जीवन के हर हिस्से पर है अधिभार...

भीड़ भड़क्का अधिभार

दुनिया एक भीड़ में तबदील होती जा रही है. वैसे, भीड़ में रहने के यूँ तो बहुत मजे हैं, परंतु बहुत से तमाम खतरे भी हैं. अब एक नया खतरा सिर पर आ गया है. अगर आप भारत में हवाई यात्रा करते हैं तो आपको प्रति टिकट एक सौ पचास रुपए अतिरिक्त भुगतान करना होता है. यह एक सौ पचास रुपए अतिरिक्त किसलिए? यह एक सौ पचास रुपए कंजेशन सरचार्ज होता है यानी कि भीड़ भड़क्का अधिभार!

अभी तो सिर्फ हवाई यात्रा में यह अधिभार लगाया गया है. भविष्य में इस तरह के अधिभार के अन्य क्षेत्रों में घुसपैठ के पूरे आसार हैं. लंदन के कुछ भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में वाहन ले जाने व पार्क करने के लिए शुल्क वसूला जाता रहा है. इसी तर्ज पर अब अपने यहाँ भी अतिरिक्त अधिभारित शुल्क लगा करेगा. जिस ट्रेन में आप यात्रा करना चाहते हैं, उसमें भीड़ और वेटिंग लिस्ट के अनुसार अधिभार लग सकता है. जो सीधी सपाट गड्ढे रहित सड़क आपके घर को जाती है, और इस कारण अगर उसमें भीड़-भाड़ रहती है तो आपको सरचार्ज देना पड़ सकता है. रोज रोज के अधिभार से बचने के लिए फिर हो सकता है कि आप घर ही नहीं जाएँ. वैसे, यह एक बढ़िया सा बहाना हो सकता है पत्नियों को बताने के लिए - डार्लिंग आज सड़क में ज्यादा ही भीड़ थी अतः आज ज्यादा ही अधिभार वसूला जा रहा था, और उस बेवजह खर्च को बचाने के लिए मैंने दफ़्तर में ही समय गुजारना उचित समझा.

आपका बच्चा स्कूल जाता है. किसी अच्छे स्कूल में ज्यादा भीड़ रहती है. ज्यादा भीड़ वाले स्कूल में ज्यादा भीड़ भड़क्का अधिभार देना होगा. बच्चे के भविष्य का सवाल है. अधिभार कम हो या ज्यादा, दिल कुछ भी बोले, चेहरे पर मुसकराहट लाकर अधिभार देना होगा.

आप चार दोस्त मिल कर नुक्कड़ पर चाय पी रहे होते हैं और इतने में नगर निगम का कर्मचारी रसीद कट्टे लेकर आ जाता है. वह भीड़ भड़क्का अधिभार आपसे वसूलना चाहता है. आप मना करते हैं. हील हुज्जत होती है. मज़े लेने वालों का मजमा लगने लगता है. भीड़ पहले से ज्यादा हो जाती है. आपने भीड़ भड़क्का अधिभार देने से मना किया. सरकारी कामकाज को सही ढंग से होने से रोका. आप पर मुकदमा दर्ज होता है. मुकदमों की भीड़ युक्त न्यायालय में आपका एक और मुकदमा दर्ज होता है- पहले से भीड़ भरे नुक्कड़ में आप चार दोस्तों ने चाय पीते हुए गपियाते हुए और ज्यादा भीड़ जो किया और ऊपर से भीड़ भड़क्का अधिभार देने से मना किया... मुकदमे का निर्णय अठारह बीस साल बाद तब आएगा जब आप सबकुछ भूल भालकर किसी लाफ़्टर चैलेंज में हँस रहे होंगे या फिर संसद की किसी कुर्सी की शान बढ़ा रहे होंगे.

(मेरे हिसाब से) मेरे इस चिट्ठास्थल पर इस चिट्ठे को पढ़ने वालों की भयानक भीड़ बढ़ रही है. सोचता हूँ कोई अधिभार मैं भी लगा ही दूं. क्या खयाल है आपका?

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व्यंज़ल

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जीवन के हर हिस्से पर लग गए अधिभार

कोई बताओ कैसे अवरुद्ध होगा ये अतिसार


हमने तो भरी नहीं थी किसी बात की हामी

उन्होंने ही ले लिए जबरन सारे अधिकार


कुछ तो थे हालात और कुछ हमारे करम

जोहते रहे तमाम उम्र चाहत और अभिसार


दोष देता है जमाना हमारी नादानियों का, पर

समर और स्नेह में खूब जायज़ हैं अतिचार


दूसरों की करतूतों पर अब न हँसा करेंगे रवि

इस संसार पर हम भी तो हैं एक अतिभार

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Priye ravi bhai, aapka blog dekha.shayad yah patrika aapko pasand aaye.....
Jan Vikalp'hindi monthly is committed to the supressed communities of Society. This monthly is againt the difference and inequality caused due to Caste, Sex, Religion and is Committed for public opposition againt the social evils.http://vikalpmonthly.googlepages.com/

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