शनिवार, 21 अक्तूबर 2006

हमारी दीवाली आपका दीवाला...

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किसी की दीवाली किसी का दिवाला

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विंडोज विष्टा ( या विस्ता? क्या अजीब नाम है - ट और ठ में जुबान फिसली तो जायका खराब हो जाए... पर यह तो भाषाओं का कमाल है - एक भाषा में गाली तो दूसरे में प्रशंसा...) इस साल के खत्म होते न होते, अंततः तमाम विश्व के कम्प्यूटरों में राज करने हेतु जारी हो जाएगा. विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम के इस संस्करण में बहुत सी नई ख़ूबियाँ हैं. तकनीकी व सुरक्षा संबंधी तो बहुत हैं, पर, आइए आज उस लाइसेंसिंग खूबी की चर्चा करते हैं जिसकी वजह से हमारी जेब का दीवाला निकलेगा और बिल्लू भैया की मनेगी हर दिन दीवाली.

बिल्लू भाई सयाने व्यावसायी यूँ ही नहीं माने जाते रहे हैं. विश्व के सर्वाधिक धनी व्यक्ति वे यूँ ही नहीं बने हैं, और आज भी वे विश्व में प्रति मिनट सर्वाधिक कमाई करने वाले व्यक्ति हैं. अनुमान है कि विंडोज़ विस्टा उनकी तिजोरियों को और अधिक, ‘एक्सपोनेंशियली' भरेगा. विंडोज़ विस्टा में नया, अलग तरह का लाइसेंस होगा जिसके तहत आप उस ऑपरेटिंग सिस्टम को सिर्फ एक बार ही किसी अन्य दूसरे कम्प्यूटर पर स्थानांतरित कर सकेंगे. उदाहरण के लिए, जैसे कि आपने विंडोज़ विस्टा जनवरी 2007 में खरीदा, और आप जुलाई 2007 में चाहते हैं कि आपका सिस्टम अपग्रेड हो. तो उस समय तो आप उसी विंडोज़ विष्टा का इस्तेमाल कर सकेंगे. परंतु यदि आप फिर से दिसम्बर 2007 में अपना सिस्टम अपग्रेड करना चाहें या उस ऑपरेटिंग सिस्टम को उस कम्प्यूटर पर से हटा कर दूसरे पर चलाना चाहें तो यह आप नहीं कर सकेंगे. इसके लिए आपको विंडोज़ विष्टा की दूसरी प्रति खरीदनी होगी. आपके पास की विंडोज़ विष्टा की प्रति इसके लिए अनुपयोगी और बेकार होगी.

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माइक्रोसॉफ़्ट पहले भी अपने एक ही उत्पाद को कई कई नामों से, नए नए लबादों में लपेट कर चतुराई से बेचता रहा है. विंडोज़ के कोई दर्जन भर संस्करण हैं, जैसे कि विंडोज़ एक्सपी प्रोफ़ेशनल, होम एडीशन, मीडिया सेंटर एडीशन, स्टार्टर एडीशन इत्यादि इत्यादि. हर एक में बस थोड़ा सा फेर बदल होता है और कहीं कहीं फ़ंक्शनलिटी में आवश्यकतानुसार कमी-बेसी होती है. एक ही उत्पाद में थोड़ा मोड़ा फेरबदल कर उसे चतुराई से हर सेगमेंट में बेचा जाता है और यह भी ध्यान रखा जाता है कि एक सेगमेंट का उत्पाद दूसरे सेगमेंट के किसी काम का न रहे. यानी कि आपने विंडोज़ का प्रोफ़ेशनल संस्करण लिया हुआ है तो आवश्यकता पड़ने पर उसका सर्वर जैसा इस्तेमाल आप आसानी से नहीं कर सकेंगे. यही बात माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस समेत, और तमाम दूसरे उत्पादों का भी है.

इन कारणों से मुक्त स्रोत की वकालत करने वाले, लिनक्स जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करने की सलाहें देते रहे हैं. सर्वरों के लिये तो लिनक्स अपने पैर जमा चुका है, परंतु एंड यूज़र के डेस्कटॉप पर इसके पैर जमने में अभी खासा समय लगेगा. अभी भी लिनक्स का प्रचालन कठिन है और आम प्रयोग के अनुप्रयोग संख्या में बहुत कम हैं. जाहिर है, विडोज़ की दीवाली में तो अभी फुलझड़ियाँ ही फुलझलड़ियाँ रहनी हैं.
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आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ.

अपने घरों की दीवारों को रोशन करने के बजाए, आइए, आज अपने भीतर आशा, विश्वास, आस्था और प्रेम का कोई दीप जलाएँ...


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4 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. वाह रवि जी। विंडोस विष्ठा!!!!:D

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  2. रविजी दीपावली की ढेरों शुभकामनायें और मेरी तरफ से बिल्लू भैया को भी

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  3. मुझे हमेशा से आपका ये टेकनीकल अंदाज़ बहुत पसंद है :)
    आपको दिपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

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  4. आपको भी दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें एवं उज्जवल भविष्य के लिये मंगलकामनायें.

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