओं से सीधे उड़ाया गया लगता है, और जाहिर है, ऐसे, पश्चिमी रस्मोरिवाज से प्रेरित लेख - आम भारतीय के किसी काम के नहीं सिवाय मानसिक मनोरंजन प्रदान करने के. परंतु ये उसमें भी नाकामयाब रहे. पत्रिका को अगर अपना स्थान बनाना है तो उसे अपनी इन कमियों से शीघ्र छुटकारा पाना होगा. अन्यथा इसकी नियति भी सड़क किनारे बिकने वाले कोकशास्त्र जैसे पुस्तकों जैसी होनी ही है.
    सेक्स शिक्षा के मामले में इधर हिन्दी की कुछ प्रसिद्ध पत्रिकाएँ जैसे वनिता, गृहशोभा इत्यादि भी अपनी वर्जनाएँ त्याग कर अब अपने हर अंक में कुछ न कुछ सामग्री परोस रही हैं, और स्तरीय सामग्री प्रस्तुत कर रही हैं.
    उम्मीद की जानी चाहिए कि हिन्दी का पाठक सेक्स शिक्षा के मामले में अब ज्यादह दिन तक अशिक्षित बना नहीं रहेगा.
    88888888888888 थोड़ा टेंशन तो दे यार! Re-exposure of   tension अब तक मानसिक तनाव से बचने बचाने के लिए तमाम तरह के जुगाड़ किए जाते रहे थे. अल्प्राज़ोलेम नाम की, तनाव घटाने वाली दवाई पिछले कई वर्षों से तमाम विश्व में सर्वाधिक बिकने वाली दवाई मानी जाती रही है. जाहिर है आदमी अपने तनाव को घटाने के लिए कितना तनावग्रस्त रहता है. परंतु ऐसे तनावग्रस्तों के लिए राहत की बात हो सकती है यह खबर. कुछ हद तक तनाव आपके स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है. 19 हजार व्यक्तियों पर अध्ययन करने के उपरांत यह पाया गया है कि थोड़ा-मोड़ा तनाव तो सचमुच स्वास्थ्यवर्धक है. तो अबकी अपने बढ़े हुए रक्तचाप और सिरदर्द के लिए घर या ऑफ़िस के तनाव को दोषी मत दीजिएगा. और अगर आप इस सप्ताह ज्यादा स्वस्थ महसूस कर रहे हों, तो हो सकता है कि ऑफ़िस के नए प्रोजेक्ट को समय पर पूर्ण करने का तनाव आपके काम आया हो. तनाव रहित जीना भी क्या जीना है लल्लू? मैं भी कई दिनों से अस्वस्थ महसूस कर रहा हूँ. कोई मुझे थोड़ा टेंशन तो दे दो यार! **-** व्यंज़ल **-**
    कहते हैं बुतों को टेंशन नहीं होता हमको भी तो अब टेंशन नहीं होता वो तो एक राजनीतिज्ञ है इसलिए पाँच वर्ष से पहले टेंशन नहीं होता नया नया है वो मेरे शहर में अभी अन्यथा उसे कोई टेंशन नहीं होता गलती से सुन ली समृद्धि की कथाएँ नहीं तो यहाँ कोई टेंशन नहीं होता इस टेंशन में मरा फिरता है रवि कि उसे क्यों कोई टेंशन नहीं होता **- **
    8888888888888888
    यूनिकोड हिन्दी की फ़ाइलों को पीडीएफ़फ़ॉर्मेट में कैसे बदलें?
    पुराने तंत्रों (यथा विंडोज़98) पर यूनिकोड का समर्थन नहीं है. यूनिकोड में बनी वर्ड फ़ाइलों को विंडोज 98 में नहीं देखा जा सकता. ऐसे तंत्रों पर जहाँ यूनिकोड हिन्दी समर्थन नहीं हैं, इन फ़ाइलों को देखने के लिए पीडीएफ़ फ़ॉर्मेट का सहारा लिया जा सकता है. पीडीएफ़ (पोर्टेबल डिजिटल फ़ॉर्मेट) एडॉब कंपनी का एक पंजीकृत व पेटेंट उत्पाद है, परंतु आप इस फ़ॉर्मेट में अपने दस्तावेज़ों को पठन पाठन के लिए व्यक्तिगत या व्यवसायिक रुप से जारी कर सकते हैं.
    यूनिकोड हिन्दी युक्त दस्तावेज़ को आप कई प्रकार से पीडीएफ़ फ़ॉर्मेट में बदल सकते हैं. इंटरनेट पर दर्जनों की संख्या में पीडीएफ़ परिवर्तक प्रोग्राम मिल जाएंगे. परंतु अधिकांश में यूनिकोड का समर्थन नहीं होता है.
    किसी दस्तावेज को पीडीएफ़ में बदलना आसान है. अगर आपके पास एडॉब एक्रोबेट है तो क्या कहने. परंतु मात्र पीडीएफ़ में बदलने के लिए इस उत्पाद को खरीदना समझदारी नहीं है. हम यहाँ एक मुफ़्त व मुक्त उत्पाद की चर्चा करेंगे, व एक एडवेयर-शेयरवेयर की जिसके लिए किसी तरह के शुल्क के भुगतान की आवश्यकता नहीं है.
    1 ओपन ऑफ़िस के जरिए पीडीएफ़ में परिवर्तन
    हिन्दी यूनिकोड सामग्री को पीडीएफ़ में परिवर्तन करने के लिए सबसे आसान तरीका आपको ओपन ऑफ़िस संस्करण 2.0 या अधिक उपलब्ध कराता है. ओपन ऑफ़िस में आप हिन्दी सामग्री को खोलें, और फ़ाइल मेन्यू में जाएँ. वहाँ आपको Export as या Send as PDF मेन्यू मिलेगा. दोनों में से किसी एक का प्रयोग कर उस फ़ाइल को पीडीएफ़ फ़ाइल फ़ॉर्मेट में सहेज सकते हैं. ओपन ऑफ़िस पूरी तरह मुक्त व मुफ़्त स्रोत सॉफ़्टवेयर है और इसके इस्तेमाल के लिए आपको किसी किस्म के शुल्क के भुगतान की कोई आवश्यकता नहीं है. तथा यह लिनक्स, विंडोज तथा मॅक सभी प्लेटफ़ॉर्म के लिए उपलब्ध है.
    2 पीडीएफ़ परिवर्तकों द्वारा
    पीडीएफ़ परिवर्तक प्रोग्राम प्रायः एक जैसे कार्य करते हैं. ये एक विशेष प्रिंटर ड्रायवर की संस्थापना आपके तंत्र में कर देते हैं जिसके जरिए आपके तंत्र का कोई भी प्रोग्राम प्रिंट कमांड के जरिए पीडीएफ़ फ़ाइल फ़ॉर्मेट में सहेज सकता है. एक ऐसा ही प्रोग्राम है पीडीएफ995 (यहाँ http://www.pdf995.com/ से डाउनलोड करें). इसे कम्प्यूटर पर संस्थापित करने के पश्चात् आपको एक अतिरिक्त प्रिंटर पीडीएफ995 का विकल्प प्राप्त होगा. किसी भी दस्तावेज़ को पीडीएफ़ में बदलने के लिए प्रिंट कमांड दें फिर प्रिंटर के रूप में पीडीएफ़995 चुनें. आपसे फ़ाइल का नाम पूछा जाएगा. *.pdf एक्सटेंशन युक्त कोई उपयुक्त फ़ाइलनाम दें. बस, आपका पीडीएफ़ दस्तावेज़ तैयार है. (टीप पीडीएफ़995 का ताज़ा संस्करण कुछ बगी है और हिन्दी यूनिकोड फ़ाइलों को ठीक से पीडीएफ़ में परिवर्तित नहीं कर पाता.)
    99999999999 rjhextension

    दीजिए दाएँ क्लिक को थोड़ी सी कलात्मकता...

    अपने कम्प्यूटर पर कार्य करने के दौरान विंडोज़ एक्सप्लोरर (या विंडोज़ डेस्कटॉप) की किसी वस्तु को जब आप अपने माउस के जरिए क्लिक या दोहरा क्लिक करते हैं (डिफ़ॉल्ट रूप में क्लिक का अर्थ दाएँ हाथ वाले माउस के बाएँ बटन को दबाकर क्लिक करने से होता है.), तो आप अपने विंडोज़ को कुछ कार्य करने के निर्देश देते हैं. जैसे कि संबद्ध अनुप्रयोगों के जरिए फ़ाइल खोलना या किसी ध्वनि फ़ाइल को बजाना इत्यादि, और यह निर्देश माउस संकेतक के स्थान और स्थिति पर निर्भर करता है. परंतु जब आप उसी स्थान और स्थिति की उसी वस्तु को दायाँ क्लिक (डिफ़ॉल्ट रूप में दाएँ हाथ वाले माउस के दाहिने बटन को दबाकर क्लिक करना) करते हैं तो विंडोज़ आपको कार्य निष्पादन के लिए चुने जाने योग्य कई विकल्पों को प्रस्तुत करता है. उदाहरण के लिए, जब आप अपने डेस्कटॉप पर कहीं रिक्त स्थान पर दायाँ क्लिक करते हैं तो विंडोज यह समझता है कि आप डेस्कटॉप की सेटिंग बदलना चाहते हैं और तदनुसार, अन्य सामान्य मौजूद रहने वाले विकल्पों के साथ ही विंडोज़ आपको डेस्कटॉप सेटिंग बदलने के अतिरिक्त विकल्प को भी मुहैया कराता है. यदि आप डेस्कटॉप पर किसी प्रोग्राम प्रारंभ करने वाले शॉर्टकट के प्रतीक को दायाँ क्लिक करेंगे तो आपको कार्य निष्पादन हेतु अन्य प्रकार के विकल्प मिलेंगे, जिनमें डेस्कटॉप सेटिंग बदलने के विकल्प, जाहिर है नहीं होंगे. दायाँ क्लिक के जरिए फ़ाइलों व फ़ोल्डरों पर कार्य करने के लिए चयन किए जाने योग्य बहुत से विविध, उपयोगी विकल्प प्राप्त होते हैं जिनके जरिए आप अपने दैनंदिनी कम्प्यूटरी कार्यों में अधिक उत्पादकता प्राप्त कर सकते हैं. दाएँ क्लिक से प्राप्त इन मैन्यू को कॉन्टैक्स्ट (संदर्भित या सम्बद्ध) मैन्यू कहा जाता है. विंडोज़ में स्वयं के ही अंतर्निर्मित बहुत से उपयोगी, खूबसूरत कॉन्टैक्स्ट मैन्यू हैं जो आपके लिए विविध अवसरों पर, दैनंदनी कम्प्यूटरी कार्यों को तत्परता, आसानी तथा प्रभावी ढंग से निपटाने में मदद करते हैं. अपने स्वयं के अंतर्निर्मित शैल मैन्यू के अतिरिक्त, विंडोज़ के कुछ अन्य कॉन्टैक्स्ट मैन्यू, ‘कॉन्टैक्स्ट मैन्यू हैण्डलर्स' द्वारा प्रदर्शित होते हैं. दायाँ क्लिक करने से लेकर प्रोग्राम प्रारंभ होने तक की सम्पूर्ण प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है. प्रथम चरण में, जब आप अपने कम्प्यूटर पर कहीं दायाँ क्लिक करते हैं, तो विंडोज़ एक्सप्लोरर अपना स्वयं का आंतरिक शैल कमांड तो लोड करता ही है, साथ ही वह कॉन्टैक्स्ट मैन्यू हैण्डलर्स भी लोड करता है. साथ ही साथ वह प्रत्येक हैण्डलर्स को क्वैरी भी करता है कि वर्तमान में किए गए दाएँ क्लिक के कारण कोई कार्य निष्पादित तो नहीं करना है. फिर दूसरे चरण में विंडोज़ एक्सप्लोरर, चुने जाने योग्य विविध कमांड के विकल्प युक्त कॉन्टैक्स्ट मैन्यू सृजित करता है जिसे आप दायाँ क्लिक करने के बाद स्क्रीन पर देखते हैं. इस मैन्यू में विंडोज़ के आंतरिक शैल कमांड तो होते ही हैं, कॉन्टैक्स्ट मैन्यू हैण्डलर्स द्वारा बताए गए कमांडों के विकल्प भी होते हैं. तीसरे व अंतिम चरण में जब आप आगे की क्रिया के लिए दाएँ क्लिक में उपलब्ध किसी विकल्प को माउस क्लिक के जरिए चुनते हैं तो विंडोज़ एक्सप्लोरर उस निर्देश को कॉन्टैक्स्ट मैन्यू हैण्डलर (या चुना गया हो, तो आंतरिक शैल को) को वह क्रिया निष्पादित करने का निर्देश देता है. आप अपने कॉन्टैक्स्ट मैन्यू को विंडोज़ के द्वारा और बेहतर तरीके से प्रबंधित कर सकते हैं. रजिस्ट्री विन्यासों में परिवर्तन कर दाएँ क्लिक के प्रायः सभी विकल्पों में वांछित बदलाव किए जा सकते हैं. कॉन्टैक्स्ट मैन्यू प्रत्येक कम्प्यूटर उपयोक्ता के लिए बहुत ही उपयोगी औजार है और इसके बगैर बहुत से विंडोज़ कार्यों को सम्पन्न कर पाना अत्यंत कठिन होता है. खुशी की बात यह है कि आप अपने विंडोज़ के कॉन्टैक्स्ट मैन्यू में मनमाफ़िक, मनवांछित बदलाव कर सकते हैं और अपने कम्प्यूटिंग कार्यों में उत्पादकता के साथ कलात्मकता भी ला सकते हैं. नीचे बताए गए कुछ चरणों पर चल देखें तो आप पाएँगे कि आपने दायाँ क्लिक करने में कितनी जल्दी कलात्मकता हासिल कर ली है.

    विंडोज़ एक्सप्लोरर के जरिए कॉन्टैक्स्ट मैन्यू का प्रबंधन :

    विंडोज़ आपके माउस क्लिक के परिणाम को स्वयं, स्वचालित तो प्रबंधित करता ही है, विशेष परिस्थितियों में आपको भी प्रबंधित करने देता है. उदाहरण के लिए, जब आप कोई ग्राफ़िक अनुप्रयोग अपने विंडोज़ में संस्थापित करते हैं तो यह अनुप्रयोग जेपीईजी जैसे कुछ फ़ाइल प्रकारों को डिफ़ॉल्ट रूप में सम्बद्ध कर लेता है. जब आप जेपीईजी फ़ाइल को क्लिक करते हैं तो विंडोज़ उस सम्बद्ध, ग्राफ़िक अनुप्रयोग के जरिए उस फ़ाइल को खोलने की कोशिश करता है. यदि आपका अनुप्रयोग खराब हो गया है या अनइंस्टाल किया जा चुका है, और फ़ाइल सम्बद्धता ठीक नहीं की गई है तो यह उस प्रोग्राम को विंडोज़ की संस्थापना में ढूंढता है तथा उपयोक्ता को स्वयं ढूंढने के विकल्प भी प्रदान करता है. यदि उपयुक्त प्रोग्राम का पता नहीं लग पाता है तो आपकी फ़ाइल सम्बद्ध प्रोग्राम के जरिए खुल नहीं पाती है. तब विंडोज़ आपको अन्यत्र रखे प्रोग्राम या अन्य प्रोग्राम के जरिए उस फ़ाइल को खोलने का विकल्प देता है. कभी-कभी ऐसा भी होता है कि किसी ग्राफ़िक फ़ाइल को आप उसके सम्बद्ध चित्र संपादक जैसे कि फ़ोटोशॉप में खोलने के बजाए, अन्य, असम्बद्ध चित्र प्रदर्शक प्रोग्राम जैसे कि इरफ़ान व्यू में खोलना चाहते हैं. ऐसी परिस्थितियों में आप डिफ़ॉल्ट रूप में निर्दिष्ट फ़ाइल संबद्धता, क्लिक तथा दाएँ क्लिक द्वारा प्राप्त होने वाली कॉन्टैक्स्ट मैन्यू के जरिए हो सकने वाली क्रियाओं की संबद्धता को भी संपादित कर सकते हैं. इन सेटिंग्स को बदलने के लिए, विंडोज़ एक्सप्लोरर प्रारंभ करें, ‘व्यू' (विंडोज़98) या ‘टूल्स' (विंडोज़-एक्सपी) पर क्लिक करें तथा - ‘फ़ोल्डर ऑप्शन्स...' चुनें. फिर ‘फ़ाइल टाइप' टैब पर क्लिक करें. आपको आपके तंत्र में पंजीकृत समस्त फ़ाइल प्रकारों के लिए प्रविष्टियाँ दिखाई देंगीं. ये प्रविष्टियाँ सैकड़ों की संख्या में हो सकती हैं जो इस बात पर निर्भर करती हैं कि आपने अपने तंत्र में कितने अनुप्रयोगों को संस्थापित किया हुआ है. किसी भी विशिष्ट फ़ाइल के सामने उससे सम्बद्ध अनुप्रयोग का नाम दिया गया होता है. यह सम्बद्ध अनुप्रयोग ही उस फ़ाइल को खोलता है, जब वह फ़ाइल, एक्सप्लोरर पर डबल क्लिक होता है. अब आप उस विशिष्ट फ़ाइल किस्म को चुनें जिसके लिए उस पर क्लिक होने पर डिफ़ॉल्ट कार्य को या कॉन्टैक्स्ट मैन्यू को आप बदलना चाहते हैं. तत्पश्चात् ‘चेंज' अथवा ‘एडवांस्ड' बटन क्लिक करें. वहाँ उपलब्ध विकल्पों ‘एडिट' (विंडोज़98) या ‘एडवांस्ड' (विंडोज़-एक्सपी) का चुनाव कर या ‘न्यू' टैब चुन कर नए कार्यों या प्रोग्राम को सम्बद्ध कर सकते हैं. यहाँ एक नया विंडो खुलेगा जिसमें दिए गए ‘एक्शन' बॉक्स में, यदि फ़ाइल मीडिया क़िस्म की नहीं है, तो प्रायः हमेशा ही फ़ाइल खोलने के तथा यदि मीडिया फ़ाइल हुआ तो उसे बजाने के लिए प्रविष्टि दी हुई होती है. आप इन प्रविष्टियों का भी संपादन कर सकते हैं, इनमें कुछ प्रविष्टियाँ जोड़ सकते हैं या पूरी प्रविष्टि ही मिटा सकते हैं. कॉन्टैक्स्ट मैन्यू संपादित करने के लिए विंडोज़ द्वारा उपलब्ध नए चाइल्ड विंडो में आपको निम्न इनपुट बक्से मिलेंगे: 1 क्रिया (Action): यहाँ पर आप की जाने वाली क्रिया या निष्पादित किए जाने वाले कमांड का नाम दे सकते हैं. उदाहरण के लिए, यदि यह मीडिया फ़ाइल है, और यदि आप इसे विंडोज़ मीडिया प्लेयर के जरिए खोलना चाहते हैं, तो टाइप करें ‘Open with Windows Media Player'. (विंडोज़-एक्सपी में आप इसे हिन्दी में भी लिख सकते हैं जैसे कि - ‘विंडोज़ मीडिया प्लेयर के साथ खोलें') इस कार्य के लिए, लिखे गए किसी भी अक्षर के पहले ‘&' लगाकर उस अक्षर को शॉर्टकट कुंजी के रूप में भी आप आबंटित कर सकते हैं - जैसे कि &Media. अब अक्षर ‘M' मेन्यू में रेखांकित प्रकट होगा जिसे आप कमांड के रूप में ऑल्ट+ M कुंजी को दबाकर चला सकते हैं. यह टीप लें कि उसी फ़ाइल के अन्य कॉन्टैक्स्ट मेन्यू की प्रविष्टियों में शॉर्ट कट हेतु एक जैसे ही अक्षर न हों, अन्यथा बाद में वास्तविक कार्य के समय कार्य निष्पादन में बाधा उत्पन्न हो सकती है. 2 क्रिया को निष्पादित करने हेतु अनुप्रयोग (Application used to perform action): यहाँ पर आपको उस एक्जीक्यूटेबल प्रोग्राम का पथ निर्धारित करना होता है जहाँ वह प्रोग्राम भंडारित होता है, और जिसे ऊपर दी गई क्रिया को निष्पादित करने हेतु चलाया जाना होता है. यदि एकाधिक एक्जीक्यूटेबल तथा डीएलएल फ़ाइलों को निर्दिष्ट किया जाता है तो यहाँ लिखी गई प्रविष्टि के सिंटेक्स सही रहने चाहिएँ. हालाकि, आमतौर पर उद्धरण चिह्नों में दिया गया प्रोग्राम पथ ही भलीभांति कार्य करता है. 3 डीडीई का इस्तेमाल करें (Use DDE) इस क्षेत्र का इस्तेमाल उन अनुप्रयोगों के लिए किया जाता है जो डायनॉमिक डाटा एक्सचेंज का इस्तेमाल करते हैं. यदि आपको अपने अनुप्रयोग के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है कि यह डीडीई इस्तेमाल करता है या नहीं, तो इसे जैसा है वैसा ही रहने दें. इसी तरह, आप चाहे जितने अतिरिक्त कॉन्टैक्स्ट मैन्यू जोड़ सकते हैं - ‘एडिट' फ़ाइल टाइप संवाद में हर बार ‘नया' यानी "New" को चुन कर. परंतु प्रत्येक फ़ाइल टाइप के लिए तथा प्रत्येक फ़ाइल के प्रत्येक कॉन्टैक्स्ट मैन्यू के लिए आपको हर बार यह लंबी, उबाऊ प्रक्रिया दुहरानी होगी. परंतु, धन्यवाद, कम्प्यूटरों की दुनिया में हर कार्य को बेहतर ढंग से, ज्यादा आसानी से कर लेने के और भी आसान विकल्प होते हैं. आप तीसरे निर्माताओं द्वारा बनाए गए औजारों (थर्ड पार्टी टूल्स) का बखूबी इस्तेमाल कर सकते हैं. नीचे दिए गए ऐसे ही कुछ औजारों में से आप अपने लिए कुछ चुन सकते हैं जिनसे आप अपने दाएँ क्लिक में ढेरों कलात्मकताएँ जोड़ सकते हैं.

    कॉन्टैक्स्ट मैजिक

    जैसा कि इसके नाम से प्रतीत होता है, यह आपके विंडोज़ कॉन्टैक्स्ट मैन्यू में जादुई प्रबंधन की क्षमता प्रदान करता है. कॉन्टैक्स्ट मैजिक दो स्वरूपों में मिलता है. मुफ़्त तथा प्रोफ़ेशनल. कॉन्टैक्स्ट मैजिक के मुफ़्त संस्करण में एक आम कम्प्यूटर उपयोक्ता के काम लायक लगभग सभी प्रकार के विशेषताओं का समावेश होता है जबकि प्रोफेशनल संस्करण में बहुत से उन्नत विशेषताओं का भी समावेश किया गया है. इसकी संस्थापना के पश्चात् यह कॉन्टैक्स्ट मैन्यू में एक अतिरिक्त मैन्यू - ‘कॉन्टैक्स्ट मैजिक' जोड़ता है, जिसमें आपको फ़ाइल तथा फ़ोल्डरों को प्रबंधित करने के बहुत सारे अतिरिक्त उप-मैन्यू प्राप्त होते हैं. उदाहरण के लिए, जब आप किसी वर्ड दस्तावेज़ फ़ाइल पर दायाँ क्लिक करते हैं तो कॉन्टैक्स्ट मैजिक के जरिए आपके कॉन्टैक्स्ट मैन्यू में आपको आधा दर्जन से अधिक विकल्प प्राप्त होते हैं कि आप उस दस्तावेज़ को इनमें से किससे खोलना चाहेंगे - नोटपैड, वर्डपैड, पेंट, मीडियाप्लेयर, इंटरनेट एक्सप्लोरर, माइक्रोसॉफ़्ट वर्ड, और माइक्रोसॉफ़्ट एक्सेल. यदि आपको लगता है कि यहाँ भी आपका वाला कार्य नहीं है जिससे उस फ़ाइल को किया जाना है तो एक विकल्प - ‘प्रोग्राम चुनें' का भी होता है जो कि विंडोज़ के ‘के साथ खोलें' (Open with...) मैन्यू सरीखा ही होता है. आपको कुछ मजेदार क़िस्म के कॉन्टैक्स्ट मैन्यू भी मिलेंगे, जैसे कि ‘चयनित फ़ाइलों को ईमेल से भेजें' तथा ‘चयनित फ़ाइलों की नकल कर खिसकाएं' इत्यादि, जिन्हें आप कॉन्टैक्स्ट मैजिक द्वारा उपलब्ध कराए गए कॉन्टैक्स्ट मैन्यू के उप-उप-मैन्यू द्वारा चुन सकते हैं. कुल मिलाकर, कॉन्टैक्स्ट मैजिक उन कम्प्यूटर उपयोक्ताओं के लिए बहुत ही काम का है जो फ़ाइलों को विविध डिरेक्ट्रीज़ में नक़ल/चिपकाने/खिसकाने का कार्य बहुलता से करते हैं. इस औजार को आप यहाँ - http://www.Conte xtMagic.com से डाउनलोड कर इस्तेमाल कर सकते हैं.

    कॉन्टैक्स्ट एडिट

    कॉन्टैक्स्ट एडिट आपको आपके विंडोज़ कम्प्यूटर में पंजीकृत समस्त फ़ाइल प्रकारों के लिए कॉन्टैक्स्ट मैन्यू को प्रबंधित करने की आसान सुविधा देता है. आप कॉन्टैक्स्ट मैन्यू के किसी भी अवयव को सक्षम, अक्षम कर सकते हैं या मिटा सकते हैं या फिर नए, नायाब अवयव जोड़ सकते हैं. विंडोज़ कॉन्टैक्स्ट मैन्यू के डिफ़ॉल्ट क्रियाओं को भी आप इसके जरिए बदल सकते हैं. यह आपको फ़ाइल किस्मों की संबद्धता को स्वचालित पुनर्स्थापित करता है तथा टूटी संबद्धताओं को सुधारता है. इसी प्रकार, बहुत से नए कॉन्टैक्स्ट मैन्यू भी आप अतिरिक्त रूप से जोड़ सकते हैं. कॉन्टैक्स्ट एडिट आपको विंडोज़ एक्सप्लोरर में कार्य करने के लिए बहुत से अतिरिक्त विकल्पों को भी प्रदान करता है. उदाहरण के लिए, किसी मैन्यू को पूरीतरह मिटाए बगैर उसे आप अक्षम बना सकते हैं. कॉन्टैक्स्ट एडिट मुफ़्त औजार के रुप में उपलब्ध है और इसे संस्थापित करने की आवश्यकता भी नहीं है. आपको सिर्फ ContextEdit.exe नाम की एक फ़ाइल को चलाना होता है जो आपके कंप्यूटर पर उपलब्ध समस्त फ़ाइल प्रकारों को स्कैन करता है तथा उन्हें एक विशिष्ट विंडो में प्रदर्शित करता है. किसी विशिष्ट फ़ाइल किस्म के कॉन्टैक्स्ट मैन्यू को देखने, उसमें कोई अवयव जोड़ने , मिटाने या परिवर्धित करने के लिए बाएँ खण्ड में ब्राउज़ करें तथा उस फ़ाइल किस्म को चुनें. आपको वर्तमान में निर्धारित प्रत्येक मैन्यू अवयव के लिए एक प्रविष्टि विंडो के दाएँ भाग में दिखाई देगी तथा प्रत्येक अवयव के लिए एक चेक-बक्सा भी दिया हुआ होता है. किसी अवयव को अक्षम बनाने के लिए उस पर से सही का निशान हटाएँ. उसे मिटाने के लिए पहले अक्षम बनाएँ फिर ‘मिटाएँ' टैब को क्लिक करें. इस अवयव को संपादित करने के लिए इसे चुनकर ‘संपादन' को क्लिक करें. और यदि आप कोई नया अवयव कॉन्टैक्स्ट मैन्यू में जोड़ना चाहते हैं तो ‘नया' टैब पर क्लिक करें तथा नए कॉन्टैक्स्ट मैन्यू अवयव के लिए वांछित जानकारी भरें. एक बार सेट हो जाने के बाद आप इस अनुप्रयोग से बाहर हो सकते हैं. जब आप इस अनुप्रयोग से बाहर होते हैं तो यह प्रोग्राम किए गए परिवर्तनों को विंडोज़ रजिस्ट्री में स्थाई रुप से दर्ज कर देता है तथा फिर दुबारा इस अनुप्रयोग को चलाने की आवश्यकता नहीं होती. आपके द्वारा किए गए परिवर्तन विंडोज़ एक्सप्लोरर में अंतर्निहित हो जाते हैं और इस प्रकार तंत्र के एक भाग के रुप में कार्य करते हैं. यह औजार विशेष रूप से अवांछित, छूटे-गुमे कॉन्टैक्स्ट मैन्यू को मिटाने व संपादित करने हेतु अच्छा खासा काम आता है.

    सीसीएम विज़ॉर्ड

    सीसीएम विज़ॉर्ड आपके विंडोज़ तंत्र के फ़ाइलों व फ़ोल्डरों पर कार्य करने हेतु बहुत से बहुमूल्य कॉन्टैक्स्ट मैन्यू जोड़ता है - जिन्हें समयानुसार परिवर्धित करने की भी सुविधा होती है. वैसे, यह कार्य निष्पादन में ऊपर बताए गए कॉन्टैक्स्ट मैजिक औजार की तरह ही है. विंडोज़ कॉन्टैक्स्ट मैन्यू में यह अपना स्वयं का ‘सीसीएम विज़ॉर्ड कॉन्टैक्स्ट मैन्यू' जोड़ता है जिसमें परिस्थितिनुसार बहुत से उपयोगी उप-मैन्यू प्रकट होते हैं, और जो फ़ाइल क़िस्मों पर निर्भर होते हैं. इसमें एक अत्यंत ही उपयोगी मैन्यू होता है - ‘चुनें (एक जैसे फ़ाइल एक्सटेंशन)' जिसके जरिए विभिन्न फ़ाइल एक्सटेंशन युक्त सैकड़ों फाइलों वाली किसी डिरेक्ट्री में आप एक जैसे फ़ाइल क़िस्म वाली समस्त फ़ाइलों को एक बार के दाएँ क्लिक से चुन सकते हैं. इस औजार को यहाँ से डाउनलोड करें - http://dntsoft.com .

    12 घोस्ट शैल-एक्स

    यह ‘सुपरगी पावरटूल्स फ़ॉर विंडोज़' का एक उपयोगी औजार है. 12घोस्ट शैल-एक्स कॉन्टैक्स्ट मैन्यू के जरिए आप अपने विंडोज कॉन्टैक्स्ट मैन्यू में बहुत से उपयोगी अवयव जोड़ सकते हैं. उदाहरण के लिए, यह आपके फ़ाइल गुणों - यथा फ़ाइल/फ़ोल्डर आकार, सृजन/परिवर्धन का दिनांक इत्यादि को सीधे ही कॉन्टैक्स्ट मैन्यू में दिखा सकता है. यह किसी डिरेक्ट्री में मौजूद समस्त फ़ाइलों के आकारों का योग भी कॉन्टैक्स्ट मैन्यू में बता सकता है. 12घोस्ट शैल-एक्स कॉन्टैक्स्ट मैन्यू के द्वारा आप अन्य, बहुत से उपयोगी कमांड प्राप्त कर सकते हैं जैसे कि - डिरेक्ट्री सूची को किसी फ़ाइल में सहेजना, मौजूदा अथवा चयनित पथ को क्लिपबोर्ड में नक़ल करना ताकि अन्य प्रोग्राम में इसका इस्तेमाल हो सके. किसी अवांछित, अप्रायोगिक अनुप्रयोग की मैन्यू प्रविष्टियों को भी आप इस औजार के जरिए मिटा सकते हैं, अक्षम बना सकते हैं या संपादित कर सकते हैं. 12घोस्ट शैल-एक्स कॉन्टैक्स्ट मैन्यू आपको मैन्यू स्थितियों को भी निर्धारित करने की सुविधा देता है. जैसे कि यदि किसी विशिष्ट कॉन्टैक्स्ट मैन्यू को आप चाहते हैं कि वह हमेशा सबसे ऊपर उपलब्ध हो, तो भी यह कार्य आप इस औजार के जरिए आसानी से कर सकते हैं. यह औजार मुफ़्त उपलब्ध नहीं है. इसके मूल्यांकन किये जा सकने वाले संस्करण को आप यहां http://www.12ghosts.co m से डाउनलोड कर सकते हैं.

    आरजेएच-एक्सटेंशन

    यह मुफ़्त उपलब्ध औजार आपके विंडोज़ एक्सप्लोरर में बहुत से उपयोगी कॉन्टैक्स्ट मैन्यू जोड़ने की सुविधा प्रदान करता है. इसके जरिए आप अपने विंडोज़ एक्सप्लोरर में बहुत से नायाब, अन्यत्र आसानी से नहीं पाए जा सकने वाले कमांड शामिल कर सकते हैं. ऐसा ही एक उपयोगी कॉन्टैक्स्ट मैन्यू आपको मिलता है - फ़ाइल कतरन का. किसी भी फ़ाइल या फ़ोल्डर का नामोनिशान हार्ड डिस्क से पूरी तरह मिटा डालने के लिए इस औजार द्वारा उपलब्ध कराए गए फ़ाइल श्रेडर का इस्तेमाल इस कार्य हेतु किया जा सकता है. इसी प्रकार आप अपने फ़ाइल व फ़ोल्डरों को पासवर्ड के जरिए इसके द्वारा उपलब्ध कराए गए कॉन्टैक्स्ट मैन्यू से सुरक्षित कर सकते हैं. किसी भी फ़ाइल या फ़ोल्डर में दायाँ क्लिक कर ‘एनक्रिप्ट फ़ाइल...' का विकल्प चुनें. आपको पासवर्ड के लिए पूछा जाएगा. कोई पासवर्ड दें, और ‘ओके' (ठीक है) को क्लिक करें. आपकी फ़ाइलें व फ़ोल्डर मजबूत ब्लोफ़िश एनक्रिप्शन अल्गोरिद्म के जरिए एनक्रिप्ट हो जाती हैं. इन्हें वापस खोलने के लिए इन पर दायाँ क्लिक करें व चुनें - ‘डीक्रिप्ट फ़ाइल...'. वह पासवर्ड भरें जो आपने फ़ाइलों को एनक्रिप्ट करते समय दिया था. पासवर्ड सही होने पर आपकी फ़ाइल आपके कार्य के लिए तत्काल खुल जाती है. विंडोज़ तंत्र में पारदर्शी और उपयोगी रुप से पूरी तरह जुड़ जाने वाले इस उपयोगी औजार को यहाँ - http://www.rjhsoftwa re.com से डाउनलोड करें. ऐसा लगता नहीं कि आपने अपने दाएँ क्लिक में अब तक बहुत सी कलाकारी शामिल कर ली है? तो चलें दाएँ क्लिक की कुछ कारगुजारियाँ दिखाने?

    MKRdezign

    संपर्क फ़ॉर्म

    नाम

    ईमेल *

    संदेश *

    Blogger द्वारा संचालित.
    Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget